17/11/2021
*गुर्जर की विशिष्टता*
*🌹गुरुत्वा जरा या यस्य स: गुर्जर !! अर्थात जिसमें वृद्ध अवस्था में भी तेज बना रहे, उसे गुर्जर कहते हैं।*🌹
*गुर्जर अन्यान्य अनेक लोगों से एक पृथक पहचान रखने वाला व्यक्ति है। किसी भी देश, प्रदेश, किसी भी धर्म या सम्प्रदाय व किसी भी युग, समय विशेष में रहने वाला गुर्जर अन्य लोगों से एकदम पृथक, विशिष्ठ प्रकृति रखने वाला होता है। देश की भौगोलिक सीमाएं सदा यथावत नहीं रहती वे समय समय पर बदलती रहती है। प्रागैतिहासिक काल में विदेशी पुकारे जाने वाले देश आर्यावर्त का अभिन्न अंग थे। वहां जहां जहां भी गुर्जर रहते हैं, उन सबको देखने पर पता चलता है कि देश व काल (दोनों) गुर्जर लोगों के स्वभावगत गुणों को नहीं बदल पाए। आज भी इन लोगों की चारित्रिक विशेषता समान है। इसी कारण गुर्जर एक अंतरराष्ट्रीय स्वरूप रखने वाली जाति है। गुर्जर रूस के एशियाई हिस्सों के गुर्जरस्तान, गुर्जर फील, गुर्जजरवी, जुर्जन, गूजर चरक, चम्पक गुर्जर, चेचेन्या, कुसानिया हिस्सों में पहचान रखते हैं। अफगानिस्तान के गुजरानी गांव, गूजर खास, गूजर याम, चछक गुर्जर इस जाति की अंतरराष्ट्रीय पहचान के द्योतक है। रही बात पाकिस्तान की तो वह तो कुछेक वर्ष पूर्व तक भारत का हिस्सा था। वहां गुजरांवाला, डेरा गूजर खान, गुजरात, गूजर गढ़ी, गूजर डेरा इस्माइल खान गुर्जर अस्तित्व को दर्शाते हैं। रावल गुर्जरों द्वारा बसाया गया रावलपिंडी, लोर गुर्जरों की सैन्य छावनी के रूप में लाहौर, खारी गुर्जरों की सैन्य छावनी के रूप में ख्यात नाम खारियान नगर इस कौम के ऐतिहासिक गौरव के प्रतीक हैं।*
*पाकिस्तान के राष्ट्रपति पद पर दो मुस्लिम गुर्जर व भारत के राष्ट्रपति श्री फ़ख़रीद्दीन अली अहमद कसाणा किसी परिचय के मोहताज नहीं है। ये सभी इस्लाम धर्म में रहे पले। गुजरात के इतिहास प्रसिद्ध चालुक्य गुर्जर सम्राट गुर्जरेश्वर कुमारपाल जैन धर्म के अनुयायी थे। कुषाण गुर्जर सम्राट कनिष्क महान, हूण गुर्जर सम्राट मिहिरकुल, गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिरभोज, बप्पा रावल गहलोत, छत्रपति शिवाजी महाराज बैंसला, आदि महान गुर्जर शाषक रहे हैं। आज के पंजाब में हमारे अनेक भाई सिख पन्थ पर अग्रसर है। गुर्जर हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी सहित दुनिया के हर धर्म में पाए जाते हैं। गुर्जर सर्वधर्म को मानते हैं। कुछ लोग सही कहते हैं कि सभी गुर्जरों की एक मां होती है। उपरोक्तानुसार गुर्जर एक अलग संस्कृति वाली कौम है। उपरोक्त पृष्ठभूमि को दृष्टिगत रखते हुए गुर्जर के विशिष्ट गुण की चर्चा करते हैं।*
*गुर्जर अपने आप मे विशिष्ट गुणधारी- अदम्य साहस, शौर्य व पराक्रम के धनी युग युगांतर से गुर्जर साहसिक वृत्ति के लोग हैं, यह तथ्य प्रमाणित है मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को समझाते हुए उनके गुरू वशिष्ठ ने यह बात बताई थी। योग वशिष्ठ सर्ग 37 उत्त्पत्ति प्रकरण में पृष्ठ 808 पर उल्लेखित है-*
