Corruption Intelligence Detective

Corruption Intelligence Detective A War Against Crime and Corruption Cotruth Corruption Intelligence Detective Foundation

05/01/2026

श्रीमान Narendra Modi जी,
हाल ही में ग्राक प्लेटफ़ॉर्म पर एक ऐसा फीचर जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से किसी भी महिला या लड़की की सामान्य तस्वीर को कुछ ही सेकंड में ब्रा-पेंटी, बिकनी अथवा अन्य अर्ध-नग्न रूप में बदला जा सकता है। यह तकनीक इतनी सरल है कि किसी भी परिचित या अपरिचित महिला की सभ्य फोटो को उसकी इच्छा के विरुद्ध आपत्तिजनक रूप में बदला जा सकता है।

“नारी तू नारायणी” की भावना वाले हमारे देश में इस तरह की तकनीक महिलाओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे टूल्स का दुरुपयोग कर महिलाओं को बदनाम किया जा सकता है, मानसिक उत्पीड़न किया जा सकता है और ब्लैकमेलिंग जैसे अपराधों को बढ़ावा मिल सकता है।

यह न केवल महिलाओं के प्रति समाज की सोच को नुकसान पहुँचाएगा, बल्कि डिजिटल अपराधों के साथ–साथ गैर जागरूक एवं अशिक्षित महिलाओं के साथ ब्लैकमेलिंग, यौन उत्पीड़न जैसी घटनाओं में भी वृद्धि करेगा।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि –
राष्ट्रहित एवं महिलाओं के सम्मान की रक्षा हेतु इस प्रकार के फीचर्स पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा इनके दुरुपयोग को रोकने के लिए कठोर दिशा-निर्देश और कानून बनाए जाएँ।

~ साभार: Corruption Intelligence Detective

03/01/2026

आवश्यक जानकारी
————————
देश में ई-चालान प्रणाली के विस्तार के साथ-साथ प्रशासनिक स्तर पर इसके दुरुपयोग और तकनीकी त्रुटियों के मामले भी तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं। कई नागरिकों के नाम ऐसे चालान जारी किए जा रहे हैं जिनका उनके वाहन, स्थान या समय से कोई वास्तविक संबंध नहीं होता। यह स्थिति केवल प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि मानव अधिकारों के उल्लंघन की श्रेणी में आती है।

उक्त क्रम में एनसीआईबी मुख्यालय का मानना है कि बिना भौतिक सत्यापन, बिना वाहन पहचान, बिना लोकेशन मिलान तथा विधिक प्रक्रिया का पालन किए यदि किसी के नाम ई-चालान जारी किया जाता है, तो वह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही, डिजिटल दुरुपयोग और प्रथम दृष्टया उत्पीड़न माना जाएगा।

ऐसे फर्जी ई-चालानों के कारण नागरिकों को मानसिक तनाव, भय, सामाजिक असुरक्षा, आर्थिक क्षति तथा पुलिस कार्रवाई का खतरा झेलना पड़ता है। यह भारत के संविधान द्वारा प्रदत्त गरिमा, स्वतंत्रता और निष्पक्ष न्याय के अधिकार का उल्लंघन है।

अगर आप भी इस तरह फर्जी ई चालान की घटना का शिकार बनते है तो आप ऐसे मामलों में सीधे राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली में संबंधित ट्रैफिक, परिवहन या पुलिस विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध शिकायत दर्ज करा सकता है।

शिकायत में आप यह आधार रख सकते हैं कि चालान बिना वाहन सत्यापन, बिना सही फोटो, बिना GPS लोकेशन मिलान या बिना डिजिटल प्रमाण के जारी किया गया। आयोग ऐसी स्थिति में संबंधित चालान से जुड़े फोटो, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, सिस्टम लॉग और सर्वर डेटा तलब कर स्वतंत्र जांच करा सकता है।
दोष सिद्ध होने पर आयोग द्वारा संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई, आपराधिक कार्यवाही, चालान निरस्तीकरण तथा पीड़ित नागरिक को मुआवजा दिलाए जाने की संस्तुति की जा सकती है।

