Youth For Seva , Youth For Nation

Youth For Seva , Youth For Nation देशावर प्रेम करणाऱ्या , उर्जावान तरुणांचा समूह .
वैभवशाली भारत घडवू , एकजुटीने प्रयत्न करू.

18/11/2025
04/11/2025

1842 में खंडवा जिले के बड़दा गांव में जन्मे टंट्या भील (टंट्या मामा) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें भारतीय रॉबिन हुड भी कहा जाता है। 1857 के भारतीय विद्रोह के बाद, अंग्रेजों ने बेहद कठोर कार्रवाई की, जिसके बाद ही टंट्या भील ने अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ना शुरू किया। वह उन महान क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने बारह साल तक ब्रिटिश शासन के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष किया।

विदेशी शासन को उखाड़ फेंकने के लिए, अपने अदम्य साहस और जुनून के बल पर वह 12 साल तक लड़ते रहे और आदिवासियों और आम लोगों की भावनाओं के प्रतीक बने। वह ब्रिटिश सरकार के सरकारी खजाने और उनके चाटुकारों की संपत्ति को लूटकर गरीबों और जरूरतमंदों में बांट देते थे।

टंट्या भील, गुरिल्ला युद्ध में निपुण थे। लेकिन एक लंबी लड़ाई के बाद, वर्ष 1888-89 में राजद्रोह के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और जबलपुर जेल ले जाया गया, जहां ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें अमानवीय रूप से प्रताड़ित किया। टंट्या भील की गिरफ्तारी की ख़बर 10 नवंबर 1889 को न्यूयॉर्क टाइम्स के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित की गई थी। इस ख़बर में उन्हें 'भारत का रॉबिन हुड' बताया गया था।

4दिसंबर 1889 को उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई थी। भारत के वीर सपूत टंट्या भील को शत् शत् नमन!

26/06/2024

#वंदेभारत
इतिहास के पन्नों में कहाँ हैं ये नाम??

सेठ रामदास जी गुड़वाले - 1857 के महान क्रांतिकारी, दानवीर जिन्हें फांसी पर चढ़ाने से पहले अंग्रेजों ने उनपर शिकारी कुत्ते छोड़े जिन्होंने जीवित ही उनके शरीर को नोच खाया।

सेठ रामदास जी गुडवाला दिल्ली के अरबपति सेठ और बेंकर थे. इनका जन्म दिल्ली में एक अग्रवाल परिवार में हुआ था. इनके परिवार ने दिल्ली में पहली कपड़े की मिल की स्थापना की थी।

उनकी अमीरी की एक कहावत थी “रामदास जी गुड़वाले के पास इतना सोना चांदी जवाहरात है की उनकी दीवारो से वो गंगा जी का पानी भी रोक सकते है”

जब 1857 में मेरठ से आरम्भ होकर क्रांति की चिंगारी जब दिल्ली पहुँची तो

दिल्ली से अंग्रेजों की हार के बाद अनेक रियासतों की भारतीय सेनाओं ने दिल्ली में डेरा डाल दिया। उनके भोजन और वेतन की समस्या पैदा हो गई । रामजीदास गुड़वाले बादशाह के गहरे मित्र थे ।

रामदास जी को बादशाह की यह अवस्था देखी नहीं गई। उन्होंने अपनी करोड़ों की सम्पत्ति बादशाह के हवाले कर दी और कह दिया

"मातृभूमि की रक्षा होगी तो धन फिर कमा लिया जायेगा "

रामजीदास ने केवल धन ही नहीं दिया, सैनिकों को सत्तू, आटा, अनाज बैलों, ऊँटों व घोड़ों के लिए चारे की व्यवस्था तक की।

सेठ जी जिन्होंने अभी तक केवल व्यापार ही किया था, सेना व खुफिया विभाग के संघठन का कार्य भी प्रारंभ कर दिया उनकी संघठन की शक्ति को देखकर अंग्रेज़ सेनापति भी हैरान हो गए ।
सारे उत्तर भारत में उन्होंने जासूसों का जाल बिछा दिया, अनेक सैनिक छावनियों से गुप्त संपर्क किया।

