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20/09/2025

मुस्लिम हो ना तो फिर डर क्यों
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असम में मुसलमानों पर हो रहे जुल्म को देखकर हतप्रभ हूं…यक़ीन मानिए तस्वीरें देख परेशान हूं…जो हो रहा है पूरी तरह से संविध...
21/07/2025

असम में मुसलमानों पर हो रहे जुल्म को देखकर हतप्रभ हूं…
यक़ीन मानिए तस्वीरें देख परेशान हूं…
जो हो रहा है पूरी तरह से संविधान के दायरे में हो रहा…
सरकार संवैधानिक,
पुलिस संवैधानिक,
कानून संवैधानिक,
बुलडोजर संवैधानिक,
संवैधानिक सिस्टम मुसलमानों पर ऐसे टूट पड़ा है…
जैसे कोई भूखा, खाने के दस्तरखान पर टूट पड़ा हो…
हिम्मत नहीं है कि तस्वीरें देख सकूं,
इतने न लोगों ने टैग किया है
कि न चाहते हुए भी नजरों से टकरा रही हैं…
मैं लिख भी नहीं पा रहा…
शायद शब्द ही नहीं मिल रहे…
क्या लिखूं?
क्या कहूं?
किससे कहूं?
जब संवैधानिक सिस्टम द्वारा ही जुल्म किया जा रहा तो दूसरों की तरह झूठी तसल्ली कैसे और क्यों दे दूं?
यक़ीन मानिए इस जुल्म में हम वो सभी लोग बराबर के हिस्सेदार हैं जो इस सिस्टम में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लेते हैं!

काका कि कलम से

यमन की जे'ल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई 2025 को फां'सी दी जानी थी, लेकिन केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख का...
16/07/2025

यमन की जे'ल में बंद केरल की नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई 2025 को फां'सी दी जानी थी, लेकिन केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख कांथापुरम एपी अबूबकर मुस्लियार के हस्तक्षेप के चलते इस स'जा पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। ग्रैंड मुफ्ती ने बताया कि इस्लाम में एक प्रावधान है, जिसके तहत पीड़ित परिवार ह'त्यारे को माफ कर सकता है। इसी उम्मीद के साथ पीड़ित परिवार से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है।

अबूबकर मुस्लियार ने कहा कि इस्लाम मानवता को सर्वोपरि मानता है और उसमें ऐसी व्यवस्था है जिससे पीड़ित परिवार ह'त्यारे को माफ कर सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि वह खुद पीड़ित परिवार को नहीं जानते, लेकिन यमन के इस्लामी विद्वानों से संपर्क किया है और उनसे आग्रह किया है कि वे परिवार से बातचीत करें और...

इस खबर को पूरा पढ़ने के लिए comment box में दिए गए लिंक पर click करे

14/07/2025

सबसे मुश्किल होता है किसी को डूबने से बचाना, खुद की जान दांव पर लगानी पडती है, 🔥🔥🔥🔥

वर्ना लोग रील बनाते रहते हैं, सैल्यूट है तीसरे व्यक्ति को 🫡

14/07/2025

इसे कहते है असली हीरो..सेल्यूट है भाई को🫡

अपनी जान जोखिम में डाल कर एम्बुलेंस को ट्रेन से टकराने से बचाया इस रियल हीरो ने👏

14/07/2025

इस शख्स का नाम रवीन्द्रनाथ दास है।
दक्षिण चौबीस परगना ज़िले में घर है, पेशे से मछुआरा,
6 साल पहले वह और उसके 15 साथी हल्दिया क्षेत्र में बंगाल की खाड़ी में एक ट्रॉलर से मछली पकड़ रहे थे।
अचानक तेज़ तूफ़ान शुरू हो गया.एक बार ट्रॉलर पलट गया. हर कोई विशाल लहरों में बह गया है।
रवीन्द्रनाथ भी बह गये।पेशे से मछुआरा होने के कारण उनमें पानी का डर बहुत कम था और साहस बहुत था।
इसलिए गहरे समुद्र में बह जाने पर भी उसने जीने की हिम्मत नहीं खोई। तैरते रहे, तैरते रहे ऊपर आसमान और नीचे पानी,रवीन्द्रनाथ तैर गये।
एक घंटा दो घंटे में बदल जाता है,एक दिन दो दिन में बदल जाता है,रवीन्द्रनाथ तैरते हैं।
रवीन्द्रनाथ का शरीर कमज़ो हो गया लेकिन उन्हें जीवित रहने का कोई साधन नहीं मिला।जब वर्षा होती है तो भोजन वर्षा जल ही होता है।क्योंकि समुद्र का खारा पानी पीने योग्य नहीं है।हालाँकि, रवीन्द्रनाथ ने हार नहीं मानी।यह तैरता रहता है और तैरता रहता है।
5 दिन बीत गए, 5 दिन बाद लगभग 600 कि.मी.बांग्लादेश के कुतुबदिया पहुंचे। तभी बांग्लादेश जहाज़ 'एमवी जवादर' के कप्तान ने दूर से उसे तैरते हुए देखा। जब उसने यह देखा,तो उसने तुरंत उस पर एक लाइफ जैकेट फेंकी।
लेकिन वह इसे पकड़ नहीं पाता. नीचे जाता है लेकिन जहाज़ का कप्तान जाति,धार्मिक मतभेद,सीमाओं की कंटीली बातों को नज़रअंदाज़ करके उसके पीछे दौड़ता रहा।कुछ देर बाद वह फिर कुछ दूरी पर नज़र आया। कप्तान ने तुरंत जहाज़ को घुमाया और एक लाइफ जैकेट फेंकी।
एक बिंदु पर रवीन्द्रनाथ लाइफ जैकेट पकड़ सकते थे।और धीरे-धीरे जहाज़ की ओर आ गया।
जहाज़ के पास क्रेन गिराकर उसे जहाज़ पर चढ़ाया गया।
उसे जहाज़ पर ले जाए जाने का दृश्य जहाज के एक नाविक ने वीडियो में कैद कर लिया।
वीडियो में साफ दिखा कि जब रवीन्द्रनाथ को जहाज़ पर सफलतापूर्वक लाया गया तो जहाज़ के सभी नाविक खुशी से चिल्लाने लगे।
वे एक इंसान की जान बचाने की खुशी में खुद को खो देते हैं।एक मरते हुए यात्री को ज़िंदा करने का रोमांच आप भी वीडियो देखकर महसूस कर सकते हैं,
🙏धन्यवाद एमवी जवाद कप्तान,❤️ एमवी जवाद पर मौजूद सभी नाविकों को धन्यवाद।
एक इंसान के बच्चे को दोबारा ज़िंदा कर इंसानियत की जगमगाती मिसाल दुनिया के लोगों को और अधिक इंसान बनना सिखाएगी।लोग आपसी मतभेद भुलाना सीखेंगे। इंसान बनना सीखो।