*गुर्जरानी कनाशेन, गुर्जरी केश लुंचनम,*
*विहित तंगणो, तुंग नासिश कुशतैरणो।*
*इतिहास काल में कुषाण गुर्जरों के पराक्रम और उनकी विजयी गुर्जर के अदम्य साहस, शौर्य व पराक्रम की बात को पुष्ट करती हैं। तदुपरान्त गुर्जर प्रतिहार काल के नौसो वर्ष के शासन काल ने उस धारणा को बल दिया। पश्चिमी सीमाओं पर लगातार हो रहे आक्रमणों के सामने नौसो वर्ष तक गुर्जर ढाल बनकर खड़े रहे। पण्डित बालकृष्ण शर्मा ने इसी बात को निम्न शब्दों में कहा है-*
*आंधी उठी इस्लाम की, मां भारती भी कंप कंपाई।*
*अरब हमलावर बने, तेग उनकी लप लपाई।।*
*फूंकते और लूटते घर, ग्राम अबलाओं की अस्मत।*
*तुम ही तो थे, मां भारती की, लाज थी जिसने बचाई।।*
*प्रतिहार पुत्रों कूप के मण्डूक, तुम क्यों हो रहे हो।*
*पूर्वजों के कृत्य को प्रमाद में, क्यूं खो रहे हो।।*
*इसके उपरांत बैंसला गुर्जर कुल नन्दन छत्रपति शिवाजी महाराज व उनके प्रधान सेनापति प्रतापराव गुर्जर की वीरता, साहस, शौर्य व पराक्रम की बातों से कौन अनभिज्ञ है। क्रमानुसार आगे चले तो कुंजा बहादुरपुर, जनपद हरिद्वार उत्तराखंड के राजा विजय सिंह गुर्जर और कल्याण सिंह गुर्जर की वीरता व अदम्य साहस की अमर गाथा इतिहास के पन्नों पर शोभित है। उन्होंने साम्राज्यवादी अंग्रेजों से लोहा लिया और हंसते हंसते जीवन उत्सर्ग कर दिया। धौलपुर के गुर्जर राजा देवहंस कसाणा ने आगरा धौलपुर के क्षेत्र को मुक्त ही करा लिया था। 1857 कि मेरठ क्रांति कोतवाल धनसिंह गुर्जर की भूमिका के बिना अधूरी है। बुलन्दशहर, हापुड़ क्षेत्र ही नहीं, चन्द्रावल, फतेहपुर बेरी, दिल्ली व सोहना गुरुग्राम के गुर्जर वीरों ने सैकड़ों की संख्या में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के यज्ञ में हंसते हंसते प्राणों की आहुतियां दी।1857 का बलिदान किसी से छिपा हुआ नहीं है। देश को स्वतंत्र कराने में जिन जिन राष्ट्रभक्तों ने अमूल्य योगदान दिया उनमें श्री बिट्ठल भाई पटेल, सरदार वल्लभ भाई पटेल, राजस्थान केसरी विजय सिंह पथिक, महंत जगन्नाथ दास का नाम सम्मिलित हैं। इनमे से पथिक जी ने राजस्थान में स्वतंत्रता सेनानियों का नेतृत्व किया, वही सरदार पटेल ने देशी रियासतों का विलीनीकरण कर आधुनिक भारत को मूर्त रूप दिया।*
