CSM Haryana

CSM Haryana पढ़ो पढ़ाई करने को–लड़ो समाज बदलने को! We Shall Fight-We Shall Win !

 #बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर का उद्देश्य संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य, जिसका उद्देश्य न्याय और स्वतं...
14/04/2026

#बाबा साहब डॉ. अम्बेडकर का उद्देश्य
संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य, जिसका उद्देश्य न्याय और स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना है, ओर देश में हर नागरिक को बराबरता मिले ,जातियों का खत्मा हो, महिलाओं ओर पुरुषों में समानता हो, एक अच्छे ओर बेहतर समाज के निर्माण के लिए बाबा साहब ने संघर्ष किया...

क्या आज देश में गरीबों को न्याय मिल रहा है?
क्या देश समानता की ओर बढ़ रहा है?
क्या जातियों का खत्मा हो रहा है?
गरीब गरीब हो रहा है अमीर अमीर हो रहा हे?

मौजूदा पूंजीपति सरकारें साम्राज्यवाद की पिट्ठु देश के नागरिकों को न तो न्याय देना चाहती है ओर ना ही समाजिक ओर आर्थिक समानता।

आज बाबा साहेब डॉक्टर अंबेडकर के जन्मदिन पर हम सब को उनके द्वारा किए गए संघर्ष को याद करते हुए समानता , न्याय ,स्वतंत्रता, भाईचारा को मजबूती से आगे बढ़ना चाहिए, सामाजिक ओर आर्थिक आजादी के लिए हमारा संघर्ष सिद्धांतिक तौर से लड़ा जाना चाहिए।

हर आंदोलन को ईमानदारी से ओर मजबूती से लड़ना और देश में सामाजिक , आर्थिक समानता के लिए संघर्ष करना बहुत जरूरी है, यही आम जनता की असली आजादी है।

जारीकर्ता :- छात्र संघर्ष मंच(CSM) हरियाणा

  Aspirants पर सरकारी दमन बंद करो! CM Nayab Saini और BJP सरकार – शर्म करो! 35% की साजिश से हजारों सीटें खाली, अब peacefu...
04/03/2026

Aspirants पर सरकारी दमन बंद करो! CM Nayab Saini और BJP सरकार – शर्म करो! 35% की साजिश से हजारों सीटें खाली, अब peaceful protesters पर FIR, नोटिस और वॉटर कैनन? ये युवाओं का खुला अपमान है!!

माननीय मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini जी, महिपाल ढांडा जी और हरियाणा सरकार,

आपके शासन में HPSC Aspirants पंचकुला में शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे – अपने हक, जॉइनिंग लेटर और न्याय की मांग लेकर। लेकिन बजाय समाधान के, आपने उन पर धाराएं लगाकर नोटिस और मुकदमे ठोक दिए! पुलिस ने वॉटर कैनन चलाए, संघर्षरत साथियों को डिटेन किया।

यह निंदनीय दमन है! जहां युवाओं को नौकरियां देनी चाहिए थीं, वहां उनके भविष्य पर हमला किया जा रहा है। सरकार ने जो नोटिस भेजे हैं, वे लोकतंत्र की हत्या हैं – peaceful protest को “अपराध” बताकर aspirants को डराने की साजिश! क्या सत्ता इतनी कमजोर हो गई है कि युवाओं की आवाज सुनने की बजाय FIR और नोटिस से जवाब दे रही है? शर्म आनी चाहिए – यह BJP सरकार की असली “युवा-विरोधी” तस्वीर है!

- Assistant Professor (College Cadre) – English: 613 पोस्ट्स पर ~2,000 कैंडिडेट्स ने subject knowledge test दिया। केवल 151 ही 35% क्वालीफाई कर पाए (462 सीटें खाली!)। UGC-NET JRF, PhD होल्डर्स, गोल्ड मेडलिस्ट, 99%+ percentile वाले भी फेल! Reserved categories में तबाही – BC-A में सिर्फ 3, BC-B में 3, EWS में 6, SC/DSC-OSC में 3। HPSC चेयरमैन Alok Verma ने खुद कहा – “हरियाणा के युवा लिखना भी नहीं जानते, शिक्षा व्यवस्था खराब”। जवाब दो, CM साहब!

