Khidmat E Awadh Foundation "Sultanpur"

Khidmat E Awadh Foundation "Sultanpur" Social welfare

 #राजभवन में चमका  #सुलतानपुर का सितारा 1 फीट लंबे आम और खेत के मोतियों ने जीता राज्यपाल का दिल !सुलतानपुर।उत्तर प्रदेश ...
01/08/2026

#राजभवन में चमका #सुलतानपुर का सितारा 1 फीट लंबे आम और खेत के मोतियों ने जीता राज्यपाल का दिल !

सुलतानपुर।
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक प्रगतिशील किसान ने अपनी अद्भुत और अनोखी कृषि उपलब्धियों से पूरे प्रदेश में *जिले का नाम रोशन किया है। #बल्दीराय_तहसील के अंतर्गत आने वाले #नंदौली_गांव के निवासी #किसान #जमील_अहमद की मेहनत और नवाचार की गूंज अब लखनऊ स्थित राजभवन तक पहुंच गई है।

#महामहिम_राज्यपाल #आनंदीबेन_पटेल के विशेष आमंत्रण पर राजभवन पहुंचे जमील अहमद ने जब अपनी फसलों और उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई, तो वहां मौजूद हर कोई दंग रह गया। जमील अहमद ने राज्यपाल के समक्ष विशेष रूप से तैयार किया गया 'एक फीट लंबा आम', मोटे अनाजों के मिश्रण से तैयार 'मल्टीग्रेन आटा' और अपने खेत के तालाब में सीपियों के जरिए तैयार किए गए 'कीमती मोती' प्रदर्शित किए।

प्राकृतिक खेती और नवाचार की सराहना:
पारंपरिक खेती से हटकर कुछ नया करने के जुनून ने जमील अहमद को आज इस मुकाम पर पहुंचाया है। उन्होंने रासायनिक खादों को छोड़कर प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को अपनाया, जिसके दम पर उन्होंने विशालकाय आम और मोती उत्पादन में सफलता हासिल की। महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जमील अहमद के इन कृषि नवाचारों की न सिर्फ बारीकी से जानकारी ली, बल्कि उनकी पीठ थपथपाते हुए जमकर सराहना भी की।

जिले के किसानों के लिए प्रेरणा:
जमील अहमद की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को सुल्तानपुर के कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ा सम्मान माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि जमील अहमद ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही तकनीक, लगन और प्राकृतिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाए, तो खेती घाटे का सौदा नहीं बल्कि बेहद मुनाफे का जरिया बन सकती है। यह सफलता जिले के अन्य युवाओं और किसानों के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनेगी।

सुलतानपुर के किसान का बढ़ा मान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जनभवन बुलायाराज्यपाल के सामने पहुंचेगा सुल्तानपुर के किसान का ...
29/07/2026

सुलतानपुर के किसान का बढ़ा मान, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने जनभवन बुलाया

राज्यपाल के सामने पहुंचेगा सुल्तानपुर के किसान का उत्पाद,प्रगतिशील किसान जमील अहमद को जनभवन से बुलावा।सुल्तानपुर जिले के बल्दीराय तहसील अंतर्गत नंदौली गांव के प्रगतिशील किसान जमील अहमद को बड़ी उपलब्धि मिली है।महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें 30 जुलाई को जनभवन आमंत्रित किया है।इस दौरान जमील अहमद अपने कृषि नवाचारों और उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे।जमील अहमद राज्यपाल के समक्ष एक फीट लंबा आम,मोटे अनाजों से तैयार मल्टीग्रेन आटा तथा खेत तालाब में उत्पादित मोती प्रस्तुत करेंगे।उनके अभिनव कृषि कार्यों और प्राकृतिक खेती से जुड़े प्रयासों को मिली यह पहचान जिले के किसानों के लिए भी गौरव का विषय मानी जा रही है।किसान जमील अहमद ने इसे सुल्तानपुर की कृषि और किसानों के सम्मान का अवसर बताया है।

