DASFI - Uttar Pradesh

DASFI - Uttar Pradesh DR. AMBEDKAR STUDENT FRONT OF INDIA ®

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11/04/2026

#डॉ_अम्बेडकर_स्टूडेंट_फ्रंट_ऑफ_इंडिया( ) #उत्तर_प्रदेश

#प्रदेश_सचिव_अभिषेक_कुमार_आर्या जी के #प्रस्ताव, #प्रदेश_कार्यकारिणी टीम* के #समर्थन एवं #प्रदेश_अध्यक्ष_सत्येंद्र_संखवार_जी के #अनुमोदन के उपरांत #डॉक्टर_सरोज_कुमार_वर्मा_जी पुत्र #श्रद्धेय_नत्था_प्रसाद_जी को डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश के िले का #जिला_अध्यक्ष बनाने जाने की हार्दिक धम्मकामनाए एवं बधाई हो।

हम इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

जय भीम!
जय संविधान!

अनुराग प्रकाश कोटार्य
प्रदेश महासचिव उत्तर प्रदेश
डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश

11/04/2026

*ਮਹਾਤਮਾ ਜੋਤੀਬਾ ਫੂਲੇ (1827-1890) ਇੱਕ ਮਹਾਨ ਭਾਰਤੀ ਸਮਾਜ ਸੁਧਾਰਕ, ਚਿੰਤਕ ਅਤੇ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀ ਸਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਜਾਤੀਵਾਦ, ਛੂਤ-ਛਾਤ ਅਤੇ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੀ ਦੁਰਦਸ਼ਾ ਵਿਰੁੱਧ ਲੜਾਈ ਲੜੀ। 1848 ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਪਤਨੀ ਸਾਵਿਤਰੀਬਾਈ ਫੂਲੇ ਨਾਲ ਮਿਲ ਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਕੁੜੀਆਂ ਲਈ ਭਾਰਤ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਸਕੂਲ ਖੋਲ੍ਹਿਆ ਅਤੇ ‘ਸਤਯਸ਼ੋਧਕ ਸਮਾਜ’ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ਕਰਕੇ ਦਲਿਤਾਂ ਤੇ ਪਛੜੇ ਵਰਗਾਂ ਦੇ ਹੱਕਾਂ ਲਈ ਆਵਾਜ਼ ਬੁਲੰਦ ਕੀਤੀ।*

*ਮਹਾਤਮਾ ਜੋਤੀਬਾ ਫੂਲੇ ਬਾਰੇ ਮੁੱਖ ਤੱਥ:*
*ਜਨਮ: 11 ਅਪ੍ਰੈਲ 1827, ਪੁਣੇ, ਮਹਾਰਾਸ਼ਟਰ।*
*ਸਮਾਜਿਕ ਕਾਰਜ: ਔਰਤਾਂ ਦੀ ਸਿੱਖਿਆ, ਵਿਧਵਾ ਪੁਨਰ-ਵਿਆਹ, ਅਤੇ ਜਾਤ-ਪਾਤ ਦੇ ਖਾਤਮੇ ਲਈ ਜੀਵਨ ਭਰ ਸੰਘਰਸ਼ ਕੀਤਾ।*
*ਸਿੱਖਿਆ ਵਿੱਚ ਯੋਗਦਾਨ: 1848 ਵਿੱਚ ਪੁਣੇ ਵਿੱਚ ਲੜਕੀਆਂ ਲਈ ਪਹਿਲਾ ਸਕੂਲ ਸਥਾਪਿਤ ਕੀਤਾ।*
*ਸਤਯਸ਼ੋਧਕ ਸਮਾਜ: 24 ਸਤੰਬਰ 1873 ਨੂੰ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਸਮਾਜਿਕ ਬਰਾਬਰੀ ਲਈ 'ਸਤਯਸ਼ੋਧਕ ਸਮਾਜ' (ਸੱਚ ਦੀ ਖੋਜ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਸਮਾਜ) ਬਣਾਇਆ।*
*ਸਾਹਿਤਕ ਰਚਨਾਵਾਂ: 'ਗੁਲਾਮਗਿਰੀ', 'ਸ਼ੇਤਕਰਿਆਚਾ ਅਸੁਦ' (ਕਿਸਾਨ ਦਾ ਕੋਰੜਾ) ਵਰਗੀਆਂ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਪੁਸਤਕਾਂ ਲਿਖੀਆਂ।*
*ਸਨਮਾਨ: ਸਮਾਜਿਕ ਸੁਧਾਰਾਂ ਲਈ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ 1888 ਵਿੱਚ 'ਮਹਾਤਮਾ' ਦੀ ਉਪਾਧੀ ਦਿੱਤੀ ਗਈ।*

*ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪਣਾ ਜੀਵਨ ਸਮਾਜ ਦੇ ਕਮਜ਼ੋਰ ਵਰਗਾਂ ਨੂੰ ਬਰਾਬਰੀ ਦਾ ਹੱਕ ਦਿਵਾਉਣ ਲਈ ਸਮਰਪਿਤ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।*

*ਵੱਲੋਂ:- ਡਾ.ਅੰਬੇਡਕਰ ਸਟੂਡੈਂਟ ਫਰੰਟ ਆਫ਼ ਇੰਡੀਆ (DASFI* )

🌼 महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🌼 महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं आप स...
11/04/2026

🌼 महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं 🌼

महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏

🌸 जयंती संदेश 🌸

"आइए, महात्मा ज्योतिबा फुले जी के आदर्शों को अपनाएं और शिक्षा, समानता व न्याय के मार्ग पर चलकर एक बेहतर समाज का निर्माण करें।"

जन्म: 11 अप्रैल 1827, पुणे (महाराष्ट्र)
पत्नी / सहयोगिनी: सावित्रीबाई फुले
प्रमुख संस्थापक कार्य: सत्यशोधक समाज (1873)
महत्वपूर्ण रचनाएँ : गुलामगिरी (1873), किसान का कोड़ा, तृतीय रत्न
निधन: 28 नवंबर 1890, पुणे

महात्मा ज्योतिबा फुले भारत के महान समाज सुधारक, विचारक और शिक्षाविद थे, जिन्होंने अपने जीवन को समाज में समानता, शिक्षा और न्याय स्थापित करने के लिए समर्पित कर दिया। उनका जन्म 11 अप्रैल 1827 को हुआ था। वे उन महान व्यक्तियों में से थे जिन्होंने जाति-पाति, भेदभाव और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई।

फुले जी का मानना था कि शिक्षा ही वह सबसे बड़ा हथियार है, जिससे समाज में बदलाव लाया जा सकता है। इसी सोच के साथ उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई फुले के साथ मिलकर भारत का पहला बालिका विद्यालय शुरू किया। उस समय लड़कियों को पढ़ाना समाज में बहुत बड़ा अपराध माना जाता था, लेकिन उन्होंने हर कठिनाई का सामना करते हुए शिक्षा का दीप जलाया।

महात्मा फुले ने दलितों, शोषितों और महिलाओं के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्होंने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जिसका उद्देश्य था समाज में फैले अंधविश्वास, जातिवाद और अन्याय को समाप्त करना। वे मानते थे कि सभी मनुष्य समान हैं और किसी के साथ भी ऊँच-नीच का व्यवहार नहीं होना चाहिए।

उनके विचार आज भी हमारे समाज को दिशा देते हैं। वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक आंदोलन थे—एक ऐसी सोच, जो हर व्यक्ति को समान अधिकार और सम्मान दिलाने के लिए प्रेरित करती है।

#आरंभिक_जीवन_और_शिक्षा

फुले का जन्म सतारा जिले के एक माली परिवार में हुआ। अल्पसंपन्न पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने स्कॉटिश मिशन स्कूल, पुणे से शिक्षा प्राप्त की। जातिगत भेदभाव से मिले अनुभवों ने उन्हें समाज सुधार की दिशा में प्रेरित किया। 1840 में उनका विवाह सावित्रीबाई से हुआ, जो बाद में भारत की पहली प्रशिक्षित महिला शिक्षिका बनीं।

