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आजाद हिंद सरकार के निर्माता महान स्वतन्त्रता सेनानी  #राजा_महेंद्र_प्रताप_सिंह(1 दिसम्बर 1886-29 अप्रैल1979)◆राजा महेंद्...
24/04/2026

आजाद हिंद सरकार के निर्माता महान स्वतन्त्रता सेनानी #राजा_महेंद्र_प्रताप_सिंह(1 दिसम्बर 1886-29 अप्रैल1979)

◆राजा महेंद्र प्रताप का जन्म मुरसान के जाट राजा बहादुर घनश्याम सिंह के यहाँ खड्ग सिंह के रूप में हुआ।
बाद में उन्हें #हाथरस के राजा हरिनारायण सिंह ने गोद ले लिया व उनका नाम महेंद्र प्रताप रखा।

◆उन्होने राज पाट की चिंता न करते हुए #निर्बल समाचार पत्र की स्थापना की व भारतीयों में स्वतन्त्रता के प्रति जागरूकता लाने का काम किया। यह उस दौर की बात है जब ज्यादातर राजा महाराजा अंग्रेजों के चरण चाटते फिर रहे थे।

◆उन्होंने गहन चिंतन किया और एक योजना बनाई के वे विदेशों में जाकर समर्थन लेंगे और एक सेना बनाकर अंग्रेजो पर आक्रमण करेंगे व देश को स्वतंत्र कर लेंगे। ऐसा सोचने वाले वे प्रथम भारतीय थे।

◆प्रथम विश्व युद्ध के समय वे विदेश गए कई देशों से भारत की स्वतंत्रता के लिए सहयोग मांगा और इसके बाद #काबुल अफगानिस्तान में भारत की एक अस्थायी निर्वासित अंतरिम सरकार की स्थापना की यह देश की प्रथम #आजाद_हिंद_सरकार थी।
इसी के साथ उन्होंने वहां एक आजाद हिंद फौज बनाई और अखंड भारत के प्रथम राष्ट्रपति के मानक पद पर आसीन हुए। लेकिन वे वहां ज्यादा समर्थन न मिलने के कारण कामयाब नहीं हो सके।

◆अंग्रेजों ने इनके #सिर पर इनमे रख दिया था व इसके बाद उनका राज्य हड़प लिया था।

◆इसके बाद वे दुनिया भर के अनेक देशों में समर्थन के लिए घूमते रहे और काफी समर्थन पाकर जापान में उन्होंने #एग्जेक्युटिव_बोर्ड_ऑफ_इंडिया की स्थापना की। वे इसके अध्यक्ष बने और रास बिहारी बोस को अपना उपाध्यक्ष बनाया।
◆इस दौरान उन्हें जापान से मार्को पोलो, जर्मनी ने ऑर्डर ऑफ रेड ईगल की उपाधि दी थी।

◆वे चीन की संसद में भाषण देने वाले पहले भारतीय थे।
◆वे दलाई लामा से भी भारत की सगतन्त्रता के समर्थन के लिए मिले थे।

◆ वे बहुत से देशों में पहुँचे व भारतीयों पर हो रहे अत्याचार के बारे में विश्व को जागृत किया।दुनियाभर में फैले भारतीयों व उनके संगठनों को एक किया व फौज के निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया।

◆उन्होंने ग़दर पार्टी के साथ मिलकर भी आजादी के लिए कार्य किया व फौज तैयार करने के लिए सारी योजनाएं बना ली और Executive Board of India को मजबूत किया।

◆फिर जापान से मिलकर उन्होंने सब तैयारी कर ली लेकिन ऐन मौके पर जापानी मनमानी करते दिखे और अपमानजनक शर्ते रखने लगे तो राजा साहब ने उन्हें फटकार दिया और कहा कि वे अपने अनुसार कार्य करेंगे वे देश को आजाद कराने के लिए लड़ रहे हैं न कि फिर से गुलाम करने के लिए। इस पर जापानी बिफर पड़े उन्हें नजरबंद कर दिया। उसके बाद राजा साहब की सहमति से रास बिहारी बोस जी अध्यक्ष बने। इसी बोर्ड का नाम योजना के हिसाब से आजाद हिंद फौज रखा गया और दूसरी आजाद हिंद फौज तैयार हुई। इस तरह यह फौज एक दिन में नहीं बनी थी बल्कि राजा साहब के पूरे जीवनकाल के संघर्ष एवं तपस्या का परिणाम थी। उसके कुछ समय बाद आजाद हिंद फौज की बागडोर संभालने के लिए नेताजी को बुलाया गया था।

