Rajpal Kaushik

Rajpal Kaushik ACTOR

जिस जहर को हम 74 साल से पालते आ रहे थे, जिसे हम वर्षों से पाल रहे थे और जो हमारे ही खिलाफ भौंक रहा था, उसे मोदी सरकार ने...
21/01/2026

जिस जहर को हम 74 साल से पालते आ रहे थे, जिसे हम वर्षों से पाल रहे थे और जो हमारे ही खिलाफ भौंक रहा था, उसे मोदी सरकार ने सिर्फ 30 मिनट में देश से बाहर फेंक दिया।

हम बात कर रहे हैं संयुक्त राष्ट्र सैन्य पर्यवेक्षक समूह (UNMOGIP) की, जो 1948 से भारत में बैठा हुआ था। इसका काम था भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद पर नजर रखना, लेकिन असल में ये संगठन भारत के खिलाफ एक विदेशी सेंसर बोर्ड जैसा बन चुका था। और मजे की बात यह है कि इनका रहना-खाना, गाड़ी, घूमना यानि कि सब-कुछ भारत सरकार यानि हमारे टैक्स के पैसे से होता था।

UNMOGIP ने न सिर्फ भारत को कई बार खुले मंचों पर दोषी ठहराया, बल्कि कश्मीर को द्विपक्षीय नहीं, त्रिपक्षीय मसला बताने की भी भरपूर कोशिशें और वकालत की। उन्होंने यहां तक कहा कि भारत हमें काम नहीं करने दे रहा, हमारे खर्च पूरे नहीं कर रहा, भत्ते बढ़ाओ और हमारे लिए और पैसा दो। यानि कि घर में घुसे मेहमान ही अब मेजबान को धमका रहे थे।
इस पर मोदी सरकार ने एक सेकंड भी नहीं गंवाया। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पूरे प्रकरण की कमान संभाली और सिर्फ 30 मिनट की कार्यवाही में UNMOGIP का वीजा रद्द कर दिया गया। उन्हें साफ शब्दों में कहा गया है कि “अब यहां तुम्हारी जरूरत नहीं है, 10 दिन में अपना बोरिया-बिस्तर समेटो और निकलो।”

इन 74 वर्षों में भारत ने इनके 40 से ज्यादा अधिकारियों का खर्च उठाया। हमने उन्हें रहना दिया, गाड़ियां दीं, सुरक्षा दी और बदले में क्या मिला? हमारे ही खिलाफ बयान, रिपोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि को नुकसान। अब वो दौर खत्म हुआ।

सबसे बड़ा सवाल इन्हें भारत में लाया कौन था? पंडित नेहरू!

वही नेहरू जो कि 1948 में कश्मीर मुद्दा खुद यूएन में घसीट कर ले गए। कश्मीर जो हमारा आंतरिक मामला था, उसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बना दिया। और आज तक उसकी सज़ा हम भुगतते रहे। हर बार जब UN की कोई रिपोर्ट आती थी, उसमें भारत को घेरने की कोशिश होती थी। अब जबकि मोदी सरकार ने UNMOGIP को बाहर का रास्ता दिखाया है, ये वही क्षण है जैसे अंग्रेजों का आखिरी झंडा उतार दिया गया हो।

आज भी देश की 99% जनता को ये नहीं पता था कि अंग्रेजों की छाया UN के नाम पर आज तक हमारे देश में मौजूद थी। मोदी सरकार ने इस बार चुपचाप, पर निर्णायक प्रहार किया है। ये सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, ये सांस्कृतिक, कूटनीतिक और मानसिक स्वतंत्रता का प्रतीक है। जो काम कांग्रेस 74 साल में नहीं कर सकी, वो मोदी सरकार ने 30 मिनट में कर दिखाया।

अब कोई विदेशी संस्था भारत में बैठकर भारत को नहीं सिखाएगी कि हमें क्या करना चाहिए और क्या नहीं। अब भारत खुद तय करेगा कि उसकी धरती पर कौन रहेगा और कौन नहीं। ये अंग्रेजी छाया का आखिरी सिरा था और उसे भी हमने आज उखाड़ फेंका।

जय हिंद 🇮🇳

जब अमेरिका का एक बड़ा नेता, डोनाल्ड ट्रंप, अपनी सोशल मीडिया पर चिल्लाया: "भारत पर 50% टैरिफ लगाऊंगा!" यूरोपियन यूनियन ने...
24/08/2025