- PGT Computer Science: 5,100+ युवाओं ने परीक्षा दी, सिर्फ 39 ही 35% पार कर पाए (1,711 में से 1,672 सीटें खाली!)। फिर से नया विज्ञापन निकाला गया – युवाओं का मजाक!

- अन्य सभी विषयों में एक जैसी तबाही (History, Political Science, Hindi, Physics, Chemistry, Commerce, Geography, Psychology, Sanskrit आदि): HPSC की 2,424 Assistant Professor भर्ती (26 विषयों में) में 35% qualifying criteria ने पूरे सिस्टम को तबाह कर दिया। हजारों सीटें खाली, रिजर्वेशन खत्म! Hindi का पेपर लीक हो गया, Geography/Commerce में भी document verification के बावजूद mass rejection। कुल Higher Education में 4,900+ Assistant Professor पोस्ट्स खाली (RTI), स्कूलों में 17,000+ टीचर वैकेंसी।

- बाहर के उम्मीदवारों का खेल: पिछले 2 साल में जनरल कैटेगरी की 2,216 सिफारिशों में 22.3% (494) बाहर के राज्य के कैंडिडेट्स को दी गईं। हरियाणा के जनरल युवा बेरोजगार, लेकिन सीटें खाली छोड़कर outsiders को favor! केवल 8% हरियाणा के युवा सिलेक्ट हुए।

- आरक्षण का खुला उल्लंघन: OBC, EWS, OSC, DSC की हजारों सीटें 35% की आड़ में खाली। कोर्ट ने भी HPSC को फटकार लगाई। यह रिजर्वेशन खत्म करने की साजिश है!

छात्र संघर्ष मंच (CSM) HPSC Aspirants के साथ खड़ा है। हम और के लिए लड़ेंगे।

हमारी मांगें :
- सभी FIR, नोटिस और मुकदमे तुरंत वापस लो– यह दमन नहीं चलेगा!
- 35% क्राइटेरिया पूरी तरह खत्म करो, कम से कम 2 गुना कैंडिडेट्स को इंटरव्यू बुलाओ।
- सभी खाली सीटें (सभी विषयों में) भरो, रिजर्वेशन लागू करो, बाहर के उम्मीदवारों की सिफारिश रद्द करो।
- पूरे रिजल्ट की थर्ड-पार्टी जांच।
- Higher Education बजट बढ़ाओ, लेकिन पहले खाली पोस्ट्स भरो!

अवैध खनन का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकार साथियों के ऊपर जानलेवा हमला बहुत निंदनीय है!!!!अवैध खनन से पर्यावरण के ऊपर सीधा अ...
03/03/2026

अवैध खनन का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकार साथियों के ऊपर जानलेवा हमला बहुत निंदनीय है!!!!

अवैध खनन से पर्यावरण के ऊपर सीधा असर पड़ता है जल ओर वायु के ऊपर गहरा असर पड़ता है जिसे आम लोगों का स्वास्थ्य खराब होता है दमे और कैंसर के मरीजो कि संख्य बढ़ती हैं,

खनन में चल रहे अनगिनत डेम्फरों से लापरवाही के चलते सैकड़ों मौतें हो रही है ये परिवार उजड़ रहे है, इनका जिम्मेदार ये अवैध खनन है, आर्थिक लाभ केवल कुछ रसूखदार लोगों की जेब में जाता है, जबकि इसका स्थायी नुकसान वहां की आम जनता को अपनी सेहत, संपत्ति और भविष्य के रूप में चुकाना पड़ता है।

अवैध खनन अक्सर माफियाओं द्वारा संचालित होता है, जिससे इलाके में गुंडागर्दी, अवैध हथियारों का चलन और हिंसा बढ़ जाती है।
जिसका शिकार भाई संजय भूड़ ओर पत्रकार बेनीवाल हुए। जो कि बहुत निंदनीय हैं!!!

