पूर्वांचल के आर्थिक-औद्योगिक विकास व उसके लिए जरूरी सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव का मंच। अभी संस्था द्वारा ज़फराबाद और जौनपुर के इस्लाम पूर्व अतीत को खोज कर उसे फिर से स्थापित करने के उद्देश्य से ज़फराबाद जौनपुर आख्यान नाम की ऐतिहासिक फिल्म बनाई जा रही है। पूर्वांचल सदियों-सदियों से प्रवास और प्रव्रजन की पीड़ा झेल रहा है। देश के कई दूसरे हिस्से भी इस त्रासदी के शिकार रहे हैं। पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठा
न का उद्देश्य पूर्वांचल व देश के दूसरे प्रवास और प्रव्रजन प्रभावित इलाकों के आर्थिक-औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना व उसके लिए जरूरी सामाजिक-सांस्कृतिक जमीन बनाना है।
२०१५ की वह घटना भूली नहीं जा सकती जब उत्तर प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी की ३६८ भर्तियों के लिए २३ लाख से अधिक लोगों ने आवेदन किये, जिनमें पीएचडी किये लोग भी शामिल थे। स्थितियां बदल रही हैं, लेकिन आबादी का बोझ स्थितियों को बहुत बदलने नहीं देता। इसके लिए आर्थिक-औद्योगिक विकास के कामों के अलावा सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी बड़े बदलाव की जरूरत है।
२०१५ से पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान भोजपुरी मनोरंजन उद्योग में फ़ैली अश्लीलता के खिलाफ, शादी-व्याह में दहेज़ और दिखावे के खिलाफ और भारतीय भाषाओँ को मज़बूत करने और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के तीन बहुत प्रभावी अभियान चला रहा है। अभी इन कामों के साथ-साथ पूर्वांचल के सांस्कृतिक विकास को गति देने के लिए `जफराबाद स्टोरी: एक खोये हुए शहर को फिर से बसाने का सपना ' नाम की ड्रामा डाक्यूमेंट्री फिल्म बना रहे हैं। इस फिल्म का उद्देश्य जफराबाद के पुराने इतिहास को जानना और जागृत करना है।
१३२१ में जफ़र शाह तुगलक ने इस नगर को इस तरह ध्वस्त किया था कि पुरानी संस्कृति के एक भी अवशेष नहीं छोड़े गए। नगर का नाम भी बदल दिया गया। हम इस ध्वंश के पहले के नगर को सामने ला रहे हैं। और जिन चीजों को ध्वस्त कर दिया गया, उनकी पुनः प्रस्तुति कर रहे हैं। साथ ही, पुरानी संस्कृति की एक ही निशानी बची है, मनहेच किले के कुछ टीले, जिन पर तेजी से अतिक्रमण हो रहा है, पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की ओर से उसे बचाने और उत्तर प्रदेश सरकार से वहां पूर्वांचल का शौर्य तीर्थ बनाने की मांग की जा रही है।
प्रतिष्ठान की ओर से जफराबाद का पुराना नाम बहाल किये जाने की भी मांग की जा रही है।
इन मांगों के समर्थन में जन अभियान भी चलाया जा रहा है।
साथ ही, दो प्रोजेक्ट्स पर और काम चल रहा है। एक तो जौनपुर का इतिहास सामने लाकर उसके जरिये नाग सर्किट को सामने लाना है। वह नागमाता जरत्कारु का केंद्र है। दूसरे, स्वर विज्ञान के आधार पर राम कथा से जुड़े विभिन्न स्थलों की भी निशानदेही की जा रही है। ये तीनों काम पूर्वांचल के सांस्कृतिक विकास को मज़बूती देंगे। और, इस तरह के दूसरे कामों के लिए भी प्रेरक बनेंगे। साथ ही, रामकथा को लेकर जो विवाद खड़े कर दिए जाते हैं, साहित्य, समाज और संस्कृति को उन विवादों से भी मुक्ति मिलेगी।
हम लोगों ने पूर्वांचल के लगभग १२ स्थलों को इतिहास की मैपिंग के लिए चुना है। इनमें फैज़ाबाद और आजमगढ़ का निज़ामबाद व अवंतिकापुरी शामिल हैं।
इन कामों हम लोग निरंतरता, समग्रता और प्रमाणिकता के साथ कर सकें, इसलिए साथ, समर्थन और सहयोग की अपील है।
हम इतिहास को समाज को जागृत करने के उद्देश्य से देख रहे हैं। हमारे काम के स्वरूप को स्पष्ट करता जफराबाद स्टोरी : एक खोये हुए नगर को फिर से बसाने का सपन का समापन गीत देखें ---
माथा झुका हुआ है
आँखें झुकी पड़ी हैं।
किसने छीन लिए मेरे जिरह और बख्तर
किसने हर लिया मेरा शौर्य
किसने कर दिया मुझे निःशब्द
बोलो बोलो ऐ वक्त के पन्नो बोलो
किसने छीन लिया मेरी जड़ों से खाद पानी मिट्टी
विलुप्ति की कगार पर कैसे सूखा पड़ा मैं अभिशप्त
तकदीर का यह था कोई द्वंद्व?
या थी मेरी ही कोई गलती ?
रोशनी जो बंद है,
खोल दो उसके कपाट.
इस पराजय से उठो
इतिहास की यह चाह है।
सदियों सदियों तक नभ में गूंजते थे मेरे पदचाप
उगता था सूरज तो पूछता था, कहां उगूं मेरे मनमीत
नक्षत्र मंडल में जब कोई निकलती थी नयी रोशनी -सीधे पूछती थी मेरे घर का पता
सदियों सदियों तक अमिट थी मेरी धर्मोपदेशना, जय. पराजय, जीवन की मेरी व्याख्या
बोलो बोलो ऐ भगवती बोलो
बोलो बोलो ऐ गोमती बोलो
बोलो बोलो बोलो ऐ राजा हरिचंद
नियति का कोई कुचक्र था?
या मुझसे ही हुई कोई भूल ?
कंठ जो अवरुद्ध हैं
आरोह उनके तान दो
माथा झुका हुआ है
आँखें झुकी पड़ी हैं।
इस पराजय से उठो
इतिहास की यह चाह है।---