उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच साहित्य एवं लोक-संस्कृति संगम

  • Home
  • India
  • Nainital
  • उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच साहित्य एवं लोक-संस्कृति संगम

उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच साहित्य एवं लोक-संस्कृति संगम उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच (साहित्य एवं लोक-संस्कृति संगम)

19/07/2026


*समय की मार और मनुष्य की परीक्षा*
(साहित्यिक सूक्ष्म लेख)- गिरीश त्रिपाठी ओम
समय सदा एक-सा नहीं रहता। जीवन में कुछ पड़ाव ऐस भी आते हैं।
”*याँ चुप रौला तौ लें कसक*,
*बोलला तो लें खटक*”।
यही समय की सबसे बड़ी परीक्षा है। ऐसे दौर में मनुष्य समझ ले कि समस्या उससे नहीं, बल्कि समय उससे धैर्य, विवेक और साहस माँग रहा है।
कुमाऊँ में एक सूक्ति छ:-
“*बखत बड़ बलवान*,
*मनुष्य त केवल मेहमान छ*”
अर्थात समय सबसे शक्तिशाली है, मनुष्य तो इस संसार का केवल यात्री/मेहमान है।आज का युग भी कुछ ऐसा ही है। यदि आप अन्याय देखकर मौन रहते हैं, तब भी परिस्थितियाँ आपको नहीं छोड़तीं और यदि सच बोलकर अन्याय का विरोध करते हैं, तब भी संघर्ष आपके सामने खड़ा मिलता है। इसलिए समस्या से बचना संभव नहीं, बल्कि उसका सामना करने का साहस ही जीवन का वास्तविक परिचय है।
हमारे बुजुर्ग कहा करते थे—
“*जैस बखत, तैसी चाल*,
*धीरज राख, मिलल हाल*”
अर्थात समय के अनुसार संयमित चलने वाला ही अंततः समाधान पाता है।
एक और कुमाऊँनी सूक्ति है—
“*घाम और पाणी सदा एक जस नि रौन*”
अर्थात धूप और वर्षा दोनों स्थायी नहीं होते। उसी प्रकार सुख-दुःख और कठिन समय भी सदैव नहीं रहते। इसलिए समय की मार से घबराने के बजाय उसे जीवन का शिक्षक मानना चाहिए। कठिन समय मनुष्य की पहचान कराता है—कौन अपना है, कौन पराया; कौन साथ निभाता है और कौन केवल अवसर का साथी है।
अंततः यही कहा जा सकता है—
“*बखतकी परीक्षा में धन नै*
*बल्कि धीरज काम औंछ*”
समय चाहे जितना कठोर क्यों न हो, यदि मन में सत्य, धैर्य और आत्मविश्वास जीवित है, तो हर अँधेरी रात के बाद नई भोर अवश्य आती है। यही जीवन का शाश्वत सत्य है- गिरीश त्रिपाठी ओम

14/07/2026

आयोजित काव्य गोष्ठी की संक्षिप्त आख्या/रिपोर्ट---

काव्य गोष्ठी " स्थापना दिवस "
(उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच )

उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच (साहित्य एवं लोक संस्कृति संगम)के तत्वाधान में मंच के स्थापना दिवस/प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर 'उत्तराखंड गौरव 'थीम आधारित काव्य गोष्ठी का आयोजन दिनांक13 जुलाई '26(सोमवार) को रात्रि 8:00बजे से 10:30बजे तक ऑनलाईन गूगल मीट पर किया गया.काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि श्री सुनील पाठक (अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय इतिहास एवं संस्कृति परिषद) जी मंचासीन रहे।मंच संस्थापिका हेमा आर्या 'शिल्पी ' जी सहित मंच अध्यक्ष/संरक्षक गिरीश तिवारी जी'ओम', उपाध्यक्ष हेम चंद्र जी, सलाहकार नीलम नेगी उपस्थित रहे, आमंत्रित रचनाकारों में उमा तिवारी,विनीता खाती,डॉ संतोष कुमार कांडपाल,हेमा जोशी' स्वाति', हेम चंद्र सक्लानी,मीना जोशी,रेनु बिष्ट,योगेश गहतोड़ी,पुष्पा नौटियाल,डॉ मुरली मनोहर भट्ट,सुरेश कुमार मनमौजी,डॉ सुमन पांडे,संगीता मीना सहित अन्य अनेक श्रोतागण उपस्थित रहे।गोष्ठी का सुंदर संचालन हेमा आर्या' ' शिल्पी' द्वारा किया गया...

