Idrisi Samaj Mau

Idrisi Samaj Mau समाज-कार्य (social work)

गरीबों के समाजिक उत्थान और उनकी भलाई ,शिक्षा के मैदान मैं लोगों को जागरूक करना समाज की बुराइयों को सुधारने का काम करना है जैसे ,दहेज, महिलाओं का उत्पीड़न

19/06/2026

दुआ:

اللّٰهُمَّ اغْفِرْ لِأَحْيَائِنَا وَأَمْوَاتِنَا وَشَاهِدِنَا وَغَائِبِنَا

“या अल्लाह! इस दुनिया से रुख़्सत हो चुके तमाम मोमिनीन और मोमिनात की मग़फ़िरत फ़रमा, उनकी क़ब्रों को रौशन फ़रमा, उनकी खामियों को माफ़ फ़रमा और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमा। आमीन।”

18/06/2026

ऐलान:
जनाब इश्तियाक अहमद फ़र्नीचर, राशिद अहमद के अब्बू, साकिन मुंशीपुरा (बेल्थरा रोड वाले) का आज इंतिकाल हो गया है।
إِنَّا لِلّهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को रौशन फ़रमाए, उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम अहल-ए-ख़ाना को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए। आमीन।

हाजी शकील अहमद मरहूम: मऊ की एक यादगार सामाजिक शख्सियतإِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَमऊ शहर की तहज़ीबी, इल्मी...
13/06/2026

हाजी शकील अहमद मरहूम: मऊ की एक यादगार सामाजिक शख्सियत

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

मऊ शहर की तहज़ीबी, इल्मी और सामाजिक विरासत में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो हमेशा अदब और मोहब्बत के साथ याद किए जाते हैं। उन्हीं में से एक नाम हाजी शकील अहमद मरहूम का है, जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी सादगी, इंसानियत, भाईचारे और समाज सेवा के लिए समर्पित कर दी।

हाजी शकील अहमद मरहूम का जन्म जनपद मऊ के ऐतिहासिक मोहल्ले बख्तावरगंज में हुआ, जिसे मऊ शहर के पुराने और प्रतिष्ठित इलाक़ों में गिना जाता है। इसी सामाजिक और तहज़ीबी माहौल में उनकी परवरिश हुई। बाद में वे अपने परिवार के साथ मिर्ज़ाहादीपुरा, मऊ में निवास करने लगे, जहाँ उन्होंने अपने अच्छे अख़लाक़, मिलनसार स्वभाव और सामाजिक व्यवहार से लोगों के दिलों में विशेष स्थान बनाया।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक दीनी तालीम मऊ के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान मदरसा मिफ्ताहुल उलूम से प्राप्त की। यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण पहलू है कि वे मऊ के मशहूर आलिम-ए-दीन हज़रत मौलाना महफूज़ुर्रहमान रहमतुल्लाह अलैह के हमजमात (सहपाठी) रहे। दोनों ने साथ-साथ शिक्षा प्राप्त की और यह संबंध केवल सहपाठी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जीवनभर की गहरी दोस्ती और आपसी सम्मान में बदल गया।

मदरसा की तालीम के बाद उन्होंने डी.ए.वी. (DAV) से आधुनिक शिक्षा भी प्राप्त की। दीनी और दुनियावी शिक्षा का यह संगम उनके व्यक्तित्व की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी, जिसने उन्हें संतुलित और व्यापक सोच रखने वाला इंसान बनाया।

हाजी शकील अहमद मरहूम एक अत्यंत सामाजिक, मिलनसार और सेवा-भाव से भरपूर व्यक्तित्व के मालिक थे। वे हर वर्ग के लोगों से आत्मीयता से मिलते थे। किसी भी ज़रूरतमंद की मदद करना, लोगों के सुख-दुःख में शामिल होना, और समाज में भाईचारे को बढ़ावा देना उनकी पहचान थी। उनके दरवाज़े से कोई भी व्यक्ति खाली हाथ या मायूस होकर नहीं लौटता था।

यह सेवा-भाव उन्हें अपने परिवार से विरासत में मिला था। उनके वालिद मरहूम भी मऊ की एक प्रतिष्ठित सामाजिक शख्सियत थे, जो अपने समय में लोगों के बीच इज़्ज़त, भरोसे और नेकनीयती के लिए जाने जाते थे। हाजी शकील अहमद मरहूम ने भी अपने वालिद के नक़्श-ए-क़दम पर चलते हुए समाज सेवा को अपनी ज़िंदगी का अहम उद्देश्य बनाया।

