seema didi-narmada seva

seema didi-narmada seva नर्मदा परिक्रमा सेवा , आश्रम देखरेख , नर्मदा पथ मार्गदर्शिका की लेखिका, नर्मदा अन्नक्षेत्र सेवा

कृपया पीडीएफ के लिए 93213 88672 पर व्हाट्सएप करें । ना ही फोन करें और कृपया आदेश भी ना करें कि मैं आपको भेज दूं।
17/09/2026

कृपया पीडीएफ के लिए 93213 88672 पर व्हाट्सएप करें । ना ही फोन करें और कृपया आदेश भी ना करें कि मैं आपको भेज दूं।

नर्मदे हर , सभी मां नर्मदा भक्तों को । एक विचार लो , उस विचार को अपना जीवन बना लो । उसके बारे में सोचो । उसके सपने देखो ...
16/09/2026

नर्मदे हर , सभी मां नर्मदा भक्तों को ।

एक विचार लो , उस विचार को अपना जीवन बना लो । उसके बारे में सोचो । उसके सपने देखो । उस विचार को जियो । अपने दिमाग , मांसपेशियों , नसों , शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो । यही सफल होने का तरीका है ।
‌स्वामी विवेकानंद

स्वामी जी का बताया हुआ यह मार्ग जाने अनजाने में मैंने कब अपना लिया मुझे ही नहीं पता चला । परिक्रमावासीयों की मार्ग और आश्रमों को लेकर जो चिंताएं थी वह मेरे दिमाग में इतनी बैठ गई थी कि मार्गदर्शिका बनाने के विचार ने कब मेरे दिल , दिमाग , मांसपेशियों , नसों पर अपना कब्जा जमा लिया यह याद करना मुश्किल है ।
लेकिन विचारों में किया एक संकल्प आज आपके सामने है मार्गदर्शिका के रूप में ।

आप सभी नर्मदा भक्तों का बहुत-बहुत धन्यवाद आपने इस PDF को इतना हाथों हाथ लिया कि मेरी सोच से परे है । 14 तारीख से ही मेरे दोनों फोन के व्हाट्सएप अनगिनत मैसेजो से भर गये थे । कल रात को जब हम विसर्जन करके फुर्सत हुए और जब मोबाइल देखा तो बाढ़ सी आ गई थी मैसेजों की । रात 2:00 बजे तक बैठकर चौधरी जी और मैंने कम से कम 2000 लोगों को पीडीएफ भेजा । आज दिन भर यही काम करते रहे ।

आप सभी के विश्वास , शुभ आशीष और शुभकामनाओं ने मुझे निरंतर संपन्न किया है । यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि और नर्मदा मैया की कृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण है । मैं अभिभूत और अनुग्रहित हूं 🙏 ।

मेरे इस सार्वजनिक धन्यवाद 🙏को आप सभी व्यक्तिक रूप से स्वीकार करें । इसी में आपका बड़प्पन और मेरा विनय भाव फलीभूत है ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगल कामनाओं के साथ
सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर

नर्मदे हर , सभी  मॉं नर्मदा परिक्रमावासियों को । 2026 की मार्गदर्शिका तैयार हो चुकी है । गणेश जी को अर्पण करने के पश्चात...
14/09/2026