* काव्य गोष्ठी चूँकि मंच के स्थापना दिवस पर 'उत्तराखंड गौरव ' विशेष थी अतः सभी के द्वारा उसी विषय से संबंधित रचनाएँ व गीत काव्य हिंदी गढ़वाली व कुमाउनी भाषाओं में प्रस्तुत किये।सिद्धि विनायक गणेश जी को प्रथम निमंत्रित करते हुए ,विद्यादायिनी माँ सरस्वती के वंदन तथा स्वागत गीत द्वारा अभिनंदन के साथ काव्य गोष्ठी का पारंपरिक शुभारंभ किया गया।

* मंच संचालन करते हुए हेमा आर्या जी ने सर्वप्रथम मंच के स्थापना दिवस की बधाई दी साथ ही अवगत कराया की 13 जुलाई 2025 को मंच की विधिवत स्थापना की गई थी,मंच की एक वर्ष की साहित्यिक यात्रा ,स्थापना के मौलिक उद्देश्य,वर्तमान प्रगति एवं भावी प्रयासों,योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सभी का स्वागत व आभार व्यक्त किया.यह भी अवगत कराया कि शीघ्र ही मंच द्वारा लोक भाषाओं कुमाउनी,गढ़वाली,जौनसारी पर आधारित एक साझा काव्य संग्रह उत्तराखंड त्रिवेणी ( विरासत के स्वर्णिम पृष्ठ) का प्रकाशन किया जा रहा है जिसके मुख पृष्ठ का गोष्ठी में विमोचन भी किया गया।

रेनू बिष्ट जी ने गढ़वाली भाषा में श्री गणेश की स्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया--
* गणपति गणेश पैलि त्वेकैं ही मनुलौं
दयाप्तों मां सबन पैलि पूजा तेरि करूँलौ..

उमा तिवारी जी द्वारा सरस्वती वंदना से गोष्ठी का पारंपरिक शुभारंभ हुआ --
* हे माँ सरस्वती जै जै जय हो माँ वंदन है अभिनंदन है माँ
आज हमारे आंगन में माँ शुभ दिन सुंदर आया है
आकर के इस पावन दिन को वीणा से झंकृत कर दो माँ..

हेमा आर्या जी द्वारा स्वागत गीत द्वारा सभी आमंत्रित अतिथियों व उपस्थित रचनाकारों का औपचरिक स्वागत अभिनंदन किया ---
* हो गया है प्रफुल्लित पटल आज ये
आ गई है घडी मधुर मंगलम्, कर रहे हैं आपका
स्वागतम् स्वागतम्....

* मुख्य अतिथि सुनील पाठक जी ने सभी मंच सदस्यों को स्थापना दिवस की बधाई व शुभकामनाएं प्रेषित की तथा अपने प्रबुद्ध संबोधन में उत्तराखंड देवभूमि का वैदिक/अनादि काल से हिमालय से संबंध होने की बात कही,जिसे देवों ने अपना निवास बनाया उन्होंने उत्तराखंड के साहित्यिक,सांस्कृतिक,ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व् व योगदान पर ज्ञानवर्धक चर्चा की।ऐसी देवभूमि जहाँ स्वामी विवेकानंद जी जैसे महान पुरुष को समाधिस्थ होने का अनुभव हुआ,जहाँ बद्री केदार,गंगोत्री,जमुनोत्री जैसे परम धाम स्थित हैं,विश्व के सबसे बड़े साहित्यिक /धार्मिक अवदान/योगदान (ग्रंथ महाभारत रचना)की विषय वस्तु हिमालयी क्षेत्रों की रही है, कालिदास जी द्वारा भी हिमालय का वर्णन किया गया है।साहित्यिक क्षेत्र में उन्होंने शैलेश मटियानी जी,सुमित्रानंदन पंत जी,शिवानी आदि अन्य अनेक विश्व प्रसिद्ध साहित्यकारों के व्यक्तितव्/कृतित्व का संबंध भी उत्तराखंड से होने को संदर्भित किया।उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का अपना एक समृद्ध इतिहास है ,अंत में "कवियों को सुनना अपने आप में एक आनंद होता है' वक्तव्य के साथ उन्होंने सभी प्रस्तुत रचनाओं की प्रशंसा की व मंच के पल्लवित पुष्पित होने की शुभेच्छा की ..

