16/08/2026
🐄 “अजी साहब, हम बस्ती में नहीं आए… बल्कि ये बस्ती हमारी जगह पर आ गई!”
गौचर भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण का गंभीर सच
गौचर भूमि केवल खाली पड़ी जमीन नहीं, बल्कि गांव के पशुधन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की साझा विरासत है। सदियों से इन भूमियों का उपयोग गोवंश एवं अन्य पशुओं के चरने के लिए होता आया है।
लेकिन आज धीरे-धीरे गौचर भूमि पर अतिक्रमण बढ़ता जा रहा है। कहीं पक्के निर्माण हो रहे हैं, कहीं बाड़े और रास्ते बनाए जा रहे हैं, तो कहीं सार्वजनिक भूमि का निजी उपयोग किया जा रहा है।
❓ सबसे बड़ा सवाल—अगर गौचर भूमि पर ही अतिक्रमण हो जाएगा, तो गांव के गोवंश चरेंगे कहां?
आज हम चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियों के लिए गौचर भूमि का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
यह किसी एक व्यक्ति या परिवार का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे गांव, पशुधन, पर्यावरण और समाज के भविष्य से जुड़ा विषय है।
👉 जिला कलेक्टर, डीडवाना-कुचामन
👉 वन विभाग, जिला डीडवाना-कुचामन
👉 संबंधित राजस्व एवं प्रशासनिक अधिकारियों
से निवेदन है कि गौचर भूमियों का सीमांकन एवं राजस्व रिकॉर्ड की जांच करवाकर अतिक्रमण की निष्पक्ष पहचान की जाए तथा जहां भी अतिक्रमण पाया जाए, वहां नियमानुसार कार्रवाई कर गौचर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
🌿 गौचर बचाएंगे — गोवंश बचाएंगे।
🐄 गौचर बचाएंगे — गांव का भविष्य बचाएंगे।
युवा हिन्दू गौ रक्षा सेवा समिति, मकराना
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