Theosophical Order of Service Muzaffarpur

Theosophical Order of Service Muzaffarpur The Theosophical Order of Service is an international organization founded in 1908 by Annie Besant.

21/11/2023
https://youtu.be/wHQJf7BwiCY?si=ZfncWA6IyFHt2UAl
20/11/2023

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मैकाले शिक्षा व्यवस्था खत्म होगी || Education reforms in bharat || Ashwini upadhyay supportThis Video Is About Tips Note This is Educational ans Informationa...

11/11/2023

*बुजुर्गों के अंतिम समय को सुखद बनाएं।*
एक आश्चर्यजनक रीति चल पड़ी है, बुजुर्ग बीमार हुए, एम्बुलेंस बुलाओ, जेब के अनुसार 3 स्टार या 5 स्टार अस्पताल ले जाओ, ICU में भर्ती करो और फिर जैसा जैसा डाक्टर कहता जाए, मानते जाओ।
और फिर अस्पताल के हर डाक्टर, कर्मचारी के सामने आप कहते है कि "पैसे की चिंता मत करिए, बस इनको ठीक कर दीजिए" वास्तव में ऐसा कहकर आप उनके हाथों में उन्हें बुजुर्ग के शरीर का लाइसेंस दे देते हैं। और डाक्टर एवं अस्पताल कर्मचारी लगे हाथ आपके मेडिकल ज्ञान को भी परख लेते है, और फिर आपके भावनात्मक रुख को देखते हुए उनका खेल आरम्भ होता है।
कई तरह की जांचे होने लगती हैं, फिर रोज रोज नई नई दवाइयाँ दी जाती है, रोग के नए नए नाम बताये जाते हैं और आप सोचते है कि बहुत अच्छा इलाज हो रहा है।
80 साल के बुजुर्ग के निर्बल हाथों में सुइयाँ घुसी रहती हैं, बेचारे करवट तक नहीं ले पाते। ICU में मरीज के पास कोई रुक नहीं सकता या बार बार मिल नहीं सकते। इसका लाभ लेते हुए वे 70-80 वर्षीय बुजुर्ग के शरीर को भिन्न-भिन्न प्रकार की नई-नई दवाइयों के परीक्षण की प्रयोगशाला बना देते हैं।
आप ये सब क्या कर रहे है एक शरीर के साथ ?
शरीर, आत्मा, मृत्युलोक, परलोक की अवधारणा बताने वाले हिन्दू धर्म की मान्यता है कि ज्ञात मृत्यु सदा सुखद परिस्थिति में होने या लाने का प्रयत्न करना चाहिए।
इसलिए वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्र में बुजुर्ग अंतिम अवस्था मे घर में होते हैं, और जिन लोगो को वो अंतिम समय में देखना चाहते हैं, अपना वंश, अपना परिवार, आत्मिय जन, परिचित आदि, सब आसपास रहते हैं।
बुजुर्ग की यदि कुछ इच्छा है खाने की, तो तुरन्त उनको दिया जाता है, भले ही वो एक कौर से अधिक नहीं खा पाएं। लेकिन मन की इच्छा पूरी होना आवश्यक है, आत्मा के शरीर छोड़ने से पहले। यदि मन की अंतिम अवस्था शांत और तृप्त होगी तो अदृश्य परलोक में भी शांति रहेगी, बेचैनी नहीं।
अस्पताल के ICU में क्या ये संभव है?
अस्पताल में कष्टदायक, सुइयाँ घुसे शरीर से क्या आत्मा प्रसन्न होकर निकलेगी?
क्या अस्पताल के ICU में बुजुर्ग की हर इच्छा पूरी होती है?

