Mayur Mayo

Mayur Mayo दुनिया बनाने वाले ने ,दुनिया को चलाने के नियम भी बनाए हैं। उन पर चलना ही ईमान है।

समंदर में उतरे भारत के 7 युद्धपोत...ईरान के जबड़े से छीने 22 जहाज़यूट्यूब चैनल खोलकर बैठे नेताओं के सिचुएशन रूम में हंगा...
30/03/2026

समंदर में उतरे भारत के 7 युद्धपोत...
ईरान के जबड़े से छीने 22 जहाज़

यूट्यूब चैनल खोलकर बैठे नेताओं के सिचुएशन रूम में हंगामा मच गया। अब तक वे सोच रहे थे कि भूम-भाम का इंटरनेशनल टूर्नामेंट, केवल ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच है।

जिसमें अंपायर - दलाल देश पाकिस्तान बना है।
पर यहां तो डियर फ्रेंड ने झपट्टा मार दिया।
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पांच देशों के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री थर्रा गए। हॉटलाइन पर फोन घुमाया- कहने को कि भाई, किधर से खेल रहे हो??

फोन देर तक बजता रहा।

फिर आवाज आई- “जिस कस्टमर से आप संपर्क करना चाहते हैं, वह फिलहाल Rally में व्यस्त है।

कृपया थोड़ी देर बाद डायल करें...”
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आधा घंटा बाद कॉल किया।

जवाब आया- “जे कस्टमर-एर साते आपनी जोगाजोग कोरते चान, तिनि एखोन Rally ते ब्यस्त आछेन।

अनुगृह कोरे एक्टु परे डायल कोरबेन।
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दो घंटे बाद - जे कस्टमर-उमायी निंगल संपर्कम नटत्तुवान उद्देशिच्चिरिक्कुनु, अवर इप्पोल Rally-यिल व्यस्तन आन।

दयवायि ओरु मुहूर्त्तम कजिञ्ञु पिन् डायल चेय्युका
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राष्ट्राध्यक्षों ने सर पीट लिया।
बहरहाल,चार दिन बाद बात हुई।

ट्रंप घिघियाते हुए बोले — “भाई, भाई, भाई!!! एक बार फोन तो उठा लो यार... हमारी शिप्स कहाँ हैं?”

डिग्रिधर जी ने शांत स्वर में बोले - “मित्रों, चिंता मत करो। हमारे 7 युद्धपोत समंदर में उतर चुके हैं। ईरान के जबड़े से 22 जहाज़ छीन लिए हैं। अब तुम लोग चाय पी लो।

ट्रंप की कॉफी कपड़ों पर उलट गई।
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नेतन्याहू बीच मे कूदा- “भाई, ईरान के जबड़े इतने चौड़े कैसे हो गए? पहले मिसाइल भेजता था, अब पूरा फ्लीट ही निगल रहा है??

और ये खामोश स्ट्राइक क्या बला है?

अगर स्ट्राइक खामोश है तो चैनल इतने जोर-जोर से क्यों चिल्ला रहे हैं? खामोश स्ट्राइक का भी लाइव कमेंट्री होता है क्या?
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फादरलैंड को चिंता देख सनलैंड से रहा न गया।
बोले- फादरश्री। लोड न लें।

कोई युद्धपोत नहीं उतरा। कोई जहाज़ कैप्चर नहीं हुए। यहां तो हमारे जहाज़ खुद फंसे हुए हैं। बात ये है कि जब भी मेरे देश में कोई बड़ी समस्या होती है.