प्रशासन जल्द घटना को अंजाम देने वाले आरोपीयों के ऊपर जल्द कार्यवाही कर उनको गिरफ्तार करें।

सरकार ओर प्रशासन को समय रहते अवैध खनन पर लगाम लगानी चाहिए।
छात्र संघर्ष मंच(CSM) इस जानलेवा हमले की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती पर नमन 🙏आज आवश्यकता है कि हम गुरु रविदास जी केसमानता, बेगमपुरा और न्यायपूर्ण समाज के विचार...
01/02/2026

संत शिरोमणि गुरु रविदास जयंती पर नमन 🙏
आज आवश्यकता है कि हम गुरु रविदास जी के
समानता, बेगमपुरा और न्यायपूर्ण समाज के विचारों को आगे बढ़ाएँ।
गुरु रविदास जी ने अपने विचारों से समाज को प्रेम, मानवता और समान अधिकारों का मार्ग दिखाया।
उनकी शिक्षाएं आज भी हमें सत्य, कर्म और सामाजिक समरसता के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा देती हैं।
आइए, उनके बताए रास्ते पर चलकर एक शोषण-मुक्त, समान और न्यायपूर्ण समाज का निर्माण करें।
— छात्र संघर्ष मंच



#समानता
#न्यायपूर्ण_समाज
#छात्र_संघर्ष_मंच

29/10/2025

💣 मज़दूरों के ख़िलाफ़ फ़रमान: 'श्रम शक्ति नीति 2025' - पूंजीपतियों की तानाशाही का नया हथियार 💣

साथियों,
देश में एक नया क़ानून आ रहा है — 'श्रम शक्ति नीति 2025'। यह नीति मज़दूरों के लिए नहीं, बल्कि कॉर्पोरेट लुटेरों के लिए बिछाया गया एक लाल कालीन है! यह नीति मज़दूरों के हक़ छीनने की पुरानी साज़िश को एक नया, चमकदार नाम देने का प्रयास है।
आज का भारत एक भयानक विरोधाभास में जी रहा है। एक तरफ़ दुनिया के सबसे अमीर लोग हैं, जिनके पास देश की आधी से ज़्यादा दौलत है और दूसरी तरफ़ 90% असंगठित मज़दूर हैं, जो हर रोज़ शोषण की चक्की में पिस रहे हैं। आज हमारे लाखों युवा 'गिग वर्कर' बन गए हैं—डिलीवरी बॉय, कैब ड्राइवर। एक रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 85% को वह न्यूनतम मज़दूरी भी नहीं मिलती जो क़ानूनन उन्हें मिलनी चाहिए, और वे 14-14 घंटे काम करते हैं। इसी तरह, भारत में महिलाओं को अक्सर समान काम के लिए कम वेतन दिया जाता है और लाखों महिला मज़दूर मातृत्व लाभ जैसी बुनियादी सुरक्षा से वंचित रह जाती हैं, जो कि खुलेआम संवैधानिक हक़ (अनुच्छेद 14 और 39) का उल्लंघन है।

👉 'राजधर्म' की आड़ में अधिकारों पर हमला:

इस नीति का सबसे ख़तरनाक पहलू इसका दार्शनिक आधार है। मसौदा नीति कहती है कि यह प्रेरणा मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथों में वर्णित 'राजधर्म' से लेती है। यह विचार आज के लोकतांत्रिक भारत में अस्वीकार्य है। 'राजधर्म' की अवधारणा उस समय की है जब मज़दूरों को उनके कर्म या जाति के आधार पर बाँट दिया जाता था। उस ज़माने में मज़दूरों का शोषण एक नियम था।
जिस राजधर्म की बात यह नीति करती है, वह मज़दूरों को कोई सम्मान या हक़ नहीं देता था। वह उन्हें जन्म के आधार पर सिर्फ़ सेवक बना देता था। मनुस्मृति के अध्याय 1, श्लोक 91 में साफ़ लिखा है:
एकमेव तु शूद्रस्य प्रभुः कर्म समादिशत।
एतेषामेव वर्णानां शुश्रूषामनसूयया ।।
"परमात्मा ने शूद्र के लिए एकमात्र कर्म ईर्ष्या रहित होकर (बिना द्वेष के) भक्ति से ऊपर के तीनों वर्णों की सेवा करना निर्धारित किया है।" यानी, मज़दूर वर्ग को अपनी मर्ज़ी से कोई दूसरा धंधा, व्यापार या नौकरी चुनने का कोई अधिकार नहीं था। उनका पूरा जीवन सिर्फ़ दूसरों की सेवा के लिए समर्पित था। यह क़ानून नहीं, तानाशाही थी।
इस नीति का वैचारिक स्रोत मज़दूरों को हमेशा कमज़ोर और आर्थिक रूप से ग़ुलाम बनाए रखने की वकालत करता है। मनुस्मृति के अध्याय 10, श्लोक 129 में स्पष्ट रूप से मज़दूरों को आर्थिक रूप से पंगु बनाने का आदेश दिया गया है:
शक्तेनापि हि शूद्रेण न कार्यो धनसंचय:।
शूद्रो हि धनमासाद्य ब्राह्मणानेव बाधते।।
"समर्थ शूद्र को भी धन संचय नहीं करना चाहिए, भले ही वह इसके लिए सक्षम हो। यदि शूद्र धन संचय कर लेता है, तो वह ब्राह्मणों को कष्ट पहुँचा सकता है।" क्या 'श्रम शक्ति नीति 2025' इसी विचार को वैधानिक (legal) रूप देने जा रही है? क्या आज की सरकार भी मज़दूरों को सिर्फ़ इतना पैसा देना चाहती है कि वह भूखा न रहे, लेकिन इतना नहीं कि वह आर्थिक रूप से आज़ाद होकर शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा सके?
मज़दूर का हक़ उचित वेतन (Fair Wages) है, जो उसकी मेहनत का असली दाम हो। लेकिन जिस 'राजधर्म' का सहारा लिया जा रहा है, वह मज़दूर को वेतन नहीं देता था, सिर्फ़ भरण-पोषण देता था। काम के बदले केवल भोजन और वस्त्र देने का ज़िक्र है। आज की नीति भी न्यूनतम मज़दूरी की अनिवार्यता पर मज़बूती से बात नहीं करती, बल्कि 'सामाजिक सुरक्षा' की आड़ में मालिक का बोझ हल्का करना चाहती है। यह साफ़ है कि मालिक मज़दूर को केवल ज़िंदा रहने लायक देगा, तरक़्क़ी करने लायक नहीं।
हमारे संविधान के निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर ने इसी सामंती और भेदभावी व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए संविधान बनाया था, जो हर नागरिक को समानता (Article 14) और शोषण से मुक्ति (Article 23) का अधिकार देता है। यह नीति 'राजधर्म' का सहारा लेकर, मज़दूरों को अधिकार मांगने के बजाय 'देश के लिए काम करने का कर्तव्य' सिखाना चाहती है, ताकि कॉर्पोरेट घरानों को फ़ायदा पहुँचाया जा सके। यह हमारे संविधान के मूल्यों को कमज़ोर करने का प्रयास है।

👉 श्रम शक्ति नीति: शोषण की गारंटी देने वाला क़ानून:

यह नीति सिर्फ़ चिकनी-चुपड़ी बातें करती है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त पर इसका असर मज़दूर-विरोधी है।

👉 नीति की सबसे बड़ी कमियाँ:

1. सरकारी निरीक्षण का क़त्ल: नीति में सबसे पहला वार निरीक्षण प्रणाली पर किया गया है। 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' के नाम पर अब मालिक ख़ुद लिखकर देंगे कि उन्होंने कानून का पालन किया है (स्व-प्रमाणन)। क्या हम इस पर भरोसा कर सकते हैं? आज जब मज़दूरी चोरी की लाखों शिकायतें हर साल आती हैं, तब सरकार ख़ुद ही मज़दूरों के रखवालों (Inspectors) को हटा रही है। इसका सीधा मतलब है— मालिकों को खुली लूट की छूट!

