05/02/2026
Matthew 23:23
[23]हे कपटी शास्त्रियों, और फरीसियों, तुम पर हाय; तुम पोदीने और सौंफ और जीरे का दसवां अंश देते हो, परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को अर्थात न्याय, और दया, और विश्वास को छोड़ दिया है; चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते, और उन्हें भी न छोड़ते।
Woe unto you, scribes and Pharisees, hypocrites! for ye pay tithe of mint and anise and cu**in, and have omitted the weightier matters of the law, judgment, mercy, and faith: these ought ye to have done, and not to leave the other undone.
1️⃣ यीशु क्या नहीं नकार रहे हैं?
यीशु दशमांश / Tithe) को गलत नहीं कह रहे।
“चाहिये था कि इन्हें भी करते रहते…”
➡️ इसका अर्थ:
धार्मिक नियमों का पालन करना गलत नहीं है।
दशमांश देना, सेवा करना, नियम मानना — ये सब ठीक हैं।
प्रमाण पद:
👉 मलाकी 3:10
👉 लूका 11:42
2️⃣ असली समस्या क्या थी?
यीशु कहते हैं: “परन्तु तुम ने व्यवस्था की गम्भीर बातों को छोड़ दिया है”
ये गम्भीर बातें हैं:
🔹 न्याय (Justice)
🔹 दया (Mercy)
🔹 विश्वास (Faithfulness)
➡️ फरीसी बाहर से बहुत धार्मिक थे
➡️ लेकिन उनके दिल में:
अन्याय था
निर्दयता थी
सच्चा विश्वास नहीं था
3️⃣ बाइबिलीय आज्ञाकारिता का प्रमाण (Biblical Evidence)
✔️ (A) न्याय – परमेश्वर की माँग
👉 मीका 6:8 “हे मनुष्य, उसने तुझे बता दिया है कि क्या अच्छा है…
न्याय से काम करना, दया से प्रेम रखना…”
➡️ सिर्फ धार्मिक कर्म नहीं, न्यायपूर्ण जीवन चाहिए।
(B) दया – बलिदान से बढ़कर
👉 होशे 6:6 “मैं बलिदान से नहीं, दया से प्रसन्न होता हूँ”
👉 मत्ती 9:13 – यीशु ने स्वयं यही पद दोहराया।
✔️ (C) विश्वास – दिल की सच्चाई
👉 इब्रानियों 11:6 “विश्वास बिना परमेश्वर को प्रसन्न करना असम्भव है”
➡️ नियम : बिना विश्वास के केवल खोखला धर्म है।
4️⃣ यीशु का संतुलन (Balance)
यह पद हमें संतुलित आज्ञाकारिता सिखाता है:
✝️ “इन्हें भी करते रहते और उन्हें भी न छोड़ते”
अर्थात:
बाहरी धार्मिकता ✔️
भीतरी धार्मिकता ✔️
दोनों ज़रूरी हैं।
🔥 निष्कर्ष (Conclusion)
मत्ती 23:23 का बाइबिलीय प्रमाण यह है कि:
📌 सच्ची आज्ञाकारिता =
➡️ नियम + न्याय
➡️ धर्म + दया
➡️ कर्म + विश्वास
❌ केवल दशमांश = अधूरी आज्ञाकारिता
❌ केवल नियम = कपट
✅ दिल बदला हुआ + जीवन बदला हुआ = परमेश्वर को प्रसन्न करता है
मती अर्थात मुझे यह लगता है जैसा हमारा बुलाने वाला परमेश्वर पवित्र है वैसा ही हम भी सारे चाल चलन में पवित्र बने
मत्ती 5:48 Therefore you must be perfect, as your heavenly Father is perfect.
इसलिए चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्वर्गीय पिता सिद्ध है।(लैव्य. 19:2)
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