Vishva Hindu Parishad -Konkan

Vishva Hindu Parishad -Konkan its an Universal Hindu organization was founded in year 1964.

Official page of Vishva Hindu Parishad (VHP) Konkan (Mumbai) Prant

VHP "organise, consolidate the Hindu society and to serve and protect the Hindu Dharma"..

विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की हरिद्वार बैठक में आए विषयों पर दण्डी स्वामी पूज्य स्वामी जितेंद्रान...
19/06/2026

विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की हरिद्वार बैठक में आए विषयों पर दण्डी स्वामी पूज्य स्वामी जितेंद्रानन्द सरस्वती तथा विहिप अध्यक्ष श्री आलोक कुमार का संयुक्त प्रेस वक्तव्य:

परिवार कानूनों की समीक्षा, मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता, गौ रक्षा, गौ संवर्धन, नशा मुक्ति, तथा हिन्दू समाज की एकता के संकल्प के साथ पूर्ण हुई विहिप के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की द्वि-दिवसीय बैठक
हरिद्वार। जून 19, 2026. मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता, गौ रक्षा, गौ संवर्धन, नशा मुक्ति, परिवार कानूनों की समीक्षा तथा हिन्दू समाज की एकता के संकल्प के साथ विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मार्ग दर्शक मण्डल की द्विदिवसीय हरिद्वार बैठक आज शुक्रवार को निष्काम सेवा ट्रस्ट, भूपतवाला परिसर में समाप्त हो गई। बैठक के बाद उसमें उभरे विषयों की जानकारी देने हेतु आज उसी परिसर में दण्डी स्वामी पूज्य स्वामी जितेंद्रनन्द सरस्वती तथा विहिप के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री आलोक कुमार ने संयुक्त रूप से एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बताया कि:

1. परिवार कानूनों की समीक्षा:
परिवार संस्था विश्व को हिंदुत्व की एक बड़ी देन है। विवाह संस्था जीवन में काम को संयमित करती है। पिछले दिनों में ऐसे निर्णय हुए हैं जो चिंता पैदा करते हैं। जैसे व्यभिचार को अपराध नहीं माना जाने का निर्णय, बिना विवाह के लिव इन में रहने की अनुमति, समलैंगिक जोड़ों को पति-पत्नी की तरह रहने की आजादी इत्यादि। ऐसा वातावरण बन रहा है कि विवाह एक झंझट लगने लगे और मुक्त काम समाज में स्वीकार हो जाए। यह खतरनाक होगा।
साथ ही परिवार के विवादों को निपटाने के लिए सामाजिक व्यवस्थाएं टूट रही है। अब पति-पत्नी, बच्चे, मां-बाप इनमें से किसी के प्रति भी कुछ विवाद लगे तो आपस में बैठकर नहीं सुलझाया जाता। यह पुलिस और कचहरी के द्वारा होता है। इससे शत्रुता पैदा होती है; समाधान नहीं।
केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल का मत है कि सभी परिवार कानूनों की समीक्षा करने का समय आ गया है। इस बात की आवश्यकता है कि परिवार कानूनों को परिवार और विवाह संस्था के साथ सुसंगत बनाया जाए।
केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल यह भी आह्वान करता है कि माता-पिता से लेकर साधु संत तक सब लोग आने वाली पीढ़ियों को स्वधर्म की जानकारी और उसके अनुरूप जीवन बनाने के लिए प्रेरित करें।

