16/06/2026
यदुवंश शिरोमणि, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव जी के जन्मदिवस 16 जून पर विशेष.....
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दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश दोस्तों के दोस्त और दिल्ली की जनता के सच्चे सेवक और शुभचिंतक थे। इसी बीती 16 जून को उनका 108वां जन्मदिन है । यानी ये वर्ष उनकी 107वीं वर्षगांठ का है।
दिल्ली विधानसभा का चुनाव अक्टूबर 1951 में हुआ। चौधरी ब्रह्म प्रकाश 17 मार्च 1952 से 12 फरवरी 1955 तक मुख्यमंत्री रहे। 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से अपने राजनीतिक जीवन का श्रीगणेश करने वाले ब्रह्म प्रकाश को कांग्रेस ने बाहरी दिल्ली की नांगलोई सीट से टिकट दिया था और वो आराम से चुनाव जीत गए थे। कांग्रेस विधायकों ने ‘तेज प्रेस’ वाले लाला देशबंधु गुप्ता को अपना नेता चुन लिया। वे दिल्ली कांग्रेस के तपे हुए नेता थे। पर दुर्भाग्य से मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही उनकी एक हादसे में मृत्यु हो गई।
ब्रह्म प्रकाश को पहला सीएम बनाने में नेहरु जी की भूमिका रही
ब्रह्म प्रकाश दिल्ली की जनता के सुखदुख से हमेशा अपने को जोड़ लिया करते थे। वे जब 1952 में मुख्यमंत्री बने तब दिल्ली आज की तरह विशाल महानगर नहीं थी। लेकिन ऐसा नहीं है कि लोगों की समस्याएं नहीं थीं। खूब होती थीं और वे बखूबी उनका निवारण करना भी जानते थे।
चलते-चलते लोगों की समस्याएं सुनते थे ये सीएम
वे कभी भी किसी विशेष वाहन से नहीं, बल्कि आम लोगों की तरह बसों में सफर करते थे। और चलते-चलते लोगों से उनकी समस्याएं भी सुन लिया करते थे। इस तरह के नेताओं की आज तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते। वे मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद चार बार सांसद रहे। वे तब भी डीटीसी बसों में यात्रा करने से परहेज नहीं करते थे। उन्हें बड़ा ओहदा कभी बदल नहीं सका था।
दिल्ली में अपना घर तक नहीं बना पाए पहले सीएम
आज के नेतागण को देखेंगे तो सरकारी बंगलों का मोह सर्वोच्च अदालत की फटकार के बाद भी नहीं छूटता है। एक चमचमाती जीवन शैली के आदी हो चुके होते हैं। लेकिन ब्रह्म प्रकाश उस वक्त में राजधानी में अपना एक आशियाना तक नहीं बना पाए थे। जो दिल्ली का शेर-ए-दिल्ली हो उसके पास छत नहीं थी। वे अब लगभग लुप्त हो गई नेताओं की उस पीढ़ी से ताल्लुक रखते थे जो पढ़ती-लिखती थी। वे कनॉट प्लेस में हर दूसरे दिन आकर कोई किताब अवश्य लेते थे।
कनॉट फ्लेस के बरामदों में बैठे अखबार-मैगजीन वालों से उनके मधुर संबंध थे। वे यूं ही बेवजह कनॉट फ्लेस के गलियारों में टहलते हुए मिल जाते थे। न कोई गनमैन कभी साथ रहा वही आम आदमी के अंदाज में रहे। अगर कोई उन्हें पहचान गया तो वे उससे पूछ लेते थे, ‘कॉफी पीना पसंद करोगे’।
ब्रह्म प्रकाश 35 बरस की युवा उम्र में ही मुख्यमंत्री बन गए थे। उस वक्त देश के बंटवारे को ज्यादा समय नहीं बीता था। दिल्ली में सरहद के उस पार से लाखों शरणार्थी आ चुके थे। इस शहर की आबादी का चरित्र बदल रहा था। अपना सब कुछ खोकर आने वाले यहां पर पुनर्वास चाहते थे। तब ब्रह्म प्रकाश और उनके साथियों ने दिन-रात उन पंजाबी शरणार्थियों की सेवा की।
अब नए सिरे से मुख्यमंत्री का चयन होना था। नेताओं के लिए पिता तुल्य ब्रह्म प्रकाश के बारे में बहुत से लोगों को लगता है कि वे जाट समाज से होंगे। पर वे यादव थे। वे अपनी जाति को कभी अपने नाम के साथ नहीं जोड़ते थे। वे आइआइसी में ही बैठा करते थे। वहां पर ही उनके मित्र आ जाते थे। तब तमाम देशविदेश के मसलों पर लंबी चर्चाएं हो जाती थी। अगर उनके साथ कोई दोस्त नही होते तो वे आइआइसी के पुस्तकालय में चले जाते। वहां पर लगातार अध्ययन जारी रखते I
चौधरी ब्रह्म प्रकाश यादव (1918–1993) भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा दिल्ली के प्रथम मुख्यमंत्री थे। वे लोकसभाके सदस्य भी रहे। १९४० में महात्मा गाँधी द्वारा चलाये गये व्यक्तिगत सत्याग्रह आन्दोलन में उन्होने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। १९४२ के भारत छोड़ो आन्दोलन में 'भूमिगत नेताओं' में वे भी थे। स्वतंत्रता संग्राम के समय वे कई बार जेल गये।
चौधरी भ्रह्म प्रकाश यादव पश्चिमोत्तर दिल्ली के शकूरपुर से थे। 'शेर–ए-दिल्ली' के नाम से मशहूर चौधरी ब्रह्म प्रकश यादव 1952 से 1955 तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे। वह केवल 33 साल की उम्र में दिल्ली के मुख्यमंत्री बने और उस समय के सबसे युवा मुख्यमंत्री थे। उन्हें भारत के प्रथम निर्दलीय मुख्यमंत्री बनने का भी गौरव प्राप्त है।बाद में वे सांसद बने तथा केन्द्रीय खाद्य, कृषि, सिंचाई और सहकारिता मंत्री के रूप में उल्लेखनीय कार्य किये। 1977 में उन्होंने पिछड़ी, अनुसूचित जातियों व अल्पसंख्यकों का एक राष्ट्रीय संघ बनाया। राष्ट्र के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उनके सम्मान में 11 अगस्त 2001 स्मारक डाक टिकट जारी किया गया।
आइये भारत के एक महान मार्गदर्शक को नमन करें
आज चौधरी साहब की 108वीं जयंति है
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शिव कुमार यादव
राष्ट्रीय अध्यक्ष(यादवसेना)
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