20/06/2026
19 जून 2026 | उत्तर प्रदेश
📍 सहारनपुर: 40 वर्षीय शहजाद ने अपनी पत्नी के साथ सनातन धर्म अपनाकर अपना नाम शंकर रख लिया। 21 अप्रैल को हरिद्वार में वैदिक रीति-रिवाज से धर्म परिवर्तन कराया गया और 19 जून को गांव लौटने पर उनका स्वागत किया गया।
📍 शामली: 27 वर्षीय आयुष मलिक ने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम कबूल कर रहमान नाम रखा और चांदनी कुरैशी से निकाह किया। मामला दोनों बालिगों की सहमति का बताया जा रहा है। इसके बावजूद चांदनी और उनके पिता को पुलिस हिरासत में ले लिया गया।
अगर अपनी मर्ज़ी से धर्म बदलना एक मामले में सम्मान की बात है, तो दूसरे मामले में उसे "लव जिहाद" बताकर पुलिस कार्रवाई क्यों? आख़िर क़ानून और उसूल धर्म देखकर क्यों बदल जाते हैं?
जहाँ तक इस्लाम छोड़ने वालों का सवाल है, मुस्लिम समाज को इससे घंटा फ़र्क नहीं पड़ता। इस्लाम की ख़ूबसूरती यही है कि वह ईमान को ज़बरदस्ती नहीं, बल्कि दिल का फ़ैसला मानता है। क़ुरआन कहता है, "दीन में कोई ज़बरदस्ती नहीं।" (सूरह अल-बक़रह 2:256)
इसलिए किसी के जाने पर नफ़रत फैलाने या हिंसा का रास्ता नहीं, बल्कि अपने दीन और अपने किरदार पर क़ायम रहना ही इस्लाम की तालीम है।
सत्ता, सियासत और सरकार का यह दोहरा मापदंड अब पूरी दुनिया देख रही है। इंसाफ़ अगर सचमुच इंसाफ़ है, तो उसका पैमाना हर नागरिक के लिए एक जैसा होना चाहिए।