13/08/2025
संस्कार ही एकमात्र वस्तु है जो किसी मानव को सच्चा राष्ट्र भक्त बना सकती है।: मनोज कांत
आज लखनऊ पब्लिक कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल स्ट्डीज एवं #उत्तिष्ठ_सेवा_संस्थानम्, के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित लोकमाता #अहिल्या बाई होलकर विषयक #संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि प्रो शीला मिश्रा,
मुख्य वक्ता मा. मनोज कान्त जी,कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो लक्ष्मी शंकर अवस्थी व उत्तिष्ठ सेवा संस्थानम् के उपाध्यक्ष श्री विकास तिवारी रहे, कार्यक्रम में बोलते हुए मनोज जी नें कहा कि आज अहिल्याबाई जी की 230 वीं पुण्यतिथि है, 13 अगस्त 1795 को 70 वर्ष की आयु में इनका शरीर शांत हो गया था, पूर्व समय में पुण्य श्लोका अहिल्याबाई ने अपने मृत्यु के पूर्व ही अपने महिला होने पर भी समाज व #राष्ट्र को जो योगदान दिया है वह वर्तमान समय में हम सभी को उस पर चिंतन कर उनके किये समस्त कार्यों को अपने आप में धारण करना चाहिए, चाहे वह समाज की समस्या हो, आर्थिक उन्नति हो, सुरक्षा, व्यवसाय आदि प्रमुख विषयों पर उन्होंने स्वयं आगे आकर #समाज का नेतृत्व किया और नारी शिक्षा,नारी उत्थान,एवं नारी सशक्तिकरण जैसे जीवंत उदाहरण के रूप में हम महारानी पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर को याद करते हैं। उस परम #शक्ति ने हर युग में, युग परिवर्तन, युग नवनिर्माण हेतु नारी को अपनी विशिष्ट शक्तियाँ, गुण, बल, सामर्थ्य देकर अपने निर्दिष्ट कार्य हेतु धरती पर अवतरित कराया। वह भगवान शिव की परम् उपासक रहीं। वहीं प्रो शीला मिश्रा जी ने बताया पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर जी ईश्वर द्वारा चुनी हुई नारी थीं यह तत्व उनके ससुर मल्लहार देश के राजा ने कही, उनके अंदर वह तत्व विद्यामन है जो सम्पूर्ण राष्ट्र का एक कीर्तमान स्थापित कर सकता है, आज प्रत्येक मानव समाज को अपने अंतर ज्ञान, भक्ति, कर्म – कौशल, बल, साहस तथा अंतरात्मा की आवाज पर जीवन जीते हुए, धरती के अशुभ, अमंगल, असत्य, अज्ञान, अंधकार की शक्तियों को पराजित करते हुए अपने ईश्वर प्रदत्त कर्म को धरती पर पूरी आस्था और विश्वास के साथ सम्पन्न करना चाहिए। “नारी के अंदर अलौकिक आध्यात्मिक शक्ति है। नारियों में यह शक्ति ज्यादा केंद्रित है। पुरुषों की अपेक्षा अधिक विकसित और समृद्ध शक्ति है। नारियाँ इसे अपने अंदर अभिव्यक्त करने में ज्यादा सक्षम और योग्य है। किंतु नारी अपने अंदर इस भागवत शक्ति की दिव्य क्षमता के प्रति सचेतन नहीं है। और इस क्षमता को उसने अपने अंदर उस सीमा तक अभिव्यक्त नहीं किया है जो उसे करना चाहिये या जो प्रत्येक नारी को करना है।
कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो लक्ष्मी शंकर अवस्थी जी ने सभी का धन्यवाद देते हुए कहा कि महारानी अहिल्याबाई के विचारों को याद करते हुए कहा कि पुण्यश्लोका अहिल्याबाई होलकर के जीवन दृष्टि कार्य और यदि उनके संपूर्ण जीवन का अवलोकन करना चाहिए। इस कार्यक्रम में डॉ जितेंद्र शुक्ल, श्री विशाल शुक्ल, अर्पित वर्मा, शिवा जी, आशीष जी व कालेज के समस्त शिक्षक और विद्यार्थी सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे । #माँ_भारती #श्रद्धांजलि #एकल #मैराथन2025 #त्योहार #वृक्षारोपण