◆राजा साहब विश्वयुद्ध में अंग्रेजो का साथ देने के विरुद्ध थे और उन्होंने इस पर गांधी जी का विरोध किया।

◆राजा महेंद्र प्रताप सिंह जी ने एक विश्व मैत्री संघ की स्थापना की,उसी तर्ज पर आज uno बनने की शुरुआत हुई थी।

◆वे 32 सालों तक देश के लिए अपना परिवार छोड़कर दुनिया भर की खाक छानते रहे।
जब वे वापिस भारत पहुंचे तो #सरदार_पटेल जी की बेटी #मणिकाबेन उन्हें हवाई अड्डे पर लेने पहुंची थी।

◆1952 में उन्हें #नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था।

◆1909 में वृन्दावन में #प्रेम महाविद्यालय की स्थापना की जो तकनीकी शिक्षा के लिए भारत में प्रथम केन्द्र था। मदनमोहन मालवीय इसके उद्धाटन समारोह में उपस्थित रहे। ट्रस्ट का निर्माण हुआ-अपने पांच गाँव, वृन्दावन का राजमहल और चल संपत्ति का दान दिया। राजा साहब #श्रीकृष्ण भक्त थे उन्ही के नाम पर उन्होंने देश का यह प्रथम तकनीकी प्रेम महाविद्दालय खोला था।उन्होंने अपनी आधी सम्पति इस विद्यालय को दान कर दी थी।

◆बनारस #हिंदू विश्वद्यालय, अलीगढ़ विद्द्यालय, #कायस्थ पाठशाला के लिए जमीन दान में दी। हिन्दू विश्वविद्यालय के बोर्ड के #सदस्य भी रहे।

◆वृन्दावन में ही एक विशाल फलवाले उद्यान को जो 80 एकड़ में था, 1911 में #आर्य_प्रतिनिधि_सभा उत्तर प्रदेश को दान में दे दिया। जिसमें आर्य समाज गुरुकुल है और राष्ट्रीय विश्वविद्यालय भी है।

◆मथुरा में किसानों के लिए #बैंक खोला, अपने राज्य के गांवों में प्रारंभिक #पाठशालाएं खुलवाई।

◆उनकी राष्ट्रवादी सोच के कारण कांग्रेस के कुछ नेता उन पर RSS का #एजेंट होने का आरोप लगाते रहते थे।

उन्होंने चुनावों में बड़े बड़े दिग्गजों को धूल चटा दी थी।
उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार होते हुए भी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री #अटल बिहारी वाजपेयी जी की जमानत जब्त करवा दी थी।

◆उन्होंने छुआछूत को कम करने के लिए दलितों के साथ एक राजा होते हुए भी खाना खाया जो उस समय एक असामान्य बात थी।उन्होके #चर्मकार समाज को जाटव की उपाधि दी थी।

◆उन्होंने अपनी सारी #संपत्ति देश और शिक्षा के लिए दान कर दी थी।
अपनी अफगानिस्तान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी अपने भाषण में इनको नमन किया था।

ऐसे महान दानवीर स्वतन्त्रता सेनानी राष्ट्रवादी समाज सुधारक राजा महेंद्र प्रताप के श्रीचरणों में कोटि कोटि प्रणाम🙏

हिन्दू सन्त शिरोमणि भगत श्री धन्ना जी महाराज (21 अप्रैल जयंती विशेष) #पूरा_नाम- भगत शिरोमणि श्री धन्नाराम जाट #जन्म- 141...
23/04/2026

हिन्दू सन्त शिरोमणि भगत श्री धन्ना जी महाराज (21 अप्रैल जयंती विशेष)

#पूरा_नाम- भगत शिरोमणि श्री धन्नाराम जाट
#जन्म- 1415 ई.
#जन्म_स्थान- धुंआ कलां(टोंक राजस्थान)

#गुरु-संत शिरोमणि श्री रामानन्द जी(काशी)। धन्ना जी रामानन्द जी के 12 प्रमुख शिष्यों में से एक थे।
#भक्तिधारा- वैष्णव संत
#धर्म- हिन्दू

◆धन्ना भगत जी के माता पिता पहले चोरु(टोंक) गांव के धनी व कुलीन जमींदार थे। धन्ना जी का जन्म यही हुआ बताया जाता है। लेकिन गांव में अकाल/अप्रिय बीमारी आने उन्हें गांव छोड़ना पड़ा। फिर वे धुआं कलां आये और वहां पर अपनी जमींदारी फिर से स्थापित की थी। कुछ लोगों का मानना है कि उनके माता पिता उनके जन्म के पहले ही धुआं कलां आ गए थे। और यहां उनका जन्म मानते हैं।

