09/08/2026
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विश्व हिंदू परिषद – कोकण प्रांत
कोकण प्रांत धर्माचार्य संपर्क आयाम की प्रांत मार्गदर्शक मंडल बैठक संपन्न
परिवार प्रबोधन, व्यसनमुक्ति, सामाजिक समरसता एवं संत रविदासजी के 650वें जन्मोत्सव वर्ष पर हुआ चिंतन
मुंबई, 4 अगस्त 2026। विश्व हिंदू परिषद, धर्माचार्य संपर्क आयाम की ओर से कोकण प्रांत के प्रांत मार्गदर्शक मंडल की बैठक मंगलवार, 4 अगस्त को विलेपार्ले, मुंबई स्थित संन्यास आश्रम–विश्वेश्वर भवन में संपन्न हुई। बैठक में कोकण प्रांत के विभिन्न संप्रदायों के 78 पूज्य संत-महंत एवं धर्माचार्य उपस्थित रहे।
बैठक की अध्यक्षता पूज्य स्वामी विश्वेश्वरानंदजी महाराज ने की। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं धर्माचार्य संपर्क के केंद्रीय प्रमुख मा. अशोकजी तिवारी, क्षेत्रीय संगठन मंत्री मा. अनिरुद्धजी पंडित, महाराष्ट्र-गोवा राज्य धार्मिक विभाग प्रमुख संजय मुरदाळे, कोकण प्रांत मंत्री मोहनजी सालेकर, कोकण प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख परशुरामजी दुबे सहित विभिन्न पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक का प्रारंभ दीप प्रज्वलन एवं ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ के सामूहिक नामस्मरण से हुआ। कोकण प्रांत मंत्री मोहन सालेकरजी ने प्रस्तावना रखते हुए कोकण प्रांत में विश्व हिंदू परिषद द्वारा किए जा रहे कार्यों की संक्षिप्त जानकारी दी।
अशोकजी तिवारी ने चार प्रमुख विषयों की दिशा रखी
प्रस्तावना के पश्चात विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं धर्माचार्य संपर्क के केंद्रीय प्रमुख मा. अशोकजी तिवारी ने बीजभाषण में बैठक के चिंतन की दिशा स्पष्ट की। उन्होंने परिवार प्रबोधन, व्यसनमुक्ति, सामाजिक समरसता तथा संत रविदासजी के 650वें जन्मोत्सव वर्ष के माध्यम से समाजप्रबोधन इन चार प्रमुख विषयों पर सविस्तर जानकारी रखते हुए इनके वर्तमान सामाजिक संदर्भ, चुनौतियों तथा समाजप्रबोधन में संत-महंत, धर्माचार्य, कीर्तनकार एवं प्रवचनकारों की भूमिका पर मार्गदर्शन किया।
उन्होंने इन चारों विषयों को केवल चर्चा तक सीमित न रखते हुए संतों के माध्यम से समाज के विभिन्न स्तरों तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की आवश्यकता व्यक्त की तथा उपस्थित पूज्य संतों से इन विषयों पर अपने विचार एवं मार्गदर्शन रखने का आग्रह किया। इसके पश्चात बैठक में इन्हीं चार प्रमुख विषयों पर पूज्य संतों के मार्गदर्शन में विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
परिवार प्रबोधन
परिवार प्रबोधन के विषय पर वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में परिवार व्यवस्था के सामने उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर विचार किया गया। परिवार में संस्कार, संवाद एवं आत्मीयता बढ़ाने तथा नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति एवं जीवनमूल्यों से जोड़ने के लिए संतों, कीर्तनकारों एवं प्रवचनकारों के माध्यम से परिवार प्रबोधन को व्यापक रूप देने की आवश्यकता व्यक्त की गई।
व्यसनमुक्ति
व्यसनमुक्ति के विषय पर युवाओं में बढ़ती व्यसनाधीनता को गंभीर सामाजिक चुनौती बताते हुए इसके दुष्परिणामों पर चिंतन हुआ। व्यसन का प्रभाव व्यक्ति के साथ-साथ परिवार और सामाजिक जीवन पर पड़ता है। इसलिए संतों एवं धर्माचार्यों द्वारा अपने कीर्तन, प्रवचन और समाजप्रबोधन के माध्यम से व्यसनमुक्ति का संदेश व्यापक रूप से पहुंचाने पर बल दिया गया।
सामाजिक समरसता
सामाजिक समरसता के संदर्भ में हिंदू समाज के विभिन्न घटकों के बीच आत्मीयता, संवाद एवं परस्पर सम्मान बढ़ाने की आवश्यकता व्यक्त की गई। संत परंपरा द्वारा दिए गए समता एवं सामाजिक एकता के संदेश को समाज के सभी वर्गों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न उपक्रम करने पर विचार हुआ।
संत रविदासजी के 650वें जन्मोत्सव वर्ष में व्यापक समाजप्रबोधन
इस वर्ष संत रविदासजी के 650वें जन्मोत्सव वर्ष के उपलक्ष्य में उनके विचारों को समाज तक व्यापक रूप से पहुंचाने का विषय भी प्रमुखता से रखा गया।