रोज नई नई दवाइयों का प्रयोग, कष्टदायक यांत्रिक उपचार, दिनभर दिखते अपरिचित चेहरों के बीच बुजुर्ग के शरीर को बचाइए! बुजुर्ग को देवलोक गमन का शरीर मानकर सेवा करिये। धार्मिक ग्रंथों का पाठ, वाचन या यंत्रों के माध्यम से सुनाईये। सभी स्वजनों का स्पर्श द्वारा आत्मिक शाँति प्रदान कीजिये। एक-एक चम्मच गंगाजल पान करायें। भगवत दर्शन करायें आदि आदि।
अच्छे डाक्टर, नर्स को घर मे रखिये, घर में सभी सुविधाओं सहित उपचार करने का प्रयत्न कीजिये।
इस लेख का आशय पैसे बचाना नहीं, बुजुर्गों को सद्गति प्रदान करना है..."
यही प्रार्थना है
इस दीपावली हम सभी यही संकल्प लें कि हमारे घर के बुजुर्गों को उचित मान सम्मान हम प्रदान करें उनकी उचित देखभाल करें और पुण्य प्राप्त कर के भाग्यशाली बने🙏🏻
आप सभी परिवार जनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं
*डॉ रजनीश कौशिक*
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[20/10, 7:11 pm] Uday Shanker Srivastava: मुजफ्फरपुर नया टोला की बेटी (मेरी) अमेरिका मैं मधुबनी पेंटिंग का प्रदर्शन[20/1...
20/10/2023

[20/10, 7:11 pm] Uday Shanker Srivastava: मुजफ्फरपुर नया टोला की बेटी (मेरी) अमेरिका मैं मधुबनी पेंटिंग का प्रदर्शन
[20/10, 7:11 pm] Uday Shanker Srivastava:

The Somerset County Library System of New Jersey's (SCLSNJ) Montgomery branch is currently exhibiting the art of Richa Rashmi, a local artist from Belle Mead who specializes in an art form called Madhubani. Madhubani is an art form largely practiced in India and Nepal and is characterized by its geo...

19/10/2023

*बात उन दिनों की है जब हम कॉलेज में प्रथम वर्ष के छात्र थे!*
*दशहरा बीत चुका था, दीपावली समीप थी, तभी एक दिन कुछ युवक-युवतियों की NGO टाइप टोली हमारे कॉलेज में आई!*

*उन्होंने छात्रों से कुछ प्रश्न पूछे; किन्तु एक प्रश्न पर कॉलेज में सन्नाटा छा गया!*

*उन्होंने पूछा, "जब दीपावली भगवान राम के १४ वर्षो के वनवास से अयोध्या लौटने के उतसाह में मनाई जाती है, तो दीपावली पर "लक्ष्मी पूजन" क्यों होता है ? श्री राम की पूजा क्यों नही?"*

*प्रश्न पर सन्नाटा छा गया, क्यों कि उस समय कोई सोशियल मीडिया तो था नहीं, स्मार्ट फोन भी नहीं थे! किसी को कुछ नहीं पता! तब, सन्नाटा चीरते हुए, हममें से ही एक हाथ, प्रश्न का उत्तर देने हेतु ऊपर उठा!*

*हमने बताया कि "दीपावली उत्सव दो युग "सतयुग" और "त्रेता युग" से जुड़ा हुआ है!"*

*"सतयुग में समुद्र मंथन से माता लक्ष्मी उस दिन प्रगट हुई थी! इसलिए "लक्ष्मी पूजन" होता है!*

*भगवान श्री राम भी त्रेता युग मे इसी दिन अयोध्या लौटे थे! तो अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था! इसलिए इसका नाम दीपावली है!*

*इसलिए इस पर्व के दो नाम हैं, "लक्ष्मी पूजन" जो सतयुग से जुड़ा है, और दूजा "दीपावली" जो त्रेता युग, प्रभु श्री राम और दीपो से जुड़ा है!*

*हमारे उत्तर के बाद थोड़ी देर तक सन्नाटा छाया रहा, क्योंकि किसी को भी उत्तर नहीं पता था! यहां तक कि प्रश्न पूछ रही टोली को भी नहीं!*

