पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान

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पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान, Non-Governmental Organization (NGO), ३/५६, विकास, राजेंद्र नगर , बोरीवली ( पूर्व) , मुंबई-४०००६६, Mumbai.

पूर्वांचल के आर्थिक-औद्योगिक विकास व उसके लिए जरूरी सामाजिक-सांस्कृतिक बदलाव का मंच। अभी संस्था द्वारा ज़फराबाद और जौनपुर के इस्लाम पूर्व अतीत को खोज कर उसे फिर से स्थापित करने के उद्देश्य से ज़फराबाद जौनपुर आख्यान नाम की ऐतिहासिक फिल्म बनाई जा रही है। पूर्वांचल सदियों-सदियों से प्रवास और प्रव्रजन की पीड़ा झेल रहा है। देश के कई दूसरे हिस्से भी इस त्रासदी के शिकार रहे हैं। पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठा

न का उद्देश्य पूर्वांचल व देश के दूसरे प्रवास और प्रव्रजन प्रभावित इलाकों के आर्थिक-औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना व उसके लिए जरूरी सामाजिक-सांस्कृतिक जमीन बनाना है।

२०१५ की वह घटना भूली नहीं जा सकती जब उत्तर प्रदेश में चतुर्थ श्रेणी की ३६८ भर्तियों के लिए २३ लाख से अधिक लोगों ने आवेदन किये, जिनमें पीएचडी किये लोग भी शामिल थे। स्थितियां बदल रही हैं, लेकिन आबादी का बोझ स्थितियों को बहुत बदलने नहीं देता। इसके लिए आर्थिक-औद्योगिक विकास के कामों के अलावा सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर पर भी बड़े बदलाव की जरूरत है।

२०१५ से पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान भोजपुरी मनोरंजन उद्योग में फ़ैली अश्लीलता के खिलाफ, शादी-व्याह में दहेज़ और दिखावे के खिलाफ और भारतीय भाषाओँ को मज़बूत करने और हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के तीन बहुत प्रभावी अभियान चला रहा है। अभी इन कामों के साथ-साथ पूर्वांचल के सांस्कृतिक विकास को गति देने के लिए `जफराबाद स्टोरी: एक खोये हुए शहर को फिर से बसाने का सपना ' नाम की ड्रामा डाक्यूमेंट्री फिल्म बना रहे हैं। इस फिल्म का उद्देश्य जफराबाद के पुराने इतिहास को जानना और जागृत करना है।

१३२१ में जफ़र शाह तुगलक ने इस नगर को इस तरह ध्वस्त किया था कि पुरानी संस्कृति के एक भी अवशेष नहीं छोड़े गए। नगर का नाम भी बदल दिया गया। हम इस ध्वंश के पहले के नगर को सामने ला रहे हैं। और जिन चीजों को ध्वस्त कर दिया गया, उनकी पुनः प्रस्तुति कर रहे हैं। साथ ही, पुरानी संस्कृति की एक ही निशानी बची है, मनहेच किले के कुछ टीले, जिन पर तेजी से अतिक्रमण हो रहा है, पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान की ओर से उसे बचाने और उत्तर प्रदेश सरकार से वहां पूर्वांचल का शौर्य तीर्थ बनाने की मांग की जा रही है।

प्रतिष्ठान की ओर से जफराबाद का पुराना नाम बहाल किये जाने की भी मांग की जा रही है।
इन मांगों के समर्थन में जन अभियान भी चलाया जा रहा है।

साथ ही, दो प्रोजेक्ट्स पर और काम चल रहा है। एक तो जौनपुर का इतिहास सामने लाकर उसके जरिये नाग सर्किट को सामने लाना है। वह नागमाता जरत्कारु का केंद्र है। दूसरे, स्वर विज्ञान के आधार पर राम कथा से जुड़े विभिन्न स्थलों की भी निशानदेही की जा रही है। ये तीनों काम पूर्वांचल के सांस्कृतिक विकास को मज़बूती देंगे। और, इस तरह के दूसरे कामों के लिए भी प्रेरक बनेंगे। साथ ही, रामकथा को लेकर जो विवाद खड़े कर दिए जाते हैं, साहित्य, समाज और संस्कृति को उन विवादों से भी मुक्ति मिलेगी।

हम लोगों ने पूर्वांचल के लगभग १२ स्थलों को इतिहास की मैपिंग के लिए चुना है। इनमें फैज़ाबाद और आजमगढ़ का निज़ामबाद व अवंतिकापुरी शामिल हैं।

इन कामों हम लोग निरंतरता, समग्रता और प्रमाणिकता के साथ कर सकें, इसलिए साथ, समर्थन और सहयोग की अपील है।

