श्री Զเमपालकी महोत्सव कुर्ला

  • Home
  • India
  • Mumbai
  • श्री Զเमपालकी महोत्सव कुर्ला

श्री Զเमपालकी महोत्सव कुर्ला ��||:धर्मो रक्षति रक्षितः||��

हर वर्ष 5 अगस्त हमें याद दिलाता है कि धैर्य, आस्था और सत्य की राह लंबी हो सकती है, लेकिन मंज़िल अवश्य मिलती है।    जय श्...
05/08/2026

हर वर्ष 5 अगस्त हमें याद दिलाता है कि धैर्य, आस्था और सत्य की राह लंबी हो सकती है, लेकिन मंज़िल अवश्य मिलती है।
जय श्री राम। 🙏🚩

केरल के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में तिनका- तिनका जोड़ कर  लोगों को पुनर्वास प्रदान करते स्वयंसेवक। भोजन, दवाइयां और अन्य आव...
05/08/2026

केरल के बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में तिनका- तिनका जोड़ कर लोगों को पुनर्वास प्रदान करते स्वयंसेवक।

भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ बेघर हुए लोगों का मनोबल भी बढ़ा रहे हैं।
यहां सेवाभाव, संकल्प और समर्पण ही जैसे स्वयंसेवकों की असली पहचान बन गए हैं।

अन्य सभी राजनैतिक कुशलताओं को छोड़ भी दिया जाए तो भी प्रशांत किशोर अपने लक्ष्य के प्रति हद से ज़्यादा ज़िद्दी , अति महत्...
04/08/2026

अन्य सभी राजनैतिक कुशलताओं को छोड़ भी दिया जाए तो भी प्रशांत किशोर अपने लक्ष्य के प्रति हद से ज़्यादा ज़िद्दी , अति महत्वाकांक्षी , अति-मेहनती , रिस्क टेकर और निडर राजनेता हैं।
2014 जीतने के बाद साधारण आदमी नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर पद या पैसे बनाने का सोचता लेकिन प्रशांत ने इसके ठीक उलट लैटरल एंट्री से भारत का कायपलट करने का सोचा।

नरेंद्र मोदी के यहाँ जुड़ने पर वहाँ पहले से स्थापित लोगों से तमाम विरोध झेलने के बावजूद वो डटे रहे ताकि जब सरकार आए तो ऐसी व्यवस्था बने लेकिन उस दिशा में काम नहीं हुआ तो नरेंद्र मोदी जब देवता माने जाते थे। उस समय उन्हें त्याग दिया।
नीतीश कुमार का हाथ उनके सबसे कमजोर राजनैतिक समय में पकड़ा। उन्हें मज़बूत किया लेकिन जदयू को फ्यूचरिस्टिक और डेमोक्रेटिक पार्टी बनाने के मिशन में जब उन्हें असहयोग मिला और नीतीश कुमार के आसपास के लोगों द्वारा पेट्टी इश्यूज में उन्हें घसीटा जाने लगा तो उसे छोड़ने में भी वक़्त नहीं लगाया।

आज वह उस साहिल पे खड़े हैं। जहाँ कश्ती भी उन्होंने ख़ुद बनाई है और उसके नाविक भी वे हैं।यहाँ से दरिया पार करते हैं तो सारा जहाँ उनके सपनों का है ….

🚩 रामायण सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं, हमारी पहचान है | Ramayana is not just a movie, it's our identity. 🚩🇮🇳मेरे लिए रामायण ही ...
02/08/2026

🚩 रामायण सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं, हमारी पहचान है | Ramayana is not just a movie, it's our identity. 🚩

🇮🇳
मेरे लिए रामायण ही भारत है और भारत ही रामायण।

अगर यह फ़िल्म भारत की संस्कृति, मर्यादा और सनातन धर्म को पूरी दुनिया तक पहुँचा रही है, तो यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। दुनिया में करोड़ों लोग बाइबल और क़ुरान के बारे में जानते हैं, लेकिन रामायण और सनातन परंपरा के बारे में उतना नहीं जानते। अगर इस फ़िल्म के माध्यम से दुनिया हमारे इतिहास और आदर्शों को जानती है, तो हमें इसका समर्थन करना चाहिए।

VFX पर सवाल उठ रहे हैं।
मेरे हिसाब से ये आदिपुरुष जैसे बिल्कुल भी नहीं हैं। क्या ये परफेक्ट हैं? शायद नहीं। लेकिन ट्रेलर देखकर मुझे अच्छे लगे।