* अंत में मंच संस्थापिका हेमा आर्या 'शिल्पी' जी ने कार्यक्रम से जुड़ने व अपना अमूल्य समय देने हेतु मुख्य अतिथि व सभी उपस्थित रचनाकारों का धन्यवाद ज्ञापित किया.भविष्य में भी मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में अपनी सतत /सक्रिय सहभागिता हेतु अनुरोध व उत्तराखंड के लोक पर्व 'हरेले' की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ अपना काव्य प्रस्तुत किया के समापन की औपचारिक घोषणा की...

👉 कुछ सुंदर भजनों व काव्यपाठ की झलकियाँ---
(मुखड़ा पंक्तियाँ )

* हिम किरीट में देवों का यह भव्य स्वरूप
कल कल करती सरिताएं बहती....
उत्तराखंड के वीर बांकुरे करते रण में हुन्कार्
जय जय जय उत्तराखंड.....
--- हेमा जोशी 'स्वाति'

* सदा भवानी दायिनी गौरी पूज्य गणेश
रक्षा कीजो तीनों देवा ब्रह्मा विष्णु महेश...

* धन्य मेरि जनमभूमि धन्य छ गढ़वाल
यक्खि मेरि देवभूमि.....
-- पुष्पा नौटियाल

* जहाँ हिम से मंडित शिखरों की पर्वत मालाएं हैं
सब सरिताओं की बहती निर्मल धाराएं हैं
जहाँ बुग्यालों में धरती माँ का अभिनंदन होता है
चरणों में जहाँ मधुर स्वरों में गुंजन होता है....
-- हेम चंद्र सक्लानी

* आया जैसे ही महीना जून मिलता सबको यहाँ सुकून
नौनिहाल की किलकारी सबकी आवाज पर होती भारी...
--- डॉ संतोष कुमार कांडपाल

* जहाँ चमड़े की जूतियों के साथ उभरे होते थे
आज टेढ़ी पगडंडियों पर कदमों के निशान किंतु
आज पगडंडी मेढों के कच्चे रास्तों से होकर वो सफर
सड़क से गुजरता है...
-- संगीता मीना

* मानव जीवन जहाँ हिमालय मौन खड़ा है
पर्वतीय होना सरल नहीं तपना पड़ता रोज
प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर मेरा शुभ वंदन...
--- योगेश गहतोड़ी

* हरी भरी वादियों में बसा है मेरा सुंदर सा चंपावत शहर
नमन वंदन है उस मातृभूमि को मेरी जिसमे निवास है गोल्यू देव का..
-- बीना जोशी

* विचरण करते जहाँ मस्ती में पशु पक्षी सुबह और शाम
बिछ जाती धरती माँ पर हरी भरी चादर वन ही तो है इसका नाम..
--- सुरेश कुमार' मनमौजी'

* धन्य धन्य है मेरी उत्तराखंड की नारी तू कभी न हारी
तूने बंजर खेत उपजाए पशुपालन तूने ही पनपाये
वन जंगल तूने ही बचाये हर कार्य पहाड़ों में तूने ही निभाए...
-- डॉ विनीता खाती

* उत्तराखंड की पावन धरती जन जन की है बाधा हरती
वीरों की यह कर्मभूमि है हर घर में है शहीद यहाँ
त्याग और तपस्या बसते हैं घर घर में यहाँ....
-- उमा तिवारी

