15/08/2026
डॉक्टर अम्बेडकर को अगर भारतीय इतिहास से हटा देंगे तो क्या होगा?
इसका उत्तर यह है की जो "Agitation for Independence" आंदोलन हुए उसमे से "Independence" शब्द इतिहासकारो को हटाना पड़ेगा क्योंकि किसी देश के स्वतंत्र होने का अर्थ है "100% जनता को उनके मानव अधिकारो को प्रदान कर देना जिसमे निर्णय, पसन्द नापसन्द व्यक्त करने का अधिकार भी अपने आप आ जाता है। भारत को आजादी "Transfer of Power" से मिली। जिसके लिए महत्वपूर्ण कारण है;
1.ब्रिटेन की दूसरे विश्व युद्ध मे खस्ता हालत हो जाना।
2.ब्रिटेन में मजदूर पार्टी की सरकार बनना जो उपनिवेशवाद से निकलने के आह्वान पर चुनाव जीती थी।
3.भारत मे स्वतंत्रता सैनानियों के गर्म दलों/व्यक्तिओ द्वारा करी गयी घटनाओं से ब्रिटेन डर गया, यह डर भगत सिंह व अन्य ऐसे ही क्रांतिकारीओ के कारण पहले से विधमान था। दूसरे विश्व युद्ध मे यह डर और ज्यादा हो गया जिसमें प्रमुख रूप से सुभाष चन्द्र बोस व अन्य हिंसक आंदोलन से ब्रिटेन डर गया, जिसमे उसे डर लग गया कि उसकी सेना में अधिकतर भारतीय है। उनके विद्रोह की स्तिथि में ब्रिटेन के नागरिकों, उच्च अधिकारियो की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उदाहरण के तौर पर;
"पूर्वोत्तर में जापानी सैनिकों का कब्जा हो गया। इससे पहले ही बर्मा व पूर्वोत्तर के लिए अंग्रेजो ने चमार रेजिमेंट बनाई थी। जिसमे अधिकतर अनुसुचित जाति वर्गों के सैनिक थे। जिसमे"चमार रेजिमेंट" को पूर्वोत्तर में भेजा गया। उन्होंने जापानियों से पूर्वोत्तर को आजाद करवा लिया।
उनकी बहादुरी के एवज में इस रेजिमेंट को "बैटल ऑफ कोहिमा" की उपाधि दी गयी। इससे प्रभावित होकर अंग्रेजो ने सुभाष चन्द्र बोस के खिलाफ लड़ने के लिए सिंगापुर भेजा गया, जँहा इस रेजिमेंट ने अपने भारतीय भाइयों को मारने से मना कर दिया ओर एज्याद हिन्द फौज में मिल गए। जिसके कारण इस रेजिमेंट को भंग कर दिया गया"
इसलिए उपरोक्त दिए कारणों के कारण ब्रिटेन को "Transfer of Power" करके भागना पड़ा।
अब बिना बाबा साहब के "Independence" शब्द हटने पर केवल "Agitation अंदोलन" शब्द बचेगा क्योंकि बिना बाबा साहब के देश का अछूत वर्ग जो वर्तमान में 25 करोड़ है व 15 करोड़ अनुसुचित जनजाति अथार्त 40 करोड़ लोग अपने अधिकारो से वंचित रहता और उसके केवल शोषणकारी बदलते लेकिन शोषण नही रुकता।
अब बिना बाबा साहब के आंदोलन को क्या कहा जाता?
इसका उत्तर है "Transfer of Power", अथार्त अंग्रेजो से राज करने की शक्ति गांधी, नेहरू, व् अन्य सवर्णों के हाथ में आना, जो कि पहले से ही आर्थिक व सामाजिक रूप से स्वतंत्र थे बस प्रशासनिक रूप से गुलाम थे, अब इस Transfer of Power में वो प्रशासनिक रूप से भी सबल हो जाते, उनकी इच्छानुसार संविधान से लेकर शासन बन जाता। क्या यह स्वतंत्रता होती?
नही होती क्योंकि अछूत व् आदिवासी से लेकर ओबीसी वर्गो पर मात्र शासन करने वाले बदलते लेकिन यह सभी अपने मानव अधिकारो से दूर ही।
एक ओबीसी प्रधानमंत्री, आदिवासी राष्ट्पति केवल इसलिए ही है क्योंकि बाबा साहब सामाजिक लडाई पैरेरल रूप से Transfer of Power के साथ साथ लड़ते रहे।
बाबा साहब ने सबसे अंतिम पायदान पर खड़े अछूत व आदिवासी वर्ग के व्यक्ति तक को "Independence" होने का एहसास दिलवाया। इसलिए यह कहना उचित है की बिना अम्बेडकर के भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन केवल "Agitation for Transfer of Power" रहता जबकि बाबा साहब की वजह से यह "Agitation for Independence" हो पाया।
बाबा साहब को नमन।
सभी स्वतंत्रता सैनानियों को नमन।
सभी शहीदों को नमन।
जय भीम। जय भारत।