तो हमारे पालतू चैनल तुरंत ‘ राग-मास्टरस्ट्रोक’ अलापने लगते हैं। खबर में न तारीख होती है, न कोई सबूत, न कन्फर्मेशन।

वीडियो गेम की फुटेज चला-चला कर व्यूज काटते हैं।
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ट्रंप ठठाकर हंस पड़े।

उन्हें याद आया कि अमेरिका में भी ऐसे ही चैनल चल रहे हैं। लेकिन फर्क यह कि वहाँ तमाम गप्प खुद उन्हें ही हांकनी पड़ती हैं। और यहां सरकार की तरफ से गप्प मारने का ठेका, एंकरों ने उठा रखा है।

उन्होंने विश्वगुरु से यह सबक सीखा
और उपयोग का प्रण लिया।

नेतन्याहू भी, जो अभी तक किसी ईरानी लाश पर बैठकर उसके जबड़े की चौड़ाई नाप रहे थे- रिलैक्स हो गए। महामानव ने मुस्कुराकर कहा- “मित्रों, सब चंगा सी।

तुम लोग इंडिया के चैनल सारे लाइक और सब्सक्राइब करके घंटी बटन दबा देना। लेकिन खबरों पर यकीन मत करना। अब अगर तुम लोगों की चुल्ल मिट गई हो..

तो मैं रैली में चला...
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फोन कट गया।

भारत भर के गैस की समस्या से परेशान लोग फोन लगा रहे थे। जवाब में सुनाई दे रहा था - नींगल तोडरबु कोल्ल विरुम्बुम महामनिदरुदन तोडरबु कोल्ल निंगल विरुम्बुगिरिरगल,

अवर इप्पोल Rally-यिल बिसियाग इरुक्किरार।
दयवु सैदु चिरिदु नेरम कजित्तु डायल सैयुंगल।

30/03/2026

STOP NUCLEAR WAR एक संयुक्त राष्ट्र UNITED NATION से जुड़े अधिकारी मोहम्मद सफा की चेतावनी।—
UN ईरान 🇮🇷 में संभावित परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है।

उन्होंने अपने X ,Account पर लिखा मैं इसलिए अपना कैरियर छोड़ रहा हूं।

उन्होंने लोगों से सड़कों पर आने की अपील की
ताकि इंसानियत को बचाया जा सके।

यूनाइटेड नेशन में काम करने वाले मोहम्मद सफा मुझे नहीं लगता कि लोग इस स्थिति की गंभीरता को समझ पा रहे हैं।

“तेहरान कोई खाली रेगिस्तान नहीं है…
यह लगभग "1 करोड़" लोगों का शहर है—जहाँ बच्चे हैं, परिवार हैं, सपने हैं, और रोज़ मेहनत करने वाले आम लोग रहते हैं।”

सिर्फ़ एक देश नहीं, पूरी इंसानियत के लिए खतरा है।
ज़रा कल्पना कीजिए।—
अगर वाशिंगटन, लंदन, पेरिस या बर्लिन पर परमाणु हमला हो जाए…
तो क्या बचेगा.?

युद्ध चाहना बहादुरी नहीं,
बल्कि एक खतरनाक सोच है।
बताया गया कि इस सच्चाई को सामने लाने के लिए उन्होंने अपना कूटनीतिक करियर तक छोड़ दिया।—

ताकि वे इंसानियत के खिलाफ़ किसी अपराध का हिस्सा न बनें,
और ‘Nuclear Winter’ जैसी तबाही को रोका जा सके।

कल अमेरिका में लाखों लोगों ने “No Kings” के नारे के साथ सड़कों पर उतरकर विरोध किया—
ये सिर्फ़ राजनीति नहीं, इंसानियत की आवाज़ है।

“खामोशी अब विकल्प नहीं है…
इतिहास गवाह होगा कि हमने क्या चुना—जंग या इंसानियत।”
🌍 🇺🇸 🇮🇷

28/03/2026

दिन पहले (24 मार्च) ट्रंप ने मोदी को कॉल किया था. हमें बताया गया कि दोनों नेताओं के बीच ईरान को लेकर बात हुई.

लेकिन अब 'न्यूयॉर्क टाइम्स' कि खबर में बताया गया कि उस कॉल पर एलन मस्क भी थे.