* सुनो कविता कुछ कहती है कहती हूँ कि
मै जैसा चाहती थी उत्तराखंड वैसा बन तो नहीं पाया
तूने मेरे घिंगारू, किल्मोड़ी, बुरांश काफल
विकास के नाम पर सबको काट डाला....
-- डॉ सुमन पांडे

* चौमास्, ईजा आज तो यो डांण काण हौल में छुप गए
रात भर बारिश के बाद आज तो द्वि कदम लै नि दिखि रौ...
--- गिरीश त्रिपाठी 'ओम'

* उत्तराखंड मै रूणी छां हम पहाड़ म दरबार छू
कुमाऊ छु हमरि जनमभूमि और हमर घरबार
लोग कुनि कुमैया और पहाड़ि हमरि पछ्याण छू
यां हुनि हमर सपन साकार योई हमरि मातृभूमि छू...
--- नीलम नेगी

* वीरों की अमर गाथाओं और स्वाभिमान लिखिये
देवभूमि की लोक परंपराओं का बखान लिखिये...
-- हेमा आर्या' शिल्पी'

फोटो संकलन /आख्या/ रिपोर्ट प्रस्तुति -- नीलम नेगी

सम्मानित रचनाकारों को हार्दिक बधाइयाँ 💐🎉
07/04/2026

सम्मानित रचनाकारों को हार्दिक बधाइयाँ 💐🎉

सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ 🌹💐
30/03/2026

सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ 🌹💐

सभी सम्मानित रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🌼🙏☘️
25/03/2026

सभी सम्मानित रचनाकारों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं 🌼🙏☘️

24/03/2026

मंच द्वारा 24 मार्च (मंगलवार) कोआयोजित भजन संध्या की संक्षिप्त आख्या/रिपोर्ट----

काव्य गोष्ठी " माता का जगराता "
(उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच )

उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच (साहित्य एवं लोक संस्कृति संगम)के तत्वाधान में नवरात्रि के अवसर पर माता का जगराता कार्यक्रम अंतर्गत भजन संध्या का आयोजन दिनांक 24मार्च (मंगलवार) छठी नवरात्रि (माँ कात्यायिनी स्वरुप) को रात्रि 8:00बजे से 10:00बजे तक ऑनलाईन गूगल मीट पर किया गया.काव्य गोष्ठी में मंच संस्थापिका हेमा आर्या 'शिल्पी ' जी सहित मंच अध्यक्ष गिरीश तिवारी जी 'ओम',उपाध्यक्ष हेम चंद्र जी, नीलम नेगी,ममता गुसाईं उपस्थित रहे.आमंत्रित रचनाकारों में उमा तिवारी, मुन्नी पांडे, विनीता खाती, आशा बुटौला, विनीता सामंत, कला गोस्वामी, हेमलता बहुगुणा, बीना जोशी, ममता वैला थे जिनके अतिरिक्त जानकी त्रिपाठी,हेमा जोशी 'स्वाति 'आदि ने नवदुर्गा भजन/काव्यपाठ एवं अन्य अनेक रचनाकारों ने श्रोता रूप में प्रतिभाग कर गोष्ठी को भक्तिमय भव्यता प्रदान की.भजन संध्या का सुंदर संचालन सुप्रसिद्ध कवि हेम चंद्र 'हेम 'जी द्वारा किया गया...

* काव्य गोष्ठी चूँकि नवरात्रि विशेष थी अतः सिद्धि विनायक गणेश जी को प्रथम निमंत्रित करते हुए तथा सर्व शक्तिमान ईश्वर/सर्व स्वरूपा माँ दुर्गा को सर्वोच्च शक्ति व शीर्ष स्थान की मान्यता प्रदान करते हुए प्रतीकात्मक रूप से माता को ही अध्यक्ष,मुख्य अतिथि,विशिष्ट अतिथि स्वरुप में सुशोभित किया गया.