विदित हो कि, ई-चालान व्यवस्था का उद्देश्य सड़क सुरक्षा है, न कि नागरिकों का उत्पीड़न। पारदर्शिता, डेटा-सत्यापन और उत्तरदायित्व के बिना डिजिटल प्रवर्तन लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बन सकता है।

~ साभार: Corruption Intelligence Detective

01/01/2026

आप सभी को नववर्ष 🎉 2026 की बधाई एवं शुभकामनाएं, नववर्ष आप सभी के लिए शुभ हो, मंगलमय हो 💐🙏🏻 🇮🇳 जय हिन्द!
सावधान रहें, सतर्क रहें, सुरक्षित रहे।
मुन्ना कुमार 🇮🇳
महानिदेशक,करप्शन इंटेलिजेंस डिटेक्टिव ,भारत।
Munna Devraj Cyber Dost Corruption Intelligence Detective

सरकार अब हर शैक्षणिक दस्तावेज़ पर QR कोड लगाने को एक बड़ी क्रांति की तरह पेश कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि यही तकनीक प...
30/12/2025

सरकार अब हर शैक्षणिक दस्तावेज़ पर QR कोड लगाने को एक बड़ी क्रांति की तरह पेश कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि यही तकनीक प्राइवेट सेक्टर पिछले 10–15 सालों से रोज़मर्रा के काम में इस्तेमाल कर रहा है। बैंकिंग, ई-कॉमर्स, हॉस्पिटल, यूनिवर्सिटी जैसी अन्य जगहों पर QR कोड और रियल-टाइम डेटाबेस वेरिफिकेशन कब का सामान्य बन चुका है।

तो सवाल यह है कि –
• अगर यह तकनीक इतनी पुरानी और परखी हुई है, तो सरकारी भर्ती और शिक्षा सत्यापन में इसे लागू करने में इतनी देरी क्यों हुई?
• फर्जी डिग्रियाँ और नकली सर्टिफिकेट सालों तक कैसे सिस्टम को चकमा देते रहे?

आज उसी बुनियादी तकनीक को लागू करके इसे “सख़्ती” और “डिजिटल क्रांति” के रूप में प्रचारित करना, दरअसल सफलता नहीं बल्कि यह स्वीकारोक्ति है कि सरकारी तंत्र इतने वर्षों तक अपने कर्तव्य में विफल रहा।
यह पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन इसे नवाचार बताना जनता की बुद्धि का अपमान है।

असल डिजिटल गवर्नेंस वह होती है जो समय पर लागू हो, न कि तब जब नुकसान हो चुका हो और भरोसा टूट चुका हो।

QR कोड नया नहीं है।
नई है सिर्फ़ सरकार की देर से आई हुई समझ।

30/12/2025

क्या आप जानतें है कि –
हमारे देश में हेल्थ इंश्योरेंस भी इंश्योरेंस कंपनियों द्वारा पॉलिसी होल्डर्स के क्लेम रिलीज होने के समय तरह तरह के हथकंडे अपना कर तगड़ा स्कैम किया जा रहा है।

लोगों को लगता है कि हेल्थ इंश्योरेंस मुश्किल समय में सुरक्षा देता है। लेकिन हकीकत यह है कि असली परेशानी अस्पताल से निकलने के बाद शुरू होती है, जब क्लेम फाइल किया जाता है। पॉलिसी बेचते समय जो भरोसा दिया जाता है, वही भरोसा क्लेम के समय धीरे-धीरे टूटने लगता है।

कई मामलों में मरीजों के बिल ₹50,000 से ₹5,00,000 तक होते हैं। पॉलिसी लेते समय या अस्पताल में भर्ती होने से पहले एजेंट कहता है कि सब कवर हो जाएगा और चिंता की कोई बात नहीं है। इसी भरोसे पर लोग इलाज करवाते हैं, लेकिन बाद में पता चलता है कि कहानी कुछ और ही है।

सबसे पहले डॉक्यूमेंट का खेल शुरू होता है। कभी कहा जाता है कि ये बीमारी क्लेम में कवर नहीं होगी, डिस्चार्ज समरी नहीं मिली, कभी बिल, कभी डॉक्टर का नोट। हर बार जब मांगा गया कागज़ दे दिया जाता है, तो कोई नया बहाना सामने आ जाता है। इसका मकसद यह नहीं होता कि जानकारी चाहिए – बल्कि यह होता है कि ग्राहक थक जाए।

