Voice Of Democracy

Voice Of Democracy An initiative started by Mr. Tapas Bose to speak and act against any kind of unethical approach related to needs of the Indian population.

06/11/2024

'डरा हुया अमीर शासक "रक्षा कवच रूपी न्याय मंदिरों" को कंटीले तारों से घेरना शुरू कर दिया है '
लगता है जनता जाग चुकी है
🙏🙏🙏

06/11/2024

1975 से जमीन घोटाला और 1996 से शिक्षा घोटाला फैलते ही धीरे धीरे मिडिल क्लास गायब होने लगे , इसे कहते हैं --
'The defeat of moral'
🙏🙏🙏

06/11/2024

1923 मे जब पानी के दो जहाजों मे भर भर कर मार्क्स और लेनिन को भारत में लाया गया था उस वक़्त colonial rule के खिलाफ लामबंद होकर संघर्ष जायज था ! " The Trade Union Act , 1923 " के तहत संघर्ष में लाखों की संख्या में लोग जुड़ते गये ,यह अब इतिहास के पन्नों की बातेँ ही रहेगी !
स्वतंत्र ( so called ) भारत में people's rule के मद्देनजर देश के कोने कोने से जुटे विद्वानों ने लगभग साढ़े तीन साल के মাথা पच्ची कर " गणतंत्र " के नियंत्रक रूपी " भारतीय संविधान "की सार्वभौमिक क्षमता निहित शासन की शुरुवात शपथ विधि के साथ किये थे जिसे pro capitalism के चलते मुह की खानी पड़ी , यह भी अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है जो इस देश के सर्वहारा वर्ग के दुर्भाग्य को दर्शाता है !
यूनियन activities को अगर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(c) के सहायता मिली होती तो शायद आज के बुरे दिन देखना नहीं पढ़ता 😢😢😢😢

05/11/2024

कौन बोल रहा यह महत्व का नहीं लेकिन 'क्या बोला जा रहा है वो महत्व का है'
जिन्हें लगता है कि CJI has failed to deliver .......
वे कृपया farewell मे न जाय
🙏🙏🙏

03/11/2024

" मानो या न मानो"
2022 के बाद से भारत सरकार के मैनेजर रूपी प्राइम मिनिस्टर के पास 'वीटो पावर ' आ चुकी है
अब चुनाव औपचारिक है
( Transfer of power )

25/10/2024

Believe it or not
Top Judiciary is bound to protect & defend the dictate of PMO following the secrecy of an agreement dealing with the Transfer of power from British Raj to India Govt .

20/10/2024

दोस्तों ,

सोशल मीडिया के ज़माने में भी पत्रकारों और राजनैतिक दलों के नेताओं द्वारा आसानी से झूठ परोसा जा रहा है ! जब से देश स्वतंत्र हुया तब से लेकर आज तक Midea देश के आम जनता के सामने सच्चाई आने नहीं दिये !
हद तो तब दिखी जब नेताओं ने "भारतीय संविधान " को लेकर राजनीति पर उतर आया है !
यह सच छुपी नहीं है कि अंग्रेजों ने हमे देश चलाने के लिए शर्तों पर स्वतन्त्रता दिये थे ! हमने स्वतन्त्रता को आजादी मे बदलने के लिये अपना कानून बनाये जिसमें ब्रिटिशों द्वारा बनाये गये सभी नियम व कानून को निरस्त किए थे "भारतीय संविधान के अनुच्छेद 395 के प्रावधानों के जरिये" ! जिन्होंने 1951 से लगातार संविधान के असर को कम करते हुये चले और 1985 मे असंवैधानिक संशोधन के जरिये we ,the people के अस्तित्व को अस्वीकार कर दसवीं शेड्यूल लेकर आये और बाद में मौका देखकर 2007 मे राजनैतिक राष्ट्रपति लाने मे कामयाब हो गए ! आज वही दलों ने "भारतीय संविधान " हाथ में थाम लिये हैं जैसे कि जनता बेवकूफ़ ही है और उनकी क्या औकात ?
यह नेता लोग अगर सही मे देशभक्ति का परिचय देते हुए संविधान हाथ में थाम CEC के खिलाफ Fraud on Power के शिकायत पुलिस स्टेशन में करते हुए संविधान के अनुच्छेद 61 के उपयोग से राष्ट्रपति पर प्रहार करते तो शायद केंचुआ को सबक के साथ साथ गणतंत्र की बहाली की दिशा में देश बढ़ सकता है !
लेकिन , अफसोस यह हो न पायेगा
यह दुर्भाग्य है आज का दौर का
😥😥😥😥😥