साई पल्लवी माँ सीता के रूप में?
कुछ लोग कहते हैं कि वे माँ सीता जैसी नहीं लगतीं। लेकिन मेरे विचार से जिन्होंने ऐसा कहा है, उन्होंने शायद मिथिला की सादगी को करीब से नहीं देखा। माँ सीता के किरदार के लिए ऐसी अभिनेत्री की ज़रूरत थी जो सादगी, गरिमा और सहजता को स्वाभाविक रूप से निभा सके, जो बहुत ज़्यादा ग्लैमरस छवि पर निर्भर न हो और भूमिका की पवित्रता को बनाए रख सके। मेरी नज़र में साई पल्लवी इस भूमिका के लिए एक अच्छी पसंद हैं।

रणबीर कपूर भगवान श्रीराम के रूप में?
हो सकता है कुछ लोगों को कोई और अभिनेता बेहतर लगता, और यह उनकी राय हो सकती है। लेकिन मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह फ़िल्म भारत की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत कर रही है।

रामानंद सागर की रामायण?
वह हमेशा अमर रहेगी। मुझे 2008 में NDTV Imagine पर आई रामायण भी बहुत पसंद थी। लेकिन समय के साथ आगे बढ़ना भी ज़रूरी है। आज की Gen Z और आने वाली पीढ़ियाँ शायद पुरानी टीवी श्रृंखलाएँ न देखें, लेकिन एक नई सिनेमाई प्रस्तुति उन्हें रामायण से जोड़ सकती है।

कुल मिलाकर मुझे ट्रेलर बहुत अच्छा लगा। मैं यह फ़िल्म अपने परिवार के साथ थिएटर में ज़रूर देखने जाऊँगा।

आइए, कमियों पर चर्चा करें, लेकिन अपनी संस्कृति को दुनिया तक पहुँचाने वाली हर सकारात्मक कोशिश का समर्थन भी करें।

जय श्री राम। 🚩

02/08/2026

सेवक एवं सेविका का सर्वप्रथम कर्तव्य है कि वे अपने गुरु के श्रीचरणों में श्रद्धाभावपूर्वक तन, मन और धन का समर्पण करें। यही सच्ची गुरु-भक्ति, साधना और संगठन के प्रति समर्पण का परिचायक है। ✨️🚩🌷

01/08/2026

युवाओं को आजादी का असली मतलब नहीं भूलना चाहिए।

आजादी का मतलब कुछ भी करना नहीं होता है, इस आजादी को पाने के लिए बहुत लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी, इसलिए इसे हल्के में कभी मत लीजिए।

: अजित डोवाल, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

22 अप्रैल 2025 को अगर पप्पू यादव इसी भेष मे पहलगाम मे उपस्थित होते तो...पहलगाम मे जितने हिन्दू थे उन्होंने भगवा नहीं पहन...
01/08/2026

22 अप्रैल 2025 को अगर पप्पू यादव इसी भेष मे पहलगाम मे उपस्थित होते तो...

पहलगाम मे जितने हिन्दू थे उन्होंने भगवा नहीं पहना था इसलिए उनका धर्म पूछकर उनकी हत्या की गई थी, कलमा पढ़ने को कहा गया.. मारने वाले कौन थे सब को पता है

लेकिन तब मुस्लिम आतंकियों द्वारा पहलगाम की नृशंस आतंकी घटना पर एक भी विपक्षी सांसद की गोल टोपी पहन नुमाइश करने की औक़ात नहीं हुई

पर अयोध्या की चोरी की घटना पर इस हिस्ट्रीशीटर को आगे कर खुलेआम भगवा का अपमान कराया, ये महापाप है, और इस महापाप के नतीजे भी जरूर आएंगे !!

🇮🇳 अमर बलिदानी ऊधम सिंह जी की जयंती पर शत्-शत् नमन! 🇮🇳जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों के रक्त की पुकार को अपने हृदय में...
31/07/2026

🇮🇳 अमर बलिदानी ऊधम सिंह जी की जयंती पर शत्-शत् नमन! 🇮🇳

जलियांवाला बाग के निर्दोष शहीदों के रक्त की पुकार को अपने हृदय में संजोकर वीर ऊधम सिंह जी ने वर्षों तक प्रतिज्ञा को जीवित रखा। 13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्सटन हॉल में उन्होंने जलियांवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब के लेफ्टिनेंट-गवर्नर रहे माइकल ओ’ड्वायर को गोली मारकर अपने संकल्प को पूरा किया।

इसके बाद उन्होंने न्यायालय में निर्भीकता से अपने कृत्य की जिम्मेदारी स्वीकार की और अंततः मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया।
🔥 जिस वीर ने मृत्यु को सामने देखकर भी मातृभूमि का मस्तक झुकने नहीं दिया, उस अमर क्रांतिकारी को भारतवर्ष का कोटि-कोटि नमन!
शहीद ऊधम सिंह अमर रहें! 🇮🇳
वंदे मातरम्! भारत माता की जय!

