सार्वदेशिक वाल्मीकि हितकारिणी सभा

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11/01/2026

#न्याय_की_माँग

मेरठ (उत्तर प्रदेश):
मेरठ के कपसाढ़ क्षेत्र में घटित हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर दलित समाज की सुरक्षा, गरिमा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अपनी बेटी रूबी को बचाने के प्रयास में माँ सुनीता द्वारा अपने प्राणों की आहुति देना केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि यह राज्य में दलित महिलाओं की सुरक्षा पर करारा आरोप है।
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घटना के मुख्य आरोपी पारस सोम की गिरफ्तारी हरिद्वार से अवश्य की गई है, किंतु यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। सवाल यह है कि ऐसे कितने अपराधी रोज़ाना दलित बस्तियों में निर्भय होकर हिंसा करते हैं और कितनों को व्यवस्था की निष्क्रियता का संरक्षण प्राप्त रहता है।

इसी मामले में न्याय की माँग को लेकर आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आज़ाद को पैदल मार्च करना पड़ा, जबकि हाईवे पर पुलिस द्वारा उन्हें रोका जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। यह घटना यह सोचने पर विवश करती है कि क्या राज्य में न्याय की माँग करना अब अपराध बन चुका है।

प्रशासन और सरकार से स्पष्ट प्रश्न हैं—
• कब तक दलित समाज की माँ-बहनों को अपनी जान की क़ीमत चुकानी पड़ेगी?
• कब तक कानून का प्रयोग चयनात्मक ढंग से किया जाता रहेगा?
• कब तक पीड़ितों की आवाज़ को व्यवस्था द्वारा दबाया जाता रहेगा?

हम माँग करते हैं कि—
1. इस प्रकरण में फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए।
2. पीड़ित परिवार को पर्याप्त मुआवज़ा, सुरक्षा और पुनर्वास प्रदान किया जाए।
3. दोषियों पर एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत कठोरतम कार्रवाई की जाए।
4. दलित महिलाओं की सुरक्षा हेतु ठोस और प्रभावी नीतियाँ तत्काल लागू की जाएँ।

यह केवल एक परिवार का नहीं, पूरे दलित समाज के सम्मान और अस्तित्व का प्रश्न है।
अब चुप्पी नहीं, जवाब चाहिए।

न्याय की इस लड़ाई में हर संवेदनशील नागरिक से साथ आने की अपील है।





जय भीम।
जय संविधान।
जय भारत।

08/01/2026

उत्तर प्रदेश की राजनीति के गलियारों और सोशलमीडिया पर भारी चर्चा चल रही है कि मकर संक्रांति के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ जी की सरकार के मंत्रीमंडल में क्षेत्रीय व जातिय संतुलन साधने के लिए मंत्रिमंडल का विस्तार/ फेरबदल किया जा सकता है।
वर्तमान में योगी आदित्यनाथ जी की सरकार में 54 मंत्री हैं। जिसमें प्रदेश की सभी बड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। सिवाय " वाल्मीकि समाज " को छोड़कर और मकर संक्रांति के बाद भी होने बाले विस्तार या फेरबदल में " वाल्मीकि समाज " को प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। यह सुनिश्चित है।
वाल्मीकि समाज के लिए सरकार के पास केवल एक ही झुनझुना है। उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी आयोग। वो भी तीन साल बाद भी दिया गया नहीं है।
ऐसी स्थिति में भी क्या " वाल्मीकि समाज " को भाजपा का अंधभक्त बने रहना चाहिए।

शिष्टाचार भेंट एवं आमंत्रण **************************उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ (कानपुर इकाई)=====================...
02/11/2025

शिष्टाचार भेंट एवं आमंत्रण
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उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ (कानपुर इकाई)
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आज कानपुर इकाई के अध्यक्ष श्री पिंटू चौधरी जी ने प्रदेश के मुख्य महामंत्री श्री अशोक कुमार वाल्मीकि जी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री राहुल कुमार वाल्मीकि जी से शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के सफाई कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं एवं उनके समाधान पर सार्थक चर्चा की।
भेंट के दौरान आपसी संवाद सौहार्दपूर्ण एवं प्रेरणादायक रहा।