ये अजीब है -

• दो राष्ट्राध्यक्षों की कॉल पर एक बिजनेसमैन क्यों था?
• ऐसा था तो मोदी सरकार ने इसकी जानकारी देश को क्यों नहीं दी?
• इस युद्ध के बीच पहली बार ट्रंप ने मोदी को कॉल किया, उस कॉल पर भी एलन मस्क क्यों था?
• ट्रंप ने युद्ध के बीच अलग-अलग देश के नेताओं से बात की, लेकिन किसी की कॉल पर बिजनेसमैन नहीं थे. ऐसा मोदी के साथ ही क्यों हुआ?
• ट्रंप का सामने से कॉल करना और उस कॉल पर एलन को रखना, क्या ये किसी बिजनेस डील का मामला है?
• सबको पता है कि एलन मस्क अपने हाईस्पीड इंटरनेट स्टारलिंक को भारत लाना चाहते हैं, क्या ये कॉल उस बात के लिए थी?
• असल ने युद्ध को लेकर बात भी हुई, या ट्रंप ने एलन को बिजनेस दिलाने के लिए कॉल किया था?

ये सारे वो सवाल हैं, जो इस खबर के सामने आने के बाद उठ रहे हैं. क्या मोदी सरकार जवाब देगी?
Indian National Congress Dr. Rajshri Singh Barsha Rani Bishaya
Yogendra Yadav

देश दुनिया के मौजूदा घटनाक्रम पर पढ़ने योग्य पोस्ट।अगर आपको लगता है कि इजरायल ने ईरान के दक्षिणी पार्स में सिर्फ गैस प्ल...
25/03/2026

देश दुनिया के मौजूदा घटनाक्रम पर पढ़ने योग्य पोस्ट।

अगर आपको लगता है कि इजरायल ने ईरान के दक्षिणी पार्स में सिर्फ गैस प्लांट पर हमला किया है तो आप मूर्ख हैं।

असल में इजरायल ने दुनिया के पेट पर लात मारी है।

दक्षिणी पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस उत्पादन केंद्र है, जहां रोज 1.2 अरब क्यूबिक घन फीट गैस पैदा होती है।

इस गैस से पहले अमोनिया बनता है और फिर यूरिया। यही यूरिया आधी से ज्यादा दुनिया का पेट भरता है।

अब इस हमले से लड़ाई और आगे बढ़ चुकी है। उम्मीद की झीनी सी किरण भी नहीं बची।

भले हॉर्मूज चालू हो जाए, खाद की सप्लाई बहाल हो, लेकिन पार्स के कुएं जलते रहेंगे।

बगल में कतर खड़ा है। उस पर हमला नहीं हुआ, लेकिन हॉर्मूज ने उसे भी रोक रखा है।

दुनिया के 2 सबसे बड़े गैस सप्लायर देश, दोनों ठप।

दोनों के गैस में नाइट्रोजन है। पेड़ों को नाइट्रोजन चाहिए। दुनिया भूखी है।

और रोज़ गाय काटकर खाने वाले देश ने आग लगाई है।

भारत इसी गौमांस खाने वाले देश इजरायल का गुलाम है।
~Soumitra Roy

25/03/2026

ना खाऊंगा ना खाने दूंगा।
याद है या भूल गए??
अपने मोई जी जो है।

ऐप्सटीन फाइल।

25/03/2026

इसको कहते हैं, करप्शन धुलाई मशीन यानि बीजेपी

अप्सटीन का नाच का नतीजा।
25/03/2026

अप्सटीन का नाच का नतीजा।

25/03/2026
25/03/2026

क्या आपको याद है वो "100
स्मार्ट सिटी " जो जून 2015 में
बड़े ही जोर शोर से बनना शुरू
हुवे थे और बन कर पूरे भी हो गए ओर किसी को पता भी नही चला।
वर्ल्ड गुरु के इस महान ड्रीम प्रोजेक्ट पर लगभग 2 लाख करोड़ रुपये बर्बाद हो गए लेकिन एक भी सिटी स्मार्ट नही बन पाया और अंततः इसे फैल मानते हुवे मार्च 2025 में चुपचाप विड्रॉ कर दिया गया।

आप समझ सकते है कि लगभग 2 लाख करोड़ रुपये किन लोगों की जेबों में गए होंगे। कितने नेता अफसरों ठेकेदारों ने अपने घर बना लिए।
इसी तरह सितंबर 2014 में हमारे " यशस्वी जी "ने बड़े जोर शोर से "मेक इन इंडिया " नाम डिम प्रोजेक्ट "शुरू किया था। इस डिम प्रोजेक्ट में लगभग 2 लाख करोड़ रुपए की विशाल राशी की बंदरबांट हुई और नतीजा निकल ZERO।

