Lok Sanskriti Shodh Sansthan, UP

Lok Sanskriti Shodh Sansthan, UP लोक संस्कृति संरक्षण-संवर्द्धन हेतु ?

“लोक रंग” (सामाजिक एवं सांस्कृतिक विमर्श की त्रैमासिक पत्रिका) अब डिजिटल लाइब्रेरी एवं पब्लिशिंग प्लेटफ़ॉर्म Notnul पर उ...
07/04/2026

“लोक रंग” (सामाजिक एवं सांस्कृतिक विमर्श की त्रैमासिक पत्रिका) अब डिजिटल लाइब्रेरी एवं पब्लिशिंग प्लेटफ़ॉर्म Notnul पर उपलब्ध है।
💻 कैसे प्राप्त करें :
www.notnul.com पर जाएँ, “Lok Rang” सर्च करें, अंक खरीदें, घर बैठे पढ़ें, समझें और जुड़ें अपनी जड़ों से।

लोक रंग | जनवरी - मार्च ’26

जनपदीय भाषाएँ और राष्ट्रभाषा परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक और आत्मीय सहचर हैं। जिसे हम जनपदीय साहित्य कहते हैं, उसमें स्थानीय रंग, लोक-स्मृति और क्षेत्रीय जीवनानुभव की अपनी विशिष्ट छटा अवश्य मिलती है, लेकिन भाव और अभिव्यक्ति के स्तर पर उसमें ऐसी गहरी समानताएँ भी हैं, जो यह बताती हैं कि ये भाषाएँ हिंदी से अलग नहीं, बल्कि उसकी जीवंत, बहुरंगी और आत्मीय पोशाक हैं।

भारतीय भाषाई संस्कृति का सौंदर्य ही इसकी विविधता में निहित है।
कहावत है—
“कोस-कोस पर पानी बदले, पाँच कोस पर बानी।”
यानी भाषा का जीवित स्वभाव ही यह है कि वह समय, समाज, भूगोल और लोकानुभव के साथ बहती हुई अपने रूप बदलती चले। ठीक गंगा की धारा की तरह—जो अपने मार्ग में आने वाली हर मिट्टी, हर स्पर्श, हर रंग को अपने साथ समेटती चलती है।

जनपदीय भाषाओं की वाचिक परम्परा केवल बोलचाल या लोक-उच्चारण का मामला नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक स्मृति, सामूहिक अनुभव और लोक-ज्ञान की अमूल्य धरोहर है। इन भाषाओं में केवल शब्द नहीं, बल्कि पीढ़ियों की जीवन-दृष्टि, संवेदना और सांस्कृतिक विरासत भी संरक्षित रहती है।

पढ़िए — डॉ. विद्या विन्दु सिंह का महत्त्वपूर्ण आलेख

‘जनपदीय भाषाओं की वाचिक परम्परा’

#लोकरंग #जनपदीयभाषाएँ #वाचिकपरम्परा #हिंदी #लोकसाहित्य #भाषा #डॉविद्याविन्दुसिंह

"दशरथ अंगना बधइया हो रामा"सात दिवसीय ऑनलाइन श्रीराम भजन कार्यशाला▪️तिथि: 12 से 18 मार्च 2026▪️समय: प्रतिदिन सायं 05 से 0...
06/03/2026

"दशरथ अंगना बधइया हो रामा"
सात दिवसीय ऑनलाइन श्रीराम भजन कार्यशाला
▪️तिथि: 12 से 18 मार्च 2026
▪️समय: प्रतिदिन सायं 05 से 06 बजे
▪️ निर्देशन : डॉ. स्मृति त्रिपाठी, असिस्टेंट प्रोफेसर, संगीत संकाय, दिल्ली विश्वविद्यालय

सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिये जायेंगे। इच्छुक प्रतिभागी मो. 8765919255 अथवा 6387779125 पर संपर्क कर सकते हैं।

निमित्त मात्र : लोक संस्कृति शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश

प्रणव शिवोज्ज्वल कल-झंकारिणिशंकित जनगण बल - सञ्चारिणिजय जय हे  चिर तरुणि !अमर वाणी जय जननि !
23/01/2026

प्रणव शिवोज्ज्वल कल-झंकारिणि
शंकित जनगण बल - सञ्चारिणि
जय जय हे चिर तरुणि !
अमर वाणी जय जननि !

नया साल, नये रास्ते और नई मंज़िलें- "लोक रंग" के साथ...
04/01/2026

नया साल, नये रास्ते और नई मंज़िलें- "लोक रंग" के साथ...