नर्मदे हर , सभी मॉं नर्मदा परिक्रमावासियों को । 2026 की मार्गदर्शिका तैयार हो चुकी है । गणेश जी को अर्पण करने के पश्चात 16 तारीख से आप सभी को भी मिल जाएगी । पिछले वर्ष से मैंने पुस्तक की प्रिंटिंग बंद करवा दी है , डाक विभाग के रवैया के कारण मुझे यह कदम लेना पड़ा । लेकिन एक तरह से अच्छा ही है कि आप अपने गांव , शहर में इस पीडीएफ से प्रिंट निकाल सकते हैं । पिछले वर्ष पीडीएफ को आप सभी ने हाथों हाथ लिया था । मुझे पूर्ण विश्वास है इस वर्ष भी आपकी सहायता करेगा यह पीडीएफ । पीडीएफ पूर्ण तरह से निशुल्क है ।
हर वर्ष नवरात्रि के आसपास पीडीएफ तैयार होता था लेकिन इस बार मैंने जल्दी तैयार किया है क्योंकि त्योहारों के कारण कंप्यूटर पर पीडीएफ बनाने वाले बहुत ही व्यस्त रहते थे और मैं उनके चक्कर में बड़ी परेशान रहती थी इसलिए इस बार जल्दी काम किया । मुंबई में मुझे टाइप कराने में भाषा की सबसे ज्यादा समस्या आती है । हिंदी टाइप बहुत मुश्किल से होता है यहां पर और उसमें मात्राओं की बहुत गलती होती है । समय बहुत लगता है मगर काम हो ही जाता है ।
आपके पास भी अभी बहुत समय है आप आराम से इसका प्रिंट निकाल के अच्छी तरह से पढ़ लीजिए । कहीं कुछ परेशानी लगे तो मेरे दोनों फोन नंबर पीडीएफ में दिये हैं आप मुझे फोन कर सकते हैं । मुझसे आपकी जो सहायता बन सकेगी पूरी कोशिश करूंगी ।
यह पीडीएफ परिक्रमा वासीयों के लिए परिक्रमा वासियों द्वारा और आश्रमों द्वारा बनाया गया है । मैंने इसको संकलित किया है । इन लोगों ने ही मुझे फोन करके नए अन्नक्षेत्र , आश्रम, और नए मार्गों की जानकारी दी है जिसे मैंने अपने तरीके से सत्यापन करने के बाद पुस्तक में जोड़ा है । आप तक सौ प्रतिशत सही जानकारी पहुंचे उसके लिए बहुत मेहनत करती हूं । इस कार्य में मुझे आनंद भी बहुत आता है और आप सभी का उत्साह वर्धन तो संजीवनी बूटी की तरह काम करता है मेरे में । बहुत से नए लोगों से परिचय होता है । अब तो मैया की कृपा से पूरे नर्मदा खंड से परिचय हो गया है ।
आप सभी की सेवा में पीडीएफ पूर्ण तरह से निशुल्क है ।
पीडीएफ के लिए आपको मुझे मेरे 9321388672 इस नंबर पर व्हाट्सएप करना है । आपको पीडीएफ मिल जाएगा । बहुत सारे ग्रुपों से भी आपके पास पहुंच जाएगा । मेरे पीडीएफ पर आपको मेरे नाम का लोगो दिखेगा ।
आप सभी से निवेदन है की ना ही फेसबुक पर अपना नंबर डालें और ना ही मुझे आदेश दें इस नंबर पर भेजो । सिर्फ और सिर्फ मुझे व्हाट्सएप करें । मैया से प्रार्थना है आप सभी की परिक्रमा अच्छे से पूर्ण हो ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगल कामनाओं के साथ
सीमा वीरेंद्र का
नर्मदे हर🙏

नर्मदा परिक्रमा एक तपस्या है । तपस्या केवल गंगा किनारे , पहाड़ों की गोद में या गुफाओं में बैठकर करने का नाम नहीं हैं । ज...
16/08/2026