🇮🇳🫡 ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान3 जुलाई 1948 | यौमे शहादत🌹 'नौशेरा के शेर' ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को ख़िराज-ए-अक़ीदत।भार...
03/07/2026

🇮🇳🫡 ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान
3 जुलाई 1948 | यौमे शहादत

🌹 'नौशेरा के शेर' ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को ख़िराज-ए-अक़ीदत।

भारतीय सेना की गौरवशाली परंपरा के महान योद्धाओं में ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है। उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ ज़िले के बीबीपुर गाँव में जन्मे ब्रिगेडियर उस्मान भारतीय सैन्य अधिकारियों के शुरुआती बैच में शामिल थे, जिन्हें ब्रिटेन में सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और बहादुरी के लिए उन्हें कई बार पदोन्नति और प्रशंसा मिली।

🇮🇳 1947–48 के भारत-पाक युद्ध के दौरान वे 50 पैरा ब्रिगेड के कमांडर थे। उनकी अगुवाई में भारतीय सेना ने नौशेरा की ऐतिहासिक रक्षा की, जिसके बाद उन्हें "नौशेरा का शेर" कहा जाने लगा।

📜 भारत के विभाजन के समय, उनकी बहादुरी और नेतृत्व से प्रभावित होकर पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना और प्रधानमंत्री लियाकत अली खान ने उन्हें पाकिस्तान आने तथा सेना का प्रमुख बनने का प्रस्ताव दिया। लेकिन ब्रिगेडियर उस्मान ने यह प्रस्ताव ठुकराते हुए भारत के प्रति अपनी निष्ठा को चुना।

⚔️ विभाजन के बाद उनकी बलूच रेजिमेंट पाकिस्तान के हिस्से में चली गई और वे डोगरा रेजिमेंट में आ गए। उस समय पाकिस्तान समर्थित कबायली और सैनिक जम्मू-कश्मीर में लगातार घुसपैठ कर रहे थे। 25 दिसंबर 1947 को झंगड़ पर पाकिस्तान ने कब्ज़ा कर लिया था, लेकिन मार्च 1948 में ब्रिगेडियर उस्मान के नेतृत्व में भारतीय सेना ने झंगड़ को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया।

💥 इस अभियान में पाकिस्तान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कहा जाता है कि इसके बाद पाकिस्तान ने ब्रिगेडियर उस्मान का सिर लाने वाले के लिए ₹50,000 के इनाम की घोषणा की।

🕯️ 3 जुलाई 1948 को नौशेरा सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान एक भारी गोला उनके निकट आकर फटा और वे वीरगति को प्राप्त हुए।

💬 उनके अंतिम शब्द बताए जाते हैं—

"हम तो जा रहे हैं, पर ज़मीन के एक भी टुकड़े पर दुश्मन का कब्ज़ा न होने पाए।" 🇮🇳

⚰️ उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया कब्रिस्तान, नई दिल्ली में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया। उनकी अंतिम यात्रा में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद और शेख अब्दुल्ला सहित अनेक गणमान्य लोग शामिल हुए।

🏅 मरणोपरांत उन्हें भारत के दूसरे सर्वोच्च वीरता पुरस्कार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

❤️ ब्रिगेडियर उस्मान ने विवाह नहीं किया। वे अपने वेतन का अधिकांश हिस्सा गरीब बच्चों की शिक्षा और ज़रूरतमंदों की सहायता पर खर्च करते थे। नौशेरा के 158 अनाथ बच्चों की देखभाल और उनकी पढ़ाई का दायित्व भी उन्होंने अपने ऊपर लिया था।

🌹🇮🇳 भारत माँ के इस अमर सपूत, 'नौशेरा के शेर' ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान को शत-शत नमन और ख़िराज-ए-अक़ीदत।



आपके अनुसार ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की सबसे बड़ी विरासत क्या है? कमेंट में अपनी राय साझा करें। 👇

