02/03/2026
अभी भारत में एक गिरोह फिर से जाग उठा है, जो ख़ामेनेई की मौत पर पटाखे फोड़ रहा है, मिठाई बाँट रहा है, लेकिन जब पूछो तो कारण बताने में लँगड़ाते हैं।
सिर्फ़ मुसलमान होना तो वजह नहीं हो सकती ना, भाई?
मैं उनसे सीधा-सीधा पूछता हूँ:
ख़ामेनेई ने भारत की ज़मीन पर कब्ज़ा किया था?
ईरान ने कभी भारत पर हमला किया?
चाबहार पोर्ट हमारा था, ईरान ने दिया था – क्या वो गलत था?
भारत को अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान को घेरने का रास्ता ईरान ने दिया था – क्या वो दुश्मनी थी?
सदियों से फारसी संस्कृति, सूफ़ी संत, व्यापार, तेल, गैस – ये सब दुश्मनी का सबूत है?
अगर तुम ख़ामेनेई की मौत पर इतना उत्सव मना रहे हो, तो सीधे-सीधे कह दो कि तुम उन लोगों के साथ खड़े हो जिनका नाम एपस्टीन की काली लिस्ट में चमक रहा है..
वो लोग जो छोटी-छोटी बच्चियों को गुलाम बनाते थे, बलात्कार करते थे, मार डालते थे।
क्या तुम उस ट्रंप के साथ हो, जिसने ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर 100 बार झूठ बोला कि “मैंने भारत को युद्ध से बचाया”, जबकि भारत को टैरिफ की धमकी देकर लूट रहा था?
क्या तुम उस ट्रंप के साथ हो जो बिना सबूत के चिल्लाता था कि “भारत के 100 राफेल गिराए गए”?
क्या तुम उस ट्रंप के साथ हो जिसने चाबहार पोर्ट हमसे छीन लिया, वेनेज़ुएला से तेल खरीदने पर पाबंदी लगवाई, और रूस – भारत का 70 साल पुराना सबसे भरोसेमंद दोस्त – से तेल लेने से रोक दिया?
क्या तुम उस ट्रंप के साथ हो जो पूरी दुनिया में अपनी दादागिरी चलाता है, भारत से बिना शर्त 500 करोड़ डॉलर की डील झटक लेता है, और फिर हम पर 100%, 150%, 200% टैरिफ थोपता है?
वो ट्रंप जो कहता था “हम टैरिफ लेंगे, लेकिन भारत नहीं ले सकता”
वो ट्रंप जो पाकिस्तान के जनरल मुनीर को व्हाइट हाउस में बिठाकर बिरयानी खिलाता है और भारत को नीचा दिखाता है?
और सबसे मज़ेदार बात – ये जश्न मनाने वाले 90% बीजेपी के ही हैं!
तो बताओ, अटल बिहारी वाजपेयी ने जो 2001-2003 में ईरान के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप और चाबहार की नींव रखी थी – वो सब गलत था?
वो दोस्ती जो अटल जी ने बनाई, वो अब कचरा है?
या फिर अब “मेडल पहनाने” और “ट्रंप जी की चाटुकारिता” करने की बारी आ गई है?स्पष्ट बोलो भाई – कारण क्या है?
या फिर बस ट्रेंड चला है, तो मुँह में लगाम डालकर नाच रहे हो?
बताओ, मैं भी समझ लूँ – या ये सब सिर्फ़ दिखावा है, ट्रोलिंग है, और असल में तुम्हें ईरान-ख़ामेनेई से कोई मतलब ही नहीं, बस हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेलकर वोट बैंक की राजनीति कर रहे हो?
लेकिन सच बोलने की हिम्मत रखो.... भेड़ ना बनो..