17/07/2026
“भीख माँगना हमारा कोई शौक नहीं, हम मजबूरी में भीख माँगते हैं…” - यह संवाद 21 दिनों तक लखनऊ के अलग-अलग हिस्सों में गूंजता रहा। बदलाव के जन-जागरूकता अभियान ‘सार्थक-भाग 3’ के तहत प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक ने भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों के जीवन के अनुभवों और पुनर्वास की संभावनाओं को लोगों तक पहुँचाने का प्रयास किया। आज दरगाह हज़रत अब्बास, रुस्तमनगर, चरक चौराहा, चौक, शाहमीना मजार, चौक, और नखास चौराहा में नाटक की प्रस्तुति करते हुए अभियान का समापन हुआ।
इस अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि नुक्कड़ नाटक की टीम में ऐसे साथी भी शामिल थे, जो कभी स्वयं भिक्षावृत्ति से जुड़े थे। उन्होंने नाटक के दौरान अपने जीवन के अनुभवों को साझा किया। नुक्कड़ नाटक की कहानी भी उनके वास्तविक अनुभवों से प्रेरित थी, जिसमें यह दिखाया गया कि संवाद, विश्वास, अवसर, और समेकित पुनर्वास के माध्यम से जीवन नई दिशा ले सकता है।
मनकामेश्वर मंदिर से शुरू हुई यह 21 दिनों की यात्रा लखनऊ के विभिन्न मंदिरों, मजारों, मस्जिदों, चौराहों, बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन और अन्य सार्वजनिक स्थानों तक पहुँची। इस दौरान नुक्कड़ नाटक और लगातार संवाद के माध्यम से लोगों तक पुनर्वास प्रक्रिया और उपलब्ध सेवाओं की जानकारी पहुँचाई गई।
अभियान में आठ सदस्यीय नुक्कड़ नाटक टीम - मोहित भारती, हीना, नेहा, रामजी वर्मा, अंकित नागर, मानस, सोनू झा और नरेंद्रदेव यादव - ने शहर के अलग-अलग हिस्सों में प्रस्तुतियाँ दीं। वहीं महेंद्र प्रताप, वीरेंद्र प्रताप सिंह और सुशील कुमार ने लोगों तक पहुँचने, संवाद स्थापित करने और पुनर्वास प्रक्रिया से जोड़ने के लिए लगातार मोबिलाइजेशन का कार्य किया।
पिछले 21 दिनों के दौरान कई लोगों ने पुनर्वास प्रक्रिया से जुड़ने में रुचि दिखाई तथा कई लोग बदलाव द्वारा संचालित पुनर्वास केंद्र (रैन बसेरा) पर भिक्षावृति छोड़कर आ चुके हैं, जबकि टीम अन्य लोगों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।
बदलाव पिछले 11 वर्षों से भिक्षावृत्ति उन्मूलन और पुनर्वास के क्षेत्र में कार्य कर रहा है। संस्था के पुनर्वास मॉडल के माध्यम से अब तक 738 से अधिक लोग पुनर्वास प्रक्रिया से जुड़े हैं, जिनमें 592 से अधिक वयस्क और 146 बच्चे शामिल हैं जो आज शिक्षा, स्वरोजगार, और रोजगार के माध्यम से अपने परिवार के साथ ख़ुशहाल एवं सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।
बदलाव का मानना है कि नुक्कड़ नाटक केवल जागरूकता फैलाने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों तक पहुँचने, संवाद शुरू करने और पुनर्वास की दिशा में पहला भरोसेमंद कदम है। यही कारण है कि संस्था पिछले कई वर्षों से इस अभियान को लगातार चला रही है।
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