संत रविदासजी ने भक्ति, सामाजिक समानता एवं जातिभेद के विरुद्ध समाजप्रबोधन का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके विचारों को वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों से जोड़कर प्रत्येक संत-महंत अपने मठ, मंदिर, कीर्तन एवं प्रवचन के माध्यम से समाज तक पहुंचाएं, ऐसी अपेक्षा व्यक्त की गई।
श्रीराम जन्मभूमि विषय पर अशोकजी तिवारी का मार्गदर्शन
बैठक के एक महत्वपूर्ण सत्र में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री एवं धर्माचार्य संपर्क के केंद्रीय प्रमुख मा. अशोकजी तिवारी ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दानपेटी से संबंधित चोरी के विषय में उपलब्ध तथ्यों की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना का श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों अथवा विश्व हिंदू परिषद के किसी वरिष्ठ पदाधिकारी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि दानराशि की गणना के लिए नियुक्त कर्मचारियों से संबंधित यह मामला था तथा संबंधित कर्मचारी संविदा के आधार पर कार्यरत थे।
उन्होंने बताया कि घटना को स्थानीय स्तर के संबंधित पदाधिकारियों ने सामने लाया तथा शासन से विशेष जांच के माध्यम से निष्पक्ष जांच की मांग की गई। उन्होंने पूज्य संतों से आग्रह किया कि इस विषय में समाज के बीच तथ्यों के आधार पर ही जानकारी दी जाए, ताकि अपूर्ण अथवा भ्रामक जानकारी के कारण समाज में भ्रम उत्पन्न न हो।
जनगणना के संदर्भ में जागरूकता का आह्वान
दूसरे सत्र में विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री मा. अनिरुद्ध पंडितजी ने आगामी जनगणना के संदर्भ में समाज में जागरूकता की आवश्यकता पर मार्गदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि जनगणना के दौरान नागरिक अपनी धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज करें। जो व्यक्ति हिंदू हैं, वे धर्म संबंधी कॉलम में अपनी पहचान स्पष्ट रूप से ‘हिंदू’ के रूप में दर्ज करें। अपनी धार्मिक पहचान को अस्पष्ट रखने से उत्पन्न होने वाले सामाजिक एवं सांख्यिकीय प्रभावों को समझाने के लिए संतों एवं धर्माचार्यों के माध्यम से तथ्यात्मक जनजागरण आवश्यक है, ऐसा उन्होंने कहा।
उन्होंने पूज्य संतों से अपने भक्तों एवं समाज के बीच इस विषय में उचित जानकारी पहुंचाने का आग्रह किया।
पूज्य संतों ने रखे अपने विचार
बैठक में विभिन्न संप्रदायों के पूज्य संत-महंतों ने अपने अनुभव एवं विचार रखे। पूज्य स्वामी विश्वेश्वरानंदजी महाराज ने अध्यक्षीय मार्गदर्शन देते हुए बैठक में उठाए गए विषयों का समग्र संदर्भ प्रस्तुत किया तथा धर्माचार्य संपर्क के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
बैठक में डॉ. भन्ते राहुलजी बोधी, पूज्य स्वामी हरिश्रद्धानंदजी महाराज गोवा, सहस्रबुद्धेजी रत्नागिरी, विजयशास्त्री घाटकोपर, स्वामी अभयानंदजी, स्वामी योगेश्वरानंदजी, आशीष महाराज, आचार्य राजकुमार मिश्राजी, हरिभक्तिपरायण नामदेवशास्त्री दुधाते महाराज, जैन मुनि निलेशचंद्रजी, पराग रामदासीजी, अभय चैतन्य महाराज खारघर, गगनगिरी महाराज मठ की शिष्या तेंडुलकर ताई तथा धरणीधराचार्य महाराज सहित अनेक पूज्य संतों ने विभिन्न विषयों पर अपने विचार रखे।
दूसरे सत्र में हरिभक्तिपरायण एकनाथ महाराज सदगीर ने विशेष मार्गदर्शन किया। इस सत्र की अध्यक्षता मैत्रीबोध परिवार के पूज्य स्वामीजी महाराज ने की।
संगठनात्मक समन्वय पर बल
बैठक में धर्माचार्य संपर्क आयाम के माध्यम से पूज्य संत-महंत, धर्माचार्य, कीर्तनकार, प्रवचनकार एवं धर्मकार्य से जुड़े कार्यकर्ताओं के बीच निरंतर संवाद एवं समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बैठक का सूत्रसंचालन कोकण प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख परशुरामजी दुबे ने किया। महाराष्ट्र-गोवा राज्य धार्मिक विभाग प्रमुख संजयजी मुरदाळे बैठक में पूर्ण समय उपस्थित रहे।
धर्माचार्य संपर्क आयाम के प्रांत स्तरीय कार्यकर्ताओं में नवलजी पुराणिक, सतेंद्र पांडे, चंद्रशेखर पांडे, गणेश सुर्वे सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
बैठक के समापन पर विभाग मंत्री ने आभार व्यक्त किया।
78 पूज्य संत-महंत एवं धर्माचार्यों की उपस्थिति में संपन्न हुई इस बैठक में परिवार प्रबोधन, व्यसनमुक्ति, सामाजिक समरसता तथा संत रविदासजी के विचारों के माध्यम से समाजप्रबोधन को आगामी कार्य में विशेष प्राथमिकता देने की दिशा स्पष्ट हुई।
्रीराम 🚩