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Educate the new generation society उज्वल भविष्य की ओर बढ़ते कदम

25/01/2026
25/01/2026

Happy Republic day....गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है? 26 जनवरी का इतिहास...........................=...===.......
अगस्त 1947 को हमारा देश भारत आजाद हुआ था लेकिन उसके पूर्व 7 से 8 महीने पहले ही देश की आजादी की घोषणा हो गई थी और संविधान लिखने का कार्य शुरू हो गया था। 1935 का जो हमारा संविधान था उसके अनुसार हमारा नया संविधान बनाया गया।

संविधान को बनाने में लगभग 2 साल 11 महीने और 18 दिन यानि 3 साल लगे थे लेकिन संविधान लागू कब हुआ। संविधान को टुकड़ो टुकड़ो में पढ़ा गया और टुकड़ो टुकड़ो में जनता को इसके बारे में जानकारी देते गये। ऐसे ही ऐसे हमारे देश में संविधान को पूरी तरह 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया था।

मतलब आजादी के लगभग 2 या ढाई साल बाद यानि 1947 से संविधान का बनना शुरू हुआ और 1950 में संविधान लागू किया गया। लेकिन 26 जनवरी को जब संविधान लागू किया गया तो उसके साथ में हमारे देश में लोकतंत्र का एक नया सेलेबर्स बनाया गया। लोकतंत्र का सेलेबर्स कुछ इस प्रकार था।

जनता में से जनता द्वारा और जनता के लिए चुनी हुई सरकार। इससे जनता का राज देश में लागू हो गया और संविधान देश में पूरी तरह लागू हो गया। इसलिए हम देश को 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस कहते है या republic day. जिसे जनता का दिन भी कहा जाता है।

इस दिन देश में पूरी तरह से लोकतंत्र लागू हुआ था। इसके अलावा हमारे देश का राष्ट्रिय ध्वज भी 26 जनवरी को ही में में लागू हुआ था। साथ ही हमारे देश भारत के राष्ट्रगान "जन गण मन" को भी 26 जनवरी के दिन ही अप्लाई किया गया था। वैसे मान्यता पहले से थी लेकिन 26 जनवरी को ये हमारे देश का राष्ट्रगान के रूप में घोषित किया गया था।

इसी के साथ देश में पूरी तरह से लोकतंत्र लागू हो गया और इसके साथ हमारे देश की जनता को कुछ अधिकार भी दिये गये। उसमें से सबसे बड़ा अधिकार था जो एक ऐसा अधिकार है जिससे हमको पूरी तरह आजादी मिल सकती है जिससे न हमको कोई बिना वजह गिरफ्तार कर सकता है हम देश में कही पर भी घूम सकते है।

इस तरह 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाने लगा और 2025 में भारत 76 वां गणतंत्र दिवस यानि रिपब्लिक डे मना रहा है। इसलिए 26 जनवरी मनाई जाती है और इसी दिन गणतंत्र दिवस (republic day) मनाया जाता है। अब आपको पता चल गया होगा की 26 जनवरी क्यों मनाई जाती है और इसी दिन गणतंत्र दिवस क्यों मनाते है और 26 जनवरी का क्या महत्त्व हैं।

26 January को गणतंत्र दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि 26 जनवरी को ही भारत का संविधान लागू किया गया था इसलिए आज ही के दिन 26 जनवरी को हर साल गणतंत्र दिवस जिसे republic day भी कहा जाता है और republic day को जनता का दिन भी कहा जाता है इसी दिन को हर वर्ष गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता हैं।

बलिदानों का सपना जब सच हुआ,
देश तभी आजाद हुआ,
आज सलाम करे उन वीरों को,
जिनकी शहादत से ये भारत गणतंत्र हुआ।

14/01/2026

Happy makar sankranti........

Happy new year 2026🎊🎊🎊🎁🎁🎈🎊
01/01/2026

Happy new year 2026🎊🎊🎊🎁🎁🎈🎊

26/10/2025

Happy chhath Puja.....

26/10/2025

Happy chhath Puja...
छठ पूजा में खरना चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का दूसरा दिन होता है। इसे 'लोहंडा' के नाम से भी जाना जाता है। खरना का अर्थ 'शुद्धिकरण' है, और यह मन और शरीर की शुद्धता बनाए रखने का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि खरना के दिन ही छठी मैया व्रती के घर आती हैं।
खरना के मुख्य अनुष्ठान
निर्जला उपवास: खरना के दिन व्रती महिलाएं सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत रखती हैं।
प्रसाद की तैयारी: शाम के समय व्रती स्नान के बाद प्रसाद तैयार करती हैं। यह प्रसाद पूरी शुद्धता और पवित्रता के साथ बनाया जाता है।
प्रसाद का भोग और ग्रहण:
प्रसाद में मुख्य रूप से गुड़ और चावल से बनी खीर, रोटी या पूड़ी शामिल होती है।
यह प्रसाद सबसे पहले छठी मैया को अर्पित किया जाता है।
इसके बाद व्रती स्वयं इस प्रसाद को ग्रहण करती हैं, और फिर इसे परिवार के सदस्यों और दोस्तों के बीच बाँटा जाता है।
36 घंटे का निर्जला व्रत: खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। यह व्रत अगले दिन शाम के अर्घ्य और उसके अगले दिन सुबह के अर्घ्य के बाद ही समाप्त होता है।
खरना का महत्व
आत्म-शुद्धि और भक्ति: खरना का दिन तप, संयम, भक्ति और समर्पण का प्रतीक है। यह मन और शरीर को छठ पूजा के कठिन व्रत के लिए तैयार करता है।
छठी मैया का आगमन: ऐसी मान्यता है कि खरना के दिन व्रती के घर छठी मैया का आगमन होता है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
संतान की सुख-समृद्धि: यह पर्व विशेष रूप से संतान की प्राप्ति और उनकी सुख-समृद्धि के लिए मनाया जाता है। व्रती सूर्य देव और छठी मैया से अपने परिवार के लिए आशीर्वाद माँगते हैं।
खरना की पूजा विधि
व्रत और स्नान: खरना के दिन व्रती सुबह स्नान के बाद पूरे दिन का निर्जला उपवास रखती हैं।
साफ-सफाई: शाम को पूजा से पहले घर और आसपास की अच्छी तरह से सफाई की जाती है।
मिट्टी का चूल्हा: प्रसाद बनाने के लिए नए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है, जिसे आम की लकड़ी से जलाया जाता है। आजकल कई लोग गैस चूल्हे का उपयोग भी करते हैं, पर शुद्धता का पूरा ध्यान रखा जाता है।
प्रसाद बनाना: नए बर्तन में गुड़ और चावल की खीर, और गेहूं के आटे की रोटी या पूड़ी तैयार की जाती है। इस प्रसाद में लहसुन, प्याज या नमक का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
पूजा और प्रसाद ग्रहण: शाम को पूजा के बाद, व्रती छठी मैया को प्रसाद अर्पित करती हैं। इसके बाद वे खुद प्रसाद ग्रहण करती हैं, जिससे 36 घंटे के निर्जला व्रत की शुरुआत होती है।

25/10/2025
25/10/2025

Happy chhath Puja.......

25/10/2025
15/08/2025

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15/08/2025

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15/08/2025

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