उन्होंने भीतर ही भीतर एक शक्तिशाली सेना व गुप्तचर संघठन का निर्माण किया। देश के कोने कोने में गुप्तचर भेजे व छोटे से छोटे मनसबदार और राजाओं से प्रार्थना की इस संकट काल में सभी सँगठित हो और देश को स्वतंत्र करवाएं।

रामदास जी की इस प्रकार की क्रांतिकारी गतिविधयिओं से अंग्रेज़ शासन व अधिकारी बहुत परेशान होने लगे

कुछ कारणों से दिल्ली पर अंग्रेजों का पुनः कब्जा होने लगा । एक दिन उन्होंने चाँदनी चौक की दुकानों के आगे जगह-जगह जहर मिश्रित शराब की बोतलों की पेटियाँ रखवा दीं, अंग्रेज सेना उनसे प्यास बुझाती और वही लेट जाती । अंग्रेजों को समझ आ गया की भारत पे शासन करना है तो रामदास जी का अंत बहुत ज़रूरी है

सेठ रामदास जी गुड़वाले को धोखे से पकड़ा गया और जिस तरह से मारा गया वो क्रूरता की मिसाल है।

पहले उन्हें रस्सियों से खम्बे में बाँधा गया फिर उन पर शिकारी कुत्ते छुड़वाए गए उसके बाद उन्हें उसी अधमरी अवस्था में दिल्ली के चांदनी चौक की कोतवाली के सामने फांसी पर लटका दिया गया।

सुप्रसिद्ध इतिहासकार ताराचंद ने अपनी पुस्तक 'हिस्ट्री ऑफ फ्रीडम मूवमेंट' में लिखा है -

"सेठ रामदास गुड़वाला उत्तर भारत के सबसे धनी सेठ थे।अंग्रेजों के विचार से उनके पास असंख्य मोती, हीरे व जवाहरात व अकूत संपत्ति थी।

सेठ रामदास जैसे अनेकों क्रांतिकारी इतिहास के पन्नों से गुम हो गए क्या सेठ रामदास जैसे क्रांतिकारियों के बलिदान का ऋण हम चुका पाये???
तुम न समझो देश को आज़ादी यूं ही मिली है।
हर कली इस बाग की,कुछ खून पी कर ही खिली है।
मिट गये वतन के वास्ते,दीवारों में जो गड़े हैं।
महल अपनी आज़ादी के,शहीदों की छातियों पर ही खड़े हैं।।

विवेक विचार मंच, महाराष्ट्र*संविधान जागर अभियान २०२३*_*राज्यस्तरीय व्हिडिओ वक्तृत्व स्पर्धा*_संविधान दिनाच्या अमृतमहोत्स...
20/12/2023

विवेक विचार मंच, महाराष्ट्र
*संविधान जागर अभियान २०२३*
_*राज्यस्तरीय व्हिडिओ वक्तृत्व स्पर्धा*_

संविधान दिनाच्या अमृतमहोत्सवी वर्षानिमित्त विवेक विचार मंच महाराष्ट्र द्वारे दिनांक *संविधान जागर अभियान २०२३* राबविले जात आहे. या अभियाना अंतर्गत राज्यस्तरीय व्हिडिओ वक्तृत्व स्पर्धेचे आयोजन केले आहे. अवश्य सहभागी व्हा व स्पर्धेची माहिती शेअर करा
https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=784154380399651&id=100064152875681&mibextid=Nif5oz

*वकृत्व स्पर्धेचे विषय :-*

१) माझ्या जगण्यातील संविधान
२) सामाजिक न्यायाची वाटचाल व भारतीय संविधान
३) १९७५ ची आणीबाणी व संविधान संरक्षक चळवळी
४) संविधानासमोरील माओवादी व जिहादी आव्हाने
५) धर्मनिरपेक्षता आणि धर्मस्वातंत्र्य
६) समान नागरी कायदा
७) स्वातंत्र्योत्तर भारताचा संविधानिक प्रवास
८) महिला सक्षमीकरण व भारतीय संविधान
९) नागरिकांचे संवैधानिक मुलभूत कर्तव्ये

