23/03/2025
शारजाह के एक भिखारी ने सिर्फ़ एक घंटे में 367 दिरहम कमाए!
एक एक्सपेरिमेंट में, शारजाह पुलिस ने एक व्यक्ति को सड़क पर भिखारी की एक्टिंग के लिए चुना, ताकि यह देखा जा सके कि वह सिर्फ़ एक घंटे में कितना कमा सकता है, जिसमें दिखाया गया कि उसने 367 दिरहम एकत्र किए। अधिकारियों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट इस वीडियो और जानकारी साझा किया।
इस बीच, दुबई पुलिस ने रमज़ान के पहले दस दिनों में 33 भिखारियों को गिरफ़्तार किया। खाड़ी के देशों में भीख मांगना अपराध है। इस्लाम में भी यह पाप है, उन लोगो के लिए जो इसे पेशा बनाते है क्योंकि दान गरीब का अधिकार है न कि गरीब का भेष बदलकर मांग रहे अमीर इंसान का।
मेरी सभी मुसलमानों से अपील है जो मस्जिद के बाहर बैठे भिखारियों को फौरन पैसे पकड़ा देते है, कृपया अपनी जेब में रखे अतिरिक्त पैसे इन लोगो को देने के लिए निकाले
दिहाड़ी मजदूर
क्योकि ये लोग रोज़ कमा कर खाते हैं, और काम न मिलने पर इनके पास कोई बचत नहीं होती। इनसे जब आप काम करवा लो और 500 रुपया बने तो 520 दे दीजिए
रिक्शा चालक/ऑटो चालक
क्योंकि दिनभर मेहनत के बावजूद इनकी कमाई मौसम, ईंधन की कीमत, और ग्राहकों पर निर्भर करती है। अगर भाड़ा 87 हो गया तो 100 दे दीजिए
फेरीवाले (स्ट्रीट वेंडर)
क्योंकि इनकी आय अनियमित होती है और प्रतिस्पर्धा के कारण बहुत कम मुनाफा मिलता है।इनसे बारगेन ही न करे, यही आपका बढ़िया दान है
घरेलू कामगार (नौकरानी, रसोइया)
क्योंकि इनकी मेहनत के मुकाबले वेतन बहुत कम होता है और कोई निश्चित सुरक्षा नहीं होती। त्यौहार पर टिप ज्यादा करके दे दीजिए
फुटपाथ पर बैठेमोची, नाई, धोबी
क्योंकि पारंपरिक छोटे पेशे जो अब मशीनों और बदलते समय के कारण प्रभावित हो रहे है।
क्यों करनी चाहिए आर्थिक सहायता?
ये पेशे समाज के लिए जरूरी हैं लेकिन इनमें काम करने वालों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिलता। महामारी, प्राकृतिक आपदा या आर्थिक मंदी जैसे हालात में इनकी स्थिति और खराब हो जाती है। इनकी मदद करने से न केवल उनकी बुनियादी जरूरतें (खाना, शिक्षा, स्वास्थ्य) पूरी हो सकती हैं, बल्कि समाज में आर्थिक असमानता भी कम हो सकती है।
( हां इसमें कोई शक नहीं कि इनमें भी बहुत बड़े वाले बैठे है लेकिन अगर इस दुनिया में अगर कोई भी भलाई नहीं करेगा तो यह दुनिया भी बर्बाद गुलिस्तां बनकर रह जाएगा)