* मंच संचालन करते हुए हेम चंद्र जी ने सर्वप्रथम नवरात्रि व आस्था/श्रद्धा की प्रतीक माता के नौ रूपों विशेष रूप से आज छठे स्वरुप माँ कात्यायिनी रुप की धार्मिक अवधारणा को प्रकाशित किया उन्होंने भजन संध्या को सुंदर सजाने हेतु सभी का स्वागत व आभार व्यक्त किया. उन्होंने माता हमारी लेखनी को और समृद्ध करे इसी उद्देश्य व भावना से भजनों की भक्तिमय काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया है.
हेमा आर्या 'शिल्पी 'जी ने श्री गणेश की स्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया--

* करूँ पहले तुम्हें वंदन त्रिलोकीनाथ के नंदन
सुनो गणपति विनय मेरी करूँ नित अर्चना तेरी...

ममता गुसाईं जी द्वारा सरस्वती वंदना से गोष्ठी का पारंपरिक शुभारंभ हुआ --
* ॐ सरस्वती नमो नमः माँ सरस्वती नमो नमः
जानकी देवी नमो नमः हँस वाहिनी नमो नमः..

*तेरि वंदना करुंला तेरा ध्यान धरूँला
दैणी ह्वे जा माँ सरस्वती तू दैणी है जा...

* मंच अध्यक्ष गिरीश त्रिपाठी'ओम'जी ने नवरात्रि के साथ हिन्दू नव वर्ष 2083 'रौद्र' नाम नव संवत्सर की बधाई व हार्दिक शुभकामनायें दीं, वार्षिक पंचांग अनुसार चूँकि इस वर्ष रौद्र नाम संवत्सर है, सभी को पूरे वर्ष स्वयं को धैर्य व संयम का पालन करने हेतु आह्वान किया,उन्होंने बद्री विशाल,बाबा केदार व माँ दुर्गा के सभी रूपों को नमन करते हुए सभी जनों को शुभ फल प्राप्ति की शुभेच्छा की तथा सभी प्रस्तुत भजनों की संक्षिप्त समीक्षा व भूरि भूरि प्रशंसा की..

* अंत में मंच संस्थापिका हेमा आर्या 'शिल्पी' जी ने नवरात्रि की व्यस्तताओं के मध्य भी कार्यक्रम से जुड़ने व अपना अमूल्य समय देने हेतु सभी उपस्थित रचनाकारों का धन्यवाद ज्ञापित किया.भविष्य में भी मंच द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में अपनी सतत /सक्रिय सहभागिता हेतु अनुरोध व नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ अपना भजन प्रस्तुत किया तथा भजन संध्या के समापन की औपचारिक घोषणा की...

👉 कुछ सुंदर भजनों व काव्यपाठ की झलकियाँ---
(मुखड़ा पंक्तियाँ )

* शेर पे सवार माता मोहक रूप सजाये
ओढ़े चुनरी लाल पैर में पायलिया छनकाये
करती भक्तों पर उपकार भव सागर से करती पार...
-- आशा बुटौला

* फूलों से सजा है तेरा भवन माँ दियों से जगमग तेरा भवन में
मैं आई माँ तेरे भवन में दर्शन मैं करने आई तेरे भवन में...
--- कला गोस्वामी

* दुर्गति नाशिनी काल विनाशिनी
जगत जननी जय जय हे अम्बे
दैत्य विमर्दिनी भव भय हारिणी
जगत जननी जय जय हे अम्बे....
--- मुन्नी पांडे

* ऊँचे ऊँचे पर्वत ऊँची चोटियां हरे भरे
कि मैया जी का भवन निराला कि भागों वाला
दरश करे नसीबों वाला....
--- बीना जोशी

* ऐ जाणी माँ ऐ जाणी म्यरा भजन माँ ऐ जाणी दर्शन दि जाणी
त्यर नों कि जगराता घर मां करोलूं भक्तों कै बुलोंलू
भक्ति मां ऐ जाणी दर्शन दि जाणी....
--- हेमलता बहुगुणा

* म्यरा मन मां बसीनो म्यरा तन मां बसीगे
मेरि भगवती भवानी कण कण मां बसीगे..
--- विनीता सामंत