राम मंदिर दान विवाद विषय:
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के पैसे को लेकर गंभीर आरोप लगाए जा रहे है। ट्रस्ट रामजी के एक-एक पैसे के लिए जिम्मेवार है। इसलिए विषय सामने आते ही ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री जी से SIT बनाने के लिए प्रार्थना की। उच्च स्तरीय SIT बनी है। चम्पतजी ने अपने को पूछताछ के लिए SIT के समक्ष प्रस्तुत किया है। जांच में पूरा सहयोग देंगे। जो लोग दोषी पाए जाएंगे, वो कोई भी हों, दंडित होने चाहिएं।
SIT की जांच का दायरा बढ़ाने की आवश्यकता है। जिन जिन अन्य ट्रस्टों ने राम मंदिर के नाम पर पैसा या सोना इकट्ठा किया, जिसमें रामालय ट्रस्ट और राम जन्म मंदिर पुनर्निर्माण ट्रस्ट भी शामिल हैं, उनके खातों की भी जांच होनी चाहिए।
ii किसी भी नतीजे पर पहुंचने से पहले हमको जांच पूरी होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। अभी से सब पर कीचड़ उछालना ठीक नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि किन्होंने बेइमानी की है और किनका दोष असावधान रहने का है।
इस बात की आवश्यकता है कि रामजन्मभूमि मंदिर की सब व्यवस्थाओं को पूर्ण रूप से दोषमुक्त बनाना होगा। SIT से भी इस बारे में अनुशंसा मांगी है। इस काम में अब कोई देरी नहीं होनी चाहिए।
iii. साथ ही अयोध्या को 2027 के विधानसभा चुनाव का हिस्सा बनाने के दुष्प्रयत्नो से सावधान रहना होगा। कांग्रेस और समाजवादी पार्टियां राम मंदिर की सतत विरोधी रही हैं। वह कारसेवकों के दमन और हत्या के लिए भी जिम्मेवार हैं। यहां तक कि सर्वोच्च न्यायालय में शपथपत्र दे कर कहा गया था कि राम वास्तविक नहीं, केवल एक काल्पनिक पात्र थे।
iv. आज वही लोग मांग कर रहे हैं कि जांच के लिए सर्वदलीय समिति बनाई जाए। यह हास्यास्पद मांग है। क्या किसी आपराधिक प्रकरण की जांच राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को सौंपी जा सकती है? क्या उन्हें इस तरह की जांच का कोई अनुभव है? क्या कानून राजनीतिक दलों के लोगों को आपराधिक जांच की अनुमति देता है? और फिर उन लोगों ने तो जांच से पहले ही मानो परिणाम घोषित कर रखा है। इस मामले में राजनीति को हिंदू समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

गोरक्षा एवं गौ संवर्धन:
मार्गदर्शक मंडल की बैठक में गोरक्षा और गौ संवर्धन पर चर्चा हुई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद ने इसके लिए सतत कार्य किया है। 1948 में संघ ने गोरक्षा के पक्ष में 2 करोड़ से अधिक हस्ताक्षर राष्ट्रपति जी को सौंपे थे। 7 नवंबर 1966 के विराट प्रदर्शन में हमारा बड़ा सहभाग था। प्रतिवर्ष बजरंगदल के कार्यकर्ता 2 लाख से अधिक गौवंश को कटने से बचाते हैं। विहिप मानती है कि संपूर्ण गौवंश की रक्षा के लिए केंद्रीय कानून बनाना चाहिए। हम इस बात से भी सहमत हैं कि सरकार गाय को सम्मानित करने वाला कोई योग्य नाम दे। कुछ लोगों का सुझाव है कि गाय को राष्ट्रमाता कहना उचित होगा। विहिप संतों के साथ देश भर में इस विषय पर सहमति बनाने का अभियान चलाएगी।
कुछ राज्यों में गोरक्षा के कानूनों में 14 वर्ष से अधिक गौधन की हत्या की अनुमति है। विहिप सभी राज्य सरकारों से आग्रह करेगी कि सख्त कानून बना कर संपूर्ण गौवंश की रक्षा सुनिश्चित करें।
विहिप समाज के सब समर्थ लोगों को गौपालन के लिए प्रेरित करेगी। गाय के गोबर और मूत्र से भी किसान को इतनी आमदनी हो जाती है कि गौपालन का खर्चा निकल आए। घर-घर में गौपालन ही इस समस्या का समाधान है।