*पारितोषिक :-*

*प्रथम क्रमांक - ७०००/-* ( पाच हजार रोख + दोन हजार रुपये किमतीचे पुस्तके व प्रशस्तीपत्र)

*द्वितीय क्रमांक - ५०००/-* ( तीन हजार रोख + दोन हजार रुपये किमतीचे पुस्तके व प्रशस्तीपत्र)

*तृतीय क्रमांक - ३०००/-* ( दोन हजार रोख + एक हजार रुपये किमतीची पुस्तके.

*०५ उत्तेजनार्थ - १५००/-* ( पाचशे रुपये रोख व एक हजार रुपयांची पुस्तके )

*स्पर्धेची प्रक्रिया व नियम -*

१) ही स्पर्धा नि:शुल्क असून *स्पर्धेत सहभागी होण्यासाठी सोबत दिलेल्या गुगल फॉर्म लिंक किंवा QR कोड ला स्कॅन करून गुगल फॉर्म मध्ये आवश्यक माहिती भरावी व फॉर्म च्या शेवटी “Add File” या पर्यायावर क्लिक करून व्हिडीओ फाईल अपलोड करावी.* (काही अडचण आल्यास संपर्क साधावा.)

*गुगल फॉर्म लिंक - https://shorturl.at/fzHW8*

२) व्हिडिओ हा ०३ ते०५ मिनिटांचा असावा.
३) व्हिडिओ पाठवण्याची अंतिम तारीख १५ जानेवारी २०२३ असेल.
४) वय वर्ष १८ ते ४५ या वयोगटातील स्पर्धक या स्पर्धेसाठी पात्र असतील.
५) व्हिडिओ शूट करताना प्रकाशयोजना, ध्वनिमुद्रण व गुणवत्तेचा विचार करावा व व्हिडिओ शूट करताना शक्यतो आडव्या फ्रेम मध्ये तयार करावा. (साईज १६:९)
६) विजेत्यांस पारितोषिक रक्कम बँक अकाउंट ला जमा करण्यात येईल. पुस्तके व प्रशस्तिपत्र प्रत्यक्ष किंवा कुरिअर द्वारे पाठवण्यात येईल. पारितोषिक वितरण कार्यक्रम घ्यायचे ठरल्यास वेळ व ठिकाण कळवले जाईल.
७) वक्तृत्व स्पर्धेची भाषा- मराठी, हिंदी किंवा इंग्रजी.
८)निवडक व्हिडिओ विवेक विचार मंच च्या सोशल मिडिया द्वारे प्रसिद्ध केले जातील.
९) सर्व सहभागींना सहभाग प्रमाणपत्र डिजिटल स्वरूपात पाठवण्यात येईल.

संपर्क क्रमांक :-
अरूण कराड - 7744907983
बेबी कांबळे – 9919148064

पुस्तक पारितोषिक प्रायोजक -
ज्ञानसाधना पुस्तकालय, परभणी

27/11/2023
संविधान अभ्यास वर्ग नोंदणी फॉर्म : https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdXgZ0JbRU3PT8-htcgdqXI15qUA54C8kHH6LV2D0npb...
20/11/2023

संविधान अभ्यास वर्ग नोंदणी फॉर्म :
https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSdXgZ0JbRU3PT8-htcgdqXI15qUA54C8kHH6LV2D0npbsOgBg/viewform

दिनांक : २१ नोव्हेंबर २०२३, मंगळवार
वेळ : सायं ७ ते ८
ठिकाण : दिपाली नगर उद्यान सभागृह, दिपाली नगर, शर्मा मंगलकर्यालय समोर
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विवेक विचार मंच, नाशिक

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