#सामाजिक_सुधार_और_शिक्षण_आंदोलन

1848 में फुले दंपति ने पुणे में देश का पहला बालिका विद्यालय खोला, जो स्त्री-शिक्षा की ऐतिहासिक पहल थी। उन्होंने अस्पृश्यों के लिए सार्वजनिक जलस्रोत खोले और विधवा विवाह, अनाथ-संरक्षण तथा बाल-हत्या-निवारण के लिए संस्थाएँ स्थापित कीं। 1873 में उन्होंने **सत्यशोधक समाज** की स्थापना की, जिसका उद्देश्य जाति-भेद, पाखंड और सामाजिक अन्याय के खिलाफ जनजागरण था।

#विचारधारा_और_प्रभाव

फुले की रचना *गुलामगिरी* ने ब्राह्मणवादी वर्ण-व्यवस्था की आलोचना की और शूद्र-अतिशूद्रों को समानता का अधिकार दिलाने का आह्वान किया। वे शिक्षा को मुक्ति का माध्यम मानते थे। उनके विचारों ने 20वीं सदी के सामाजिक और राजनीतिक नेताओं, विशेषकर भीमराव रामजी आंबेडकर, को गहराई से प्रभावित किया।

#विरासत_और_सम्मान

1888 में मुंबई में आयोजित सभा में उन्हें “महात्मा” की उपाधि दी गई। आज फुले स्त्री शिक्षा, दलित उद्धार और किसान-मजदूर आंदोलनों के प्रेरक के रूप में याद किए जाते हैं। महाराष्ट्र सहित पूरे भारत में उनकी जयंती (11 अप्रैल) समानता और सामाजिक न्याय दिवस के रूप में मनाई जाती है।

प्रदेश महासचिव उत्तर प्रदेश
डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश

10/04/2026

संगठन नई व्यवस्था और अनुशासन के अनुसार आगे बढ़ रहा है। राजनैतिक स्वार्थ के लिए मनमाने तरीके से कार्य करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी ।

31/03/2026

सीखना और सीखकर कार्य करना ही समय की मांग है।
जो सीखना ही नहीं चाहते उनपर न अपना निर्णय जारी करें और न ही उनकी अनुशासन हीनता सहें।

 #डॉ_अम्बेडकर_स्टूडेंट_फ्रंट_ऑफ_इंडिया( ) #उत्तर_प्रदेश*डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश*  #प्र...
17/03/2026

#डॉ_अम्बेडकर_स्टूडेंट_फ्रंट_ऑफ_इंडिया( ) #उत्तर_प्रदेश

*डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश*

#प्रदेश_सचिव_रोहित_अम्बेडकर_जी के #प्रस्ताव, #प्रदेश_कार्यकारिणी_टीम के #समर्थन एवं #प्रदेश_अध्यक्ष_सत्येंद्र_संखवार_जी के #अनुमोदन के उपरांत यह निर्णय लिया जाता है कि #श्रद्धेय_प्रमोद_कुमार_जी पुत्र #श्रद्धेय_भगवान_सिंह_जी को डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश के #हाथरस_जिले का #जिला_अध्यक्ष बनाने जाने की हार्दिक धम्मकामनाए एवं बधाई हो।

हम इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।

जय भीम!
जय संविधान!