साथ ही, श्री पिंटू चौधरी जी ने अपनी सुपुत्री के विवाह समारोह (दिनांक 24 नवम्बर 2025) का निमंत्रण सादर प्रदान किया तथा प्रदेश के सभी पदाधिकारीगण एवं सदस्यगण को इस शुभ अवसर पर सादर आमंत्रित किया।

संघ परिवार की ओर से उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई 💐

जय भीम! 🙏🏼💐💐💐

आक्रोश वाल्मीकि जयंती से ठीक पहले हरिओम वाल्मीकि की क्रूर हत्या पर तीव्र आक्रोश: दोषियों को फांसी और पीड़ित परिवार को तत...
06/10/2025

आक्रोश
वाल्मीकि जयंती से ठीक पहले हरिओम वाल्मीकि की क्रूर हत्या पर तीव्र आक्रोश: दोषियों को फांसी और पीड़ित परिवार को तत्काल न्याय की मांग!
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रायबरेली जनपद के फतेहपुर क्षेत्र में हमारे दलित भाई हरिओम वाल्मीकि (38 वर्ष) की भीड़ द्वारा बेरहमी से पीट-पीटकर की गई हत्या ने पूरे वाल्मीकि समाज को गहरे सदमे में डाल दिया है। वाल्मीकि जयंती से ठीक पहले इस तरह की जघन्य घटना हमारे समाज के लिए असहनीय दर्द है। हरिओम एक निर्दोष युवक थे, जो अपने ससुराल जा रहे थे, लेकिन ड्रोन चोरी की झूठी अफवाह में उन्हें चोर समझकर क्रूरता की हद पार कर दी गई। वायरल वीडियो में उनकी करुण पुकार साफ गूंज रही है – “मैं बेगुनाह हूं!” लेकिन जब उन्होंने मदद के लिए राहुल गांधी जी का नाम लिया, तो हमलावरों ने घृणित मानसिकता दिखाते हुए कहा, “हम बाबा वाले हैं” और उन्हें मौत के घाट उतार दिया। यह घटना न केवल एक हत्या है, बल्कि हमारे पूरे वाल्मीकि समाज की अस्मिता, सम्मान और अस्तित्व पर घोर हमला है।

वाल्मीकि समाज महर्षि वाल्मीकि और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के अनुयायी हैं, और उनके द्वारा बनाए गए संविधान पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। हमारी यह धरोहर हमें न्याय और समानता की लड़ाई में मजबूत बनाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश में दलितों और वंचित समाज के खिलाफ बढ़ती हिंसा, अन्याय और डर की यह घटना कानून-व्यवस्था की पूरी तरह विफलता को उजागर करती है। इतनी गंदी मानसिकता वाले निर्दयी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी शक की बुनियाद पर निर्दोष की जान न ले सके।
सार्वदेशिक वाल्मीकि हितकारिणी सभा इस जघन्य अपराध की कठोर निंदा करती है और केंद्र व राज्य सरकार से तत्काल कठोर कार्रवाई की मांग करती है। दोषियों को ऐसी सजा दी जाए जो इतिहास में मिसाल बने और मॉब लिंचिंग जैसे अपराधों पर हमेशा के लिए लगाम लगे।
हमारी प्रमुख मांगें:

1 दोषियों को फांसी की सजा: वैभव सिंह, विपिन मौर्या और अन्य सभी हत्यारों को तत्काल फांसी दी जाए। उनके घरों पर बुलडोजर चलाकर समाज को यह संदेश दिया जाए कि दलितों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं होगा।

2 पीड़ित परिवार को न्याय और सहारा: उत्तर प्रदेश सरकार हरिओम के परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा, परिवार के एक योग्य सदस्य को सरकारी नौकरी और पूर्ण सुरक्षा प्रदान करे। उनकी मासूम बेटी, विधवा पत्नी और टूटे हुए परिवार का दर्द अनदेखा न किया जाए।

3 निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच: इस मामले की जांच सीबीआई या विशेष जांच दल द्वारा कराई जाए, ताकि सच सामने आए और कोई दोषी बच न पाए।

4 दलित अत्याचार रोकने हेतु सख्त कानून: केंद्र सरकार मॉब लिंचिंग के खिलाफ कठोर कानून बनाए, जिसमें फांसी की सजा अनिवार्य हो।