इस " चिटफंड स्कीम" का उद्देश्य था भारत को चीन के मुकाबले विशाल ग्लोबल "मैन्युफैक्चरिंग हब " बनाना।
सरकार और संगठन में बैठे महामहिमो ने अपने चेहतों को कागजो में ही "प्लांट "लगवा कर मैन्युफैक्चरिंग शुरू करवा दी , 10 साल पूरे होते होते इसका नतीजा ये निकला कि चीन से हमारा आयात दोगुना हो गया।
मेन्युफेक्चरिंग हब बनने के बजाय "लाखो MSME "तबाह हो गए । चीन से ट्रेड "डेफिशिएट लगभग 40 अरब डॉलर (2014 ) से अब 95 अरब डॉलर बढ़ गया।

इसी तरह नम्बर 2016 में महामहीम
को सनक चढ़ी की जनता को लाइनों में
लगा कर डंका बजाया जाए हाहाकार मचाया जाए।
अचानक बिना किसी ठोस प्लानिंग के "डिमोनेटाइजेशन "की घोषणा कर दी। करोड़ो लोगो को सब काम धंधे ओर जरूरी काम छुड़वा कर बैंकों की लाइन में लगा दिया।

हजारों लोग एक "सनकी अजैविक "की सनक के भेंट चढ़ गए। दावा किया गया कि इससे "ब्लैक मनी ओर फेक करेंसी खत्म होगा और पाक प्रो टेरोरिज्म की कमर टूट जाएगी , डिजिटल करेंसी को बढ़ावा मिलेगा।
लेकिन अजैविक तुगलकी सनक का नतीजा क्या निकला , 99% अमाउंट वापस बैंकों ओर सिस्टम में वापस आ गया ,ब्लैकमनी तीन गुना बढ़ गया , प्रो पाक टेरेरिज्म फेक करेंसी से नार्को टेरेरिज्म पर शिफ्ट हो गया।

करोड़ो लोगो के छोटे मोटे रोजगार , उद्योगधन्धे , MSME बर्बाद हो गए , इकोनॉमी का भट्टा बैठ गया।
साहेब ने डिमोनेटाइजेशन खास कार्पोरेट्स यारो के लिए अमेरिका के इशारे पर किया था उंसके बाद देश के केवल दो तीन कार्पोरेट्स ने रॉकेट की स्पीड से ग्रो किया।
महामानव ने बकखोरी करते हुवे दिनों 50 दिन का समय माँगा था ओर कोई भी चौराहे पर किसी भी सजा का आह्वान किया था।
ना तो वो चौराहा आ तक कंही मिला है ना विश्वगुरु कभी वँहा आएंगे। पिछले 11 सालों के इन सभी कूकर्मो ,स्कैम्स , करप्शन , कॉन्सपिरेसी , बर्बादी का आखिर जवाब कौन देगा ?
ऐसे सैंकड़ो प्रोजेक्ट्स थे जिनको मोदी सरकार ने शुरू किया था और करोड़ो करोड़ बर्बाद करके चुपचाप बंद कर दिया गया उनका आज तक कोई हिसाब किताब नही हैँ।
विश्वगुरु ओर इनके कुलीग्स कभी संसद में इन सभी इशूज का जवाब नही देते , 12 साल के कार्यकाल में एक बार भी निष्पक्ष खुली प्रेस कॉम्फ्रेस का सामना इन्होंने किया नही , सत्ता का "झबरू" बन चुके गोदी मीडिया की इतनी ओखात नही की कभी इन घोटालों ओर बर्बादी पर सवाल कर सके। नियम बदल कर RTI को भोंथरा किया जा चुका हैँ।
भृष्टाचार लूट अब लीगेलाइज्ड है ऑर्गेनाइज्ड हैँ चेनेलाइज्ड है , सिस्टेमेटिक ओर जनविचार का हिस्सा बन चुकी हैँ।
जवाब देने वाला कोई नही हैँ , ये न्यूनॉर्मल हैँ।
अमृतकाल से पहले भी भ्रष्टाचार था।लेकिन तब डर था।
शर्म थी।जवाबदेही थी। सजा थी।
आज बेशर्मी हैँ।आज खुला खेल हैँ।आज लूट संवैधानिक हैँ।अब आप कुछ नहीं उखाड़ सकते।
क्योंकि यह लूट अब अपराध नहीं रही।
यह कानन बन चकी हैँ।
मुस्कुराइए की आप अमृतकाल मे है। 😑🇮🇳
Surender Singh









इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद ने मोदी के गले में "आर्डर आफ दि निस्सेट" का पट्टा डाल भारत को फांसी के ...
24/03/2026

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मोसाद ने मोदी के गले में "आर्डर आफ दि निस्सेट" का पट्टा डाल भारत को फांसी के फंदे पर लटका दिया है। एक व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत खुशी और महत्वाकांक्षा की पूर्ति के लिए अपने राष्ट्रीय हितों की कैसे बलि चढ़ा देता है, मोदी जी इसके सबसे बड़े और उपयुक्त उदाहरण हैं। एप्सटीन फाइल्स की मजबूरियों ने मोदी जी को इतना मजबूर कर दिया है कि वे भारत को ही अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया है, और इजरायल को फादर लैंड कहने के लिए बाध्य हो गये हैं। इसके बाद भी भारत और भारतीयों को अपमान, आर्थिक तबाही, व्यापार घाटा, रुपये की गिरावट, वैश्विक राजनीति में पहचान की संकट, राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का बलिदान, सुरसा की तरह बढ़ता विदेशी कर्ज का बोझ, औद्योगिक विनाश और देश की आमजनता के लिए गरीबी, भूखमरी, महंगाई और बदहाली ही मिला। एक अयोग्य, मूर्ख, अज्ञानी, अदूरदर्शी, अहमक, आत्मकेंद्रित, आत्ममुग्ध और आत्मतुष्ट तथा, मदांध, हीनभावना और कुंठाग्रस्त व्यक्ति का देश का प्रधानमंत्री बनना किसी भी राष्ट्र के लिए कितना घातक हो सकता है, उसका यह प्रामाणिक दस्तावेज है। आज की तारीख में दुनिया का कोई भी देश भारत का मित्र नहीं रह गया है। आज भारत की स्थिति उस जलयान की तरह ही हो गई है, जो महासागर के तुफान में फंसकर जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हिचकोले खा रहा है, जो जिसके पास लहरों से बचकर और दिशाहीन होकर किनारे लगना की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है...!!























23/03/2026

ईरानी प्रोफेसर मरांदी:

“आईएसआईएस तुम्हारी हुकूमत ने बनाया।

अल-कायदा भी तुम्हारी हुकूमत ने बनाया।

अल-कायदा का सरदार व्हाइट हाउस तक गया, वही Organization जिस पर तुम 9/11 करने का इल्ज़ाम लगाते हो।

तो फिर हम कैसे तय करें कि असली दहशतगर्द कौन हैं, जब तुम्हारे अपने पैमाने ही साफ नहीं हैं?”

जो केंट, पूर्व यूएनएससी (नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल):

"अल-कायदा और आईएसआईएस लंबे समय तक सीआईए के बनाए हुए थे और जब वे बेकाबू हो गए, तो अमेरिका ने युद्ध छेड़ दिया।"

अमेरिकी राजनयिक रॉबर्ट फोर्ड

"अमेरिका और ब्रिटिश MI6 ने अबू मोहम्मद अल-जुलानी, जो पहले अल-कायदा का प्रमुख था, को नया रूप दिया। अब वही सीरिया का राष्ट्रपति है और अमेरिका व इज़राइल के लिए ईसाइयों को मार रहा है।"

ध्यान दें, यह सच्चाई का सिर्फ कुछ उदाहरण है: जिसे अकसर लोग स्वीकार नहीं करेंगे।

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