05/10/2026
प्रेस विज्ञप्ति अभिमत
नई दिल्ली
भारत
दिनांक 05 अक्टूबर 2026
रिसर्च स्कॉलर विकास अनिल सराफ द्वारा रचित 'श्री बजरंग बल चालीसा' बनी आध्यात्मिक चेतना और लोक-कल्याण का केंद्र
कॉपीराइट-मुक्त और निःशुल्क उपलब्ध कराने का लिया गया संकल्प, जन जन के माध्यम से मध्य प्रदेश के समस्त मंदिरों में होगी स्थापना
मुंगावली/अशोकनगर, 05 अक्टूबर 2026
सनातन संस्कृति, लोक-कल्याण, नैतिक मूल्यों और युवाओं में सकारात्मक ऊर्जा के संचार को समर्पित 'श्री बजरंग बल चालीसा' इन दिनों धर्मप्रेमियों और आम जनमानस के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस आधुनिक एवं प्रेरक आध्यात्मिक कृति की रचना भारत सरकार के राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India), नई दिल्ली के रिसर्च स्कॉलर एवं प्रखर सामाजिक विचारक विकास अनिल सराफ द्वारा की गई है।
मूल रूप से अशोकनगर जिले की मुंगावली तहसील के निवासी विकास अनिल सराफ प्राचीन झिरिया हनुमान मंदिर के अनन्य भक्त हैं। केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी के मार्गदर्शन में ग्वालियर-चंबल संभाग की प्रगति और जनसेवा में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ सराफ ने इस अनूठी चालीसा के माध्यम से साहित्य और अध्यात्म के क्षेत्र में भी अपनी गहरी छाप छोड़ी है।
मुंगावली के प्राचीन झिरिया मंदिर में हुआ श्रीचरणों में अर्पण
हाल ही में रचयिता विकास अनिल सराफ ने मुंगावली स्थित प्राचीन झिरिया मंदिर में विराजमान श्री हनुमान जी महाराज के श्रीचरणों में अपनी इस कृति 'श्री बजरंग बल चालीसा' को श्रद्धापूर्वक अर्पित किया तथा समस्त भारतवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं मंगल की कामना की।
इस अवसर पर उन्होंने एक ऐतिहासिक संकल्प लेते हुए घोषणा की कि ‘श्री बजरंग बल चालीसा’ की संपूर्ण प्रति और इसका पाठ-आराधना आजीवन सभी देशवासियों के लिए पूर्णतः निःशुल्क और कॉपीराइट-मुक्त उपलब्ध रहेगी, ताकि समाज का प्रत्येक वर्ग और हर श्रद्धालु इसका पाठ कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सके। मध्य प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों में इसकी प्रतियों को मुद्रित कर वितरित करने का निवेदन भी किया गया है ताकि अधिक से अधिक भक्त इससे जुड़ सकें।
साहस, आत्मबल और राष्ट्र-निर्माण का संदेश
पारंपरिक हनुमान चालीसा और बजरंग बाण की महिमा को आत्मसात करते हुए रचित 'श्री बजरंग बल चालीसा' संकट काल में मनुष्य के भीतर आत्मबल, साहस और मानसिक दृढ़ता जागृत करने का संदेश देती है।
इस रचना को लेकर लेखक विकास अनिल सराफ का कहना है: "आज की इस भागदौड़ भरी जिंदगी और मानसिक तनाव के दौर में, हनुमान जी का 'बजरंग बल' ही युवाओं को भटकाव से बचाकर सही दिशा दिखा सकता है। यह चालीसा राष्ट्र निर्माण, जनकल्याण और लोक-कल्याण की भावना को पूरी तरह समर्पित है।"
क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, प्रबुद्धजीवियों, संतों और धर्मप्रेमियों ने विकास अनिल सराफ के इस साहित्यिक और धार्मिक प्रयास की भूरी-भरी प्रशंसा की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस समकालीन रचना को भक्तों के लिए साझा किया जा रहा है।
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नाम: विकास अनिल सराफ
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