नर्मदा परिक्रमा एक तपस्या है । तपस्या केवल गंगा किनारे , पहाड़ों की गोद में या गुफाओं में बैठकर करने का नाम नहीं हैं । जो भी काम हम पूरे मन और बुद्धि से पूर्ण समर्पण के साथ करते हैं वही तपस्या कहलाती है ।
बस नर्मदा परिक्रमा भी कुछ यही सिखाती है ।
चतुर्मास चल रहा है , त्योहार प्रारंभ होने वाले हैं । तीन महीने कहां चले जाएंगे पता ही नहीं चलेगा और देवउठनी ग्यारस आ जाएगी और इसके साथ ही सबसे बड़ी तीर्थ यात्रा प्रारंभ हो जाएगी ।
बहुत लोगों के फोन रोज आ रहे हैं की पीडीएफ कब तैयार होगा❓ और हमें कब तक मिल जाएगा❓। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद मुझ पर इतना विश्वास बनाए रखने के लिए । पीडीएफ पर काम चल रहा है । मुखपृष्ठ तैयार है ।
पीडीएफ तैयार होते ही फेसबुक और बहुत सारे व्हाट्सएप ग्रुप द्वारा आपको सूचना मिल जाएगी ।
पीडीएफ गणेश चतुर्थी तक तैयार हो जाएगा । नए आश्रमों को जोडा जा रहा है , एक दो रास्ते नए हैं उन्हें भी जोड़ा गया है । पहले उनकी विश्वसनीयता को जांच गया है । इसके बाद ही उन्हें जोड़ा जाता है इसलिए इस कार्य में बहुत समय लगता है ।
मेहनत मेरी रहती है , मार्गदर्शन मैया का रहता है तो सब कार्य आसानी से हो जाते हैं और आप सभी की शुभकामनाएं , मार्गदर्शन बड़े सहायक सिद्ध होते हैं ।
यह पुस्तक परिक्रमावासियों द्वारा परिक्रमावासियों के लिए बनाई गई है । मैंने सिर्फ संग्रहण का काम किया है । मुझे विश्वास है कि यह हमेशा की तरह सहायक सिद्ध होगी । पीडीएफ निशुल्क है ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगल कामना के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर ।

आज विश्व आदिवासी दिवस पर एक आदिवासी महिला का परिचय देने जा रही हूं ।समाज और राष्ट्र के विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यं...
09/08/2026