नशा मुक्ति अभियान:
देश में बढ़ती नशाखोरी को रोकने के लिए बजरंग दल गत एक वर्ष से एक सघन नशा मुक्ति अभियान चला रहा है। अब इस अभियान को और प्रभावी बनाने हेतु पूज्य संतों द्वारा भी इस संदर्भ में एक व्यापक समाज प्रबोधन का कार्य किया जाएगा।

संत रविदास जी की 650 वीं जयंती:
संतों ने आह्वान किया कि सामाजिक समरसता के अग्रदूत व महान आध्यात्मिक पुरुष पूज्य संत रविदास जी की 650 वीं जयंती को देश भर में समाज के हर वर्ग द्वारा वर्ष भर मनाया जाए तथा उनके प्रेरक संदेशों को जन मन में उतारा जाए।

जनगणना में ORP षड्यंत्र:
बैठक में इस वर्ष होने वाली जनगणना के संबंध में चर्चा करते हुए पूज्य संतों ने आह्वान किया कि जो लोग जन जातीय समाज को ORP के रूप में दर्ज करने की बात कर रहे हैं वे उन्हें उनकी मूल संस्कृति से काटने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दू हम सब एक हैं।

जनसंख्या असंतुलन पर उच्चस्तरीय समिति:
केंद्र सरकार द्वारा जनसंख्या असंतुलन की जांच हेतु गठित एक उच्च स्तरीय समिति के गठन के संदर्भ में प्रधान मंत्री जी का धन्यवाद करते हुए पूज्य संतों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा व अलगाववाद को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

जारी कर्ता:
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिन्दू परिषद

15/06/2026

अयोध्या राम मंदिर, दान राशि विवाद में एस आई टी (S.I.T) टीम की जांच से सच्चाई सामने आएगी - आलोक कुमार (अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व हिन्दू परिषद)

13/06/2026

बजरंगदल का इतिहास है, हम राष्ट्र के सामने उपस्थित हर चुनौती की स्वीकार करते हैं, उसका मुकाबला करते हैं और उस पर विजय प्राप्त करके ही रहते हैं : डॉ. सुरेन्द्र जैन, बजरंगदल पूर्व राष्ट्रीय संयोजक एवं अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री- विहिप

इस वर्ष 16 अगस्त से प्रारम्भ होने वाली बाबा बूढ़ा अमरनाथ की यात्रा के लिए यात्रार्थ आह्वान व निमंत्रण।

यात्रा सम्बंधित अधिक जानकारी हेतू वेबसाइट के माध्यम से सम्पर्क करें :
budhaamarnath.org

देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम मागे; नव्या कायद्यासाठी तज्ज्ञ समिती स्थापन, विहिंपकडून शासनाचे अभिनंदनमहाराष्ट्र...
06/06/2026

देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम मागे; नव्या कायद्यासाठी तज्ज्ञ समिती स्थापन, विहिंपकडून शासनाचे अभिनंदन

महाराष्ट्रातील देवस्थानांचे हित, धार्मिक स्वायत्तता आणि सांस्कृतिक वारसा जपण्याच्या दृष्टीने राज्य शासनाने एक ऐतिहासिक आणि अत्यंत महत्त्वाचा निर्णय घेतला आहे. चौफेर होणारा विरोध आणि लोकभावना लक्षात घेऊन शासनाने वादग्रस्त ठरलेला 'महाराष्ट्र देवस्थान इनाम निर्मूलन प्रारूप अधिनियम, २०२६' अखेर मागे घेतला आहे. यासोबतच, या संदर्भातील नवीन कायद्याच्या निर्मितीसाठी एक सर्वसमावेशक तज्ज्ञ समिती स्थापन करण्याची घोषणाही शासनाकडून करण्यात आली आहे.
राज्य शासनाच्या या सकारात्मक भूमिकेचे विश्व हिंदू परिषद (विहिंप) आणि राज्यातील विविध देवस्थान प्रतिनिधींनी जाहीर स्वागत केले असून, हा निर्णय लोकभावना आणि न्यायाचा सन्मान करणारा असल्याचे म्हटले आहे.