जब अमेरिका का एक बड़ा नेता, डोनाल्ड ट्रंप, अपनी सोशल मीडिया पर चिल्लाया: "भारत पर 50% टैरिफ लगाऊंगा!" यूरोपियन यूनियन ने शोर मचाया, जापान ने बैठकर सौदा करने की कोशिश की, और चीन ने सीधा पलटवार कर दिया। लेकिन भारत? बस शांत। न कोई भाग-दौड़, न वॉशिंगटन की तरफ दौड़, न कोई हड़बड़ी वाली मीटिंग। सिर्फ सन्नाटा।

क्यों? क्या मोदी का घमंड था? या अंधा देशभक्ति का जोश? नहीं, बिलकुल नहीं। ये तो एक लंबी, गहरी साजिश थी, जो 11 साल पहले शुरू हुई थी।

साल 2014। मोदी प्रधानमंत्री बने ही थे, तभी NSA अजीत डोभाल ने उनसे कहा, "सर, अगर भारत सुपरपावर बनना चाहता है, तो अमेरिका का दबाव सहने की तैयारी करनी पड़ेगी। असली दुश्मन चीन नहीं, बल्कि हमारी कमजोरियां हैं – डॉलर की जकड़न, तेल पर दूसरों का कब्जा, और हथियारों की निर्भरता।"

मोदी ने पूछा, "तो क्या करें?"

डोभाल ने जवाब दिया, "खतरे से दूर रहना है अमेरिका से दुश्मनी नहीं।
लेकिन भारत पहले खाड़ी और अफ्रीका के देशों से दोस्ती बढ़ाये। अपनी नौसेना मजबूत करेbऔर अपना बाजार को हथियार बनाये।"

बस, योजना शुरू हो गई। जैसे कोई योद्धा अपना कवच गढ़ता है, वैसे ही साल दर साल ये चलती रही।

शुरुआत 2014 में 'मेक इन इंडिया' से।
फिर 2015 में कतर से गैस का सौदा दोबारा तय किया। 2016-17 में UPI और GST लाए, जो डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बने।
2018 में ईरान पर अमेरिकी पाबंदी आई, तो हमने अपना सिस्टम बनाया जो पाबंदी से बचाए।
2019 में इलेक्ट्रॉनिक्स पॉलिसी – अब सिर्फ जोड़ना नहीं, बल्कि पार्ट्स खुद बनाना। 2020 में PLI स्कीम, 1.97 लाख करोड़ की।
2021 में तेल का रिजर्व स्टॉक। 2022 में INS विक्रांत जहाज, UAE और ऑस्ट्रेलिया से व्यापार समझौते।
2023 में UPI को विदेश से जोड़ा, रुपए में व्यापार शुरू। 2024 में अग्नि-V मिसाइल टेस्ट, कतर से 20 साल का गैस डील, और चाबहार बंदरगाह। और
2025 में सर्विस एक्सपोर्ट 387.5 अरब डॉलर तक पहुंचा, अमेरिका का 25% टैरिफ आया, लेकिन असर? जीरो।

ये घमंड नहीं था, भाई। ये कवच था – मजबूत, अटूट।
2013 में GDP 1.86 ट्रिलियन डॉलर थी,
2025 में 4.19 ट्रिलियन – दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। PPP में 17.65 ट्रिलियन। रफ्तार 6-8%। गरीबी आधी हो गई। FDI 300 अरब$ से ऊपर।

हां, रास्ता कठिन था। टैक्स भारी पड़े, दर्द हुआ। लेकिन ये आग की परीक्षा थी, जो स्टील को मजबूत बनाती है। अब टैरिफ हमारी जंजीर नहीं, बल्कि हमारी ढाल से टकराते हैं।

वो पुराना भारत, जो अमेरिका के आगे झुकता था, वो खत्म हो चुका। यहां कोई राजा का नुमाइंदा नहीं, कोई कठपुतली नहीं। अब हम अपनी चाय पीते हैं, अपने जहाज गिनते हैं, अपने समंदर की रखवाली करते हैं, और अपनी कमाई पर किसी की दया नहीं मांगते।
जय श्री राम 🚩 copy

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