*खेद इस बात का है कि अरबों व अंग्रेजों से लोहा लेने वाला गुर्जर स्वतंत्र भारत में भी अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए सड़कों व रेल पटरियों पर लेटने को बाध्य हुआ। उसे स्वदेशी हुक्मरानों के खूनी पंजों से जुझने को बाध्य होना पड़ा। इसी क्रम में पीपलखेड़ा, पाटोली (दौसा), पीलूपुरा (बयाना), सवाईमाधोपुर, लालसोट, बूंदी की धरती को एक बार पुनः गुर्जर के खून से लाल हो गई। लाठियों व गोलियां का सामना गुर्जर ने किया और वीरता, शौर्य व पराक्रम का प्रदर्शन करते हुए सीने पर गोलियां खाई। ज्यों ज्यों लाठियां व गोलियां चली त्यों त्यों गुर्जर लामबन्द होता गया। गुर्जर आरक्षण आंदोलन में 72 से ज्यादा गुर्जर वीर सपूतों ने हंसते हंसते जाति गौरव के नाम पद प्राण न्योछावर कर दिए।*
*कर्त्तव्यपरायणता व राष्ट्रभक्ति – एक बार पुनः श्री बालकृष्ण शर्मा की पंक्तियों को उद्घृत करना चाहूंगा-*
*भूत भारत के सहस्य दो साल, गुर्जर जाति का कोई भी लाल।*
*बना हो कभी, देश गद्दार, बता दें, कोई ऐसी एक मिशाल।।*
*गुर्जर विदेशी आक्रमणों के सामने दीवार बनकर खड़ा रहा। मातृभूमि के लिए बगड़ावत वीर लड़ते लड़ते प्राणों पर खेल गए। मेवाड़ के गुर्जर सूरजमल चौहान ने जहां चित्तौड़गढ़ की रक्षा के लिए प्राण न्योछावर किये, वहीं कर्त्तव्य परायणता व राष्ट्रभक्ति में उसकी पत्नी पन्नाधाय गुर्जर ने महाराणा उदयसिंह के प्राण बचाने के लिए अपने बेटे चन्दन गुर्जर की बलि देदी। विश्व के इतिहास में इसकी टक्कर का बलिदान देखने, पढ़ने व सुनने में नहीं आता।* *1947, 1965, 1971 व 1999 के भारत पाक संघर्ष में जम्मू कश्मीर के गुर्जरों ने राष्ट्रभक्ति का सर्वोत्तम उदाहरण पेश किया।* *द्विराष्ट्र सिंद्धांत का इस्लाम धर्म भी उनकी राष्ट्रभक्ति के आड़े नहीं आया। श्रीमती जानी गुर्जरी, श्रीमती सरबा गुर्जरी, श्रीमती माली गुर्जरी, श्री मोहम्मदिन गुर्जर एवं श्री गुलामदिन गुर्जर ने भारतीय सैन्य बल की सहायता कर आक्रमणकारियों के नापाक इरादों को धूल धूसरित कर दिया और भारत सरकार से पदम् सम्मान से सम्मानित हुए।*
*पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने 24 मई 1976 को लिखा- गुर्जर देशभक्त और देशप्रेमी कौम है। इनका जीवन दुर्लभ है, किन्तु वे सदा निडर और हंसमुख रहे हैं। पीर निज़ामुद्दीन गुर्जर की भूमिका के बिना जम्मू कश्मीर का भारत मे विलय सम्भव ही नहीं था। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू व उप प्रधानमंत्री श्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम किया।*
*गुर्जर भोला- गुर्जर अत्यंत भोला होता है। वह किसी का भी विश्वास कर लेता है। ताज़ा घटनाक्रम देखे तो राजस्थान के गुर्जर ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का भरोसा किया।* *गुर्जर समाज बार बार धूर्त लोगों की धूर्तता का शिकार हुआ।* *उसकी सच्चाई, उसका भोलापन उसकी कमजोरी बनकर सामने आयी है। गुर्जर आरक्षण आंदोलन का घटनाक्रम दर्शाता है-*
*गुर्जर भोला, गुर्जर सख्त।*
*गुर्जर हिलादे, ताजो तख्त।।*