विश्व हिंदू परिषदेचे क्षेत्र मंत्री श्री रामचंद्र रामूका आणि मंदिर आयामाचे क्षेत्र प्रमुख श्री अनिल सांबरे यांनी पत्रकातून ही प्रतिक्रिया दिली आहे.
मुख्यमंत्री व महसूल मंत्र्यांचे मानले आभार
या ऐतिहासिक निर्णयाबद्दल विश्व हिंदू परिषद आणि देवस्थान प्रतिनिधींनी संयुक्त पत्रकाद्वारे माननीय मुख्यमंत्री आणि राज्याचे महसूल मंत्री श्री. चंद्रशेखर बावनकुळे यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन केले असून त्यांचे आभार मानले आहेत.
"देवस्थानांचे अधिकार, प्राचीन परंपरा आणि त्यांचे अस्तित्व अबाधित राखण्यासाठी राज्य शासनाने टाकलेले हे पाऊल अत्यंत महत्त्वपूर्ण आणि मैलाचा दगड ठरणारे आहे," अशा शब्दांत विश्व हिंदू परिषदेच्या वतीने भावना व्यक्त करण्यात आल्या आहेत.

व्यापक सल्लामसलतीनंतरच होणार नव्या कायद्याची निर्मिती
सूत्रांनी दिलेल्या माहितीनुसार, जुना मसुदा मागे घेतल्यानंतर आता स्थापन करण्यात येणारी तज्ज्ञ समिती राज्यातील विविध धार्मिक संस्था, कायदेतज्ज्ञ आणि देवस्थानच्या प्रतिनिधींशी व्यापक सल्लामसलत करणार आहे. सर्वांना विश्वासात घेऊनच नवीन कायद्याचे प्रारूप तयार केले जाईल, अशी ग्वाही शासनाकडून देण्यात आली आहे. शासनाच्या या निर्णयामुळे राज्यातील हजारो देवस्थानांना आणि त्यांच्याशी जोडलेल्या लाखो भाविकांना मोठा दिलासा मिळाला असून, धार्मिक क्षेत्रातून या निर्णयाचे उत्स्फूर्त स्वागत होत आहे.

विश्व हिंदू परिषद अंतर्गत मातृशक्ति, मार्वे जिला द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण एवं...
06/06/2026

विश्व हिंदू परिषद अंतर्गत मातृशक्ति, मार्वे जिला द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वृक्षारोपण कर प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन का संदेश दिया गया।
आइए, हम सभी "एक पेड़ माँ के नाम" अभियान से जुड़कर हरित और स्वच्छ भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।
🚩 ्रीराम 🚩

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक व विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक प.पू. माधवराव सदाशिव गोलवलकर 'गुरुजी' की पु...
05/06/2026

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक व विश्व हिंदू परिषद के संस्थापक प.पू. माधवराव सदाशिव गोलवलकर 'गुरुजी' की पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन्

04/06/2026
मराठी -प्रस्तावित मंदिर इनामी जमीन हक्क निर्मूलन कायदा तात्काळ रद्द करावा महाराष्ट्र शासनाने प्रस्तावित केलेला “मंदिर इन...
04/06/2026