18 अगस्त 2023, बरोज़ जुमा (शुक्रवार) को हाजी शकील अहमद मरहूम इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए। उनके इंतिकाल की ख़बर ने पूरे परिवार, रिश्तेदारों, दोस्तों और मऊ शहर को गहरे सदमे में डाल दिया। बख्तावरगंज में जन्म लेने वाले और मिर्ज़ाहादीपुरा में अपनी पहचान बनाने वाले इस नेक इंसान के जाने से समाज ने एक ऐसी शख्सियत खो दी जिसकी कमी लंबे समय तक महसूस की जाएगी।

आज भी उन्हें जानने वाले उनकी सादगी, मुस्कान, ख़ुलूस, वफ़ादारी और समाज सेवा को आदर और मोहब्बत के साथ याद करते हैं। ऐसे लोग भले ही इस दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन अपने अच्छे किरदार और नेक अमल की वजह से लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहते हैं।

हाजी शकील अहमद मरहूम की ज़िंदगी आने वाली नस्लों के लिए यह संदेश छोड़ती है कि इंसान की असली पहचान उसके माल-दौलत से नहीं, बल्कि उसके अख़लाक़, इंसानियत, इल्म और समाज सेवा से होती है।

अल्लाह तआला हाजी शकील अहमद मरहूम की मग़फ़िरत फ़रमाए, उनकी क़ब्र को नूर से भर दे, उनकी नेकियों को क़ुबूल फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए। आमीन।

साथ ही उनके परिवार को सब्र-ए-जमील अता फ़रमाए।

إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ

04/06/2026

एलान: जनाब अब्दुस्समद साहब का इंतकाल हो गया है। ِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-ज़ोहर , जीयनपुर(मनेका देह) में अदा की जाएगी।
तमाम अहबाब से नमाज़-ए-जनाज़ा में शिरकत करने और मरहूम के लिए दुआ-ए-मग़फिरत की गुज़ारिश है।

अल्लाह तआला मरहूम की मग़फिरत फ़रमाए और उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मकाम अता फ़रमाए। आमीन। 🤲

04/06/2026

� اعلانِ وفات
حاجی منظور صاحب گھوسی نائس ٹیلر کا انتقال ہو گیا ہے۔
إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
نمازِ جنازہ آج شام 5:30 بجے ادا کی جائے گی۔

تمام احباب سے دعائے مغفرت اور نمازِ جنازہ میں شرکت کی درخواست ہے۔

اللہ تعالیٰ مرحوم کی مغفرت فرمائے۔ آمین۔ 🤲🏻

16/05/2026

📢 अहम ऐलान 📢

जो हज़रात अल्लाह की राह में क़ुर्बानी करने का इरादा रखते हैं, उनसे गुज़ारिश है कि अपने बाल और नाखून 29 ज़िलक़ादा, दिन इतवार — 17 मई 2026 तक काट लें।

ज़िलहिज्जा का चाँद नज़र आने के बाद, साहिबे-क़ुर्बानी के लिए क़ुर्बानी होने तक बाल और नाखून न काटना मुस्तहब और सुन्नत के मुताबिक अमल है।

🤲 अल्लाह तआला हम सबकी इबादत और क़ुर्बानी को क़ुबूल फ़रमाए। आमीन।

⚠️ नोट: यह तारीख़ चाँद नज़र आने पर निर्भर है।

12/05/2026

📢 ऐलान 📢
आज दिनांक 12/05/2026 को हाजी अब्दुल कलाम साहब (इदरीसी), निवासी मोहल्ला मुंशी पुरा, मऊ का इंतकाल हो गया है।
إِنَّا لِلّٰهِ وَإِنَّا إِلَيْهِ رَاجِعُونَ
मरहूम की नमाज़-ए-जनाज़ा आज बाद नमाज़-ए-असर शाम 5:20 बजे 12 बीघा कब्रिस्तान में अदा की जाएगी, इंशाअल्लाह।
तमाम हज़रात से दुआ-ए-मगफिरत और जनाज़े में शिरकत की गुज़ारिश है।
इदरीसी समाज, मऊ

20/03/2026
19/03/2026

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