• हमारी चेतावनी स्पष्ट है: यदि हरिओम वाल्मीकि के परिवार को शीघ्र न्याय न मिला, मुआवजा और सरकारी नौकरी न दी गई, और दोषियों को कठोर दंड न दिया गया, तो वाल्मीकि समाज सड़कों पर उतरने का काम करेगा। हम पूरे देश में आक्रोशित आंदोलन छेड़ेंगे – गलियों, मोहल्लों, शहरों और दिल्ली तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

• वाल्मीकि समाज महर्षि वाल्मीकि और बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के अनुयायी हैं, और उनके द्वारा बनाए गए संविधान पर पूर्ण विश्वास रखते हैं। हरिओम की बेटी की आंखों के आंसू और उनकी मां की चीखें हमें इंसाफ की जंग में डटकर लड़ने की ताकत दे रही हैं। हम पूरे भारत के वाल्मीकि समाज के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं और हर स्तर पर न्याय के लिए संघर्ष करेंगे।

दिनांक: 06 अक्टूबर, 2025
�सार्वदेशिक वाल्मीकि हितकारिणी सभा�
जय भीम! जय वाल्मीकि! इंसाफ की जीत होगी!

(कृपया इसे अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि हरिओम के लिए न्याय की आवाज देश के कोने-कोने तक पहुंचे।)

आइए, एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं!�

आप सभी श्रधालुओं को जगद्धात्री माँ भगवती की आराधना व उपासना के पावन पर्व 'शारदीय नवरात्रि' के प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्र...
22/09/2025

आप सभी श्रधालुओं को जगद्धात्री माँ भगवती की आराधना व उपासना के पावन पर्व 'शारदीय नवरात्रि' के प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्री से प्रार्थना है, माँ सभी के जीवन को सुख, स्वास्थ्य और सौभाग्य के आशीर्वाद से अभिसिंचित करें।

वन्दे शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

जय माता दी! जय माँ शैलपुत्री! शुभ नवरात्रि!

एक ऐसा कानून जिसने इतिहास के पन्नों को शर्मसार किया! स्तन ढकने पर दलित महिलाओं को चुकाना पड़ता था टैक्स—————————————————...
08/09/2025

एक ऐसा कानून जिसने इतिहास के पन्नों को शर्मसार किया! स्तन ढकने पर दलित महिलाओं को चुकाना पड़ता था टैक्स
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क्या आप जानते हैं कि कभी हमारे देश में दलित महिलाओं (Dalit Women) को सिर्फ इसलिए टैक्स (Breast Tax) देना होता था क्योंकि वे अपने स्तन ढकना चाहती थीं? जी हां सही पढ़ा आपने! अगर वे ऐसा नहीं करतीं तो उन्हें सजा भी दी जाती थी। आइए जानते हैं कि यह कितनी क्रूर और अन्यायपूर्ण प्रथा (Mulakkaram) थी और कैसे इन महिलाओं ने मिलकर इसे समाप्त किया।
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आजादी के पहले, हमारे देश में कई अमानवीय कानून थे जो समाज के एक बड़े हिस्से को कुचलने (Social Discrimination) का काम करते थे। इनमें से एक कानून इतना क्रूर था कि सुनकर रूह कांप उठती है। इस कानून के मुताबिक, दलित जाति की महिलाओं (Dalit Women) को अपनी आजादी का मूल्य चुकाना पड़ता था और वो भी अपनी इज्जत के बदले! जी हां, उन्हें सिर्फ इसलिए टैक्स देना होता था कि वो अपने शरीर के ऊपरी हिस्से यानी स्तन को ढक सकें। अगर कोई महिला इस अन्याय (Breast Tax In India) के खिलाफ आवाज उठाती, तो उसे सजा का सामना करना पड़ता था। आइए, आज हम आपको बताएंगे कि ये कानून कहां लागू था और कैसे महिलाओं ने मिलकर इस अत्याचार के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ी।

स्तन ढकने पर देना होता था टैक्स
केरल के त्रावणकोर में सदियों पहले, दलित जाति की महिलाओं को 'मुलक्करम' नामक एक अत्यंत अपमानजनक टैक्स चुकाना पड़ता था। अगर कोई अधिकारी या ब्राह्मण उनके सामने आता था, तो उन्हें या तो अपनी छाती से वस्त्र हटाने पड़ते थे, या फिर अपनी छाती ढकने के लिए एक टैक्स देना पड़ता था। इस अमानवीय नियम का पालन सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य था। बता दें, इस टैक्स को बहुत कठोरता से वसूला जाता था। बाद में, व्यापक विरोध के कारण और अंग्रेजों के दबाव में, यह क्रूर प्रथा समाप्त की गई।