मराठी -

प्रस्तावित मंदिर इनामी जमीन हक्क निर्मूलन कायदा तात्काळ रद्द करावा
महाराष्ट्र शासनाने प्रस्तावित केलेला “मंदिर इनामी जमीन हक्क निर्मूलन कायदा” हा राज्यातील हजारो प्राचीन देवस्थानांवर अन्याय व आघात करणारा असून हिंदू धार्मिक संस्थांच्या स्वायत्ततेवर गदा आणणारा आहे. त्यामुळे हा कायदा संपूर्णतः रद्द करून नवीन तज्ञ समितीमार्फत व्यापक अभ्यासानंतर नवीन प्रारूप तयार करण्यात यावे, अशी ठाम मागणी महाराष्ट्रातील विविध देवस्थानांनी आणि विश्व हिंदू परिषदेतर्फे करण्यात येत आहे.
कोकण प्रांत मंत्री मोहन सालेकर म्हणाले सनातन आणि प्रस्थापित हिंदू कायदा यांचे अनुषंगाने देवस्थान जमिनींवर झालेले अतिक्रमण तत्काळ काढून टाकून सदरील जमिनी देवस्थान कडे तत्काळ वर्ग करून एकंदरीतच देवस्थान जमिनीच्या संरक्षण, व्यवस्थापन आणि संवर्धनासाठी तज्ञ समिती नियुक्त करून व्यापक अभ्यासानंतर उपरोक्त उद्येश पूर्ती साठी कायद्याचे प्रारूप तयार करण्याची मागणी केली आहे.
मंदिरांना शेकडो वर्षांपूर्वी समाजहित, धार्मिक परंपरा, नित्य पूजा-अर्चा, उत्सव, अन्नदान, धर्मशाळा, वेदपाठशाळा आणि सामाजिक उपक्रमांसाठी इनामी जमिनी देण्यात आल्या होत्या. या जमिनी केवळ मालमत्ता नसून हिंदू समाजाच्या श्रद्धा, परंपरा आणि धार्मिक व्यवस्थेचा आधार आहेत. प्रस्तावित कायद्यामुळे मंदिरांच्या आर्थिक स्रोतांवर गंभीर परिणाम होऊन अनेक धार्मिक आणि सामाजिक उपक्रम बंद पडण्याचा धोका निर्माण झाला आहे.
या पत्रकार परिषदेत बोलताना चित्त मंदिर विकास फाउंडेशन चै श्री महेश भागवत म्हणाले हा कायदा हिंदू देवस्थानांच्या बाबतीतच हस्तक्षेप करणारा असून धार्मिक समतेच्या तत्त्वालाही बाधा पोहोचवणारा आहे. संविधानाने दिलेल्या धार्मिक स्वातंत्र्य आणि धार्मिक संस्थांच्या व्यवस्थापनाच्या अधिकारांवर हा कायदा प्रत्यक्ष किंवा अप्रत्यक्षपणे मर्यादा आणणारा आहे. म्हणून खालील प्रमुख मागण्या करण्यात येत आहेत :
1 प्रस्तावित मंदिर इनामी जमीन हक्क निर्मूलन कायदा तात्काळ व संपूर्णतः रद्द करण्यात यावा.
2 राज्यातील सर्व प्रमुख देवस्थानांचे प्रतिनिधी, धर्माचार्य, कायदेतज्ञ, महसूल तज्ञ आणि सामाजिक संस्थांचा समावेश असलेली स्वतंत्र तज्ञ समिती नियुक्त करण्यात यावी.
3 मंदिरांच्या धार्मिक, सामाजिक आणि आर्थिक हितांचा सखोल अभ्यास करून नवीन प्रारूप तयार करण्यात यावे.
4 मंदिरांच्या मालमत्ता, परंपरा आणि धार्मिक स्वायत्ततेचे संरक्षण करणारी स्पष्ट तरतूद करण्यात यावी.
5 कोणताही निर्णय घेण्यापूर्वी राज्यभरातील देवस्थान, अर्चक, पुजारी आणि हिंदू समाजाशी व्यापक चर्चा करण्यात यावी.

हिंदू समाजाच्या भावना लक्षात घेऊन हा प्रस्तावित कायदा आपले हिंदुत्ववादी सरकार मागे घेईल, असा आम्हाला विश्वास आहे.

