13/06/2026
एक मित्र का प्रश्न: मूलाधार चक्र के बारे में बताने की कृपा करें..की आर्थिक विकास के लिए इसका जाग्रत होना जरूरी है, तथा एक सामान्य व्यक्ति इसे कैसे जागृत कर सकता है।
✅उत्तर:
मूलाधार चक्र मानव चेतना की आधारशिला है। यह रीढ़ की हड्डी के निचले सिरे पर स्थित होता है और जीवन की मूल आवश्यकताओं—सुरक्षा, स्थिरता, जीविका और आर्थिक आधार—से सीधे जुड़ा है।
जब मूलाधार चक्र असंतुलित होता है, तब व्यक्ति में भय, असुरक्षा, धन की कमी का भाव और भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती है। इसके विपरीत, जब यह चक्र संतुलित व जाग्रत होता है, तब परिश्रम की क्षमता, निर्णय शक्ति, धैर्य और भौतिक समृद्धि की दिशा स्वतः खुलने लगती है।
आर्थिक विकास के लिए मूलाधार चक्र का जाग्रत होना इसलिए आवश्यक है क्योंकि बिना आंतरिक स्थिरता के बाहरी सफलता टिकाऊ नहीं हो सकती। धन केवल अवसर से नहीं, बल्कि आधारभूत ऊर्जा की मजबूती से आता है।
एक सामान्य व्यक्ति के लिए मूलाधार चक्र को जागृत करने का सरल मार्ग है—
• नियमित और सजग प्राणायाम, विशेषकर गहरी, स्थिर श्वास
• धरती से जुड़ाव—नंगे पाँव भूमि पर चलना, प्रकृति के संपर्क में रहना
• जीवन में अनुशासन, परिश्रम और ईमानदारी
• भय और असुरक्षा को पहचानकर उनसे भागने की बजाय उनका साक्षी बनना
जब मूलाधार सुदृढ़ होता है, तब व्यक्ति का जीवन आर्थिक रूप से ही नहीं, मानसिक और शारीरिक रूप से भी स्थिर होने लगता है। यही स्थायी समृद्धि का वास्तविक आधार है।
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