नेताजी मुलायम सिंह यादव

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Akhileshian
(225)

साल 2012...उत्तर प्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिला था Akhilesh Yadav । पूर्वांचल दौरे से लौटते हुए उनका काफिला हाईवे पर था।...
29/12/2025

साल 2012...

उत्तर प्रदेश को नया मुख्यमंत्री मिला था Akhilesh Yadav । पूर्वांचल दौरे से लौटते हुए उनका काफिला हाईवे पर था। लगातार बारिश हो रही थी। तभी उन्होंने कहा “हाईवे छोड़ो… गांवों के रास्ते से चलो।” ड्राइवर ने हिचकते हुए कहा, “साहब, रास्ता बहुत खराब है।” अखिलेश जी ने कहा “कोई बात नहीं, चलो।”

काफिला कच्ची सड़क पर मुड़ा। चारों ओर खेत, पानी से भरी मेड़ें और मिट्टी में धँसे रास्ते। तभी एक बस्ती आई। लेकिन वहाँ कुछ अजीब था सन्नाटा। न बच्चों की हँसी, न किसी आंगन से आवाज़, न चूल्हे का धुआँ। एक जगह कुछ लोग जमा थे अखिलेश जी ने गाड़ी रुकवाई गई।

अखिलेश जी नीचे उतरे और पूछा यहाँ सब ठीक तो है?

इतने में एक बुज़ुर्ग आगे आया। भीगी धोती, काँपते हाथ, आँखों में डर। उसने धीरे से कहा, “साहब… सब ठीक कैसे हो सकता है…”

“क्या हुआ, बाबा?” अखिलेश जी ने पूछा।

बुज़ुर्ग की आवाज़ भर्रा गई।
“हमरी बहू है… पेट में बहुत दर्द है। बच्चा अटक गया है। सुबह से तड़प रही है। गाड़ी नहीं है साहब… डॉक्टर बहुत दूर है।”

पीछे से एक और औरत बोल पड़ी, आँचल से आँसू पोंछते हुए
“साहब, बचा लो… अगर आज नहीं बचे तो…”
वाक्य पूरा नहीं हो सका।

अखिलेश जी ने तुरंत कहा काफिले में चल रही एंबुलेंस से महिला को अस्पताल भिजवाया लेकिन महिला को बचाया नहीं जा सका।

पूरा काफिला वहीं रुका रहा। कोई जल्दबाज़ी नहीं थी। कोई औपचारिकता नहीं। बस एक मुख्यमंत्री खड़ा था चुप। सामने गांव के लोग थे, जिनकी आँखों में सवाल था।

अखिलेश यादव ने बहुत धीमे स्वर में कहा
“अगर समय पर एंबुलेंस मिल जाती… तो शायद ये जान बच जाती।”
फिर उन्होंने खुद से जैसे वादा किया
“अब किसी गांव को यह दिन नहीं देखना पड़ेगा।”

उसी क्षण एक फैसला हुआ अब उत्तर प्रदेश में कोई भी इंसान इलाज के इंतज़ार में नहीं मरेगा। उसी दर्द से जन्मी समाजवादी एंबुलेंस सेवा (108)। एंबुलेंस को गाड़ी नहीं, जिम्मेदारी बनाया गया। आज प्रदेश में 4,800 से अधिक एंबुलेंस सड़कों पर हैं गांव, कस्बे, शहर सबके लिए। मुफ्त सेवा, प्रशिक्षित स्टाफ, GPS ट्रैकिंग, ताकि मदद रास्ता न भटके।

यही फर्क होता है सत्ता और सेवा में। जब शासक गांव की मिट्टी में उतरता है, तब योजनाएँ कागज़ नहीं रहतीं जीवन बन जाती

भाजपा व आरएसएस भारत रत्न सरदार पटेल जी की फोटो अमित शाह के साथ जोड़कर सरदार पटेल जी के विचारों और उनके कद का अपमान कर रह...
30/04/2025

भाजपा व आरएसएस भारत रत्न सरदार पटेल जी की फोटो अमित शाह के साथ जोड़कर सरदार पटेल जी के विचारों और उनके कद का अपमान कर रही है।

लौह पुरूष सरदार पटेल का यह अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान...