* तू दुर्गा तू ही काली महिमा तेरी अपार
हे जग जननी महामाया आयाँ तेरे द्वार
जै मैया दुर्गा भवानी जय मैया.....
--- ममता वैला

* आने से उसके आये बाहर जाने से उसके जाये बहार
बड़ी ही दयालु है मेरी शेरों वाली जग से निराली है मेरी...
--- जानकी त्रिपाठी

* बहार जगदम्बे द्वारे पे आई बहार
बहार महारानी द्वारे पे.....
मैया तेरे द्वार में तो बेला भी लाई चमेली भी लाई
गेंदा भी लाई लालों लाल बहार जगदम्बे....
--- हेमा जोशी'स्वाति'

* आगामी रामनवमी के शुभ अवसर पर अपनी नव विमोचित पुस्तक'रम्माण'( रामायण का अपभ्रश शब्द)से कुछ अंशों का वाचन किया..
--- हेम चंद्र'हेम'

* मैया हमको शक्ति देना मन पावन करें
तेरी भक्ति में रहें सच्चाई की राह चलें
तेरे चरणों की छाया में जीवन सफल करें
मैया हमको.....
-- डॉ. विनीता खाती

* अब मैंने तुझे पहचान लिया भगवान तुम्हारी जय होवे
दीनानाथ तुम्हारी जय होवे
कैलाश में शिवजी का नाम रहे जय गणपति जी की जय होवे
गौरा मैया तुम्हारी जय होवे.....
--- उमा तिवारी

* चौकी लगाओ रे आँगन सजाओ रे
मैया के पावन चरण घर आये हैँ...
--- ममता गुसाईं

* जै मैया जगदम्बे भवानी जै मैया
तेरी महिमा हम सबको...
तेरो चरणों मैं शीश झूकुंला....
-- गिरीश त्रिपाठी 'ओम'

* जै जै मैया वे मेरि जै भवानी मैया भगवती मेरि सिंह वाहिनी
शंख चक्र गदा त्रिशूल धारिणी
ऊँचा डाना बसी रै मेरि पहाड़ वासिनी....
-- हेमा आर्या'शिल्पी'

* फोटो संकलन /आख्या/ रिपोर्ट प्रस्तुति -- नीलम नेगी

होली विशेष काव्य गोष्ठी की उत्कृष्ट प्रस्तुति हेतु प्रमाण पत्र आप सभी को होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ
01/03/2026

होली विशेष काव्य गोष्ठी की उत्कृष्ट प्रस्तुति हेतु प्रमाण पत्र आप सभी को होली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाइयाँ

चित्र आधारित उत्कृष्ट लेखन ✍️ हेतु आप सभी के प्रमाण पत्र सादर प्रेषित हैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 👏
25/01/2026

चित्र आधारित उत्कृष्ट लेखन ✍️ हेतु आप सभी के प्रमाण पत्र सादर प्रेषित हैं सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ 👏

लेखन ✍️ गतिविधि हेतु प्रमाण पत्र हमारे page से प्राप्त किए जा सकते हैं आप सभी को हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ ...
09/01/2026

लेखन ✍️ गतिविधि हेतु प्रमाण पत्र हमारे page से प्राप्त किए जा सकते हैं आप सभी को हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ 🙏

कण्वाश्रम विषय पर आयोजित लेखन ✍️ गतिविधि में उत्कृष्ट भाव एवं सहभागिता हेतु आप सभी का आभार 🙏 उक्त हेतु आप सभी के प्रमाण ...
02/01/2026

कण्वाश्रम विषय पर आयोजित लेखन ✍️ गतिविधि में उत्कृष्ट भाव एवं सहभागिता हेतु आप सभी का आभार 🙏 उक्त हेतु आप सभी के प्रमाण पत्र हमारे facebook पेज में उपलब्ध हैं

Address

Nainital

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when उत्तराखंड पर्वतीय रचनाकार मंच साहित्य एवं लोक-संस्कृति संगम posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share