हम इतिहास को समाज को जागृत करने के उद्देश्य से देख रहे हैं। हमारे काम के स्वरूप को स्पष्ट करता जफराबाद स्टोरी : एक खोये हुए नगर को फिर से बसाने का सपन का समापन गीत देखें ---

माथा झुका हुआ है
आँखें झुकी पड़ी हैं।

किसने छीन लिए मेरे जिरह और बख्तर
किसने हर लिया मेरा शौर्य
किसने कर दिया मुझे निःशब्द
बोलो बोलो ऐ वक्त के पन्नो बोलो
किसने छीन लिया मेरी जड़ों से खाद पानी मिट्टी
विलुप्ति की कगार पर कैसे सूखा पड़ा मैं अभिशप्त
तकदीर का यह था कोई द्वंद्व?
या थी मेरी ही कोई गलती ?

रोशनी जो बंद है,
खोल दो उसके कपाट.

इस पराजय से उठो
इतिहास की यह चाह है।

सदियों सदियों तक नभ में गूंजते थे मेरे पदचाप
उगता था सूरज तो पूछता था, कहां उगूं मेरे मनमीत
नक्षत्र मंडल में जब कोई निकलती थी नयी रोशनी -सीधे पूछती थी मेरे घर का पता
सदियों सदियों तक अमिट थी मेरी धर्मोपदेशना, जय. पराजय, जीवन की मेरी व्याख्या
बोलो बोलो ऐ भगवती बोलो
बोलो बोलो ऐ गोमती बोलो
बोलो बोलो बोलो ऐ राजा हरिचंद
नियति का कोई कुचक्र था?
या मुझसे ही हुई कोई भूल ?

कंठ जो अवरुद्ध हैं
आरोह उनके तान दो

माथा झुका हुआ है
आँखें झुकी पड़ी हैं।

इस पराजय से उठो
इतिहास की यह चाह है।---

प्रिय भाई,  पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा इतिहास, पुरातत्व, भाषा विज्ञान आदि की नयी  जानकारियों के आधार पर वेदों और ...
17/05/2026

प्रिय भाई,
पूर्वांचल विकास प्रतिष्ठान द्वारा इतिहास, पुरातत्व, भाषा विज्ञान आदि की नयी जानकारियों के आधार पर वेदों और पुराणों का भाष्य किया जा रहा है। इससे वैश्विक स्तर पर नष्ट हो गए सनातन धर्म के कई मूल केंद्र तो फिर से स्थापित होंगे ही, दुनिया के अनेक देशों, लोगों, जातीय समूहों को भी उनकी मूल संस्कृति वापस मिलेगी। विश्व मानवता को भारत का यह अप्रतिम उपहार होगा।

इसी काम की एक कड़ी के रूप में कभी भारत के दिल, पूर्वांचल के दो प्रसिद्ध नगरों, पुराने ज़फराबाद और पुराने जौनपुर के इतिहास का भी अध्ययन किया गया है। इन नगरों को मध्यकाल में पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। मध्यकाल के पहले ये दोनों नगर भगवती तारा, अष्ट तारा, बौद्ध तारा , काली व दस महाविद्या की अन्य देवियों के बड़े उपासना स्थल थे। हिन्दू और बौद्ध ताराओं का आपसी मिलान भी संभवतः यहीं हुआ। कई शुल्ब और श्रौत सूक्त भी यहां लिखे गए।

रविवार, ३१ मई, २०२६ को, शाम ५ से ८.३० , श्री एल आर तिवारी कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग (कमिश्नर बंगले के पास , कनकिया पार्क, मीरा रोड (पूर्व), ठाणे) हम तारा, बौद्ध तारा और दस महाविद्या की अन्य देवियों के मूल स्वरूप , मूल उपासना पद्धति और उनके वैश्विक फैलाव की एक झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। हिन्दू तारा के गीत को सुविख्यात ध्रुपद उस्ताद पद्मश्री फ़ैयाज़ वासिफुद्दीन डागर और बौद्ध तारा के धारणा मन्त्रों को बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के अध्यक्ष रहे पद्मश्री डॉ. ऋत्विक सान्याल ने गाया है।

ज़फराबाद में स्वत्व की रक्षा के लिए राजकुमारी अनंगिता ने आत्मोत्सर्ग भी किया था। आठ-सवा आठ सौ साल हो गये, लेकिन ज़फराबाद ने इस उत्सर्ग को विस्मृत नहीं किया। न कोई मंदिर, न कोई अन्य स्मृति चिह्न, लेकिन बच्चा-बच्चा राजकुमारी अनंगिता को याद करता है। उनसे जुड़े गीत को पद्मश्री डॉ. सोमा घोष प्रस्तुत कर रही हैं।