2. लाखों मज़दूरों को 'आउट ऑफ़ बाउंड्स': इस नीति के कारण, नए लेबर कोड्स में तय की गई उच्च सीमाएँ (जैसे 300 मज़दूरों तक छंटनी की छूट) बनी रहेंगी। कल्पना कीजिए— किसी टेक्सटाइल फ़ैक्ट्री में 250 मज़दूर काम करते हैं। वे न तो आसानी से यूनियन बना पाएँगे, न ही उन्हें नौकरी से निकालने पर कोई सवाल होगा। यह क़ानून मज़दूरों को जानबूझकर सुरक्षा के दायरे से बाहर निकाल देगा।

3. विरोध का हक़ छीनने की चाल: यह नीति हड़ताल करने और यूनियन बनाने की प्रक्रिया को इतना जटिल बना देती है कि मज़दूर अपने हक़ के लिए लड़ ही नहीं पाएँगे। जब देश में राजनीतिक विरोध का गला घोंटा जा रहा है, तब मज़दूरों के सामूहिक विरोध के अधिकार को कमज़ोर करना सीधे तौर पर शोषण को मज़बूती देना है।

4. गिग वर्कर को झूठा सपना: नीति गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को 'सामाजिक सुरक्षा' देने का वादा करती है, लेकिन 'पैसा कौन देगा?'— इस सवाल पर चुप्पी साध लेती है। यह पूंजीपतियों को पैसा देने से बचाने की चाल है, जिससे इन मज़दूरों को सिर्फ़ नाम का फ़ायदा मिलेगा, असली सुरक्षा नहीं।

👉 CSM का स्पष्ट स्टैंड और आगे की राह:
छात्र संघर्ष मंच इस नीति को सिरे से ख़ारिज करता है। हम साफ़ करते हैं कि मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा संवैधानिक क़ानूनों से होगी, न कि मनुस्मृति जैसे प्राचीन ग्रंथों के 'राजधर्म' से।
हम निम्नलिखित कदम उठाने की मांग करते हैं:
👉 नीति वापस ली जाए: यह मसौदा तुरंत वापस लिया जाए और मज़दूर संगठनों के साथ पूरी बातचीत के बाद ही कोई नई नीति बने।
👉 रोज़गार हमारा हक़: सभी शिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोज़गार दिया जाए, या तुरंत उचित बेरोज़गारी भत्ता दिया जाए।
👉 शिक्षा का अधिकार: शिक्षा पर सरकारी ख़र्च (GDP का 6%) बढ़ाया जाए और शिक्षा का व्यापारीकरण बंद किया जाए, ताकि मज़दूर के बच्चे भी अच्छी शिक्षा पाकर शोषण के इस चक्र से बाहर निकल सकें।
👉 निरीक्षण और सुरक्षा गारंटी: मज़दूरों की सुरक्षा के लिए सरकारी निरीक्षण प्रणाली को मज़बूत किया जाए, ताकि हर हाल में न्यूनतम मज़दूरी और काम के घंटे सुनिश्चित हो सकें।

जब तक मज़दूरों के पसीने की क़ीमत नहीं मिलेगी, और उनके अधिकारों का सम्मान नहीं होगा, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

छात्र संघर्ष मंच (CSM)
हरियाणा

Jan Manch The Lallantop Forum Against Corporatization and Militarization - FACAM युवा संघर्ष मोर्चा

कल रात लंदन की एक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर फ्रांचेस्का ऑर्सिनी जोकि हिंदी की विद्वान हैं, भारत आ रही थीं। उन्हें दिल्ली ए...
21/10/2025

कल रात लंदन की एक यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर फ्रांचेस्का ऑर्सिनी जोकि हिंदी की विद्वान हैं, भारत आ रही थीं। उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर रोक लिया गया और कहा गया कि उन्हें वापिस भेजा जा रहा है। कोई कारण नहीं दिया गया, जबकि उनके पास पांच साल का वीजा था। वैध वीजा होने के बावजूद देश में आने से रोकी जाने वाली ये चौथी विदेशी शोधकर्ता हैं। ये घटना ऐसे समय में सामने आई है जब एक वैश्विक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब उन देशों में शामिल हो गया है जहां अकादमिक स्वतंत्रता घट रही है और यूनिवर्सिटी तथा राजनीतिक समूहों द्वारा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाई जा रही है। शिक्षा पर राजनीति द्वारा कब्जा किया जा रहा है और असल में भारत हजारों साल पीछे जा चुका है।