अनुराग प्रकाश कोटार्य
प्रदेश महासचिव उत्तर प्रदेश
डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश

 #मान्यवर_कांशीराम_साहबजन्म: 15 मार्च 1934जन्म स्थान: Roparमृत्यु: 9 अक्टूबर 2006, New Delhiकांशीराम भारत के प्रसिद्ध सा...
15/03/2026

#मान्यवर_कांशीराम_साहब

जन्म: 15 मार्च 1934
जन्म स्थान: Ropar
मृत्यु: 9 अक्टूबर 2006, New Delhi

कांशीराम भारत के प्रसिद्ध सामाजिक सुधारक और बहुजन आंदोलन के नेता थे। उन्होंने दलित, पिछड़े और वंचित समाज को राजनीतिक रूप से संगठित करने का बड़ा अभियान चलाया।

📚 #प्रारंभिक_जीवन
> कांशीराम का जन्म पंजाब के रोपड़ (अब रूपनगर) में एक रामदासिया सिख (दलित) परिवार में हुआ।
> . उन्होंने विज्ञान (B.Sc.) की पढ़ाई की।
> . बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी भी की, लेकिन सामाजिक भेदभाव देखने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर सामाजिक आंदोलन शुरू किया।

✊ #बहुजन_आंदोलन_में_योगदान
कांशीराम ने बहुजन समाज को संगठित करने के लिए कई संगठन बनाए:
1. BAMCEF (1978)
पिछड़े, अल्पसंख्यक और दलित कर्मचारियों को संगठित करने के लिए।

2. DS-4 (1981)
नारा दिया: “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी भागीदारी।”

3. Bahujan Samaj Party (1984)
दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समाज की राजनीतिक शक्ति बढ़ाने के लिए पार्टी बनाई।

🏛️ #राजनीति_में_भूमिका

> . कांशीराम ने बहुजन राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया।

> .उन्होंने Mayawati को राजनीति में आगे बढ़ाया, जो बाद में Uttar Pradesh की कई बार मुख्यमंत्री बनीं।

📖 प्रमुख विचार

“बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय”
“राजनीतिक सत्ता ही सामाजिक परिवर्तन की चाबी है।”

🏆 #विरासत

1. कांशीराम को बहुजन आंदोलन का प्रमुख शिल्पकार माना जाता है।
2. उन्होंने दलित-पिछड़े समाज को राजनीतिक चेतना और संगठन दिया।

मान्यवर कांशीराम साहब ने अपना पूरा जीवन समाज के शोषित, वंचित और पिछड़े वर्गों को जागरूक करने और उन्हें संगठित करने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने यह स्पष्ट रूप से समझ लिया था कि जब तक बहुजन समाज राजनीतिक रूप से सशक्त नहीं होगा, तब तक सामाजिक न्याय और समानता का सपना अधूरा रहेगा। इसी विचार के साथ उन्होंने बहुजन समाज को संगठित करने का एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया।

कांशीराम साहब ने समाज को यह संदेश दिया कि शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से ही अधिकार प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने बहुजन समाज में आत्मसम्मान और आत्मविश्वास की भावना जगाई और लोगों को यह विश्वास दिलाया कि वे भी देश की राजनीति और सत्ता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

उनकी दूरदर्शी सोच और अथक संघर्ष का परिणाम था कि बहुजन समाज की आवाज़ राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत हुई। उन्होंने केवल एक राजनीतिक आंदोलन ही नहीं खड़ा किया, बल्कि सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान की ऐसी ज्योति जलाई जो आज भी लाखों लोगों को प्रेरित कर रही है।

मान्यवर कांशीराम साहब का जीवन हमें यह सिखाता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और संकल्प मजबूत हो, तो समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है। उनका संघर्ष, त्याग और विचारधारा आज भी सामाजिक न्याय, समानता और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

कांशीराम साहब की जयंती हमें उनके आदर्शों को याद करने और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेने का अवसर देती है। आइए, हम सभी उनके विचारों को अपनाकर समाज में समानता, भाईचारा और न्याय की स्थापना के लिए कार्य करें।

मान्यवर कांशीराम साहब जी की जयंती पर उन्हें पुनः शत-शत नमन।

अनुराग प्रकाश कोटार्य
प्रदेश महासचिव - उत्तर प्रदेश
डॉ अम्बेडकर स्टूडेंट फ्रंट ऑफ इंडिया (DASFI) उत्तर प्रदेश

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Lucknow
226016

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