जब आखिरकार क्लेम प्रोसेस होता है, तो पूरा पैसा नहीं दिया जाता। उदाहरण के लिए, ₹80,000 के बिल पर ₹50,000 ही रिलीज़ कर दिए जाते हैं। जब पूछा जाता है कि बाकी ₹30,000 क्यों काटे गए, तो जवाब मिलता है कि “उस अमाउंट का प्रूफ नहीं मिला।” कुछ दिन बाद वही कंपनी कहती है कि पहले गलत अमाउंट कोट हो गया था और असली अमाउंट कुछ और है।

फिर “मेडिकल नेसेसिटी” का तर्क शुरू होता है। अटेंडेंट के लिए लिए गए बेड, नर्सिंग चार्ज या कुछ दवाओं पर सवाल उठा दिए जाते हैं – जैसे वे इलाज का हिस्सा ही न हों। स्पष्टीकरण देने के बाद भी हफ्तों तक कोई जवाब नहीं आता, और फिर कहा जाता है कि “वो डॉक्यूमेंट एक्सेप्ट नहीं हुआ, फिर से भेजिए।”

इस पूरी प्रक्रिया में एजेंट, जो पॉलिसी बेचते समय रोज फोन करता था, क्लेम के समय या तो गायब हो जाता है या सिर्फ इतना कहता है, “मैं देख रहा हूँ।” जवाबदेही कहीं नहीं होती।

यह सब एक तय पैटर्न है। कंपनियों को पता होता है कि ज़्यादातर लोग महीनों ईमेल, कॉल और शिकायतों में नहीं पड़ेंगे। वे या तो कम अमाउंट मान लेंगे या पूरी तरह छोड़ देंगे। इसी मानसिक थकान पर यह सिस्टम चलता है।

अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो समझिए कि आप अकेले नहीं हैं और आप गलत नहीं हैं। यह तरीका ही ऐसा बनाया गया है। लेकिन आपके पास विकल्प हैं – IRDAI, इंश्योरेंस ओम्बड्समैन और कंज़्यूमर कोर्ट। जब लोग शिकायत दर्ज करते हैं, तभी यह सिस्टम जवाब देने लगता है।

~ साभार: Corruption Intelligence Detective

देख रहे हो Raj Thackeray जी –भाषा के नाम पर बोए गए जहर का विष इतना विनाशकारी होता है कि एक मां ने अपने ही 6 साल की बच्ची...
29/12/2025

देख रहे हो Raj Thackeray जी –
भाषा के नाम पर बोए गए जहर का विष इतना विनाशकारी होता है कि एक मां ने अपने ही 6 साल की बच्ची को मराठी की जगह हिन्दी में बात करने पर गला घोंट कर मार डाला।

नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में घटित दिल दहला देने वाली यह घटना एक चेतावनी है कि अगर अभी भी समय रहते भाषा के नाम पर अगर समाज में जहर घोलना बंद न किया गया तो उसका परिणाम कितना भयंकर एवं विनाशकारी हो सकता है।

आवश्यक जानकारी—————————अगर आप दोपहिया वाहन चलाते हैं, तो यह जानना बेहद ज़रूरी है कि केवल हेलमेट पहनना ही काफी नहीं, बल्क...
28/12/2025

आवश्यक जानकारी
—————————
अगर आप दोपहिया वाहन चलाते हैं, तो यह जानना बेहद ज़रूरी है कि केवल हेलमेट पहनना ही काफी नहीं, बल्कि उसे सही तरीके से पहनना और उसकी पट्टी ठीक से बांधना भी अनिवार्य है। हेलमेट की पट्टी खुली होना या हेलमेट ढंग से न पहनना भी ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन माना जाता है। ऐसी स्थिति में ट्रैफिक पुलिस आपका ₹2,000 तक का चालान कर सकती है।

इसलिए बाइक या स्कूटर चलाते समय सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि अपने जीवन की सुरक्षा के लिए भी हेलमेट हमेशा सही तरीके से पहनें। अच्छी गुणवत्ता वाला ISI-मार्क वाला हेलमेट इस्तेमाल करें, उसकी पट्टी ठीक से बांधें और हर सफर को सुरक्षित बनाएं।