आज विश्व आदिवासी दिवस पर एक आदिवासी महिला का परिचय देने जा रही हूं ।समाज और राष्ट्र के विकास में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण बहुआयामी और अपरिवर्तनीय है । वे परिवार की धुरी , संस्कृति की संरक्षक और देश की प्रगति की आधारशिला है ।
एक महिला बच्चों की प्रारंभिक शिक्षक और मार्गदर्शक होती है , जो भावी पीढ़ी में नैतिक मूल्य और संस्कार डालती है ।
इनका नाम श्रीमती राधा इलेश सस्तिया , ग्राम मथवाड़ , तहसील सोंडवा , जिला अलीराजपुर, मध्य प्रदेश । नर्मदा परिक्रमा मार्ग उत्तर तट शूलपानी ।
राधा का परिचय तो पढ़ लिया आपने ,अब उनके काम के बारे में भी जाने । MSc maths ,Med इतनी पढ़ी-लिखी महिला जो अपने क्षेत्र के लोगों के लिए सहारा बनी है । जिला मातृशक्ति संयोजिका हैं , वृद्ध लोगों को पेंशन दिलवाती है, बच्चों को पढाती है , परिक्रमा वासियों की सेवा करती है , जीवा पब्लिक स्कूल की डायरेक्टर है ।
राधा करोना काल तक एक गृहिणी थी , दो छोटे बच्चों की मां । पति सरकारी नौकरी में है उनका जहां ट्रांसफर होता उनके साथ रहती थी । करोना में जब सभी लोग अपने गांव लौटे तो राधा भी बच्चों के साथ ससुराल मथवाड़गांव में आ गई ,लेकिन औरों की तरह वापस शहर नहीं लौटी बस गांव की होकर रह गई । करोना काल में लंबे समय तक गांव में बच्चों के साथ रहने से उन्हें भी वहां की समस्याओं से दो-चार होना पड़ा । जब उन्होंने देखा कि यहां के बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो रहा है , ना हीं यहां की महिलाओं की स्थिति में सुधार है । वे इसी उधेड़बुन में रही कि मैं तो पढ़ी लिखी हूं , मेरे बच्चे भी पढ़ रहे हैं लेकिन इन सभी का क्या जो गांव में रह रहे हैं ।
राधा के माता-पिता भी आदिवासी थे , किसान थे , लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने अपनी बेटी को पढ़ाया लिखाया इसलिए राधा ने संकल्प लिया कि जिनके माता-पिता यह नहीं कर पा रहे हैं , वह उन बच्चों के लिए काम करेगी , उन महिलाओं के लिए काम करेगी जो शिक्षित नहीं है । इन्होंने इस बारे में अपने पति से और सास ससुर से चर्चा की । पति उनके साथ खड़े थे उन्होंने बोला आप जो निर्णय लेगी उसमें मैं आपके साथ हूं । ससुराल वालों ने भी साथ दिया बस फिर क्या था राधा ने अपना निर्णय ले लिया जो बहुत ही कठिन था एक मां के लिए ।
गांव के बच्चों के भविष्य लिए उन्होंने बहुत ही कठोर कदम लिया और अपने दोनों छोटे बच्चों को हॉस्टल में डाल दिया और खुद ने मथवाड गांव में रहने का निर्णय लिया ।
हम सोच कर देखें तो एक महिला के लिए कितना कठिन निर्णय था की दोनों बच्चे दो अलग हॉस्टल में , पति एक अलग स्थान पर नौकरी कर रहे थे और वह खुद पिछड़े इलाके के गांव में घूम-घूम कर काम करने का मन बना रही थी । राधा की हिम्मत को मेरा साधुवाद ।
इसके बाद की कहानी राधा के दृढ़ संकल्प की है । मुश्किलों से भरी डगर थी लेकिन उन्होंने सबको साइड में करके मथवाड में एक स्कूल खोल लिया और आसपास के गांव गांव घूम कर बच्चों को घर से निकालकर स्कूल तक लेकर आई । उनके लिए हर सामान की व्यवस्था की , शिक्षिकाओं की नियुक्ति की , धीरे-धीरे यह स्कूल अब आठवीं कक्षा तक हो गया है । यहां पर पढ़कर अब बच्चे आसपास के बड़े कस्बे तक पढ़ने जाने लगे हैं । आज 80 बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं ।
मथवाड उत्तर तट नर्मदा परिक्रमा में आता है । उत्तर तट की शुलपानी करने वाले परिक्रमावासी गांव में रुकते हैं । राधा द्वारा इन परिक्रमा वासियों की सेवा होती है । राधा ने अपने गांव में अपने घर के पास बोरिंग बनवाया । जिसे बनाने के लिए लोगों ने कहा था कि पानी बहुत गहराई में आता है लेकिन राधा ने नर्मदा मैया से प्रार्थना की और बोरिंग में इतनी जल्दी पानी आ गया कि सभी का आश्चर्य का ठिकाना ना रहा ।आज इतना पानी आ रहा है कि पूरा गांव उस पानी का उपयोग कर रहा है ।
स्कूटर चलाने वाली महिला साड़ी पहनकर और सिर ढक कर पूरे शुलपानी में घूमती है । यह आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है , लोग बहुत कम पढ़े लिखे हैं इसलिए लोगों की समस्याएं सुनती है और उसका समाधान निकालने के लिए सरकारी दफ्तरों में चक्कर मारती है ।
नर्मदा मैया आपसे प्रार्थना है राधा का मार्ग प्रशस्त करना। उस पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखना । उसके उन सपनों को साकार करना जिसके लिए उसने बहुत बड़ा त्याग किया है । आप सभी भी राधा को आशीर्वाद देना ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगल कामनाओं के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर

सभी मैया भक्तों को नर्मदे हर मेरी मां की कही हुई बात हम दोनों बहने हमेशा याद रखते हैं कि लोगों की परवाह छोड़कर वह करो जि...
04/02/2026

