09/08/2026
CC Limit: व्यापार की 'वैसाखी' या 'पैरों की बेड़ियाँ'? तय आपको करना है!
एक CA होने के नाते अक्सर देखता हूँ कि व्यापारी भाई Cash Credit (CC) लिमिट को 'सुविधा' समझकर शुरू करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी 'जरूरत' और फिर एक कभी न खत्म होने वाली 'आदत' बन जाती है।
ज़रा ठंडे दिमाग से इस गणित को समझिये:
1. ये 'अपना' पैसा नहीं, 'किराये' का है:
लोग भूल जाते हैं कि CC लिमिट पर लगा ब्याज आपके मुनाफे को दीमक की तरह चाट रहा है। अगर आपकी 1 करोड़ की लिमिट है और आप उसे हमेशा फुल रखते हैं, तो साल का ₹10-12 लाख तो आप सिर्फ बैंक को अमीर बनाने के लिए कमा रहे हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आप बैंक के 'बिना पगार वाले कर्मचारी' बन चुके हैं?
2. 'Parking Slot' की तरह इस्तेमाल करें, 'Permanent Garage' नहीं:
CC का असली मकसद था—माल खरीदा तो पैसा निकाला, माल बिका तो पैसा वापस अंदर! लेकिन होता क्या है? पैसा एक बार बाहर निकला तो फिर वो कभी अंदर जाता ही नहीं। लोग इसे 'Term Loan' की तरह इस्तेमाल करने लगते हैं, जबकि इसका ब्याज उससे कहीं ज्यादा होता है।
3. हर साल बढ़ती लिमिट—तरक्की या जाल?
ज़्यादातर व्यापारी खुश होते हैं कि बैंक ने उनकी लिमिट बढ़ा दी। पर भाई साहब, लिमिट बढ़ना मतलब आपके सिर पर कर्ज का बोझ बढ़ना है। अगर आपका धंधा 10 साल बाद भी बैंक की उधारी पर ही टिका है, तो असल में आपने कमाया क्या?
4. ब्याज का 'चक्रव्यूह':
CC पर ब्याज 'Daily Basis' पर लगता है। अगर आप प्लानिंग से चलें और ज़रूरत न होने पर पैसा खाते में वापस डाल दें, तो आप लाखों का ब्याज बचा सकते हैं। पर हम क्या करते हैं? फालतू पड़ा पैसा भी सेविंग अकाउंट में रखते हैं और CC को माइनस में चलने देते हैं। यह फाइनेंशियल सुसाइड है!
CA की सलाह
CC लिमिट को एक 'Safety Net' की तरह रखें, 'Oxygen Mask' की तरह नहीं। कोशिश कीजिये कि साल में कम से कम दो बार आपकी सीसी लिमिट 'Nil' या 'Credit Balance' में आए। अगर ऐसा नहीं हो पा रहा, तो समझ जाइये कि आपका बिजनेस मॉडल खतरे में है।
याद रखिये: बैंक का पैसा व्यापार को 'रफ़्तार' देने के लिए होना चाहिए, व्यापार को 'जिंदा' रखने के लिए नहीं।
अपनी बैलेंस शीट सुधारिये, बैंक की नहीं!
~ Corruption Intelligence Detective