याद रखें कि –
आपकी एक छोटी सी सावधानी, आपकी पूरी ज़िंदगी बचा सकती है।

~ साभार: Corruption Intelligence Detective
Traffic

https://youtu.be/6j7rVzJI3Gs?si=GTTQ4bzXLwTHyMqd*पत्रकार ताहिर खान ✍️*
27/12/2025

https://youtu.be/6j7rVzJI3Gs?si=GTTQ4bzXLwTHyMqd

*पत्रकार ताहिर खान ✍️*

Enjoy the videos and music you love, upload original content, and share it all with friends, family, and the world on YouTube.

https://youtu.be/u0lppOUtArU?si=NuFWpV_vgYihCeZ7
26/12/2025

https://youtu.be/u0lppOUtArU?si=NuFWpV_vgYihCeZ7

स्टेट वाइस प्रेसिडेंट अब्बास नकवी के नेतृत्व मे हुआ भव्य कार्यक्रम आयोजित

अखबार बोलता है जरूरतमंद लोगों को रजाई वितरण किया गया! #सहायता Corruption Intelligence Detective
26/12/2025

अखबार बोलता है जरूरतमंद लोगों को रजाई वितरण किया गया!
#सहायता Corruption Intelligence Detective

बढ़ती ठंड को ध्यान में रखते हुए आज उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर हमारे स्टेट अधिकारी मिस्टर जिया हसन जी एवं वाइस प्रेसिडें...
25/12/2025

बढ़ती ठंड को ध्यान में रखते हुए आज उत्तर प्रदेश के जिला बिजनौर हमारे स्टेट अधिकारी मिस्टर जिया हसन जी एवं वाइस प्रेसिडेंट मिस्टर अब्बास जी एवं अन्य अधिकारी उपलब्ध थे जिसमें नगीना देहात थाना के एसएचओ साहब शह इंस्पेक्टर साहब और अन्य अधिकारी उपलब्ध थे करीब 100 ज़रूरतमंद लोगों के बीच कंबल वितरण किया।
मेरी कोशिश रहती है कि मौसम की कठिनाइयों में किसी परिवार को परेशानी न हो।
आप सबकी सेवा ही मेरे लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
Patrika Uttar Pradesh Corruption Intelligence Detective #सहायता

17/12/2025

महत्वपूर्ण जानकारी
————————
आपके पास एक कॉल आता है, जिसे उठाने पर उधर से कोई आवाज़ नहीं आती है। अगर आप भी इसे बाकी लोगों के तरह नेटवर्क की समस्या समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं तो हो जाए सावधान।

यह "साइलेंट कॉल" साइबर ठगों का नया हथियार है। साइबर ठग इस तरीके से यह जांचते हैं कि कोई मोबाइल नंबर एक्टिव है या नहीं। अगर कॉल उठाई गई और सामने वाला कट हो गया, तो उन्हें यह संकेत मिल जाता है कि नंबर इस्तेमाल में है।

ऐसे एक्टिव नंबरों को बाद में ठगी के लिए निशाना बनाया जाता है। इन पर फर्जी बैंक कॉल, लुभावने ऑफ़र, इनाम या OTP और निजी जानकारी मांगने वाले कॉल आ सकते हैं। इसलिए साइलेंट कॉल को हल्के में लेना ख़तरनाक हो सकता है।

अगर आपको ऐसी कॉल आए जिसमें कोई बात न हो, तो उस नंबर पर दोबारा कॉल करने से बचें और किसी भी तरह की जानकारी साझा न करें। बेहतर होगा कि ऐसे नंबर को संचार साथी ऐप पर तुरंत रिपोर्ट करें और उसे ब्लॉक कर दें।

ध्यान रहें कि आपकी थोड़ी सी सतर्कता आपको बड़ी साइबर ठगी से बचा सकती है। जागरूक रहें, सुरक्षित रहें और साइलेंट कॉल के ठगी से बचें।

~ साभार: Corruption Intelligence Detective Cyber Dost #सहायता Information & Public Relations Department, Government of Bihar

Address

Madhubani

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Corruption Intelligence Detective posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share