सभी मैया भक्तों को नर्मदे हर
मेरी मां की कही हुई बात हम दोनों बहने हमेशा याद रखते हैं कि लोगों की परवाह छोड़कर वह करो जिसे करने में तुम्हें खुशी मिलती है प्रसिद्धि की इच्छा किए बगैर अपनी रुचि के कार्य को तन्मयता से करते रहो इससे मिलने वाला आनंद ही तुम्हारी वास्तविक उपलब्धि है ।
नर्मदा से अधिक प्रिय कुछ भी नहीं है मुझे । 24 घंटे मन उसी में रमा रहता है । नर्मदा की परिक्रमा करने वाले परिक्रमावासी भी मुझे बहुत प्रिय है । उनके लिए मुझे कुछ करना बहुत अच्छा लगता है लेकिन मैं उतना ही कर पाती हूं जितनी मेरी चादर है ।
नर्मदा मैया ने मेरा पहचान का दायरा इतना विशाल करके दिया है की मेरी चादर कभी-कभी बड़ी हो जाती है ।
नर्मदा खंड के हर आश्रम में शौचालय और महिलाओं के लिए स्नान गृह होना चाहिए ऐसा मेरा हमेशा से ही मत था और यह समय के अनुसार आवश्यक भी है ।
मेरे इस विचार को सपोर्ट किया था नर्मदा संवर्धन परिवार ने और हम सभी ने मिलकर कार्य किया और चार आश्रमों में दो शौचालय और एक स्नान गृह का निर्माण कर लिया । मेरे गांव उत्तर तट वृंदावन ढाबा , बिलगढा अमर दास जी महाराज उत्तर तट , रिछावर नरसिंहपुर जिला दक्षिण तट , हरई पंचम लाल यादव उत्तर तट ।
मैंने इन सभी की पोस्ट बनाकर फेसबुक पर पोस्ट की थी । इस पोस्ट को पढ़कर मुंबई डोंबिवली के एक परिक्रमावासी दिलीप जोशी जी का मुझे फोन आया और उन्होंने मुझसे इस कार्य के बारे में जानकारी ली । इसे बनाने में कितना खर्च आता है , कैसे इस कार्य को किया जाता है । उन्होंने पूछा और मैंने बताया । दिलीप जोशी जी सपत्नी परिक्रमा कर चुके हैं इसलिए वे आश्रमों की परिस्थितियों से अच्छी तरह परिचित थे ।उन्हें मुझसे बात करके बड़ी संतुष्टि हुई और उन्होंने मुझसे पूछा की क्या कोई ऐसा आश्रम है जहां शौचालय की आवश्यकता हो तो वहां पर हम इस निर्माण कार्य में आपकी सहायता करना चाहते हैं ।
मैंने उन्हें दो-तीन आश्रमों के नाम बताएं जहां पर हमें शौचालय निर्माण का कार्य करना है । इसमें एक आश्रम था मंडला जिले का फड़की संगम , लक्ष्मण बाबा का आश्रम जो बहुत ही सुंदर स्थान पर है मैया के किनारे लेकिन भौगोलिक स्थिति बहुत ही कठिन । गांव में अभी तक सड़क नहीं बनी है । क्योंकि बड़ी-बड़ी चट्टानें बड़े-बड़े पत्थर होने से सड़क बनाना अति दुष्कर कार्य है इसलिए शायद सरकार ने वहां पर रुचि नहीं ली कभी ।
लक्ष्मण बाबा कई वर्षों से मुझसे जुड़े हैं और अन्न क्षेत्र के लिए कुछ लोगों की मदद से मैं वहां का संचालन करती रहती हूं । 1 वर्ष पहले वहां पर गद्दे और कंबल की व्यवस्था भी की थी ।
दिलीप जोशी जी मुंबई डोंबिवली की रहने वाले हैं और वहीं के तिलक नगर विद्या मंदिर स्कूल से पढ़े हैं । 1974 के एसएससी बैच के उनके मित्र मंडल से उन्होंने इस कार्य के लिए मदद मांगी और सभी ने अपनी इच्छा अनुसार सहयोग दिया और एक बड़ी रकम एकत्र हो गई ।
और आश्रम में शौचालय बनने की तैयारी प्रारंभ हो गई । निवास नाम के छोटे से शहर में एक नर्मदा भक्त राजेश रजक जी मेरे परिचित थे उन्होंने इस का सामान खरीदने में हमारी मदद की । लेकिन कोई भी ट्रैक्टर और टेंपो गांव में जाने के लिए तैयार नहीं था। पत्थरों के कारण ट्रैक्टर पलट सकता था इसलिए बहुत दूर से सामान को मजदूरों द्वारा आश्रम तक पहुंचाया गया । बड़ी कठिन परिस्थितियों में निर्माण हो गया और इसका उपयोग भी प्रारंभ हो गया है ।
मैं दिलीप जोशी जी और उनके सभी मित्रों का सादर अभिनंदन करती हूं जिन्होंने हमें मदद की और आगे भी मदद का आश्वासन दिया । नर्मदा मैया से प्रार्थना है आप सभी स्वस्थ रहें , आनंदित रहें और इस तरह के नेक कार्य आप लोगों के हाथ से होता रहे ।
आप सभी के स्वस्थ जीवन की मंगल कामना के साथ सीमा वीरेंद्र का नर्मदे हर