धर्मो रक्षति रक्षितः । मंदिर वाचवा – परंपरा वाचवा !
— महाराष्ट्रातील देवस्थानांचे प्रतिनिधी
— विश्व हिंदू परिषद, महाराष्ट्र

हिंदी -

प्रस्तावित मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन विधेयक तत्काल वापस लिया जाए
महाराष्ट्र शासन द्वारा प्रस्तावित “मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन विधेयक” राज्य के हजारों प्राचीन मंदिरों के धार्मिक, सामाजिक एवं आर्थिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला तथा हिंदू धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर आघात करने वाला है। अतः महाराष्ट्र के विभिन्न देवस्थान प्रतिनिधियों एवं विश्व हिंदू परिषद की ओर से इस प्रस्तावित विधेयक को तत्काल एवं पूर्णतः वापस लेने की मांग की जाती है।

पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुये कोकण प्रांत मोहन सालेकर ने कहा सनातन परंपराओं, स्थापित हिंदू विधि सिद्धांतों तथा प्रचलित कानूनी प्रावधानों के अनुरूप देवस्थानों की भूमि पर हुए सभी अतिक्रमणों को तत्काल हटाकर संबंधित भूमि मंदिरों को वापस सौंपी जाए। इसके अतिरिक्त, देवस्थान भूमि के संरक्षण, प्रबंधन एवं संवर्धन हेतु एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित कर व्यापक अध्ययन के पश्चात नए विधायी प्रारूप का निर्माण किया जाए।
सदियों पूर्व मंदिरों को लोककल्याण, नित्य पूजा-अर्चना, धार्मिक उत्सवों, अन्नदान, धर्मशालाओं, वेद पाठशालाओं, गोसेवा तथा विविध सामाजिक कार्यों के संचालन हेतु इनामी भूमि प्रदान की गई थी। यह भूमि केवल संपत्ति नहीं है, बल्कि हिंदू समाज की आस्था, परंपरा एवं धार्मिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रस्तावित विधेयक के कारण मंदिरों के आर्थिक संसाधनों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे अनेक धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों के प्रभावित होने की आशंका है।
पत्रकार परिषद को सम्बोधित करते हुए चित्त मंदिर विकास फाउंडेशन के श्री महेश भागवत ने कहा , संविधान धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक कार्यों एवं व्यवस्थाओं के संचालन का अधिकार प्रदान करता है। अतः मंदिरों एवं धार्मिक संस्थाओं से संबंधित किसी भी कानून में उनकी स्वायत्तता, परंपराओं एवं संपत्ति अधिकारों का समुचित संरक्षण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। सभी संबंधित पक्षों से व्यापक विचार-विमर्श किए बिना ऐसे विधेयक को आगे बढ़ाना उचित नहीं होगा।

प्रमुख मांगें
1. प्रस्तावित मंदिर इनामी भूमि अधिकार उन्मूलन विधेयक को तत्काल एवं पूर्णतः वापस लिया जाए।
2 .देवस्थान प्रतिनिधियों, धर्माचार्यों, विधि विशेषज्ञों, राजस्व विशेषज्ञों, कृषि विशेषज्ञों तथा सामाजिक संगठनों को सम्मिलित करते हुए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए।
3. मंदिर भूमि से जुड़े धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक एवं कानूनी पहलुओं का व्यापक अध्ययन कर नया प्रारूप तैयार किया जाए।
4. मंदिरों की संपत्तियों, धार्मिक परंपराओं तथा संस्थागत स्वायत्तता की सुरक्षा हेतु स्पष्ट कानूनी प्रावधान किए जाएँ।
5. मंदिर भूमि पर हुए अतिक्रमणों की पहचान कर उन्हें तत्काल हटाया जाए तथा भूमि संबंधित देवस्थानों को वापस सौंपी जाए।
6. किसी भी निर्णय से पूर्व राज्यभर के देवस्थानों, पुजारियों, न्यासियों, धर्माचार्यों एवं हिंदू समाज के प्रतिनिधियों से व्यापक संवाद किया जाए।
हमें विश्वास है कि हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार इस प्रस्तावित विधेयक पर पुनर्विचार करेगी तथा इसे वापस लेगी।

