Akhil Bharatiya Vanvasi Kalyan Ashram

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त्रिपुरा के संत, समाज जागरण के प्रेरणास्रोतपूज्य शांति काली महाराज जी की जयंती पर कोटिशः नमन।धर्म, सेवा और समाज जागरण को...
15/06/2026

त्रिपुरा के संत, समाज जागरण के प्रेरणास्रोत
पूज्य शांति काली महाराज जी की जयंती पर कोटिशः नमन।

धर्म, सेवा और समाज जागरण को जीवन का ध्येय बनाकर उन्होंने जनजातीय समाज में आत्मगौरव एवं सांस्कृतिक चेतना का कार्य किया। विपरीत परिस्थितियों में भी समाज के बीच रहकर कार्य करते हुए उन्होंने अपने जीवन को समर्पित किया।

त्रिपुरा के विभिन्न क्षेत्रों में आश्रमों एवं सेवा केन्द्रों के माध्यम से उन्होंने समाज संगठन, धार्मिक जागरण और सांस्कृतिक संरक्षण का कार्य किया। जनजातीय समाज के बीच शिक्षा, सेवा और अपनी परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए। कठिन परिस्थितियों और उग्रवाद के दौर में भी उन्होंने समाज के बीच रहकर कार्य जारी रखा। उनका मानना था कि समाज का उत्थान केवल उपदेश से नहीं बल्कि सेवा, संगठन और संस्कार से होता है।

उनका जीवन हमें सेवा, साहस और अपने मूल्यों के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।

“धर्म केवल आस्था नहीं, समाज के प्रति उत्तरदायित्व भी है।”

🌺 नागा वीर हेपाऊ जादोनांग  🌺10 जून 1905 को मणिपुर के पुइलोन (कंबिरोन) ग्राम में जन्मे हेपाऊ जादोनांग केवल एक स्वतंत्रता ...
10/06/2026

🌺 नागा वीर हेपाऊ जादोनांग 🌺

10 जून 1905 को मणिपुर के पुइलोन (कंबिरोन) ग्राम में जन्मे हेपाऊ जादोनांग केवल एक स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि नागा समाज के आध्यात्मिक मार्गदर्शक, समाज सुधारक और सांस्कृतिक अस्मिता के रक्षक थे।

जब अंग्रेजी शासन, अत्यधिक कर व्यवस्था और ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण प्रयासों से नागा समाज की परंपराएं संकट में थीं, तब जादोनांग ने हराक्का आंदोलन का नेतृत्व कर समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने नागा समाज में आत्मविश्वास, एकता और स्वाभिमान का संचार किया तथा लोगों को अन्यायपूर्ण करों और औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध संगठित किया।

उन्होंने एक स्वतंत्र "नागा राज" का स्वप्न देखा, जहाँ जनजातीय समाज अपनी संस्कृति, आस्था और परंपराओं के साथ स्वतंत्र जीवन जी सके। उनके बढ़ते प्रभाव से भयभीत अंग्रेजों ने झूठे आरोपों में उन्हें गिरफ्तार किया और मात्र 26 वर्ष की आयु में 29 अगस्त 1931 को इम्फाल में फांसी दे दी।

उनका बलिदान व्यर्थ नहीं गया। उनकी शिष्या Rani Gaidinliu ने उनके अधूरे कार्य को आगे बढ़ाया और जनजातीय जागरण की ज्योति को प्रज्ज्वलित रखा।

आज हम उस महान जननायक को नमन करते हैं जिसने अपने धर्म, संस्कृति, समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया।

🙏 हेपाऊ जादोनांग अमर रहें!

09/06/2026
06/06/2026

🌳 विश्व पर्यावरण दिवस 2026 🌳

जनजाति विकास समिति नागालैंड के डिमापुर, चुमुकेदिमा एवं विस्तारित डिमापुर जिले की 19 ग्राम परियोजनाओं में 306 सहभागियों द्वारा 378 पौधों का रोपण किया गया। 🌱

हर पौधा प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी और आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य का संकल्प है।

🙏 सभी आचार्यों, विद्यार्थियों एवं कार्यकर्ताओं का अभिनंदन।

06/06/2026

॥ૐ॥5 सितम्बर 1730 इतिहास-स्मृति पर्यावरण संरक्षण हेतु अनुपम बलिदानप्रतिवर्ष पांच जून को हम ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाते ह...
05/06/2026

॥ૐ॥

5 सितम्बर 1730 इतिहास-स्मृति पर्यावरण संरक्षण हेतु अनुपम बलिदान

प्रतिवर्ष पांच जून को हम ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ मनाते हैं; लेकिन यह दिन हमारे मन में सच्ची प्रेरणा नहीं जगा पाता। क्योंकि इसके साथ इतिहास की कोई प्रेरक घटना के नहीं जुड़ी। इस दिन कुछ जुलूस, धरने, प्रदर्शन, भाषण तो होते हैं; पर उससे सामान्य लोगों के मन पर कोई असर नहीं होता। दूसरी ओर भारत के इतिहास में पाँच सितम्बर, 1730 को एक ऐसी घटना घटी है, जिसकी विश्व में कोई तुलना नहीं की जा सकती।