स्नेह , आशीर्वाद और दुआओं की ताकत को कभी कम मत आंकिए  ....यह वह खामोश ऊर्जा है जो आपके असंभव कार्यों को संभव बनाने की सब...
01/02/2026

स्नेह , आशीर्वाद और दुआओं की ताकत को कभी कम मत आंकिए ....
यह वह खामोश ऊर्जा है जो आपके असंभव कार्यों को संभव बनाने की सबसे बड़ी शक्ति है......।
अन्न क्षेत्र समाप्त हुआ और 2026 के लिए मार्गदर्शिका पर काम प्रारंभ हो गया ।
बहुत मेहनत करती हूं और ढेर सारा आशीर्वाद , स्नेह पाती हूं नर्मदा खंड के लोगों का , आश्रमों का , परिक्रमावासियों का ।
रेवा मैया यह कृपा जीवन पर्यंत बनाए रखना बस यही भाव है ।
हर नर्मदे हर

नर्मदे हर 2026 का अन्न क्षेत्र समाप्त कर मुंबई वापस आ गई हूं। लेकिन मन अभी भी जबलपुर से दूर  चल रहे परिक्रमावासियों के स...
22/01/2026

नर्मदे हर 2026 का अन्न क्षेत्र समाप्त कर मुंबई वापस आ गई हूं। लेकिन मन अभी भी जबलपुर से दूर चल रहे परिक्रमावासियों के साथ रह गया है । काश उन सभी से भी मिलने का मौका मिलता । उनकी भी सेवा करने का मौका मिलता । नर्मदे हर का जय घाेष अभी भी कानों में गूंज रहा है जो आते जाते परिक्रमावासी बोल रहे थे ।
बहुत ही गहमा गहमी थी इस बार बहुत ज्यादा ही संख्या में परिक्रमा वासी चल रहे थे इसलिए बातचीत का मौका लोगों से बहुत कम मिल पाया मुझे । पूरा समय भोजन , दवाइयां देने में , टोपी मोजा देने में निकल गया ।
लेकिन सभी के पास पीडीएफ देखकर बहुत खुशी महसूस हो रही थी । लेकिन कुछ को शिकायत भी थी कि आपकी पुस्तक हमने सब जगह ढूंढी कहीं नहीं मिली ।
भोजन करने के बाद सब के मुख मंडल पर जो तृप्ति का भाव था वह मेरे लिए अतुलनीय था ।
मेरे लिए सेवा पूजा का सर्वोच्च रूप और सर्वोत्तम तपस्या है ।

देनहार कोउ ओर है भेजत सो दिन रैन ।लोग भरम हम पर धरैंयाते नीचे नैन ।।संस्कारधानी जबलपुर में पैदल चलने वाले सभी परिक्रमावा...
17/12/2025

देनहार कोउ ओर है
भेजत सो दिन रैन ।
लोग भरम हम पर धरैं
याते नीचे नैन ।।
संस्कारधानी जबलपुर में पैदल चलने वाले सभी परिक्रमावासियों का स्वागत है ।

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