हनुमत् सेवा मंडल

हनुमत् सेवा मंडल धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षित?

धनतेरस के महात्म्य
18/10/2025

धनतेरस के महात्म्य

सभी मित्रों एवं देशवासियों को धन तेरस की हार्दिक शुभकामनायें ।

आज ही के दिन आयुर्वेदाचार्य एवं सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक धन्वन्तरि का प्रादुर्भाव हुआ था । इन्होंने ही औषधियों के गुण से अमृत निकालने की परिकल्पना को मूर्त रूप दिया था । इनके एक हाथ में अमृत कलश और दूसरे हाथ में आयुर्वेद जैसे विज्ञान की अवधारणा की गई है ।

"धन तेरस का धन से कोई संबंध नहीं है !"

धन्वंतरि ऋषि का प्राकट्य त्रयोदशी के दिन होने की कारण इसे धन तेरस बोला जाता है । बाजारीकरण एवं भौतिकतावाद की अंध दौड़ ने इसके रूप को गलत ढंग से प्रेषित किया है ।

धन शब्द के कारण लोग इसे लक्ष्मी या धन से जोड़ देते हैं ! और बाजारवाद ने इसी मुर्खता का फायदा उठाया और लोगों के दिमाग में Advertisement के माध्यम से यह प्रचार प्रसार किया कि इस दिन सोना खरीदने पर लाभ होगा ! या इस दिन नए आभूषण खरीदने पर लक्ष्मी की कृपा बरसेगी !

परन्तु ऐसा कुछ नहीं है !

इसका सोना या गहना या आभूषण खरीदने से कोई सम्बन्ध नहीं है !

लेकिन इस दिन लोग नए बर्तन भी खरीदते हैं , उसका क्या रहस्य है ???????

लोग खरीदते तो हैं पर शायद यह 99% लोगों को नहीं पता होगा कि वह क्यों खरीदते हैं?

देखिये इस दिन बर्तन इसलिए खरीदा जाता है क्योंकि यह प्रतीक है उस कलश का जिसको लेकर भगवान् धन्वन्तरी प्रकट हुए थे ! उस कलश में अमृत था ! उस पात्र में अमृत था !

उसी पात्र या कलश के प्रतीक धनतेरस पर नए पात्र या नए कलश को खरीदने की परम्परा चली !
यह अच्छी बात है कि लोग नया बर्तन या नया पात्र खरीदते हैं लेकिन अमृत तुल्य औषधि को सब भूल गये !

यह वही बात हुई कि टेलीविज़न का कार्टन खरीद लिया लेकिन उसके अंदर का टेलीविज़न नदारद है ! मोबाइल का बॉक्स खरीद लिया लेकिन उसके अन्दर का मोबाइल नहीं खरीदा !

तो अमृत हम कैसे खरीदेंगे ???

बिलकुल अमृत हम नहीं खरीद सकते लेकिन अमृततुल्य औषधियों को अवश्य खरीद सकते हैं !

इस दिन औषधियों को अवश्य खरीदें ! औषधि का अर्थ आयुर्वेदिक औषधियों से है ! वह एलॉपथी वाले विष की बात नहीं कर रहा हूँ ! एलोपैथिक Medicines एकमात्र जहर हैं , कालकूट विष हैं जो स्वर्ण पात्र या सोने के पात्र में रखा हुआ है ! उसको स्वर्ण पात्र में देखकर लोग लालच में आ जाते हैं लेकिन यह उनके समस्त दुःख , रोगों और मृत्यु का कारण बनता है !

इसलिए धनतेरस के दिन नए पात्र या बर्तन के अलावा कोई न कोई औषधि अवश्य खरीदें और औषधियों की पूजा या औषधीय वनस्पतियों का पूजन और आयुर्वेदिक चिकित्सक का सम्मान अवश्य करें !

औषधि के रूप में आप आयुर्वेदिक काढ़ा बनाकर खरीदे हुए नए पात्र या बर्तन में , जो आपने बर्तन खरीदा है , उसमें डालकर उसको भगवान् धन्वन्तरी का ध्यान कर उनसे अपने परिवार के स्वस्थ्य आरोग्य की कामना कर , उस काढ़े में अमृत की भावाना भावित कर पूरे परिवार को सेवन करना चाहिए !