16/12/2025

लोक संस्कृति शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश
लोक विमर्श-2025
दिनांक 18 एवं 19 दिसम्बर 2025, प्रतिदिन सायं 03:30 बजे से सायं 06:30 बजे तक
निराला सभागार, उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान परिसर, हजरतगंज, लखनऊ

प्रथम दिवस (18 दिसम्बर 2025) कार्यक्रम :
"लोक संस्कृति संरक्षण" विषयक परिचर्चा
मुख्य अतिथि :
आचार्य कौशिक चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज, चिन्मय मिशन, लखनऊ

विशिष्ट अतिथि :
प्रो. (डॉ.) शीला मिश्रा, डीन, विज्ञान संकाय, लखनऊ विश्वविद्यालय

अध्यक्षता :
श्री शाखा वन्द्योपाध्याय (प्रदर्श्यकारी कला मर्मज्ञ), सम्पादक-कला वसुधा ........

श्रीमती निवेदिता भट्टाचार्य (संगीताचार्य, संगीत भवन अकादमी) के निर्देशन में सामूहिक सांगीतिक प्रस्तुतियां
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
द्वितीय दिवस (19 दिसम्बर 2025) कार्यक्रम :
"लोक संस्कृति संरक्षण" विषयक परिचर्चा एवं सांस्कृतिक विभूतियों का अलंकरण

मुख्य अतिथि :
डॉ. महेन्द्र सिंह, मा. सदस्य विधान परिषद, पूर्व मंत्री, उ.प्र.सरकार

विशिष्ट अतिथि : डॉ. कल्पना दीक्षित (लोक साहित्य अध्येता), कोलकाता

अध्यक्षता :
पद्मश्री डॉ. विद्या विंदु सिंह (लोक साहित्य मर्मज्ञ).......
(वरिष्ठ लोकगायिका श्रीमती नीरा मिश्रा के निर्देशन में संस्कार गीतों की सामूहिक प्रस्तुति)

सम्मानित विभूतियां :
▪️ श्रीमती पद्मा गिडवानी - दीर्घकालीन सांगीतिक योगदान हेतु 'लोक रत्न' सम्मान
▪️ श्रीमती विमल पंत - दीर्घकालीन सांगीतिक योगदान हेतु 'लोक रत्न' सम्मान
▪️ डॉ. पूनम श्रीवास्तव (संगीत साधिका) – प्रो. कमला श्रीवास्तव स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ श्रीमती पुष्पलता अग्रवाल (संस्थापक, सेंट जोसेफ स्कूल समूह, लखनऊ) – पद्मश्री डॉ. योगेश प्रवीन स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ डॉ. स्मृति त्रिपाठी (दिल्ली विश्वविद्यालय) – आरती पाण्डेय स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ श्रीमती रमा अरुण त्रिवेदी (सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिशासी, दूरदर्शन) – प्रभा श्रीवास्तव स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ श्रीमती वीना सक्सेना – सावित्री देवी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ डॉ. कल्पना दीक्षित (कोलकाता) – रमावती देवी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ डॉ. रिन्दाना रहस्य (दिल्ली विश्वविद्यालय) – शोभा देवी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ डॉ. सुशील कुमार राय (कार्यक्रम अधिशासी, आकाशवाणी, लखनऊ) – सीताराम तिवारी स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ मोहम्मद नौशाद (कठपुतली) – जे.पी. लम्बोदर स्मृति लोक संस्कृति सम्मान
▪️ श्रीमती अलका प्रमोद (वरिष्ठ साहित्यकार) – पद्मश्री डॉ. विद्याविन्दु सिंह ध्वजवाहक लोक संस्कृति सम्मान
▪️ श्री राजेन्द्र विश्वकर्मा (वरिष्ठ संस्कृतिकर्मी) – डॉ. रामबहादुर मिश्र ध्वजवाहक लोक संस्कृति सम्मान

आप इष्ट-मित्र व परिजनों सहित सादर आमंत्रित हैं।

स्वागतोत्सुक :
इंजी. जीतेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष
डॉ. सुधा द्विवेदी, सचिव
आशीष गुप्ता, कोषाध्यक्ष
अर्चना गुप्ता, मुख्य संयोजक
समस्त पदाधिकारी व सदस्यगण, लोक संस्कृति शोध संस्थान, उ.प्र.

सम्पर्क : 8765919255, 6387779125, 9927410033

23/11/2025
23/11/2025

।। आमंत्रण।।
लोक संस्कृति शोध संस्थान की मासिक श्रृंखला का 75वां आयोजन
"दादी नानी की कहानी : जीतेश की ज़ुबानी"
दिनांक 24 नवम्बर 2025, प्रातः 10 बजे
स्थान : बाल निकुंज इंग्लिश स्कूल, पल्टन छावनी, सेक्टर-ए, सीतापुर रोड योजना, लखनऊ

विशेष आभार :
श्री एच. एन. जायसवाल, प्रबंध निदेशक
श्रीमती रश्मि शुक्ला, प्रधानाचार्य

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Lucknow

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+918765919255

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