मधुबनी जिले के राजनगर प्रखण्ड के कोइलख गाँव स्थित भद्रकाली भगवती परम सुविख्यात हैं।यहाँ भव्य मंदिर के गर्भगृह मे शक्ति विग्रह भद्रकाली के रूप मे सुन्दर रजत मुकुट धारण कर पीठिका पर भगवती विराजमान हैं। भगवती को लोग कोकिलाक्षी के रूप मे भी पूजते हैं। कोकिलाक्षी के नाम पर ही इस गाँव का नाम कोइलख पड़ा। ये अति प्राचीन काल से पूजित होती आयी हैं। इसका अपना एतिहासिक पृष्ठभूमि भी रहा है। कहा जाता है कि 11वीं
शताब्दी के अंत मे राजपूत कल्चूरी सेनापति नाथ देव ने मदनपाल (गौड़वासव) पर चढ़ाई के क्रम मे वासुदेव की सिद्धभूमि वासुदेवपुर(वर्तमान कोइलख) मे छावनी बनाई। वहीं के सिद्धनाथ झा के आशिर्वाद से नाथ देव इसमे सफल हुए। उस स्थान पर सजे हुए रथ (कल्याक्ष) रखे थे इस कारण इस भूमि स्थित देवी को कोकिलाक्षी अर्थात भद्रकाली एवं वासुदेवपुर को कोइलख कहा जाने लगा।
मिथिलाक धरोहर पर्यटक एवं धार्मिक स्थल माँ भद्रकाली मंदिर मधुबनी जिला सँ १४ किलोमीटर पूर्व दिशा कोइलख गांव मे अवस्थित अछि । ई स्थान बहुत प्राचीन भद्रकालीका सिद्धपीठ नामसँ जानल जाईत अछि । एहि मन्दिर मे माँ भद्रकाली दुर्गा स्वयं प्रादुर्भावित छथि । एहि स्थान पर जे कोनो साधक जेहि मनोकामना पुर्तिके लेल जाइत छथि वो खाली हाथ वापस नहि अबैत छथि । मन्दिर के पूर्व दिशा मे एक तालाब अछि । एहि मन्दिर पर सुबह शाम आस-पासक गाँव सँ लोक पूजा-पाठ आरती करय लेल अबैत छथि । एहिस्थान पर प्रतिदिन सोमवार क भजन, अष्टजाप, कीर्तन होइत रहैत अछि । विशेष उत्सव आश्विन नवरात्रामे एहि स्थान पर मनाओल जाईत अछि । एहि समय मे चारुकात सँ १५ कोस धरि के आदमी एहि पर्व मे सम्मिलित होइत छथि । नवरात्राके अष्टमी-नवमी तिथिकें बलि प्रदान कयल जाईत अछि । माँ भद्रकाली मंदिर के विकास के लेल मंदिर समिति के गठन केल गेल अछि जे एहि स्थान क विकास के लेल समय - समय पर ग्रामीण सव स रुपयाक योगदान लैइत रहैत छथि आ मंदिर के विकास करैत रहैत छथि । मंदिर समिति मंदिर के विकास लेल अपन काम ईमानदारी स करैत रहैत छथि। ई स्थान प्राचीन कालसँ सिद्ध स्थान अछी ।
सब गोटे स निबेदन अछी जे अप्पन राजनैतिक विचारधारा के प्रचार के लेल अहि ग्रुप के प्रयोग नै करू खास क जे विषय मिथिला- मैथिल " कोइलख " स नै जुरल होई !!
जय मां भद्रकाली कोइलख देवी
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धन्यवाद
सतीश कुमार ठाकुर (गुड्डू)