Ramashram satsang Mathura

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हे प्रभु हम सबों पे दया करें कृपा करें 🙏🙏
29/05/2021

हे प्रभु हम सबों पे दया करें कृपा करें 🙏🙏

29/05/2021
या अल्लाह रहम कर 🙏🙏
29/05/2021

या अल्लाह रहम कर 🙏🙏

29/05/2021

*सत्संगियों के कर्तव्य*

*अब इस सत्संग-मिशन को कुछ ऐसे आदमियों की आवश्यकता है कि जो अभ्यास के साथ वैराग्य में भी अपनी कुछ रुचि रखते हो। जिनके हृदय में पर-सेवा के भाव उदय हो रहे हो, जो पब्लिक सर्विस के लिए अपनी लाइफ (Life) देने को तैयार हो, जिनको सादगी और सरलता पसंद हो, जो ऋषियों की तरह उच्च कोटि का अपना जीवन बनाना चाहते हो।*

*धन बहुत ही बुरी वस्तु है, इससे आगे चलकर बहुत सी खराबियां आ जाती है। रुपए की शक्ल देखते ही बड़े-बड़े तपस्वी और त्यागी भी चलायमान हो जाते हैं 'एक कंचन और कामिनी दुर्गम घाटी दोय।' इसलिए हम चाहते हैं कि आप लोग किसी ऐसे ढंग से इस सत्संग मिशन को चलाने की कोशिश करें जिसमें अधिक रुपए का सवाल सामने न आए थोड़ा-सा रुपया प्रभु कहीं ना कहीं से देता ही रहेगा। वह सब की आवश्यकताओं को पूर्ण करता है।*

*यह कहना वृथा ही है कि गृहस्थ बनकर मनुष्य कुछ नहीं कर सकता। ऋषि लोग अधिकतर गृहस्थ ही होते थे, बाल बच्चों का पालन पोषण करते, पाठशाला खोलते और फिर भी अपना समय परोपकार के कार्यों में लगाते थे। यदि तुम अपने को ऋषियों के समान सादा बना सको तो धन के लिए तुमको फिकर न करनी पड़ेगी।*

*यह मत घबराओ कि इतना बड़ा कार्य हम कैसे कर सकेंगे। सर्व शक्तिमान जगदीश्वर तुम्हारे अत्यंत समीप है और तुम्हारे हृदय-मंदिर की गुफा में छिपा बैठा है। तुम उस गुफा के दरवाजे पर धरना दे दो। आर्तनाद से पुकार-पुकार कर उससे प्रार्थना करो। वह अपने किवाड़ खोल देगा और अवश्य खोल देगा। उस समय तुम उसके महल में प्रवेश हो जाओ और जो कुछ दिल में आए वह उससे मांग लो। उसे अपने लिए कुछ आवश्यकता नहीं है। उसकी सारी वस्तुएं तुम्हारे लिए ही हैं। पिता का धन पुत्रों के लिए ही होता है। माता के स्तन अपने बच्चों के लिए हमेशा खुले रहते हैं। वह हमारी माता है वह हमारा हितु है और सखा है। उस पर भरोसा रखो वह निःसंदेह सहायता करता है और करेगा।*
*सत्संग के उत्सवों में जहां तक हो सके सादगी ही बरती जानी चाहिए। राजसी ठाटों से रजोगुण प्रधान होकर वातावरण को बिगाड़ देता है। सतोगुणी स्वभाव रखने के लिए सादा भोजन और सादा रहन-सहन ही लाभकारी होता है। हमको अपने अंदर से रजोगुण और तमोगुण हटा के सतोगुण को बिठालना है इसलिए आवश्यकता है इस बात की कि हमारे जल्से भी सात्विक हो।*

*पूज्य गुरुदेव*
🙏🙏

बुद्ध पूर्णिमा विशेष
29/05/2021

बुद्ध पूर्णिमा विशेष

29/05/2021
हे परम पिता परमेश्वर, हे जगत जननी जिया मां हम सबों पे दया करें कृपा करें 🙏🙏
29/05/2021

हे परम पिता परमेश्वर, हे जगत जननी जिया मां हम सबों पे दया करें कृपा करें 🙏🙏

29/05/2021

*तीन गुरु*

*(पटना में श्री गुरुदेव का प्रवचन)*

*गतांक से आगे भाग ३*

*जब उस प्रभु की छटा क्षण-मात्र के लिए सामने आती है तो उस समय वह आत्म-विभोर हो जाता है और जब वह लोप हो जाती है तब वह छटपटाने लगता है और उसके दिल में एक टीस पैदा हो जाती है। उसका चंद्रमुख देखते ही सांसारिक वस्तुएं तुच्छ मालूम पड़ने लगती हैं। उसके अंदर इतनी व्याकुलता बढ़ जाती है कि वह उनके लिए प्राण देने के लिए भी तैयार हो जाता है। भगवान तो यही देखता है कि कितनी तड़प हमारे लिए इसके अन्दर है, कितना यह प्यार कर सकता है, कितना कष्ट उठा सकता है। जब इस व्याकुलता की अंतिम स्थिति आ जाती है तब वह हमारे सामने आ जाता है। लेकिन आपने तो अभी उसके बाहरी स्वरूप को देखा है, उसके पास कितनी शक्तियां हैं, कितना ज्ञान है इत्यादि यह भी आपको जानना है कि गुरु की जरूरत इसलिए पड़ती है कि वह अविद्या को दूर कर इस विद्या का ज्ञान कराएं। अध्यात्म विद्या के भी तीन गुरु होते हैं। एक गुरु वह होता है जो मनुष्य को कर्म करने के लिए इस तरफ झुकाता है, दूसरा गुरु वह होता है जो उपासना के साधन में लगाता है, और तीसरा गुरु वह होता है जो पूर्ण और यथार्थ ज्ञान करा देता है। जैसे-जैसे लड़का पढ़ता जाता है वैसे वैसे उसको दूसरा गुरु करना पड़ता है। हाईस्कूल के पास करने के बाद उसे कॉलेज में जाना पड़ता है और इस प्रकार से बराबर ही उसे गुरु बदलने की जरूरत होती है। जो विषय एक गुरु पढ़ा सकता है वह दूसरा गुरु नहीं पढ़ा सकता है। जो गुरु जितना जानता है उतने तक शिष्य को पहुंचा देता है और उसको दूसरे गुरु के पास भेज देता है। जो आखिरी गुरु होता है वही आत्म-ज्ञान कराता है, इस प्रकार से अध्यात्म विद्या पढ़ने के लिए तीन गुरु करने की आवश्यकता होती है। जो गुरु थोड़ा जानते हैं वह आपको आगे नहीं बढ़ा सकते हैं, वे दूसरे गुरु करने की सलाह दे देते हैं। जो चीजें व्यवहार में हैं वहीं परमार्थ में भी हैं। भगवान राम ने भी तीन गुरु किए थे। उनके पहले गुरु थे वशिष्ठ, दूसरे विश्वामित्र और तीसरे अगस्त जी थे। मनुष्य तीन भागों में बटा हुआ है, शरीर, मन, और आत्मा और सबसे सबमें कुछ शक्तियां मौजूद हैं। जैसे शरीर में चलने फिरने और देखने इत्यादि की शक्ति भरी हुई है। उसके बाद मन की शक्ति है। मन की शक्ति बहुत जबरदस्त होती है। इसी मन को कालिया नाग कहा गया है, आपको इसी कालिया नाग को नाथ कर आगे

हे प्रभु दया करें 🙏🙏
28/05/2021

हे प्रभु दया करें 🙏🙏

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