Aum Srijan - YOGA & Ayurveda

Aum Srijan - YOGA & Ayurveda Astitva- YOGA & Ayurveda is a studio where different bodies, stories and intentions are gathered together for their practice. When in doubt, just ask!

A place where all levels of yoga are not only offered but welcomed! You can experience several styles brought by our Teachers. Class Descriptions:-
Below you will find descriptions of what to expect in our classes. All classes on the schedule have a number indicating what level of practice each class is geared towards. ‘All levels’ is suitable for newer yogis whereas a level 2 or 3 class is geare

d towards students already knowledgeable of poses and are searching for more of a challenge. For people completely new to yoga, we recommend our Beginner’s Series on Saturday mornings. It is a six-week introduction to get a foundation with basic yoga poses, breathing techniques and overall personal awareness. We seek to provide our community with a wide array of class types and teachers. If you feel there is something we may be missing, we’d love to hear from you!

26/10/2025

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25/10/2025

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25/10/2025
*सूजी के फायदे जानकर चौंक जाएंगे*  1. सूजी या रवे में फाइबर के साथ विटामिन ई, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स के अलावा अन्य पोषक ...
05/04/2023

*सूजी के फायदे जानकर चौंक जाएंगे*

1. सूजी या रवे में फाइबर के साथ विटामिन ई, विटामिन बी कॉम्प्लेक्स के अलावा अन्य पोषक तत्व भी होते हैं, जो सेहत से जुड़े कई फायदे देते हैं।

2. सूजी हल्की होने के कारण आसानी से पच जाता है और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा नहीं करता। पेट भी आसानी से साफ होता है।

3. सूजी में वसा नहीं होता, जिससे आपका वजन बढ़ने का सवाल ही नहीं उठता, बल्कि यह वजन कम करने में मददगार साबित हो सकता है।

4. सूजी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स बहुत कम होता है, जो शरीर में शर्करा की मात्रा नहीं बढ़ाता और डायबिटीज रोगियों के लिए फायदेमंद होता है।

5. यह एक हल्का आहार है, जो आपके शरीर की ऊर्जा को नहीं चुराता, बल्कि इसे खाने के बाद आप भारीपन महसूस करने के बजाए हल्का ही महसूस करते हैं।

6. सूजी का हलवा, इडली, उत्तपम, ढोकला, उपमा आदि को हेल्दी ब्रेकफास्ट के तौर पर उपयोग में लाया जाता है, जो कि खाने में बहुत लाइट होने के कारण सेहत को फायदा पहुंचाता है।

7. इसके अलावा सूजी के सेवन से जहां शरीर में एनर्जी बनी रहती है, वहीं यह हार्ट के लिए लाभदायी है तथा एनीमिया रोग में भी फायदेमंद है। अत: सूजी को हल्का और पौष्ट‍िक भोजन के रूप में अपने खाने में शामिल किया जा सकता है।

18/01/2023

स्वाधिष्ठान चक्र - त्रिक चक्र
नाभि चक्र - स्वाधिष्ठासन चक्र

प्रतीक: स्वाधिष्ठान चक्र या त्रिक चक्र का प्रतीक कई मंडलियों, एक वर्धमान चंद्रमा और छह कमल के फूल की पंखुड़ियों से बना है। वृत्त और वर्धमान चंद्रमा जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म की चक्रीय प्रकृति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि 6 पंखुड़ियाँ हमारी प्रकृति के 6 नकारात्मक पहलुओं को चित्रित करती हैं जिन्हें हमें इस चक्र को खोलने के लिए दूर करने की आवश्यकता है।

रंग: नारंगी

तत्व: जल

स्थान: स्वाधिष्ठान चक्र, जिसे आमतौर पर सैक्रल चक्र के रूप में जाना जाता है, पेट के निचले हिस्से में, नाभि से लगभग चार अंगुल नीचे स्थित होता है। इसकी विशेषताओं में कामुकता के साथ-साथ रचनात्मकता और आत्म-मूल्य की बुनियादी आवश्यकता शामिल है।

एक अवरुद्ध / असंतुलित त्रिक चक्र के लक्षण: जब त्रिक चक्र असंतुलित होता है, तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से विस्फोटक और चिड़चिड़ा महसूस कर सकता है, ऊर्जा और रचनात्मकता की कमी महसूस कर सकता है, चालाकी महसूस कर सकता है, या यौन विचारों से ग्रस्त हो सकता है।

संतुलित त्रिक चक्र के लक्षण: संतुलित होने पर, यह व्यक्ति को अधिक जीवंत, खुश, सकारात्मक, संतुष्ट, दयालु और सहज महसूस कराता है।