औषधि के रूप में त्रिफला खरीद लीजिये या हर्र खरीद लीजिये या गिलोय या कोई भी औषधि जैसे एलो वेरा या घ्रित्कुमारी , या तुलसी या गिलोय, अजवाईन या आँवला इत्यादि खरीद कर उसका पूजन और सेवन करिए !

यह अभियान प्रत्येक हिन्दू के घर घर पर चलना चाहिए और प्रत्येक सनातन धर्मियों को इसे आन्दोलन या अभियान का रूप देकर इस दिवस को आयुर्वेद की महत्ता या importance को विश्व विदित करना चाहिए !

आयुर्वेद के महान ज्ञाता होने के कारण शास्त्रों में यह दिखाया जाता है कि समस्त वनस्पतियाँ औषधि के समान हैं उनका सेवन उनके गुणों को जान कर करना आपके शरीर के अंदर आरोग्यता लाएगा जो अमृत के समान होता है ।
शरद पूर्णिमा की चांदनी से जो औषधीय गुण वनस्पतियों को प्राप्त हुए हैं वह अमृत तुल्य है ।

धन्वंतरि को आयुर्वेद की चिकित्सा करनें वाले वैद्य आरोग्य का देवता कहते हैं। इन्होंने ही अमृतमय औषधियों की खोज की थी। इनके वंश में दिवोदास हुए जिन्होंने 'शल्य चिकित्सा' का विश्व का पहला विद्यालय काशी में स्थापित किया जिसके प्रधानाचार्य सुश्रुत बनाये गए थे।

सुश्रुत दिवोदास के ही शिष्य और ॠषि विश्वामित्र के पुत्र थे। उन्होंने ही सुश्रुत संहिता लिखी थी। सुश्रुत विश्व के पहले सर्जन (शल्य चिकित्सक) थे।
इस दिन को भारत सरकार की तरफ से "राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस" के रूप में भी मनाया जाता है ।

निरोगी एवं स्वस्थ्य काया ही जीवन की अमूल्य पूँजी और धन का प्रतीक है इसलिए आज का दिन धनतेरस के रूप में जाना जाता है । इस अवसर पर सभी देशवासियों और मित्रों के स्वस्थ्य मानसिक एवं शारीरिक समृद्धि की कामना करता हूँ ।

तन औ मन का स्वास्थ्य ही , धन सुख पूँजी समान ।
धनतेरस अवधारणा , तभी सफल हो जान ।।

उदित प्रेम सौहार्द्र हो , सबके हिय में आज ।
धन्वन्तरि की कामना , हो मुद सकल समाज ।।

- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )
Shwet Prem Ras

www.ShwetPremRas.in

22/09/2025

व्रत, पर्व, त्योहार, उत्सव और नवरात्र

[भाषा की पाठशाला– दैनिक जागरण और नई दुनिया के सभी संस्करणों में]
*****************************

व्रत शब्द का अर्थ है– प्रण अथवा प्रतिज्ञा। ‘वृ’ धातु से बने इस शब्द में मानसिक रूप से कुछ वरण करने या चुनने का भाव है। किसी धार्मिक अनुष्ठान को पूर्ण शुचिता से निभाने के लिए, उपवास आदि को चुनने एवं साधना के लिए जाने वाले प्रण के लिए ‘व्रत’ शब्द का प्रयोग होता है। देखा जा सकता है कि लोकजीवन में जिन-जिन धार्मिक आयोजन अथवा पर्व में ‘व्रत’ लगा है, उनमें शुचिता और नियम-धर्म अधिक रहता है। यही कारण है कि कृष्णाष्टमी, नवरात्र आदि का ‘व्रत’ होता है।