◆धन्ना जी बचपन से ही श्रीकृष्ण जी के पक्के भगत थे। कहते हैं कि बचपन में पुजारी द्वारा मूर्तिपूजा करते देख उन्होंने मूर्ति घर ले जाने की हठ कर ली। दुसरी मूर्ति न होने के कारण जब कई बार मना करने के बाद भी धन्ना नहीं माने तो पुजारी जी ने उन्हें मन्दिर में रखा हुआ एक शालिग्राम यह कहकर दे दिया कि यही श्रीकृष्ण भगवान हैं। शालिग्राम एक तरह का पत्थर होता है जिसे भगवान विष्णु का प्रतिनिधि मानते हैं और शिवलिंग के रूप में भी यह पूजा जाता है। पुराणो में शालिग्राम पत्थर की महिमा का गुणगान है।कहते हैं कि उस पत्थर की पूजा करके धन्ना ने श्रीकृष्ण भगवान को प्रकट कर दिया था व अपना सखा बना लिया था।

◆जब धन्ना थोड़े बड़े हुए तो उनके पिता ने उन्हें काशी में हिन्दू धर्म के सबसे बड़े संतों में से एक गुरु रामानन्द जी के पास पढ़ने के लिए भेज दिया था। वहां वे गुरु के प्रसिद्ध 14 प्रिय शिष्यों में से एक थे।

◆बाद में धन्ना बहुत बड़े सन्त के रूप में प्रसिद्ध हुए उन्होंने बहुत से भजन, शब्द, कीर्तन, कविताएं व वाणियों आदि की रचनाएं की।
उनकी वाणी को सिखो के गुरुग्रन्थ साहिब में भी जगह मिली है। उनकी रचनाओं में से तीन शब्द सिख ग्रन्थ में लिखे गए हैं।

◆धन्ना भगत जी ने अखंड भंडारे की भी शुरुआत की थी जिसमे राहगीरों व जरूरतमंदों को हमेशा भोजन मिलता था।

◆धन्ना जी ने #गंगेश्वर_मन्दिर का भी निर्माण करवाया था जिस पर उन्होंने अपने गरु रामानन्द जी के नाम के साथ सूचनापट्ट लगवाया था।

◆वे अरावली की पहाड़ियों में स्तिथ जिस शिव मन्दिर में वे पूजा करते थे वह मन्दिर आज भी मौजूद है।

◆धन्ना भगत जी हिन्दू स्वामी समाज के संस्थापक माने जाते हैं जो आज धन्नावंशी स्वामी संत जाति के रूप में जाना जाता है।

◆धन्ना जी की भक्ति के कई सारे चमत्कारिक घरेलू किस्से भी प्रसिद्ध हैं। धन्ना जी मूर्ति पूजक भी थे और निर्गुण भक्ति में भी माहिर हुए।

◆धन्ना जी महान संत, भक्त, कवि एवं गौभक्त थे।उन्होंने अनेक गौशालाओं की स्थापना की थी। धन्ना जी की वाणी आज भी दुनिया भर में अनेकों लोगो का मार्गदर्शन करती है।

◆ उनके गांव धुंआ कलां में उनका सुंदर विशाल मंदिर बना हुआ है। मन्दिर के पास ही धन्ना जी की नाडी है बताते है वहाँ हीरे मोती उपजे थे। चौरू गांव में भी उनका विशाल मंदिर है। उनके नाम से एक गुरुद्वारा भी बना हुआ है।

◆उनकी जयंती पर हर वर्ष मेला लगता है।

◆धन्ना जी के नाम से श्री धन्ना पीठ रामधाम आश्रम, तापड़िया भी बना हुआ है जहां हिन्दू सन्त उनकी भक्ति का गुणगान करते हैं।उनके गांव धुंआ कलां, जन्मस्थली चौरू गांव, गुजरात के धौला में उनके विशाल सुंदर मन्दिर हैं। हरियाणा राजस्थान उत्तर प्रदेश, पंजाब, दिल्ली व देश के अन्य हिस्सों में इसके अलावा भी धन्ना जी के नाम से बहुत से आश्रम व मन्दिर अलग अलग राज्यों में बने हुए हैं। कई शिक्षण संस्थान भी उनके नाम से बने हुए हैं। हिन्दू बैरागी समाज की एक शाखा स्वयं को गर्व से धन्नावंशी कहती है।

◆ श्रीमती वसुंधरा राजे सरकार में उनके नाम पर भगत श्री धन्ना भगत पैनोरमा बनवाया गया जिसमे उनकी विशाल व सुंदर नक्काशी की मूर्ति बनी हुई है।