मंत्र : स्वाधिष्ठान चक्र का बीज मंत्र (बीज मंत्र) 'वं' है।

त्रिक चक्र को सक्रिय करने के लिए योगासन: आप स्वाधिष्ठान चक्र को संतुलित करने के लिए क्रो पोज (काकासन) या ट्राइएंगल पोज (त्रिकोणासन) जैसे पोज का अभ्यास कर सकते हैं ।

18/01/2023

प्रतीक चिन्ह
लम बीज मंत्र
आस्था चिकित्सक>चक्र संतुलन>लम बीज मंत्र
मूल चक्र लम बीज मंत्र

रूट चक्र ध्यान या मूलाधार चक्र उपचार और सक्रियण के लिए मंत्र
आपकी ध्यान यात्रा रूट चक्र ध्यान से शुरू होती है और ध्वनि LAM बीज मंत्र है। संस्कृत भाषा में 'बीज' शब्द का अर्थ बीज होता है। कुल मिलाकर सात प्रमुख चक्र हैं , प्रत्येक चक्र एक विशेष ध्वनि आवृत्ति के साथ कंपन करता है। प्रत्येक चक्र का एक विशेष बीज (बीज) मंत्र होता है। चक्र बीज मंत्र ध्यान करना आपके चक्रों को संतुलित और ठीक करने का सबसे कारगर तरीका है

रूट चक्र पर एक संक्षिप्त

मूल चक्र सात प्रमुख चक्रों में सबसे निचला चक्र है और इसे मूल चक्र भी कहा जा सकता है। मूलाधार चक्र का संस्कृत नाम मूलाधार चक्र है। मूलाधार शब्द को 'मूल' में विभाजित किया जा सकता है जिसका अर्थ है जड़ और 'अधारा' का अर्थ है आधार।
यह चक्र इस दुनिया में हमारे अस्तित्व और सुरक्षा की भावना के लिए जिम्मेदार है। उत्तरजीविता एक मौलिक वृत्ति है लेकिन फिर भी सबसे उपेक्षित है!
जड़ चक्र आपके भ्रूण अवस्था की भावनाओं और आपकी शैशवावस्था और प्रारंभिक बचपन की छापों को वहन करता है। शैशवावस्था और प्रारंभिक बचपन के दौरान अच्छी तरह से देखभाल की भावना और सुरक्षित महसूस करना, ये सभी आपके मूल चक्र में दर्ज हो जाते हैं। इसे एरिक एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास के चरणों में से एक के साथ सहसंबद्ध किया जा सकता है । पहला चरण, 'विश्वास बनाम अविश्वास' आपके रूट चक्र पर परिलक्षित होता है। यदि आपकी शैशवावस्था और प्रारंभिक बाल्यावस्था के दौरान अच्छी देखभाल की गई थी तो आप दुनिया के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ बड़े होते हैं और महसूस करते हैं कि इस पर भरोसा किया जा सकता है।
हमारी बुनियादी जरूरतें जैसे भोजन, आश्रय, सुरक्षा और सुरक्षित महसूस करना इसके साथ जुड़ा हुआ है।
एक अवरुद्ध रूट चक्र के शारीरिक लक्षण कंकाल की समस्याएं, आंतों के मुद्दे और प्रजनन संबंधी समस्याएं हैं।
लम बीज मंत्र

बीज मंत्रों का अनुवाद नहीं किया जा सकता है। वे विशेष स्पंदनात्मक आवृत्ति वाली ध्वनियाँ हैं। पूर्व-रिकॉर्डेड निर्देशित ध्यान के साथ बीज मंत्र ध्यान करना आपके चक्र ध्यान की प्रभावशीलता को बढ़ा सकता है. LAM एक एकल शब्दांश ध्वनि है। एलएएम ध्वनि कंपन रूट चक्र की कंपन आवृत्ति के साथ प्रतिध्वनित होती है। एलएएम ध्वनि जड़ चक्र की रुकावटों को साफ करती है। तो LAM बीज मंत्र का जप करने से आपका रूट चक्र उसकी आवृत्ति के साथ प्रतिध्वनित हो जाएगा और इस प्रकार रुकावटों को दूर करने में सक्षम हो जाएगा, जिस तरह से एक विशेष आवृत्ति का ट्यूनिंग फोर्क जब मारा जाता है तो उसकी आवृत्ति के साथ मेल खाने वाला यंत्र इसके साथ प्रतिध्वनित होता है। जब आप कम आत्मसम्मान, वित्तीय मुद्दों, भय और असुरक्षा से जूझ रहे हों तो एलएएम बीज मंत्र का जाप करना बहुत मददगार होता है। यह ऊर्जा अवरोधों को साफ करेगा और आप जमीन से जुड़े और सुरक्षित महसूस करेंगे। यह एक समृद्ध जीवन की ओर भी ले जाएगा।

02/10/2022

*नीम ऑइल के फायदे Neem Oil benefits*
1. *इंफेक्शन को दूर करें*
अगर आपके शरीर में कहीं भी फंगल इंफेक्शन हो रहा है तो बाजरू क्रीम की बजाय घर पर नीम का तेल बनाएं और उस जगह पर इस तेल को लगाएं. इससे फंगल में जल्द ही रोहत मिल सकती है.