स्मरण रहे कि व्याकरणिक दृष्टि से शुद्ध शब्द ‘नवरात्र’ है, नवरात्रि नहीं। सामासिक पद ‘नवरात्र’ का अर्थ है– ‘नौ रात्रियों का समाहार’। ‘नवरात्र’ में कलश स्थापना के साथ नौ दिन उपवास (उपवस् से व्युत्पन्न; अर्थ समीप रहना); अर्थात् माँ के साथ रहने का व्रत निष्ठापूर्वक निभाया जाता है। ध्यातव्य है कि होली का व्रत या पर्व नहीं होता, ‘त्योहार’ होता है; क्योंकि इसमें साधना नहीं, खाना-पीना और उत्सव का भाव प्रमुख होता है।

त्योहार : नौ दिनों तक नवरात्र का व्रत रखने के पश्चात् विजयादशमी का ‘त्योहार’ मनाया जाता है, जो हमारी उत्सवधर्मिता का सूचक है। नूतन वस्त्र, मिठाइयाँ आदि के व्यवहार के साथ यह त्योहार मनाया जाता है। त्योहार के अवसर पर मिलने वाले शगुन को ‘त्योहारी’ कहा जाता है। कुल मिलाकर त्योहार मुख्यतः खुशी और धूमधाम का ‘उत्सव’ होता है।

उत्सव : उत्सव में हर्ष अथवा आनंद का भाव प्रमुख होता है। स्मरण रहे कि उत्सव(उद् + सू +अप्) में सीधे-सीधे धार्मिकता का समावेश नहीं होता। हाँ कोई उत्सव धार्मिक भी हो सकता है, पर यह जन्मदिन आदि किसी अन्य अवसर पर भी मनाया जा सकता है।

पर्व : व्रत में जहाँ धार्मिक साधना और सादगी का भाव है; वहीं पर्व इससे कुछ व्यापक होता है और इसमें धार्मिक आयोजन आदि भी संयुत(जुड़ा) होता है। भाषिक दृष्टि से ‘पर्व’ का अर्थ है– गाँठ, जोड़ या संधि। जानना चाहिए कि पर्व से ही ‘पर्वत’ शब्द बना है, जो बहुत सारी चट्टानों का जोड़ होता है। आपके हाथों की उंगलियों पर भी इसलिए ‘पर्वत’ बनते हैं। प्राचीन ग्रंथों में अध्याय को ‘पर्व’ लिखा गया है। वस्तुतः, ये विशिष्ट ‘घटनाओं के जोड़’ या ‘संधिस्थल’ हैं। ‘नवरात्र’ पर्व भी है, क्योंकि दो ऋतुओं के जोड़ अथवा संधि पर इसका आयोजन होता है।

[कमल की कलम के सभी पाठकों को नवरात्र की स्वस्तिकामनाएँ! नवरात्र के सभी रूपों की भाषावैज्ञानिक व्याख्या आप प्रतिदिन 'स्वदेश' में पढ़ सकेंगे।]

18/07/2025

यह एक नशेड़ी दुष्ट व्यक्ति की फ़ोटो है जो अपने आप को भगवान शंकर के नाम से प्रचारित करता है ।

आप सभी से हाथ जोड़कर निवेदन है कि जहाँ ऐसी फ़ोटो देखें , वहाँ त्वरित रूप से उसका विरोध करें ।
जहाँ कहीं भी इस नशेड़ी व्यक्ति की फ़ोटो लगी देखें उसको तुरंत नष्ट करने का प्रयास करें क्योंकि यह एक नशेड़ी गंजेड़ी दुष्ट व्यक्ति की फ़ोटो है जो भगवान शंकर बन कर लोगों को ठग रहा है और हमारे नवयुवकों में नशे की लत लगा रहा है ।

आपका जागरूक रहना इस देश के कई नवजवानों को गलत मार्ग पर जाने से रोकेगा और अन्य कुधर्मियों को अपने धर्म का उपहास और उंगली उठाने से भी रोकेगा ।

आपका यह कार्य धर्म रक्षा के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों से लिखा जाएगा !!!

निवेदनकर्ता :
श्वेताभ पाठक
Shwetabh Pathak
Shwet Prem Ras


#शंकराचार्य #सावन

Address

Lucknow
226001

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when हनुमत् सेवा मंडल posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share