“धर्मो रक्षति रक्षितः” | मंदिर बचाओ – परंपरा बचाओ |
- महाराष्ट्र के देवस्थानों के प्रतिनिधि,
- विश्व हिंदू परिषद,

04/06/2026

मंदिरों की भूमि पर आघात स्वीकार नहीं — धर्म, परंपरा और देवस्थान अधिकारों की रक्षा हेतु विश्व हिंदू परिषद की निर्णायक भूमिका।
-प्रेस वार्ता कोंकण प्रांत मुंबई

विश्व हिंदू परिषद अंतर्गत बजरंग दल, कोकण प्रांताच्या शिष्टमंडळाने महाराष्ट्राचे मुख्यमंत्री मा. श्री देवेंद्र फडणवीस यां...
02/06/2026

विश्व हिंदू परिषद अंतर्गत बजरंग दल, कोकण प्रांताच्या शिष्टमंडळाने महाराष्ट्राचे मुख्यमंत्री मा. श्री देवेंद्र फडणवीस यांची भेट घेऊन राज्यात वाढत असलेल्या लँड जिहाद, अवैध अतिक्रमण आणि घुसखोरी यांसारख्या गंभीर विषयांवर सविस्तर चर्चा केली.

महाराष्ट्राला लँड जिहादमुक्त करण्याच्या मागणीसाठी मा. मुख्यमंत्र्यांना निवेदन सादर करण्यात आले. तसेच बांद्रा पूर्व येथील कारवाईबाबत त्यांचे आभार व्यक्त करणारे पत्रही सुपूर्द करण्यात आले.

यावेळी विश्व हिंदू परिषद कोकण प्रांत मंत्री मा. श्री मोहन सालेकर, बजरंग दल कोकण प्रांत संयोजक मा. श्री रणजीत जाधव तसेच कोकण प्रांत सहसंयोजक श्री गौतम रावरिया उपस्थित होते.

महाराष्ट्रात अवैध बांधकामे, घुसखोरी आणि अतिक्रमण कोणत्याही परिस्थितीत खपवून घेतले जाणार नाही. कायद्याचे राज्य प्रस्थापित होऊन भूमी, देवस्थाने आणि समाजाच्या हक्कांचे संरक्षण व्हावे, हीच आमची अपेक्षा आहे.

🚩 जय श्रीराम 🚩

आज विश्व हिंदू परिषद अंतर्गत बजरंग दल, कोकण प्रांत के प्रतिनिधिमंडल ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस जी से भेंट कर राज्य में बढ़ते लैंड जिहाद, अवैध अतिक्रमण एवं घुसपैठ जैसे गंभीर विषयों पर विस्तृत चर्चा की।

महाराष्ट्र को लैंड जिहाद मुक्त बनाने हेतु माननीय मुख्यमंत्री जी को निवेदन पत्र एवं बांद्रा पूर्व के कार्यवाही हेतु आभार पत्र सौंपा गया।

इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के कोकण प्रांत मंत्री श्री मोहन सालेकर जी, बजरंग दल कोकण प्रांत संयोजक श्री रणजीत जाधव जी तथा कोकण प्रांत सह संयोजक श्री गौतम रावरिया उपस्थित रहे।

अब महाराष्ट्र में अवैध ढांचे, घुसपैठ और अतिक्रमण को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून का शासन स्थापित हो और भूमि, धर्मस्थलों तथा समाज के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो, यही हमारी अपेक्षा है।

🚩 जय श्री राम 🚩

Address

Mumbai
400007

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Vishva Hindu Parishad -Konkan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Vishva Hindu Parishad -Konkan:

Share