2. *बालों के लिए है रामबाण*
बालों को हेल्दी, घने औऱ सिल्की बनाने के लिए आप न जाने क्या-क्या उपाय करते हैं लेकिन यहां आपके लिए रामबाण दवाई है नीम का तेज! यह तेल आपके बालों के लिए काफी असरदार हो सकता है. जो बालों को झड़ने से रोक सकता है. साथ ही बालों को घना और लंबा बनाने में भी मदद कर सकता है.

3. *गठिया में भी असरदार*
नीम के फलों और छालों का प्रयोग गठिया के इलाज लिए लाभकारी माना जाता है. गई गठिया रोगी नीम का प्रयोग बीमारी से राहत पाने में करते हैं! नीम के फल से निकाले गए तेल की मालिश करने से जोड़ो के दर्द में राहत मिल सकती है. पीठ के निचले हिस्से पर ऑस्टियोआर्थराइटिस के दर्द को कम करने के लिए नीम की पत्तियों का लेप भी लगाया जा सकता है.

4. *मच्‍छरों से छुटकारा*
मच्छर दब परेशान करते हैं तो आप बाजार से मच्छरों को भगाने के लिए दवाई ले आते हैं ऐसा न करके आप नीम के तेल से मच्छरों को आसानी से भगा सकते हैं. इसके लिए पानी में नीम के तेल को मिलाए और पूरे घर में स्प्रे से छिड़क दें...

02/10/2022

*💚पान*

पान का प्रयोग भारतवर्ष में सिर्फ़ खाने के लिए ही नहीं अपितु पूजन , यज्ञ तथा अतिथियों के स्वागत इत्यादि में भी किया जाता है , पान को औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है , जिससे आज हम आपका परिचय करने जा रहे हैं -------

1. मुँह के छालों के लिए पान के पत्तों के रस में शहद मिलाकर लगाने से लाभ होता है , यह प्रयोग दिन में दो -तीन बार किया जा सकता है |

2. घाव के ऊपर पान के पत्ते को गर्म करके बांधें तो सूजन और दर्द शीघ्र ही ठीक होकर घाव भी ठीक हो जाता है |

3. शरीर में होने वाली पित्ती होने पर , एक चम्मच फिटकरी को थोड़े से पानी में डालें , तीन खाने वाले पान के पत्ते लें | फिटकरी वाले पानी में मिलाकर इन पत्तों को पीस लें | इस मिश्रण को पित्ती के चिकत्तों पर लेप करें , लाभ होगा |

4. मोच आने पर पान के पत्ते पर सरसों का तेल लगाकर गर्म करें , फिर इसे मोच पर बांधें शीघ्र लाभ होगा |

02/10/2022

*मूत्र का बंद होना :-------*

1. नींबू के बीजो को पीसकर, नाभि पर रखकर ठंडा पानी डालें। इससे रूका मूत्र चालू हो जाता है ।

2. केले के तने कारस चार चम्मच और घी दो चम्मच मिलाकर सेवन करने से, रूका हुआ मूत्र चालू हो जाता है । यह मूत्रघात के लिए, उत्तम प्रयोग है । इस रस में मिला हुआ घी , पेट में नही रूक नही पाता है और मूत्र तुरंत आता है ।

3. मूली के पत्तों के रस में , 50 ग्राम रस में , चौथाई चम्मच सोडाबाई कार्ब मिलाकर सेवन करने से, रूकावट दूर होकर मूत्र खुल कर आता है । मूली का केवल सेवन करने से भी लाभ होता है ।

4. गर्मी में , कई कारणों से मूत्र में , अवरोध पैदा हो जाता है । इससे कारण से रोगी व्यक्ति की बैचेनी बढ़ जाती है । खीरे के 100 ग्राम रस में , 5 ग्राम मिलाकर सेवन करने से, धनिए का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से, मूत्र की रूकावट दूर होती है ।

5. ताजा नारियल के पानी में , पालक का रस समान मात्रा में मिलाकर, नित्य दो बार, सेवन करने से, मूत्र खुलकर आता है । पोटेशियम और नायट्रेट की उचित मात्रा शरीर को मिलने पर, मूत्र उचित मात्रा में आता रहता है ।

6. पत्तागोभी की सब्जी , घी में छौककर सेवन करें ।

7. 50 ग्राम प्याज के टुकडे़, एक किलो पानी में उबालें। इसको छानकर, स्वादानुसार शहद मिलाकर, तीन बार दिन में , सेवन करें ।

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29/08/2022

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