19/03/2026
🚩श्री परशुराम सेवा समिति🚩
भारतीय नववर्ष पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवं मंगल कामना
।। भारत का जीवंत पंचांग ।।
भारत का पंचांग भारतीय सभ्यता की एक अनमोल धरोहर है, जो शताब्दियों से हमारे गणितज्ञों, ज्योतिषियों और ऋषियों की गहन मेधा का परिणाम है। यह मात्र ग्रेगोरियन कैलेंडर की तरह रात-दिन, सप्ताह या महीनों की साधारण गिनती नहीं है, बल्कि सूर्य, चंद्रमा, नक्षत्रमंडल की गतियों के साथ पृथ्वी की जीवन-गति का पूर्ण सामंजस्य स्थापित करता है। भारतीय पंचांग पूरे आकाश का एक जीवंत मानचित्र है, जिसमें मानव-जीवन और प्रकृति की लय को अविच्छिन्न रूप से जोड़ा गया है। यह कालगणना सृष्टि के उद्भव-प्रलय, आविर्भाव-तिरोभाव जैसे दार्शनिक सिद्धांतों से गहराई से जुड़ी हुई है। लोकजीवन में तीज-त्योहार, विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य आज भी इसी पंचांग के आधार पर ही निर्धारित होते हैं। भारतीय समाज ने इसे सदियों से धारण किया है, लोक-परंपराओं के प्रवाह के साथ इसे अपनाया और संरक्षित किया है, तथा यह आगे भी इसी रूप में जीवंत रहेगा।इस पंचांग की विशेषता यह है कि यह केवल समय की गणना नहीं करता, बल्कि जीवन को उसके समग्र परिवेश—प्रकृति, ग्रह-नक्षत्र और आध्यात्मिक ऊर्जा—के साथ संतुलित रखने का मार्गदर्शन देता है।
चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्र का आरम्भ इस वर्ष आज गुरुवार 19 मार्च 2026 से हो रहा हैं। इसी दिन से हिन्दू नवसंवत्सर २०८३ ( विक्रम संवत ) का आरम्भ भी होता है। चैत्र मास के नवरात्र को ‘वार्षिक नवरात्र’ या ‘वासंतिक नवरात्र’ कहा जाता है। नवरात्र के पावन अवसर पर अष्टमी तथा नवमी के दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है। इस वर्ष वासंतिक नवरात्र पूर्ण नौ दिनों की है। अधिकांश पंचांगों के अनुसार कोई प्रमुख तिथि क्षय नहीं दिख रहा है, इसलिए सामान्य रूप से नौ दिनों तक पूजा-अर्चना होगी। जो लोग श्रीसप्तशती का प्रतिदिन एक पाठ करते हैं, उन्हें नवमी तिथि पर हवन आदि पूर्ण कर सकते हैं।
नौ दिनों तक चलने वाले नवरात्र पर्व में माँ दुर्गा के नौ रूपों क्रमशः- शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धदात्री देवी की पूजा का विधान है। नवरात्र के इन प्रमुख नौ दिनों में लोग नियमित रूप से पूजा पाठ और व्रत का पालन करते हैं। वासंतिक नवरात्र का समाप्ति दिवस श्रीराम नवमी का होता है, जो इस वर्ष शुक्रवार 27 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। नवरात्र के नौ दिन तक देवी दुर्गा का पूजन, दुर्गा सप्तशती का पाठ इत्यादि धार्मिक क्रिया पौराणिक कथाओं में शक्ति की आराधना का महत्व व्यक्त किया गया है। इसी आधार पर आज भी माँ दुर्गा जी की पूजा सम्पूर्ण भारत वर्ष में बहुत हर्षोउल्लास के साथ की जाती है। वर्ष में दो बार की जाने वाली दुर्गा पूजा एक चैत्र माह में और दूसरा आश्विन माह में की जाती है।
घट स्थापना:-
नवरात्र में घट स्थापना का बहुत महत्व है। नवरात्र की शुरुआत घट स्थापना से की जाती है। कलश को सुख समृद्धि, ऐश्वर्य देने वाला तथा मंगलकारी माना जाता है। कलश के मुख में भगवान विष्णु, गले में रूद्र, मूल में ब्रह्मा तथा मध्य में देवी शक्ति का निवास माना जाता है। नवरात्र के समय ब्रह्माण्ड में उपस्थित शक्तियों का घट में आह्वान करके उसे कार्यरत किया जाता है। इससे घर की सभी विपदा दायक तरंगें नष्ट हो जाती हैं तथा घर में सुख शांति तथा समृद्धि बनी रहती है।
माँ दुर्गा की कृपा आपसब पर सदैव बनी रहे यही माँ से प्रार्थना हैं।
भारतीय नववर्ष आप सभी के लिए मंगलकारी हो आनंददायक हो एवं सुख समृद्धि कारक हो।
🙏 जय माँ भगवती 🙏