*स्वतंत्रता प्रेमी स्वभावगत है गुर्जर- अरबों व अंग्रेजों से निरन्तर जूझता, टकराता गुर्जर अपनी स्वच्छंद मनोवृत्ति के अनुकूल जंगलों, पहाड़ों व नदी की घाटियों में रहने लगा। फलतः वह शिक्षा से वंचित हो गया जो वर्तमान में उसके पिछड़ेपन का मूल कारण है। परतंत्रता काल में गुर्जर के बागी तेवर उसकी स्वतंत्रता की भूख के प्रतीक रहे हैं।*
*चारित्रिक बल- प्रायः प्रत्येक गुर्जर स्वभाव से चरित्रबल में बहुत ऊंचा रहा है।* *1857 के स्वतंत्रता आंदोलन के समय अंग्रेजों पर कहर बरपाने वाले गुर्जर ने किसी भी अंग्रेज महिला की आबरू पर हाथ नहीं डाला।* कई बार तो *गुर्जर *आंदोलनकारी जान जोखिम में डाल कर अंग्रेज महिलाओं से लूटी गई अंगूठियां अंग्रेज छावनी में वापस लौटाने गए कि कहीं अंगूठी की वजह से अंग्रेज दम्पत्ति का विवाह बंधन खतरे में न पड़ जाए।* *गुर्जर डकैत भी इस दृष्टिकोण से ऊंचे चाल चलन के पक्षधर रहे हैं। इसी वजह से देशी राजाओं ने उच्च चारित्रिक संस्कार में अपने बच्चों को ढालने के लिए गुर्जर परिवारों में ही रखा जिससे धाभाई प्रथा चलन में आई।*
*संघर्ष की राहों के राही- स्वभावत: गुर्जर ने कभी भी दबाव के सामने झुकना स्वीकार नहीं किया। संघर्ष के राह का राही गुर्जर सर्वस्व गंवाकर भी सामने तन कर खड़ा होना जानता है। वह टूट सकता है परंतु मुड़ेगा नहीं, वह बर्बाद हो जाएगा परन्तु झुकेगा नहीं, यह उसकी प्रकृति में है। इस तथ्य को पुष्ट करने के अनेक प्रमाण हैं।*
*शुद्ध आर्य नस्ल का प्रतीक- यूँ तो आर्य जाति का रक्त भारत की अनेक जातियों में प्रवाहित हो रहा है परंतु इस जाति (आर्य) की नस्ल का शुद्ध स्वरूप गुर्जर में ही देखने को मिलता है। हज़ारों वर्षों से इस शुद्धता को बनाए रखना गुर्जर की विशिष्टता है।*
*भारत, भारतीयता व भारतीय संस्कृति का पोषक भारतीय सभ्यता व संस्कृति की पताका फहराने में गुर्जर सदा ही अग्रणी रहा है। हज़ारों वर्षों तक अरबों व अंग्रेजों से जूझता रहा। ब्रह्मा से मां गायत्री, कृष्ण से यशोदा मां के मार्फ़त गुर्जर का जुड़ाव है। मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम सर्व स्वीकार्य गुर्जर थे।*
*श्री राम के पिता श्री महाराज दसरथ को तो गुरुतरो गुरुव: याने सबसे बड़ा गुर्जर कहा गया है। राम के वंशज आज भी अपने आप को बड़ गुर्जर कहते हैं। *राम के वंशज कुषाण (कसाना), बैंसला, बटार, भरत के वंशज चौहान, देवड़ा, विधूड़ी, नागर, सराधना, लक्ष्मण के वंशज प्रतिहार, परिहार, पड़िहार, पडियार,* *भरत व शत्रुघ्न के वंशज पंवार, मुंडन, लोहमोड आदि है।*
*गुर्जर जाति आनुवंशिक तौर पर क्षत्रिय वर्ण से आई है और परपरागत रूप से क्षत्रिय गुणों से मण्डित है।* *आन, बान व शान के लिए सिर तक कटा लेने को तैयार गुर्जर राष्ट्र व धर्म के नाम पर सदा से समर्पित है, इन्हीं गुणों के कारण इन्हें देश की संस्कृति के रक्षक का नाम दिया गया है।*
🌹 *गुर्जर शक्ति दल*🌹
*हस्तिनापुर मेरठ*