राजस्थान तथा भारत के अनेक अन्य क्षेत्रों में बिश्नोई समुदाय के लोग रहते हैं। उनके गुरु जम्भेश्वर जी ने अपने अनुयायियों को हरे पेड़ न काटने, पशु-पक्षियों को न मारने तथा जल गन्दा न करने जैसे 29 नियम दिये थे। इन 20 + 9 नियमों के कारण उनके शिष्य बिश्नोई कहलाते हैं।

पर्यावरण प्रेमी होने के कारण इनके गाँवों में पशु-पक्षी निर्भयता से विचरण करते हैं। 1730 में इन पर्यावरण-प्रेमियों के सम्मुख परीक्षा की वह महत्वपूर्ण घड़ी आयी थी, जिसमें उत्तीर्ण होकर इन्होंने विश्व-इतिहास में स्वयं को अमर कर लिया।

1730 ई. में जोधपुर नरेश अजय सिंह को अपने महल में निर्माण कार्य के लिए चूना और उसे पकाने के लिए ईंधन की आवश्यकता पड़ी। उनके आदेश पर सैनिकों के साथ सैकड़ों लकड़हारे निकटवर्ती गाँव खेजड़ली में शमी वृक्षों को काटने चल दिये।

जैसे ही यह समाचार उस क्षेत्र में रहने वाले बिश्नोइयों को मिला, वे इसका विरोध करने लगेे। जब सैनिक नहीं माने, तो एक साहसी महिला ‘इमरती देवी’ के नेतृत्व में सैकड़ों ग्रामवासी; जिनमें बच्चे और बड़े, स्त्री और पुरुष सब शामिल थे; पेड़ों से लिपट गये। उन्होंने सैनिकों को बता दिया कि उनकी देह के कटने के बाद ही कोई हरा पेड़ कट पायेगा।

सैनिकों पर भला इन बातों का क्या असर होना था ? वे राजज्ञा से बँधे थे, तो ग्रामवासी धर्माज्ञा से। अतः वृक्षों के साथ ही ग्रामवासियों के अंग भी कटकर धरती पर गिरने लगे। सबसे पहले वीरांगना ‘इमरती देवी’ पर ही कुल्हाड़ियों के निर्मम प्रहार हुए और वह वृक्ष-रक्षा के लिए प्राण देने वाली विश्व की पहली महिला बन गयी।

इस बलिदान से उत्साहित ग्रामवासी पूरी ताकत से पेड़ों से चिपक गये। 20वीं शती में गढ़वाल (उत्तराखंड) में गौरा देवी, चण्डीप्रसाद भट्ट तथा सुन्दरलाल बहुगुणा ने वृक्षों के संरक्षण के लिए ‘चिपको आन्दोलन’ चलाया, उसकी प्रेरणास्रोत इमरती देवी ही थीं।

भाद्रपद शुक्ल 10 (5 सितम्बर, 1730) को प्रारम्भ हुआ यह बलिदान-पर्व 27 दिन तक चलता रहा। इस दौरान 363 लोगों ने बलिदान दिया। इनमें इमरती देवी की तीनों पुत्रियों सहित 69 महिलाएँ भी थीं। अन्ततः राजा ने स्वयं आकर क्षमा माँगी और हरे पेड़ों को काटने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। ग्रामवासियों को उससे कोई बैर तो था नहीं, उन्होंने राजा को क्षमा कर दिया।

उस ऐतिहासिक घटना की याद में आज भी वहाँ ‘भाद्रपद शुक्ल 10’ को बड़ा मेला लगता है। राजस्थान शासन ने वन, वन्य जीव तथा पर्यावरण-रक्षा हेतु ‘अमृता देवी बिश्नोई स्मृति पुरस्कार’ तथा केन्द्र शासन ने ‘अमृता देवी बिश्नोई पुरस्कार’ देना प्रारम्भ किया है। यह बलिदान विश्व इतिहास की अनुपम घटना है। इसलिए यही तिथि (भाद्रपद शुक्ल 10 या पाँच सितम्बर) वास्तविक ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ होने योग्य है।

संकलनकर्ता ✍ योगेश पारेख

30/05/2026

#तू_मै_एक_रक्त
#जनजाति_गौरव

धन्यवाद !माननीय प्रधानमंत्री महोदय...
28/05/2026

धन्यवाद !
माननीय प्रधानमंत्री महोदय...

नई दिल्ली में आज जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधियों से मुलाकात का अवसर मिला। आदिवासी समाज के लिए इनका समर्पण भाव बहुत सराहनीय है। इस दौरान जनजातीय समुदायों के विकास और उनके सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।

जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधि मंडल ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से भेंट कर जनजाति समाज के संदर्भ में विविध ...
28/05/2026

जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधि मंडल ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी से भेंट कर जनजाति समाज के संदर्भ में विविध विषयों पर उनसे चर्चा की। जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक श्री गणेश राम भगत जी एवं विभिन्न मान्यवरों ने प्रधानमंत्री जी का स्वागत किया।

जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधि मंडल ने आज महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी से भेंट कर जनजाति के संदर...
28/05/2026

जनजाति सुरक्षा मंच के प्रतिनिधि मंडल ने आज महामहिम राष्ट्रपति महोदया श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी से भेंट कर जनजाति के संदर्भ में विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

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