भारत की इंद्रपुरी, शिराज-ए-हिंद कहे गए ज़फराबाद और जौनपुर। शर्की सुलतान गंधर्वराज हुसैन शाह ने पुराने सांस्कृतिक फलक को ईरानी राग-रागिनियों से मिला कर कई नए राग-रागिनियों की रचना की। उन्हें आगे बढ़ाने के लिए पूर्वांचल के आदि वाद्यों में से एक सारंगी भी इस सांस्कृतिक वितान से जुड़ी। सो, राग जौनपुरी, आसावरी, छोटे-बड़े खयाल आदि की भी सारंगी पर एक जबरदस्त प्रस्तुति है। अपने पिता सुप्रसिद्ध सारंगी वादक उ. साबरी खान की स्मृति में उ. कमाल खान सारंगी बजा रहे हैं। तबले पर उन्हें सुप्रद्ध तबला वादक उ. फज़ल कुरैशी संगत दे रहे हैं।

अद्भुत है यह आयोजन। आपकी सहभागिता सनातन धर्म की वैश्विक स्थापना के हमारे संकल्प को आगे बढ़ाएगी।

सादर,

प्रो बी पी सिंह , ठाकुर विलेज, कांदीवली; ओम प्रकाश, पत्रकार, बोरीवली
श्याम जी मिश्र, वलसाड ; संजय तिवारी कश्यप, लोखंडवाला
शैलेन्द्र सिंह, बोरीवली; वसंत चुडासमा, जोगेश्वरी

12/05/2026
महाकाव्य वृत्तचित्र ` सनातन धर्म: एक खोज ' में हम सनातन धर्मों के मूल स्थानों, अवधारणाओं और पूजा पद्धतियों आदि की खोज और...
11/05/2026

महाकाव्य वृत्तचित्र ` सनातन धर्म: एक खोज ' में हम सनातन धर्मों के मूल स्थानों, अवधारणाओं और पूजा पद्धतियों आदि की खोज और उसकी पुनः प्रस्तुति कर रहे हैं। यह काम वेदों और पुराणों के भाष्य पर आधारित है। और संभवतः, वेदों और पुराणों के अध्ययन की दिशा में महर्षि पाणिनि के किये काम के बाद का सबसे बड़ा काम है। इससे पूरी दुनिया का पुराना इतिहास और धर्म और अध्यात्म की बहुत सारी अवधारणाएं बदल जाने वाली हैं। हमारी वर्तमान जिंदगी पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। यह काम विश्व मानवता को एक अद्भुत उपहार होगा।

इस काम का कथा-सूत्र भारत के ह्रदय स्थल के दो इंद्रपुरी के समान नगरों, पुराने ज़फराबाद और पुराने जौनपुर की खोज से जुड़ा है, जिन्हें मध्यकाल के झंझावात में तुगलक और शर्की सल्तनत द्वारा पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। हम उस अतीत को जानने और फिर से स्थापित करने, स्मृतियों और अवशेषों आदि के संरक्षण का भी प्रयास कर रहे हैं। यह एक बड़ा काम है, और क्रमशः हो रहा है।

अपने शोध को हम वृत्तचित्र के जरिये तो सामने रख ही रहे हैं, बात स्थिर हो, लोगों के मन में उतरे, सोच में बदले , उसके लिए हम इसे प्रदर्शनों, व्याख्यानों आदि के जरिये भी कह रहे हैं। इस सीधे संवाद को हम, २७ मई को शाम ५ से ८ , विरंगुळा केंद्र , इंदिरा गांधी अस्पताल भवन, पूनम सागर कॉम्प्लेक्स, मीरा रोड ( पूर्व) में शुरू कर रहे हैं। जिसमें जौनपुर की पुरानी देवियों तारा, अष्ट तारा, तुरे और दस महाविद्या की देवियों का जिक्र होगा। बौद्ध तारा को पद्मश्री डॉ. ऋत्विक सान्याल और हिन्दू तारा को पद्मश्री फ़ैयाज़ वसीफुद्दीन डागर ने गाया है। तारा के आदि गीत , दुनिया के प्रथम प्रेम गीत इनाना के पाताल लोक जाने की कथा को श्री कुलदीप सिंह जी धुन दे रहे हैं।

राग जौनपुरी को मध्यकाल में शर्की सुल्तान हुसैन शाह ने ईज़ाद किया। संगीत प्रेमी इस सुलतान ने गंधर्व की उपाधि धारण की थी। उन्होंने भारत और ईरान के रागों को मिला कर कई राग-रागिनियों की भी रचना की। इस संगीत- राग जौनपुरी और आसावरी को विदुषी अमृता काळे प्रस्तुत कर रही हैं।

हम आपको इस कार्यक्रम से जुड़ने का बहुत भावभीना निमंत्रण दे रहे हैं।

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