स्तन के आकार पर भरना पड़ता था टैक्स
मद्रास कुरियर नामक समाचार पत्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, त्रावणकोर राज्य में निचली जाति की महिलाओं पर अत्याचार की हदें पार कर दी गई थीं। इन महिलाओं को अपनी छाती ढकने के लिए एक कर देना पड़ता था और यह कर महिलाओं के स्तन के आकार के आधार पर तय किया जाता था। यह अमानवीय नियम त्रावणकोर के राजा के आदेश पर लागू किया गया था और इसे उसके सलाहकारों का पूरा समर्थन प्राप्त था।

विरोध पर काट देते थे स्तन
ब्रेस्ट टैक्स का विरोध करने वाली महिलाओं को अमानवीय यातनाएं दी जाती थीं। नांगेली नाम की एक दलित महिला ने इस अत्याचार का विरोध किया तो उसे मौत के घाट उतार दिया गया। बता दें, उसके स्तनों को काट देने की क्रूरता ने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया था। नांगेली की शहादत ने दलितों को एकजुट कर दिया और उन्होंने इस अमानवीय प्रथा के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी। इस आंदोलन में कई ईसाई महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और अंग्रेजों और मिशनरियों से मदद मांगी। अंततः अंग्रेजी शासन के दबाव में त्रावणकोर को यह क्रूर कानून रद्द करना पड़ा।

महिलाओं के पहनावे पर अमानवीय प्रतिबंध
दीवान जर्मनी दास ने अपनी पुस्तक 'महारानी' में उल्लेख किया है कि त्रावणकोर के शासनकाल में, केरल के एक हिस्से में रहने वाली महिलाओं को अपने पहनावे के बारे में कड़े नियमों का पालन करना पड़ता था। ये नियम इतने सख्त थे कि किसी के कपड़ों को देखकर उसकी जाति का अंदाजा लगाया जा सकता था।

एजवा, शेनार या शनारस, नाडार जैसी जातियों की महिलाओं को अपनी छाती पूरी तरह से खुली रखनी होती थी। अगर कोई महिला इन नियमों का पालन नहीं करती थी, तो उसे राज्य को जुर्माना देना पड़ता था। यह एक ऐसा समय था जब महिलाओं को अपनी पसंद से कपड़े पहनने का अधिकार नहीं था। उन्हें समाज द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार ही जीना पड़ता था।

125 साल तक चला अत्याचार
जानकारी के मुताबिक, टैक्स लेने की प्रथा को बंद कर दिया गया था, लेकिन स्तन ढंकने पर प्रतिबंध लगा रहना एक क्रूर मजाक-सा था। यह कुप्रथा लगभग 125 साल तक चलती रही। त्रावणकोर की रानी तक इस अमानवीय व्यवस्था को सही मानती थीं। अंग्रेज गवर्नर चार्ल्स ट्रेवेलियन ने 1859 में इसे खत्म करने का आदेश दिया, फिर भी यह जारी रहा। ऐसे में, नाडार महिलाओं ने उच्च वर्ग की तरह कपड़े पहनकर विरोध किया। आखिरकार, 1865 में सभी को ऊपरी वस्त्र पहनने की आजादी मिली। दीवान जर्मनी दास की पुस्तक "महारानी" में इस कुप्रथा का विस्तृत विवरण मिलता है।

प्रेस विज्ञप्तिमाननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी के जन्मदिवस पर सेवा कार्यलखनऊ, 10 जुलाई 2025 भारतीय जनता पार्टी क...
10/07/2025

प्रेस विज्ञप्ति
माननीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी के जन्मदिवस पर सेवा कार्य
लखनऊ, 10 जुलाई 2025