(मूल लेख बंगाली में था,जिसका अनुवाद गूगल अनुवादक द्वारा किया गया)

10/07/2025

इस वीडियो को पोस्ट करने का मेरा एक ही मतलब है
शायद कुछ सिखने को मिल जाए

"वीर अब्दुल हमीद — जो न होते, तो पंजाब न होता"ज़रा याद करो क़ुर्बानी...आज उसी शेर-ए-वतन का जन्मदिन है — परमवीर चक्र विजे...
01/07/2025

"वीर अब्दुल हमीद — जो न होते, तो पंजाब न होता"

ज़रा याद करो क़ुर्बानी...

आज उसी शेर-ए-वतन का जन्मदिन है — परमवीर चक्र विजेता शहीद अब्दुल हमीद — जिनकी जान की क़ीमत पर आज पंजाब हमारे पास है, अमृतसर हमारा है, और लुधियाना की गलियों में तिरंगा लहरा रहा है।

लेकिन अफ़सोस — न प्रधानमंत्री ने याद किया,
न विपक्ष के नेता बोले,
न किसी चैनल ने हेडलाइन चलाई।
आज का दिन सिर्फ नेताओं के जन्मदिन की बधाइयों में गुम हो गया।

1965 का वो मंजर याद करो…

जब पाकिस्तान अमेरिका से मिले पैटन टैंकों पर सवार होकर पंजाब को रौंदता चला आ रहा था। उस वक़्त हमारी सेना के पास न बड़े हथियार थे, न ही संसाधन। बस एक जुनून था — मातृभूमि के लिए मर मिटने का।

तभी अब्दुल हमीद सामने आए।
एक जीप और 106 मिमी की रिकॉइललेस गन के साथ — उस शख्स ने पैटन टैंकों के घमंड को चूर-चूर कर दिया।
दो दिन में 7 टैंक ध्वस्त।

असल उत्तर गांव — जहां ये जंग लड़ी गई — पाकिस्तान की टैंकों की कब्रगाह बन गया।

फिर एक गोला गिरा... और अब्दुल हमीद अमर हो गए।

9 सितंबर 1965 को, शहीद हो गए — चिथड़े उड़ गए थे, पहचान मुश्किल थी, वहीं पंजाब की मिट्टी में दफ्न कर दिए गए।

लेकिन असली शर्म की बात तो इसके बाद शुरू हुई।

जिन्होंने देश बचाया, उनका घर भूख से हारा...

उनकी पत्नी रसूलन बीवी मदद के लिए जिंदगी भर चिठ्ठियाँ लिखती रहीं — सरकारें बस बुलाकर फोटो खिंचवाती रहीं।

बेटी नजबुन सरकारी दफ्तरों में बकाया पैसे के लिए ठोकरें खाती रहीं।

दामाद अलाउद्दीन की पेंशन, एरियर, ग्रेच्युटी आज तक अधूरी पड़ी है।

बेटा अली हसन, कानपुर के अस्पताल में ऑक्सीजन न मिलने से तड़पकर मर गया।

क्या यही सिला है “भारत माँ” के लाल का?

गांव में नाम भी छीन लिया गया...

उनके नाम से बने स्कूल का नाम बदल दिया गया।
जब लोगों ने सोशल मीडिया पर विरोध किया, तब जाकर फिर से नाम वापस लिखा गया।

सोचिए...

अगर अब्दुल हमीद मुसलमान थे, तो पाकिस्तान वाले भी मुसलमान थे —
लेकिन एक ने भारत के लिए अपनी जान दी, और दूसरे ने भारत को तोड़ने की कोशिश की।

क्यों नहीं मनाया जाता उनका जन्मदिन राष्ट्रीय गौरव के तौर पर?
क्यों नहीं दी जाती उन्हें वो जगह, जो शहीद-ए-आज़म भगत सिंह या नेताजी को दी जाती है?

ख़िराज-ए-अक़ीदत...

आज हम बस इतना ही कह सकते हैं:

> "वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा…"

वीर अब्दुल हमीद को सलाम
अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुक़ाम दे। आमीन।

लेख : मोहम्मद जाहिद कुछ तरतीब चेंज करके

17/06/2025

ईरानी मिसाइलों को रोकने में इस्राइल की नाकामयाब एयर डिफेंस सिस्टम के विफल होने के बाद इस्राइली सदमे में हैं, पहली बार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं!

17/06/2025

तेल अवीव के बेन गुरियन हवाई अड्डे से रोते हुए भाग रहे इजरायली सैनिकों को देखिए।

बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय !!!

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