17/10/2024

भाऊ
बीमार देश के समाज नंगे दुर्योधन के कब्जे में है और गांधारी माई ने आंखों के पट्टी खोल ली है तो क्या अब दिग्गजों द्वारा दुर्योधन के टांग तोड़ना असंभव हो जायेगा ? 😭😭😭

16/10/2024

आज का सवाल

" क्या हम शान्तिप्रिय नागरिक मुर्ख हैं ? "

शहीदों की त्याग और बलिदान के चलते जो (स्वतंत्र) भारत हमे मिला क्या वो यही देश है ?
सवाल तो बनता है

"आज का भारत" राजाओं के भारत मे तब्दील हो चुकी है ! गणतंत्र यहां दिखावा और गणतंत्र के नियंत्रक रूपी "भारतीय संविधान " छल बना हुया है !
हरियाणा में चुनाव हुयी ,गडबड़ी हुयी - गडबडी पकडी भी गई लेकिन शिकायतों के निपटारे के लिए न्यायपालिका गहरी नींद में जा चुकी है ! राजा ने जो कहा सो आपको सुनना होगा ! राजा जिसे कहा उसीका ताजपोशी तय होगा किन्तु परंतु की जगह नहीं बची है 😥😥😥
महाराष्ट्र भी इसी तरह की कहानी दोहराने जा रही है ! ढाई साल से अवैध सरकार चली आ रही है न्यायपालिका के मदत से यह बात छुपी नहीं है !
पारंपरिक राजनीति के चाटुकार पत्रकारों के फौज अब तैनात हो चुका है " झूठी आजादी और झूठा गणतंत्र " परोसने के लिए जो वे बखूबी 1947 से निभाते आ रहे हैं !

हम मुर्ख नहीं है ---

दोस्तों , एक बहोत पुरानी कहावत है --
" A little compromise of today may become a big borrower for tomorrow "
दरअसल यही कहावत बार बार साबित हो रही है ईन दिनों जब से बीजेपी सत्ता में आई -
"Transfer of power के secret agreement के " चलते स्वतंत्र भारत के सभी प्रतिष्ठानों ( न्याय पालिका समेत ) PMO के अधीन चलायी जा रही है ! किसी को भी बगावत करने की भारी कीमत चुकानी पढ़ सकती है इसका डर संस्थानों को लगी रहती है !
पहला जनवरी 1948 के GATT करार पर हस्ताक्षर और 1951 मे अमीरों के सम्पत्ति की रक्षा हितार्थ लोकसभा और राज्यसभा के अनुपस्थिति को दरकिनार करते हुए संविधान संशोधन इसी बात की पुष्टि कर रही है !

जम्मू कश्मीर अगर बीजेपी के हाथ से निकल जाय तो अनुच्छेद 370 को कोई फर्क़ नहीं पढ़ेगा लेकिन अगर बीजेपी हरियाणा हार जाय तो मोदी शासन को बहोत ज्यादा फर्क़ पढ़ेगा इसलिए यह नतीज़ा दिखाया जा रहा है !
देश के तजुर्बे कार पत्रकारों समेत राजनैतिक दलों के भक्तों गण जितनी जल्द इस सच्चाई को अपना ले उतनी ही अच्छा है इस देश और भारतीय संविधान के लिये !

इसलिए , जनता को एक ही मांग को लेकर सड़क पर उतरना होगा -- Demand for White Paper on secret agreement

🙏🙏🙏

15/10/2024

"Transfer of power from British Raj to India Govt के secret agreement के दम पर PMO के dictation से भारत के शासन चला रही है 1947 से "
" white paper की demand "
"एकला चलो रे "

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Nagpur
440009

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