बंदउ गुरू पद कंज कृपा सिंधु नर रूप हरिमहामोह तम पुंज जासु बचन रवि कर निकर।मैं उन गुरु महाराज के चरण-कमलों की वंदना करता ...
29/07/2026

बंदउ गुरू पद कंज कृपा सिंधु नर रूप हरि
महामोह तम पुंज जासु बचन रवि कर निकर।

मैं उन गुरु महाराज के चरण-कमलों की वंदना करता हूँ जो कृपा के समुद्र और साक्षात् नर रूप में भगवान विष्णु (हरि) ही हैं।उनके वचन घने अंधकार (महामोह) को नष्ट करने के लिए सूर्य की किरणों के समूह के समान हैं।

🌼गुरु पूर्णिमा 🌼

राज्य का प्रथम धर्म प्रजा का संरक्षण है न कि प्रजा को ऐसे वर्गो में बाटना जिनकी पहचान ही उनके अधिकारों का आधार बन जाए। स...
28/07/2026

राज्य का प्रथम धर्म प्रजा का संरक्षण है न कि प्रजा को ऐसे वर्गो में बाटना जिनकी पहचान ही उनके अधिकारों का आधार बन जाए। समाज में अनेक दोष होते हैं। कुछ समय के साथ मिटते हैं, कुछ को नीति से मिटाना पड़ता है। परंतु कोई भी नीति तभी तक श्रेष्ठ कहलाती है, जब तक वह रोग का उपचार करे, स्वयं रोग का स्थायी कारण न बन जाए।

जाति मनुष्य के मन में जन्म लेती है, राजपत्र में नहीं। यदि किसी के मन में अहंकार है, तो वह बिना किसी कानून के भी भेदभाव करेगा और यदि किसी के भीतर समता का भाव है, तो वह बिना किसी आदेश के भी सबके साथ न्याय करेगा। अतः यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि केवल कानून बदल देने से मनुष्य का चित्त बदल जाता है। कानून व्यवस्था स्थापित कर सकता है। परंतु सद्भाव का निर्माण शिक्षा, संस्कार और न्यायपूर्ण आचरण से होता है।

यदि राज्य किसी ऐतिहासिक अन्याय का उपचार करना चाहता है, तो उसका उद्देश्य ऐसा समाज बनाना होना चाहिए जहा एक दिन उस उपचार की आवश्यकता ही समाप्त हो जाए। जो उपाय अस्थायी रूप से बनाया गया हो, उसका मूल्यांकन समय समय पर होना चाहिए। अन्यथा नीति साधन न रहकर स्वयं लक्ष्य बन जाती है। और तब समाज का प्रत्येक वर्ग अपने को पीड़ित तथा दूसरे को विशेषाधिकार प्राप्त मानने लगता है।

ऐसी स्थिति राज्य की शक्ति नहीं, उसकी चुनौती होती है।
यह भी स्मरण रहे कि किसी मनुष्य का मूल्य उसके जन्म से नहीं, उसके गुण, परिश्रम और आचरण से आँका जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति केवल अपने कुल के कारण सम्मान चाहता है तो वह अयोग्य है। और यदि कोई केवल दूसरे के कुल के कारण उसका तिरस्कार करता है, तो वह भी नीति से विमुख है। न्याय का तराजू जन्म नहीं, पात्रता और वास्तविक आवश्यकता को देखना चाहिए।

राजा का कर्तव्य किसी एक वर्ग को प्रसन्न करना नहीं, सम्पूर्ण राज्य में विश्वास स्थापित करना है। जहाँ एक वर्ग को लगे कि उसके साथ अन्याय हो रहा है और दूसरा वर्ग स्वयं को सदैव संदेह की दृष्टि से देखा जाए। वहाँ सामाजिक एकता दुर्बल पड़ती है। विभाजित समाज बाहरी शत्रु से पहले भीतर के अविश्वास से पराजित होता है।

अतः यदि जातिवाद का अंत करना है, तो केवल कानूनों पर विवाद पर्याप्त नहीं होगा। विद्यालयों में समता का संस्कार, समाज में पारस्परिक सम्मान, प्रशासन में निष्पक्षता और नीतियों की समय समय पर निष्पक्ष समीक्षा यही वह मार्ग है जिससे समाज स्थायी शांति प्राप्त कर सकता है। राज्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी नागरिक की पहचान उसके जन्म से पहले उसके नागरिक होने के अधिकार से हो।

नीति का अंतिम लक्ष्य यह नहीं कि लोग अपने अपने वर्गों की विजय का उत्सव मनाए। नीति का लक्ष्य यह है कि एक दिन किसी को अपने जन्म की नहीं, केवल अपने कर्म की पहचान बतानी पड़े। वही राज्य दीर्घायु होता है जहा न्याय सबको दिखाई देता है और अवसर पर सबका विश्वास बना रहता है।
#आरक्षण

Address

Andheri Kurla Road
Mumbai

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when श्री Զเमपालकी महोत्सव कुर्ला posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share