17/05/2026
प्रिय भाई,
पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा इतिहास, पुरातत्व, भाषा विज्ञान आदि की नयी जानकारियों के आधार पर वेदों और पुराणों का भाष्य किया जा रहा है। इससे वैश्विक स्तर पर नष्ट हो गए सनातन धर्म के कई मूल केंद्र तो फिर से स्थापित होंगे ही, दुनिया के अनेक देशों, लोगों, जातीय समूहों को भी उनकी मूल संस्कृति वापस मिलेगी। विश्व मानवता को भारत का यह अप्रतिम उपहार होगा।
इसी काम की एक कड़ी के रूप में कभी भारत के दिल, पूर्वांचल के दो प्रसिद्ध नगरों, पुराने ज़फराबाद और पुराने जौनपुर के इतिहास का भी अध्ययन किया गया है। इन नगरों को मध्यकाल में पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। मध्यकाल के पहले ये दोनों नगर भगवती तारा, अष्ट तारा, बौद्ध तारा , काली व दस महाविद्या की अन्य देवियों के बड़े उपासना स्थल थे। हिन्दू और बौद्ध ताराओं का आपसी मिलान भी संभवतः यहीं हुआ। कई शुल्ब और श्रौत सूक्त भी यहां लिखे गए।
रविवार, ३१ मई, २०२६ को, शाम ५ से ८.३० , श्री एल आर तिवारी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग (कमिश्नर बंगले के पास , कनकिया पार्क, मीरा रोड (पूर्व), ठाणे) हम तारा, बौद्ध तारा और दस महाविद्या की अन्य देवियों के मूल स्वरूप , मूल उपासना पद्धति और उनके वैश्विक फैलाव की एक झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। हिन्दू तारा के गीत को सुविख्यात ध्रुपद उस्ताद पद्मश्री फ़ैयाज़ वासिफुद्दीन डागर और बौद्ध तारा के धारणा मन्त्रों को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के अध्यक्ष रहे पद्मश्री डॉ. ऋत्विक सान्याल ने गाया है।
ज़फराबाद में स्वत्व की रक्षा के लिए राजकुमारी अनंगिता ने आत्मोत्सर्ग भी किया था। आठ-सवा आठ सौ साल हो गये, लेकिन ज़फराबाद ने इस उत्सर्ग को विस्मृत नहीं किया। न कोई मंदिर, न कोई अन्य स्मृति चिह्न, लेकिन बच्चा-बच्चा राजकुमारी अनंगिता को याद करता है। उनसे जुड़े गीत को पद्मश्री डॉ. सोमा घोष प्रस्तुत कर रही हैं।
भारत की इंद्रपुरी, शिराज-ए-हिंद कहे गए ज़फराबाद और जौनपुर। शर्की सुलतान गंधर्वराज हुसैन शाह ने पुराने सांस्कृतिक फलक को ईरानी राग-रागिनियों से मिला कर कई नए राग-रागिनियों की रचना की। उन्हें आगे बढ़ाने के लिए पूर्वांचल के आदि वाद्यों में से एक सारंगी भी इस सांस्कृतिक वितान से जुड़ी। सो, राग जौनपुरी, आसावरी, छोटे-बड़े खयाल आदि की भी सारंगी पर एक जबरदस्त प्रस्तुति है। अपने पिता सुप्रसिद्ध सारंगी वादक उ. साबरी खान की स्मृति में उ. कमाल खान सारंगी बजा रहे हैं। तबले पर उन्हें सुप्रद्ध तबला वादक उ. फज़ल कुरैशी संगत दे रहे हैं।
अद्भुत है यह आयोजन। आपकी सहभागिता सनातन धर्म की वैश्विक स्थापना के हमारे संकल्प को आगे बढ़ाएगी।
सादर,
प्रो बी पी सिंह , ठाकुर विलेज, कांदीवली; ओम प्रकाश, पत्रकार, बोरीवली
श्याम जी मिश्र, वलसाड ; संजय तिवारी कश्यप, लोखंडवाला
शैलेन्द्र सिंह, बोरीवली; वसंत चुडासमा, जोगेश्वरी