Akhilesh Yadav Samajwadi Party Dimple Yadav

बगल में Avdhesh Prasad, दलित हैं। पीछे जो बैठा है, उसे कपड़ो से पहचान सकते हैं। सिर पर समाजवादी टोपी। Akhilesh जुबान से ...
05/04/2025

बगल में Avdhesh Prasad, दलित हैं।

पीछे जो बैठा है, उसे कपड़ो से पहचान सकते हैं। सिर पर समाजवादी टोपी।

Akhilesh जुबान से ही नही, अपने स्टेज सेटअप से भी बोलते हैं। जुबान पर वो, जो बोलने की हिम्मत सबकी नहीं।
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अखिलेश की इस निर्भीकता का कायल हूँ।

इसी तस्वीर में पीछे पत्नी Dimple Yadav भी है। परिवारवाद का आरोप लगने के लिए वह काफी है। लेकिन अखिलेश बेपरवाह हैं।

दरअसल जो उनके साथ है, वो उसके साथ है, वह पत्नी हो, मुसलमान हो, दलित.. वे सहज हैं। पोलिटिकली करेक्ट दिखने की कोशिश नही करते। माजरत के साथ कहूंगा, यह सहजता तो राहुल में भी नही दिखती।
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स्वाभाविकता के साथ सन्देश देना एक पॉलिटिशियन की सबसे बड़ी स्किल है।

अखिलेश को बोलते देखना दर्शनीय होता है। अव्वल उनके भाषण में टोकाटाकी करने का चांस नही होता,

लेकिन दुष्ट भाजपाई अपनी ट्रेनिंग के अनुसार विघ्न डालते भी हैंवह अपने विट और ह्यूमर से उससे पार निकल जाते हैं।
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संसदीय बहसों का सबसे बदतरीन दौर है।

खास तौर पर सत्ता पक्ष की ओर से चीखते झूठ, दादागिरी, निजी आक्षेप, बेशर्म हंसी, टोकाटाकी, और निहायत बकवास, निम्नस्तरीय अध्यक्षीय आसंदी कार्यवाही देखने का मजा दोनों ही सदनों में खराब कर देती है।

लेकिन इसके बीच इमरान प्रतापगढ़ी, संजय सिंह, मंनोज झा को सुनना अच्छा लगता है।

कपिल सिब्बल बहुत एकेडमिक हो जाते हैं। अंग्रेजी में महुआ मोइत्रा अच्छा बोलती हैं, लेकिन एक ही पैटर्न को फॉलो करना और विट का अभाव उन्हें नीरस बना देता है।
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हास्य के अभाव की समस्या तो राहुल के साथ भी है। अति संजीदा और भारी भरकम भंगिमाओ से सहज सुलभ हंसी कहीं ज्यादा असरकारी होती है।

अखिलेश में यह स्वाभाविक है। तो सदन में वह साधारण सरल भाषा, स्टेज सेटिंग और जुदा अंदाज से खुद पर निगाह टिका लेते है।
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सच कहूँ तो समाजवादी पार्टी, या यूपी का मुख्यमंत्री उनके लिए एक छोटा मंच है।

लेकिन राजनीति में उनके पास लम्बा समय है। आशा है किसी दिन वे, इन सबसे ऊंचे पायदान पर दिखेंगे।

manish
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सोच और नीतियों में फर्क देखिएभिक्षा नहीं, शिक्षा दीजिए!Difference between Thinking and PolicyAkhilesh Yadav Dimple Yadav...
04/01/2025

सोच और नीतियों में फर्क देखिए

भिक्षा नहीं, शिक्षा दीजिए!

Difference between Thinking and Policy

Akhilesh Yadav Dimple Yadav Samajwadi Party Shivpal Singh Yadav नेताजी मुलायम सिंह यादव

12/10/2024

Are U ready For Change....

Comment here....

13/02/2024

सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav व माननीय Dimple Yadav जी ने आज निर्माणाधीन श्री केदारेश्वर मंदिर के लिए लाये गये शालिग्राम शिला की पूजा अर्चना की।

12/02/2024

जो अपने गॉव की पहचान नहीं बना सकते वो किसी को पहचान नहीं दे सकते है, बात ख़ानदान तक पहुँची है तो ख़ानदान बढ़ाने के लिए भी कुछ करना चाहिए- माननीय Akhilesh Yadav जी

01/02/2024

अखिलेश यादव जी ने कन्नौज में स्पेशल काऊ मिल्क प्लांट लगवाया था, जो की किसानों के लिए व गौवंश संरक्षण की दिशा में ये एक बेहतरीन कदम था।

लेकिन भाजपा सरकार ने काऊ मिल्क प्लांट का बजट काट दिया और अपना नाम चिपका लिया लेकिन फिर भी दूध प्लांट को बर्बाद कर दिया।

कौन किसके साथ खड़ा होता है,जो सबके आंसू पोछे वही बड़ा होता है।Akhilesh YadavShivpal Singh Yadav Dimple Yadav
16/10/2023

कौन किसके साथ खड़ा होता है,

जो सबके आंसू पोछे वही बड़ा होता है।

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