27/09/2026
एससी एसटी एक्ट का दुरूपयोग किस हद तक किया जा रहा है इस घटना से समझिए....
साहिल वकोड़े दलित समाज से थे। IIT बॉम्बे के द्वितीय वर्ष के छात्र थे। वो परीक्षा हाल में नकल कर रहे थे। ChatGpt से देखकर कॉपी में उत्तर लिख रहे थे। ड्यूटी पर मौजूद प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला ने उन्हें नकल करते पकड़ लिया, IIT का दावा है कि न सस्पेंड किया, न अनुशासनात्मक कार्यवाई की— काउंसलिंग करके वापस भेज दिया।
हॉस्टल जाकर साहिल ने आत्महत्या कर ली। ये दुखद घटना है। इसके साथ पूरे देश को संवेदना है। लेकिन उसके बाद माँ-बाप ने जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाए पोस्टमार्टम के बाद भी शव नहीं लिया वो प्रोफ़ेसर पर केस दर्ज करवाने और SC/ST एक्ट लगवाने पर अड़ गए।
अब जरा इस व्यवस्था पर सवाल पूछिए...? ?
परीक्षा में नकल रोकना अपराध है या जाति देखकर नकल रोकनी चाहिए?
क्या IIT में परीक्षा के नियम भी अब जाति देखकर लागू होंगे ?
मोबाइल लेकर परीक्षा में बैठना—नियमों का उल्लंघन
AI पर प्रश्नपत्र डालकर जवाब लेना—गंभीर सवाल
प्रोफेसर का पकड़ना—उसका काम
लेकिन छात्र की मौत के बाद अगर हर सवाल का जवाब SC/ST Act में खोजा जाएगा, तो कल शायद परीक्षा में नकल पकड़ने से पहले invigilator को यह पूछना पड़े “पहले जाति बता दीजिए, फिर नकल रोकूं”
जातिगत भेदभाव के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच से पहले किसी को दोषी घोषित करना भी न्याय नहीं है।
नकल रोकने वाला शिक्षक अपराधी और नकल करने वाला पीड़ित—क्या यही नया अकादमिक मॉडल है?
IIT Bombay
゚ #विप्रमहासंघ