◆ जहां भी हिन्दू संतों, भक्ति का जिक्र होता है वहां उनका नाम शिरोमणि संतों में लिया जाता है। लगभग सभी संतों पर लिखी पुस्तकों, विद्यालयों या महाविद्यालयों की पुस्तकों में जहाँ भी भक्ति एवं संतों का जिक्र है वहां धन्ना जी का नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखा हुआ है एवं पढ़ाया जाता है। हिन्दू जागरणों में उनके भजन बड़े चाव से गाये एवं सुने जाते हैं।

गोपाल तेरा आरता
गोपाल तेरा आरता ॥
जो जन तुमरी भगति करते
तिन के काज सवारता ॥१॥
दालि सीधा मागउ घीउ ॥
हमरा खुसी करै नित जीउ ॥
पन्हीआ छादनु नीका ॥
अनाजु मगउ सत सी का ॥।।
गऊ भैस मगउ लावेरी ॥
इक ताजनि तुरी चंगेरी ॥
घर की गीहनि चंगी ॥
जनु धन्ना लेवै मंगी।।।।

कई सौ बीघां को खेत जाट को, श्याम देवे पाणी रे,
बिना बाड़ को खेत जाट को, श्याम करै रुखाली रे।
कुण जाणे श्याम तेरी लीला अजब निराली रे,
त्रिलोकी को नाथ जाट घर बण गयो हाली रे।।

"भरतपुर के संस्थापक, शूरवीर योद्धा महाराजा सूरजमल जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।उनके साहस, न्याय और त्याग के आदर्श हम...
25/12/2025

"भरतपुर के संस्थापक, शूरवीर योद्धा महाराजा सूरजमल जी की पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन।

उनके साहस, न्याय और त्याग के आदर्श हमारे समाज के लिए सदैव प्रेरणा स्त्रोत बने रहेंगे।"

महापुरुष सबके होते हैं, मगर उनकी जाति होती हैं गर्व सबको होना चाहिए, उनके अच्छे कामो पर...86 साल पहले, सन् 1938 में सर छ...
28/11/2025

महापुरुष सबके होते हैं, मगर उनकी जाति होती हैं
गर्व सबको होना चाहिए, उनके अच्छे कामो पर...

86 साल पहले, सन् 1938 में सर छोटूराम ने पंजाब में किसानों के हित के लिए जो कानून बनाए थे, उन कानूनों को संयुक्त पंजाब के इतिहास के सुनहरे कानूनों के रूप में याद किया जाता है। उन चार कानूनों में से एक ”कृषि उत्पाद मंडी अधिनियम - 1938" को बचाने के लिए किसानों ने अभी एक साल तक आंदोलन चलाया ही था। उसी दौरान एक और कानून बनाया थे ”पंजाब बंधक भूमि बहाली अधिनियम - 1938”, जिसकी बुनियाद पर कुरुक्षेत्र जिले के माजरी कला और ठोल के एक किसान परिवार को 125 साल पहले गिरवी रखी गई जमीन वापिस मिली।

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी खेमका ने 1938 में सर छोटूराम द्वारा पेश किए गए एक कानून (पंजाब बंधक भूमि बहाली अधिनियम, 1938) का भी हवाला दिया। खेमका ने कहा, "यह ध्यान में रखना चाहिए कि 1938 का अधिनियम भूमि मालिकों को बंधक भूमि पर कब्ज़ा वापस दिलाने और किसानों को सूदखोरी से राहत प्रदान करने के लिए एक लाभकारी कृषि कानून है।"

सर छोटू राम द्वारा पेश किए गए कानून के बाद, किसानों को अपनी गिरवी रखी गई भूमि की बहाली के लिए केवल जिला कलेक्टर को एक आवेदन प्रस्तुत करना था। वर्तमान मामले में भी, मूल भूमि मालिक (बीरू) के उत्तराधिकारियों ने अक्टूबर 2018 में कलेक्टर (पेहोवा एसडीएम) के समक्ष भूमि की बहाली के लिए एक याचिका दायर की थी।

#जाट #छोटूराम

जाट एकता जिंदाबाद... आइये सब मिलकर इस आयोजन के माध्यम से मिलजुल कर आगे बढ़े, भाईचारे मे, व्यापार मे, राजनीती मे, समाज मे ...
09/11/2025

जाट एकता जिंदाबाद...

आइये सब मिलकर इस आयोजन के माध्यम से मिलजुल कर आगे बढ़े,
भाईचारे मे, व्यापार मे, राजनीती मे, समाज मे एकरूपता लाये...

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