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑपरेशन सिंदूर के प्रणेता, भारत के यशस्वी रक्षा मंत्री, और लखनऊ के प्रिय सांसद, माननीय श्री राजनाथ सिंह जी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ (पंजीकृत संख्या 10039) एवं सार्वदेशिक वाल्मीकि हितकारिणी सभा के तत्वाधान में वाल्मीकि समाज द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविल अस्पताल, हजरतगंज, लखनऊ में एक सेवा कार्य का आयोजन किया गया।
इस पुनीत अवसर पर अस्पताल में भर्ती मरीजों के बीच पौष्टिक आहार लंच बॉक्स, दूध, और बिस्किट का वितरण किया गया।
यह कार्यक्रम माननीय रक्षा मंत्री जी के जनसंपर्क अधिकारी प्रो. आदरणीय राघवेंद्र शुक्ला जी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
समारोह में निदेशक कजली गुप्ता जी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री राजेश श्रीवास्तव जी , चिकित्सा अधीक्षक एस आर सिंह जी,

*उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ के (प्रमुख पदाधिकारी)*

*प्रदेश प्रमुख महामंत्री श्री अशोक कुमार वाल्मीकि, प्रदेश उपाध्यक्ष श्री संतोष कुमार वाल्मीकि, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री राहुल कुमार वाल्मीकि, प्रदेश महामंत्री श्री रितेश कुमार वाल्मीकि, प्रदेश कानूनी सलाहकार श्री अमन कुमार वाल्मीकि (एडवोकेट, हाई कोर्ट),*

*उपस्थित गणमान्य सदस्य*

*श्री राजेश वाल्मीकि, श्री मुकेश वाल्मीकि, श्री सुमित वाल्मीकि, श्री अभिषेक वाल्मीकि, श्री विकास वाल्मीकि, श्री मनीष वाल्मीकि, श्री सनी बागड़ी, श्री धीरज वाल्मीकि, श्री मुकुल वाल्मीकि, श्री ऋतिक वाल्मीकि, श्री यश वाल्मीकि, श्री हिमांशु वाल्मीकि, श्री तुषार वाल्मीकि, श्री रोनित वाल्मीकि, श्री आयुष वाल्मीकि, श्री सिद्धार्थ कुमार वाल्मीकि, श्री सुजीत वाल्मीकि सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।*
*माननीय श्री राजनाथ सिंह जी के प्रेरणादायी नेतृत्व, राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण, और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनके सराहनीय योगदान को सम्मानित करने हेतु यह सेवा कार्य आयोजित किया गया। उनके जन्मदिवस पर हम सभी उनके दीर्घ, स्वस्थ और मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। उनकी दूरदर्शिता और कर्तव्यनिष्ठा भारत को वैश्विक पटल पर और अधिक गौरव प्रदान करे।*
*जय हिंद!*
*उत्तर प्रदेशीय सफाई कर्मचारी संघ व वाल्मीकि समाज, लखनऊ*

Rajnath Singh Ministry of Defence, Government of India Bharatiya Janata Party (BJP) BJP Uttar Pradesh Brajesh Pathak Anand Dwivedi Pankaj Singh Neeraj Singh Sushma Kharkwal Narendra Modi Amit Shah MYogiAdityanath Yogi Adityanath Office
Dr. Shyama Prasad Mukharji Civil Hospital

शुभ जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं..!!!हमारे मार्गदर्शक, प्रेरणास्त्रोत यशस्वी माननीय उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार पर...
25/06/2025

शुभ जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं..!!!

हमारे मार्गदर्शक, प्रेरणास्त्रोत यशस्वी माननीय उपमुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार परम आदरणीय श्री ब्रजेश पाठक जी आपको हार्दिक शुभकामनाएं एवं अभिनंदन।

दलित वाल्मीकि समाज आपके संवेदनशील नेतृत्व, सहयोग और संघर्षशील भावना को नमन करता है।
ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सदैव स्वस्थ, ऊर्जावान एवं जनसेवा में अग्रणी रहें।
आपका साथ, आपका संरक्षण – हमारे समाज के लिए एक मजबूत संबल है।

💐 हम सब की ओर से शुभकामनाओं सहित।
सार्वदेशिक वाल्मीकि हितकारिणी सभा

Brajesh Pathak Dy CM Office of Brajesh Pathak
#ब्रजेशपाठक #उपमुख्यमंत्री_उत्तरप्रदेश #दलित_वाल्मीकि_समाज
#वाल्मीकि_सम्मान


#सशक्त_दलित_समाज #संविधान_का_सम्मान
Bharatiya Janata Party (BJP) BJP Uttar Pradesh

25/06/2025

जाति न पूछो साधु की,पूछ लीजिये ज्ञान।
मोल करो तलवार का,पड़ी रहन दो म्यान।।

- कबीरदास जी

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