*खैर कुछ देर बाद सभी ने खूब तालियां बजाई!*

*उसके बाद, एक समाचारपत्र ने हमारा साक्षात्कार (इंटरव्यू) भी किया!*

*उस समय समाचारपत्र का साक्षात्कार करना बहुत बड़ी बात हुआ करती थी!*

*बाद में पता चला, कि वो टोली आज की शब्दावली अनुसार "लिबरर्ल्स" (वामपंथियों) की थी, जो हर कॉलेज में जाकर युवाओं के मस्तिष्क में यह बात डाल रही थी, कि "लक्ष्मी पूजन" का औचित्य क्या है, जब दीपावली श्री राम से जुड़ी है?" कुल मिलाकर वह छात्रों का ब्रेनवॉश कर रही थी!*

*लेकिन हमारे उत्तर के बाद, वह टोली गायब हो गई!*

*एक और प्रश्न भी था, कि लक्ष्मी और श्री गणेश का आपस में क्या रिश्ता है?*

*और दीपावली पर इन दोनों की पूजा क्यों होती है?*

*सही उत्तर है :*

*लक्ष्मी जी जब सागर मन्थन में मिलीं, और भगवान विष्णु से विवाह किया, तो उन्हें सृष्टि की धन और ऐश्वर्य की देवी बनाया गया! तो उन्होंने धन को बाँटने के लिए मैनेजर कुबेर को बनाया!*

*कुबेर कुछ कंजूस वृति के थे! वे धन बाँटते नहीं थे, सवयं धन के भंडारी बन कर बैठ गए!*

*माता लक्ष्मी परेशान हो गई! उनकी सन्तान को कृपा नहीं मिल रही थी!*

*उन्होंने अपनी व्यथा भगवान विष्णु को बताई! भगवान विष्णु ने उन्हें कहा, कि "तुम मैनेजर बदल लो!"*

*माँ लक्ष्मी बोली, "यक्षों के राजा कुबेर मेरे परम भक्त हैं! उन्हें बुरा लगेगा!"*

*तब भगवान विष्णु ने उन्हें श्री गणेश जी की दीर्घ और विशाल बुद्धि को प्रयोग करने की सलाह दी!*

*माँ लक्ष्मी ने श्री गणेश जी को "धन का डिस्ट्रीब्यूटर" बनने को कहा!*

*श्री गणेश जी ठहरे महा बुद्धिमान! वे बोले, "माँ, मैं जिसका भी नाम बताऊंगा, उस पर आप कृपा कर देना! कोई किंतु, परन्तु नहीं! माँ लक्ष्मी ने हाँ कर दी!*

*अब श्री गणेश जी लोगों के सौभाग्य के विघ्न/रुकावट को दूर कर उनके लिए धनागमन के द्वार खोलने लगे!*

*कुबेर भंडारी ही बनकर रह गए! श्री गणेश जी पैसा सैंक्शन करवाने वाले बन गए!*

*गणेश जी की दरियादिली देख, माँ लक्ष्मी ने अपने मानस पुत्र श्री गणेश को आशीर्वाद दिया, कि जहाँ वे अपने पति नारायण के सँग ना हों, वहाँ उनका पुत्रवत गणेश उनके साथ रहें!*

*दीपावली आती है कार्तिक अमावस्या को! भगवान विष्णु उस समय योगनिद्रा में होते हैं! वे जागते हैं ग्यारह दिन बाद, देव उठावनी एकादशी को!*

*माँ लक्ष्मी को पृथ्वी भ्रमण करने आना होता है शरद पूर्णिमा से दीवाली के बीच के पन्द्रह दिनों में, तो वे सँग ले आती हैं श्री गणेश जी को! इसलिए दीपावली को लक्ष्मी-गणेश की पूजा होती है!*
🙏🌹🙏
*(यह कैसी विडंबना है, कि देश और हिंदुओ के सबसे बड़े त्यौहार का पाठ्यक्रम में कोई विस्तृत वर्णन नहीं है? औऱ जो वर्णन है, वह अधूरा है!)🖊️*

*इस लेख को पढ़ कर स्वयं भी लाभान्वित हों, अपनी अगली पीढी को बतायें और दूसरों के साथ साझा करना ना भूलें !* 🙌

*और इसे बार-बार👉🏻 शेयर करते रहें दिवाली तक सभी देशवासियों को इसकी पूरी तरह से जानकारी हो जाए।*

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