अमेरिका में 'नो किंग्स' प्रोटेस्ट तेज हुआ, राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ 2600 जगहों पर 70 लाख से ज्यादा लोगों ने...
20/10/2025

अमेरिका में 'नो किंग्स' प्रोटेस्ट तेज हुआ, राष्ट्रपति ट्रम्प की नीतियों के खिलाफ 2600 जगहों पर 70 लाख से ज्यादा लोगों ने सड़कों पर निकाली रैली

ये ट्रंप साम्राज्यवादी एक नम्बर का तानाशाह है जो बर्बाद होगा।

18/10/2025

भीमराव अंबेडकर कॉलेज में शिक्षक को थप्पड़ मारना ABVP में निहित गुंडई तत्वों को सामने ला देता है।

भीमराव अम्बेडकर कॉलेज के शिक्षक श्री सुजीत कुमार जी को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की संयुक्त सचिव दीपिका झा द्वारा मारा गया थप्पड़ इस बात को साफ कर रहा है कि ABVP सिर्फ गुंडागर्दी के जरिए ही अपनी पैठ बनाना चाहती है। भीमराव अंबेडकर कॉलेज में जब छात्र संघ के चुनाव हुए थे, तो उसमें ABVP हार गई थी और शपथ ग्रहण कार्यक्रम में उन्होंने नवनिर्वाचित अध्यक्ष को पीटा था। जाहिर सी बात है कि गुंडई करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी थी और अनुशासनात्मक समिति को देख रहे थे श्री सुजीत जी। एक पत्रकार को श्री सुजीत जी ने बताया कि ABVP के उन छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ को सूचित किया और संयुक्त सचिव दीपिका झा जोकि ABVP से है, वह पहुंची और जबरदस्ती श्री सुजीत जी से अनुशासनात्मक समिति से इस्तीफा दिलवाया, ताकि उनके संगठन के छात्रों पर कार्यवाही ना हो। दिल्ली पुलिस की मौजूदगी में प्राचार्य कार्यालय में दीपिका झा ने श्री सुजीत जी को थप्पड़ मारा।
ABVP पर पहले भी विद्यार्थियों के साथ मारपीट करने के आरोप लगते रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ की संयुक्त सचिव, जिसे विद्यार्थियों ने चुना है, जोकि विद्यार्थियों का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका संगठन ABVP ज्ञानशील एकता में विश्वास करता है, उसके द्वारा ज्ञान पुंज शिक्षक पर हमला, सिर्फ उन शिक्षक की अस्मिता पर ही हमला नहीं, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ को भी सवालों के घेरे में खड़ा करता है। ABVP दिल्ली विश्वविद्यालय को दीपिका झा और भीमराव अंबेडकर कॉलेज के ABVP से जुड़े विद्यार्थियों पर खुद कार्रवाई करनी चाहिए थी और उदाहरण स्थापित करना चाहिए था कि शिक्षकों के साथ इस तरीके का व्यवहार ABVP बर्दाश्त नहीं करेगी। लेकिन इसके उलट, ABVP ने उन शिक्षक पर ही झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिए।
ये सब घटनाक्रम दिखाता है कि ABVP को अपने कार्यकर्ताओं की गुंडई पर जरा भी लज्जा नहीं है, और इस तरीके के हमले करना दिखाता है कि इन लोगों को प्रशासन की ओर से पूरा समर्थन प्राप्त है, जिसके चलते इन पर कोई कार्यवाही नहीं होती।
छात्र संघर्ष मंच हरियाणा, दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ और दिल्ली विश्वविद्यालय से अपील करता है कि छात्र संघ में शामिल ऐसे शिक्षक विरोधी तत्वों पर कार्यवाही हो, ताकि विश्वविद्यालय की गरिमा बनी रहे और छात्र संघ पर कोई संशय विद्यार्थियों के मन में ना हों। हम भीमराव अंबेडकर कॉलेज के प्रशासन से भी अपील करते हैं कि कॉलेज में अनुशासन भंग करने वाले तमाम विद्यार्थियों, चाहे वह किसी भी विचारधारा से हों, पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें। देशभर के छात्र संगठनों को ये याद रखना चाहिए कि हमारा कर्तव्य विद्यार्थियों के हितों के लिए लड़ना और हर प्रकार के अन्याय के खिलाफ खड़े होना है।

