30/05/2026
🌱 "बैल बचेंगे, मिट्टी बचेगी; मिट्टी बचेगी, तो खेती और किसान दोनों समृद्ध होंगे।" 🌱
"क्या हम खेती को कम खर्चीला, अधिक लाभकारी और प्रकृति के अनुकूल बना सकते हैं?
अवतार डेवलपमेंट फाउंडेशन के द्वारा, प्रधान मंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना के अंतर्गत रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड के भैपुर गांव में चयनित 15 एकड़ भूमि पर ट्रैक्टर के स्थान पर बैलों से जुताई को बढ़ावा दिया जा रहा है।
आज अधिकांश किसान ट्रैक्टर पर निर्भर हो गए हैं, जिससे डीजल, मशीन और मरम्मत का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके विपरीत बैलों से जुताई करने पर खेती की लागत कम होती है और किसानों की बाहरी संसाधनों पर निर्भरता घटती है।
बैलों से जुताई करने पर मिट्टी अत्यधिक दबती नहीं है, जिससे मिट्टी में हवा और नमी का संतुलन बना रहता है। खेत में रहने वाले केंचुए और लाभकारी सूक्ष्मजीव सुरक्षित रहते हैं, जो भूमि की उर्वरता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
बैल केवल जुताई का साधन नहीं हैं, बल्कि प्राकृतिक खेती की मजबूत नींव हैं। इनके गोबर और गोमूत्र से जीवामृत, घना जीवामृत तथा जैविक खाद तैयार की जा सकती है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है।
आइए, अपने खेत, मिट्टी और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए बैल आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाएं।