Friends unity social work

Friends unity social work फ्रेंड्स यूनिटी सोशल वर्क फाऊंडेशन एक सामाजिक संगठन है।

"फ्रेंड्स यूनिटी सोशल वर्क फाउंडेशन" की तरफ़ से आप सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाए...
26/01/2026

"फ्रेंड्स यूनिटी सोशल वर्क फाउंडेशन" की तरफ़ से आप सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं ढेर सारी शुभकामनाएं🎉🙏🇮🇳


सभी साथियों को सूचित किया जाता है कि "फ्रेंड्स यूनिटी सोशल वर्क फाऊंडेशन" के सभी पदाधिकारी अपने जिलों के समस्त टीमों को ...
25/11/2025

सभी साथियों को सूचित किया जाता है कि "फ्रेंड्स यूनिटी सोशल वर्क फाऊंडेशन" के सभी पदाधिकारी अपने जिलों के समस्त टीमों को और बढ़ाएं तथा सभी "जिला उपाध्यक्ष" अपने जिलों के कार्यकर्म एवं कार्यभारों से सभी सदस्यों को अवगत कराएं।

जिन जिलों में अभी तक संगठन के सदस्यों के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन नहीं हुए हैं, सभी "जिला उपाध्यक्ष" रजिस्ट्रेशन की प्रकिया को जल्द से जल्द पूर्ण कराएं। प्रत्येक सदस्य का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अति आवश्यक है।
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(आज्ञा से)
संगठन अध्यक्ष
आदित्य प्रताप सिंह......🖋

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Aditya Pratap Singh Shakya

HAPPY BUDDHA PurnimaWishing you great success and the blessings of Lord Buddha in all your endeavours. Happy Buddha Purn...
12/05/2025

HAPPY BUDDHA Purnima

Wishing you great success and the blessings of Lord Buddha in all your endeavours. Happy Buddha Purnima...


महाराणा प्रताप, जो मेवाड़ के शासक थे, एक महान योद्धा और स्वतंत्रता के प्रतीक थे। उनका जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ में हुआ...
09/05/2025

महाराणा प्रताप, जो मेवाड़ के शासक थे, एक महान योद्धा और स्वतंत्रता के प्रतीक थे। उनका जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ में हुआ था। उन्होंने मुगल बादशाह अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। हल्दीघाटी के युद्ध में उन्होंने अकबर की सेना के खिलाफ वीरता से लड़ाई लड़ी.
जन्म और प्रारंभिक जीवन: महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ किले में हुआ था। उनके पिता मेवाड़ के राजा उदय सिंह द्वितीय थे और उनकी माता जयवंता बाई थीं.
मुगल विरोध: महाराणा प्रताप ने अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अकबर की सेना के खिलाफ हल्दीघाटी का युद्ध लड़ा.
हल्दीघाटी का युद्ध: हल्दीघाटी का युद्ध 18 जून 1576 को हुआ था। यह एक निर्णायक युद्ध था जिसमें महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच संघर्ष हुआ था। हालांकि महाराणा प्रताप को युद्ध में सफलता नहीं मिली, लेकिन उनकी वीरता और साहस ने उन्हें एक वीर योद्धा के रूप में स्थापित किया.
अंतिम दिन: महाराणा प्रताप ने 19 जनवरी 1597 को अपना जीवन त्याग दिया। उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी वीरता और साहस आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं.

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Friends unity social work foundation free ebooks provide program..........!
20/04/2025

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भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं शत-शत् नमन ।.....
14/04/2025

भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं शत-शत् नमन ।.......🙏🙏🇮🇳🇮🇳

डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय समाज के एक महान नेता, सामाजिक सुधारक और भारत के संविधान के शिल्पकार थे। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज में समानता की स्थापना के लिए किया गया योगदान उन्हें इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाता है। ऐसे महान विचारक का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के ‘महू’ नामक स्थान पर हुआ था, जिसे अब डॉ. अंबेडकर नगर के नाम से जाना जाता है। बाबासाहेब अंबेडकर जाति से दलित थे और उस समय की सामाजिक व्यवस्था में उन्हें ‘अछूत’ माना जाता था। इस कारण उनका बचपन अनेक कठिनाइयों और भेदभाव से भरा रहा। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।

भारत रत्न के पास 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं के सबसे बेहतर जानकार थे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मात्र 2 साल 3 महीने में 8 साल की पढ़ाई पूरी की थी। वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ नामक एक दुर्लभ डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले भारत के ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं।

प्रथम विश्व युद्ध की वजह से उनको भारत वापस लौटना पड़ा। कुछ समय बाद उन्होंने बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप में नौकरी प्रारंभ की। बाद में उनको सिडनेम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनोमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर के रूप में नौकरी मिल गई।

कोल्हापुर के शाहू महाराज की मदद से एक बार फिर वह उच्च शिक्षा के लिए लंदन गए।

वर्ष 1936 में बाबा साहेब जी ने स्वतंत्र मजदूर पार्टी का गठन किया था। सन् 1937 के केन्द्रीय विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 15 सीट की जीत मिली। अम्बेडकर जी अपनी इस पार्टी को आल इंडिया शीडयूल कास्ट पार्टी में बदल दिया, इस पार्टी के साथ वे 1946 में संविधान सभा के चुनाव में खड़े हुए, लेकिन उनकी इस पार्टी का चुनाव में बहुत ही ख़राब प्रदर्शन रहा। कांग्रेस व महात्मा गाँधी ने अछूते लोगों को हरिजन नाम दिया, जिससे सब लोग उन्हें हरिजन ही बोलने लगे, लेकिन अम्बेडकर जी को ये बिल्कुल पसंद नहीं आया और उन्होंने उस बात का विरोध किया था। उनका कहना था अछूते लोग भी हमारे समाज का एक हिस्सा है, वे भी बाकि लोगों की तरह आम व्यक्ति ही हैं। अम्बेडकर जी को रक्षा सलाहकार कमिटी में रखा गया व वाइसराय एग्जीक्यूटिव परिषद उन्हें लेबर का मंत्री बनाया गया था। बाबा साहेब आजाद भारत के पहले कानून मंत्री भी बने थे........!

friends Unity social work foundation
संगठन अध्यक्ष - आदित्य प्रताप सिंह......🖋🖋

भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं शत-शत् नमन ।.....
13/04/2025

भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं शत-शत् नमन ।.......🙏🙏🇮🇳🇮🇳

डॉ. भीमराव अंबेडकर भारतीय समाज के एक महान नेता, सामाजिक सुधारक और भारत के संविधान के शिल्पकार थे। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा के प्रति समर्पण और समाज में समानता की स्थापना के लिए किया गया योगदान उन्हें इतिहास में एक विशेष स्थान दिलाता है। ऐसे महान विचारक का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्यप्रदेश के इंदौर जिले के ‘महू’ नामक स्थान पर हुआ था, जिसे अब डॉ. अंबेडकर नगर के नाम से जाना जाता है। बाबासाहेब अंबेडकर जाति से दलित थे और उस समय की सामाजिक व्यवस्था में उन्हें ‘अछूत’ माना जाता था। इस कारण उनका बचपन अनेक कठिनाइयों और भेदभाव से भरा रहा। लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी और शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया।

भारत रत्न के पास 32 डिग्रियों के साथ 9 भाषाओं के सबसे बेहतर जानकार थे। उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मात्र 2 साल 3 महीने में 8 साल की पढ़ाई पूरी की थी। वह लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से ‘डॉक्टर ऑफ साइंस’ नामक एक दुर्लभ डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने वाले भारत के ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं।

प्रथम विश्व युद्ध की वजह से उनको भारत वापस लौटना पड़ा। कुछ समय बाद उन्होंने बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप में नौकरी प्रारंभ की। बाद में उनको सिडनेम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनोमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था के प्रोफेसर के रूप में नौकरी मिल गई।

कोल्हापुर के शाहू महाराज की मदद से एक बार फिर वह उच्च शिक्षा के लिए लंदन गए।

वर्ष 1936 में बाबा साहेब जी ने स्वतंत्र मजदूर पार्टी का गठन किया था। सन् 1937 के केन्द्रीय विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 15 सीट की जीत मिली। अम्बेडकर जी अपनी इस पार्टी को आल इंडिया शीडयूल कास्ट पार्टी में बदल दिया, इस पार्टी के साथ वे 1946 में संविधान सभा के चुनाव में खड़े हुए, लेकिन उनकी इस पार्टी का चुनाव में बहुत ही ख़राब प्रदर्शन रहा। कांग्रेस व महात्मा गाँधी ने अछूते लोगों को हरिजन नाम दिया, जिससे सब लोग उन्हें हरिजन ही बोलने लगे, लेकिन अम्बेडकर जी को ये बिल्कुल पसंद नहीं आया और उन्होंने उस बात का विरोध किया था। उनका कहना था अछूते लोग भी हमारे समाज का एक हिस्सा है, वे भी बाकि लोगों की तरह आम व्यक्ति ही हैं। अम्बेडकर जी को रक्षा सलाहकार कमिटी में रखा गया व वाइसराय एग्जीक्यूटिव परिषद उन्हें लेबर का मंत्री बनाया गया था। बाबा साहेब आजाद भारत के पहले कानून मंत्री भी बने थे।

जलियांवाला हत्याकांड में शहीद हुए वीर शहीदों को  स्मृति दिवस पर शत शत नमन....🙏🙏🇮🇳🇮🇳  जलियांवाला बाग हत्याकांड की यह घटना...
13/04/2025

जलियांवाला हत्याकांड में शहीद हुए वीर शहीदों को स्मृति दिवस पर शत शत नमन....🙏🙏🇮🇳🇮🇳

जलियांवाला बाग हत्याकांड की यह घटना 13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन हुई थी. उस दिन कई लोग अमृतसर में त्योहार मनाने और रौलट एक्ट के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध में शामिल होने के लिए इकट्ठा हुए थे. रौलट एक्ट एक ऐसा कानून था, जिससे अंग्रेज बिना किसी मुकदमे के किसी को भी गिरफ्तार कर सकते थे.

इसी दौरान जनरल डायर अपने सैनिकों के साथ जलियांवाला बाग पहुंचा. उसने बिना किसी चेतावनी के गोलियां चलाने का आदेश दे दिया. बाग का एक ही रास्ता था और उसे भी बंद कर दिया गया. लोग भाग नहीं सके और कई लोगों की जान चली गई. यह घटना आजादी की लड़ाई में एक बड़ा मोड़ बन गई.




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save forest, save life.........!🙏👏हैदराबाद का वन्यजीव मदद के लिए पुकार रहा है 400 एकड़ जंगल को नष्ट किया जा रहा है, सैकड...
06/04/2025

save forest, save life.........!🙏👏
हैदराबाद का वन्यजीव मदद के लिए पुकार रहा है 400 एकड़ जंगल को नष्ट किया जा रहा है, सैकड़ों जानवरों का घर उनसे छीना जा रहा है,
वनों की कटाई से भूमि में परिवर्तन होता है और इसलिए बहुत से पौधे और जानवर जीवित नहीं रह पाते। अधिक वनों की कटाई से पूरी प्रजातियाँ विलुप्त हो सकती हैं। इसे 'जैव विविधता का नुकसान' कहा जाता है। पौधों और जानवरों की कई अद्भुतप्रजातियाँ नष्ट हो गई हैं, और कई अन्य लुप्तप्राय हैं।
वृक्षों और अन्य वनस्पतियों के नष्ट होने से जलवायु परिवर्तन, मरुस्थलीकरण, मृदा अपरदन, कम फसलें, बाढ़, वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि तथा मूल निवासियों के लिए अनेक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। वनों की कटाई कई कारणों से होती है।


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