छात्र संघर्ष मंच
हरियाणा

हम सरकार और प्रशासन से मांग करते हैं :1. पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पर NSA हटाया जाए और उन्हें तथा अन्य गिरफ्तार आंदोलनका...
01/10/2025

हम सरकार और प्रशासन से मांग करते हैं :
1. पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक पर NSA हटाया जाए और उन्हें तथा अन्य गिरफ्तार आंदोलनकारियों को तुरंत बिना शर्त रिहा किया जाए।
2. पीड़ित परिवारों को तत्काल सहायता और उचित मुआवज़ा दिया जाए।
3. लद्दाख में हुए दमन की निष्पक्ष और त्वरित जाँच कर दोषियों को सख्त सज़ा दी जाए।
4. स्थानीय जनता की लंबे समय से चली आ रही सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय मांगों को गंभीरता से सुना जाए और हल किया जाए।
5. लद्दाख में तुरन्त इंटरनेट बहाल किया जाए।
👉छात्र संघर्ष मंच (CSM)

31/07/2025

#वकील रजत कलसन एक केस में जमानत हो गई!! हिसार पुलिस ने दूसरे में फिर गिरफ्तार कर लिया।।

पुलिस की उच्च जातीय मानसिकता सामने आ गई है। हिसार पुलिस का एकमात्र मकसद दलित अधिकार अधिवक्ता रजत कलसन को उकड़ू बिठा कर फोटो सेशन करना था, जातिवादी गुंडों को खुश करने के लिये, रजत कलसन को अपमानित करना था।

रजत कलसन की गिरफ्तारी के बाद बुडाना गांव में पंचायत करके एसपी हांसी का धन्यवाद करते हुए कहा कि रजत कलसन को उसकी औकात दिखा दी गई है।

ऐसा करके पुलिस ने सिर्फ उच्च जातीय अहंकारी तत्वों की आत्मा को शांति प्रदान की है। नारनौंद वाले केस में जमानत मिलते ही रजत को हिसार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कल इस केस में भी अदालत जमानत दे देगी। दोनों ही मामले ऐसे नहीं है कि गिरफ्तारी की जरूरत पड़े। पुलिस सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ा रही है।

#पूरा समाज सामाजिक कार्यकर्ता वकील रजत कलसन के साथ खड़ा है ।
छात्र संघर्ष मंच (CSM)हिसार पुलिस प्रशासन की तानाशाही की कड़े शब्दों में निंदा करता है।
#हरियाणा kalsan
kapdo

 #बहुत ही संघर्षशील साथी साइकोलॉजिस्ट सम्राट सिंह यमुनानगर जो पिछले 20 सालों से समाज के बीच में रहकर दलितों, पिछड़ों ,मु...
13/07/2025

#बहुत ही संघर्षशील साथी साइकोलॉजिस्ट सम्राट सिंह यमुनानगर जो पिछले 20 सालों से समाज के बीच में रहकर दलितों, पिछड़ों ,मुस्लिम,किसान ,मजदूरों , महिला हर वर्ग की आवाज उठा रहे हैं और समाज के हर आंदोलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले साथी को #कल शाम 7 बजे उनके घर से दिल्ली पुलिस प्रशासन की टीम ने बिना किसी नोटिस दिए ओर न कोई केस या FIR के बारे में बताया गैर कानूनी तरीके से गिरफ्तार कर लिया है,सत्ता की तानाशाही के खिलाफ बोलने वालों को सरकार गिरफ्तार करके आम जनता की आवाज दबाना चाहती हे ...
#छात्र संघर्ष मंच(CSM) दिल्ली पुलिस प्रशासन ओर सत्ता की इस गैर कानूनी कार्यवाही का विरोध करता है ओर प्रशासन से मांग करता हे सामाजिक कार्यकर्ता सम्राट सिंह को रिहा किया जाए।
Samrat Singh immediately!!

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