14/04/2025
तमिलनाडु गवर्नर प्रकरण: गवर्नर के विवेकाधिकार और संस्थागत संतुलन का संकट
तमिलनाडु गवर्नर और राज्य सरकार के बीच उत्पन्न विवाद अब केवल राजनीतिक टकराव नहीं रह गया है। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ द्वारा दिया गया निर्णय, जिसमें गवर्नर को मंत्रिपरिषद की सलाह पर "अनिवार्य रूप से" कार्य करने वाला बताया गया, ने एक बड़ा संवैधानिक प्रश्न खड़ा कर दिया है: क्या संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों को विवेक की कोई स्वतंत्रता नहीं है?
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जो दृष्टिकोण अपनाया, वह गवर्नर की भूमिका को यंत्रवत बनाता है। यह व्याख्या भारत के संवैधानिक संघवाद की उस भावना के विपरीत जाती है, जिसमें राज्यपाल को न केवल केंद्र का प्रतिनिधि, बल्कि राज्य के संविधान संरक्षक की भूमिका भी दी गई है।
संविधान के अनुच्छेद 163(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि कुछ विषयों पर राज्यपाल को अपने विवेक से निर्णय लेने का अधिकार है। यदि इस विवेक को पूरी तरह नकार दिया जाए, तो यह संविधान की मूल संरचना को चुनौती देना होगा।
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल – ये सभी प्रतीकात्मक से अधिक संस्थागत विवेक के वाहक हैं।
न्यायालय का यह संकेत कि गवर्नर का कर्तव्य मंत्रिपरिषद की बात मानने तक सीमित है, इन पदों को "रबड़ स्टैम्प" बना देता है। यह न केवल लोकतंत्र में शक्ति संतुलन को कमजोर करता है, बल्कि न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका के क्षेत्र में हस्तक्षेप के रूप में भी देखा जा सकता है।
न्यायिक व्यवस्था में यह तर्क देना कि "विवेक का प्रयोग संविधान में नहीं लिखा है, इसलिए नहीं होगा", तर्कसंगत नहीं। संविधान मौन है, निषेधात्मक नहीं।
भारत जैसे लोकतंत्र में, जहाँ संस्थाएं आपसी संतुलन और नियंत्रण (checks and balances) से चलती हैं, वहाँ किसी भी पदाधिकारी को यंत्रवत बना देना लोकतंत्र को कमजोर करता है।
गवर्नर का विवेक सीमित हो सकता है, लेकिन शून्य नहीं। संविधान की आत्मा न्यायिक विवेक और कार्यकारी विवेक – दोनों के बीच संतुलन की मांग करती है।
न्यायपालिका को संविधान पीठ के माध्यम से इस संवैधानिक भ्रम को सुलझाना चाहिए।
यह मामला केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है। महाराष्ट्र, पंजाब, केरल, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी केंद्र-राज्य संबंधों में तनाव सामने आ चुके हैं। ऐसे में, गवर्नर की भूमिका को लेकर एक सुस्पष्ट और संतुलित मार्गदर्शन आवश्यक है, जो केवल संविधान पीठ द्वारा ही दिया जा सकता है।