महज़ 12 साल की उम्र में अब्दुल्लाह इमरान ने यह साबित कर दिया कि हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता। सोलापुर के इस होनहार बच्च...
02/07/2026

महज़ 12 साल की उम्र में अब्दुल्लाह इमरान ने यह साबित कर दिया कि हुनर उम्र का मोहताज नहीं होता। सोलापुर के इस होनहार बच्चे ने करीब छह महीने तक लगातार मेहनत की और कबाड़ में पड़े सामान को इस्तेमाल कर एक शानदार सोलर साइकिल तैयार कर दी।

करीब ₹9,000 की लागत से बनी यह साइकिल सूरज की रोशनी और बैटरी दोनों से चल सकती है।
इसमें GPS ट्रैकिंग, डिजिटल स्पीडोमीटर और वॉयस कंट्रोल जैसी आधुनिक सुविधाएँ भी मौजूद हैं। अगर बैटरी खत्म हो जाए, तो इसे आम साइकिल की तरह पैडल मारकर आसानी से चलाया जा सकता है। अब्दुल्लाह की यह सोच और मेहनत इस बात की मिसाल है कि लगन, जिज्ञासा और मेहनत से बड़े से बड़ा सपना भी हकीकत में बदला जा सकता है।

 #ख़िदमत_ए_अवध  #फाऊंडेशन की सफल बैठककल ख़िदमत-ए-अवध फाऊंडेशन की एक महत्वपूर्ण बैठक नायगांव में फाऊंडेशन के सक्रिय साथी ...
29/06/2026

#ख़िदमत_ए_अवध #फाऊंडेशन की सफल बैठक

कल ख़िदमत-ए-अवध फाऊंडेशन की एक महत्वपूर्ण बैठक नायगांव में फाऊंडेशन के सक्रिय साथी #रियाज़_भाई (पप्पू) की मेज़बानी में आयोजित की गई थी।

बैठक का मुख्य उद्देश्य फाऊंडेशन के विजन, #मिशन और #समाज_सेवा के उद्देश्यों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाना था। बैठक में उपस्थित सभी साथियों ने संस्था की कार्यशैली और सेवा भावना को सराहा तथा मानवता की सेवा के इस अभियान से जुड़ने का संकल्प लिया।

यह हम सबके लिए बेहद खुशी और गर्व की बात है कि बैठक से प्रेरित होकर अनेक सम्मानित साथियों ने ख़िदमत-ए-अवध फाऊंडेशन की सदस्यता ग्रहण की और संस्था के साथ मिलकर समाज की भलाई के लिए कार्य करने का वादा भी किया।

इस सफल बैठक के आयोजन के लिए रियाज़ भाई (पप्पू) का हम सब तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हैं।
आपकी मेहनत, लगन और समाज के प्रति समर्पण संस्था को नई ऊर्जा और नई दिशा प्रदान करता है।
#अल्लाह_तआला आपको इसकी बेहतर से बेहतर जज़ा अता फरमाए। आमीन🤲

आज सदस्यता ग्रहण करने वाले सम्मानित साथियों के नाम:

1. Jamil Ahmad Khan - मुंशीगंज, कटकाखानपुर
2. Israr Ahmad Khan - मसूरन, दोस्तपुर
3. Siraj Khan - हरदासपुर, लम्भुआ
4. Ayaz Khan - सेऊर, कूरेभार
5. Tayab Khan - पठानीपुर, गोसाईंगंज
6. Jainuddin Khan - हयातनगर, गोसाईंगंज
7. Samshad Khan - हयातनगर, गोसाईंगंज
8. Faheem Khan - हयातनगर, गोसाईंगंज

"आइए, हम सब मिलकर सेवा, सहयोग और सद्भाव की इस मुहिम को हर गांव और हर घर तक पहुँचाएँ।"

ख़िदमत-ए-अवध फाऊंडेशन

"इंसानियत की सेवा, समाज की तरक्की।" 🌿🤝

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