राजपूताना इतिहास और रजवाड़े

राजपूताना इतिहास और रजवाड़े बलिदान और शौर्य का नाम क्षत्रिय राजपूत जब तक सूरज चाँद रहेगा राजपूतों का स्वर्णिम इतिहास चमकता रहेगा

आओ मिलकर निर्माण करे उस राजपुताना का जिसकी खातिर हमारे पुरखो ने अपने रक्त से माटी को पवित्र कर दिया ! आओ मिलकर आगे ले जाए इस धरोहर को जो हमारे स्वाभिमान का प्रतीक रही आओ मेरे राजपूत बंधुओ अंधकार से प्रकाश की और चले..जय राजपुताना.!

मेवाड़ राजवंश
10/06/2026

मेवाड़ राजवंश

32 दुर्गों के निर्माता, अनेक ग्रंथों के रचनाकार, प्रकांड विद्वान, एक भी युद्ध न हारने वाले परम प्रतापी मेवाड़ नरेश महाराण...
09/06/2026

32 दुर्गों के निर्माता, अनेक ग्रंथों के रचनाकार, प्रकांड विद्वान, एक भी युद्ध न हारने वाले परम प्रतापी मेवाड़ नरेश महाराणा कुम्भा

09/06/2026

राजस्थान की धरती पर स्थित चितौड़गढ़ केवल एक किला नहीं, बल्कि त्याग, स्वाभिमान और बलिदान का अमर प्रतीक है। इसे "जौहर भूमि" इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां मातृभूमि, धर्म और सम्मान की रक्षा के लिए राजपूत क्षत्राणियों ने तीन बार जौहर किया।

1. प्रथम जौहर (1303 ई.)

जब रानी पद्मिनी के समय अलाउदीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ को घेरा, तब हजारों राजपूत महिलाओं ने सम्मान की रक्षा हेतु जौहर किया और वीरों ने साका कर रणभूमि में प्राण न्यौछावर कर दिए।

2. द्वितीय जौहर (1535 ई.)

रानी कर्णावती के नेतृत्व में बहादुर शाह के आक्रमण के समय फिर से जौहर हुआ और मेवाड़ के वीरों ने अंतिम सांस तक युद्ध किया।

3. तृतीय जौहर (1568 ई.)

जयमल मेड़तिया और पता सिसोदिया के नेतृत्व में चित्तौड़ ने अकबर की विशाल सेना का सामना किया। इस युद्ध से पहले हजारों क्षत्राणियों ने पुनः जौहर किया और वीरों ने साका कर इतिहास में अमर स्थान प्राप्त किया।

आज भी चित्तौड़गढ़ की धरती पर खड़े होकर ऐसा महसूस होता है मानो उन वीरांगनाओं की अग्नि, उन रणबांकुरों की तलवारें और उनके स्वाभिमान की गूंज हवाओं में जीवित हो।

यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि स्वाभिमान की वह ज्योति है जो सदियों बाद भी भारत की आत्मा को प्रकाशित कर रही है।

जौहर भूमि चित्तौड़गढ़ को कोटि-कोटि नमन। 🙏🚩

स्व. श्री अरविंद सिंह जी मेवाड़ अपने पुत्र श्री लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ के साथ
08/06/2026

स्व. श्री अरविंद सिंह जी मेवाड़ अपने पुत्र श्री लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ के साथ

बीकानेर के महाराजा सर गंगा सिंह अपने बच्चे सादुल सिंह और बेटी चाँद कँवर के साथ
05/06/2026

बीकानेर के महाराजा सर गंगा सिंह अपने बच्चे सादुल सिंह और बेटी चाँद कँवर के साथ

चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित महाराणा कुम्भा महल
05/06/2026

चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित महाराणा कुम्भा महल

सिरोही के महाराव सुरताण देवड़ा, जिन्होंने 17 अक्टूबर 1583 ई. को दत्ताणी के भीषण युद्ध में अकबर द्वारा भेजी गई सेना को परा...
04/06/2026

सिरोही के महाराव सुरताण देवड़ा, जिन्होंने 17 अक्टूबर 1583 ई. को दत्ताणी के भीषण युद्ध में अकबर द्वारा भेजी गई सेना को परास्त करके ऐतिहासिक विजय प्राप्त की। इस युद्ध में अकबर द्वारा भेजी गई सेना के तीनों सेनापति जगमाल, रायसिंह व कोलिसिंह मारे गए।

एकलिंग दीवान श्रीजी हजुर महाराणा विश्वराज सिंह जी मेवाड़ व महाराणी सा महिमा कुमारी जी मेवाड़ 🌞  #मेवाड़ी_सरदार  #राजपूता...
03/06/2026

एकलिंग दीवान श्रीजी हजुर महाराणा विश्वराज सिंह जी मेवाड़ व महाराणी सा महिमा कुमारी जी मेवाड़ 🌞
#मेवाड़ी_सरदार
#राजपूताना
#मेवाड़

केवल एक शब्द   #राजपूत
02/06/2026

केवल एक शब्द #राजपूत

बठिंडा किला (पंजाब) भारत के सबसे प्राचीन किलों में से एक माना जाता है, जिसका इतिहास लगभग 1,800 वर्ष पुराना बताया जाता है...
01/06/2026

बठिंडा किला (पंजाब) भारत के सबसे प्राचीन किलों में से एक माना जाता है, जिसका इतिहास लगभग 1,800 वर्ष पुराना बताया जाता है।
इसी किले में दिल्ली की पहली महिला शासक रज़िया सुल्तान को 1240 ईस्वी में कैद रखा गया था।

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