Gosewa, Awadh Prant, RSS/ गोसेवा अवध प्रांत

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Gosewa, Awadh Prant, RSS/ गोसेवा अवध प्रांत गतिविधि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

06/12/2025

गौवंश में गांठदार त्वचा रोग-

गांठदार त्वचा रोग वायरस (एलएसडीवी) के दो उपभेदों - जिनमें से एक में उच्च आनुवंशिक भिन्नता है, इसने गायों में रोग का प्रकोप 1 पैदा किया, जिससे 2022 में पूरे भारत में 200,000 से अधिक गायों की मौत हो गई । इस प्रकोप ने देश में दूध उत्पादन को पंगु बना दिया।
एक बहु-संस्थागत आनुवंशिक विश्लेषण अब ऐसी जानकारियाँ प्रदान करता है जो इस अत्यधिक संक्रामक वायरस से लड़ने में मददगार हो सकती हैं, जिसकी पहली बार 2019 में भारत में रिपोर्ट की गई थी। टीम ने वायरस के डीएनए जीनोम में 1800 से ज़्यादा विविधताएँ पाईं, जिनमें मेज़बान कोशिकाओं से जुड़ने, प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को चकमा देने और कुशल प्रतिकृति के लिए महत्वपूर्ण जीन भी शामिल हैं। ये उत्परिवर्तन वायरस को तेज़ी से प्रजनन करने में मदद करते हैं, जिससे अधिक गंभीर लक्षण पैदा होते हैं।
बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में अध्ययन के सह-लेखक उत्पल एस. टाटू का कहना है कि इन प्रजातियों के विकास पथ और संभावित बहु-प्रवेश का सटीक पता लगाने के लिए अधिक व्यापक निगरानी और डेटा संग्रह आवश्यक है, क्योंकि एलएसडीवी जीनोम अनुक्रमों पर वर्तमान वैश्विक डेटासेट सीमित है।
टाटू भारत में प्रचलित एलएसडीवी वेरिएंट के लिए एक विशेष रूप से तैयार किए गए टीके की वकालत कर रहे हैं। मच्छरों और टिक्स जैसे रक्त-चूसने वाले कीड़ों द्वारा फैलने वाली यह बीमारी बुखार और त्वचा पर गांठें पैदा करती है। इसका पहली बार 1929 में अफ्रीका में वर्णन किया गया था। एलएसवीडी का प्रकोप 1989 तक अफ्रीका तक ही सीमित रहा, जिसके बाद 2019 में यह बीमारी नए क्षेत्रों में फैल गई - जिसकी शुरुआत बांग्लादेश में प्रकोप से हुई।
टीम ने पशु चिकित्सा संस्थानों के सहयोग से, अगस्त-नवंबर 2022 के प्रकोप के दौरान, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक के संक्रमित मवेशियों की त्वचा की गांठें, रक्त और नाक के स्वाब एकत्र किए। उन्होंने 22 नमूनों से निकाले गए डीएनए का उन्नत संपूर्ण-जीनोम अनुक्रमण किया।
भारत में दुनिया में सबसे ज़्यादा पशुधन है और यह गाय के दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। देश का व्यापक टीकाकरण अभियान बकरी चेचक के टीके पर निर्भर है। बकरी चेचक वायरस और एलएसडीवी, दोनों ही कैप्रीपॉक्सवायरस वंश से संबंधित हैं और समान प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न करते हैं। रांची स्ट्रेन पर आधारित समरूप जीवित-क्षीण एलएसडी वैक्सीन , लुम्पी-प्रो वैक्सीन (एक प्रायोगिक वैक्सीन), कुछ ही महीनों में उपलब्ध होने की संभावना है, यह जानकारी पशु चिकित्सा विषाणु विज्ञानी नवीन कुमार ने दी, जिन्होंने यह वैक्सीन विकसित की है और पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान के निदेशक हैं।

29/03/2025
सभी बंधुओं/गोभक्तों व गोपालकों को होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ
14/03/2025

सभी बंधुओं/गोभक्तों व गोपालकों को होली की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ

17/01/2025

हिंदू धर्म में गाय को केवल एक जानवर के रूप में ही नहीं, बल्कि माता के रूप में देखा जाता है। गाय देवी-देवताओं के समान ही पूजनीय है।
कुछ मान्यताओं के अनुसार, कामधेनु गाय का मुख एक महिला के समान था और बाकी शरीर गाय का है। देवताओं और दानवों के बीच हुए समुद्र मंथन से 14 रत्न निकले थे, जिसमें से कामधेनु गाय भी एक थी। दिव्य कामधेनु गाय व्यक्ति की किसी भी इच्छा की पूर्ति कर सकती थी। स्वर्ग कामधेनु गाय का निवास स्थान है। जिसके पास भी कामधेनु गाय होती थी, वह सबसे शक्तिशाली व्यक्ति कहलाता था। साथ ही यह भी माना जाता है कि कामधेनु गाय के दर्शन मात्र से सभी कष्टों का निवारण होता है।
एक पौराणिक कथा के अनुसार, सबसे पहले कामधेनु गाय ऋषि वशिष्ठ के पास थी। एक बार राजा विश्वामित्र ऋषि वशिष्ठ के आश्रम में अतिथि बनकर आए। उन्होंने कामधेनु गाय की सहायता से राजा को अनेकों प्रकार के व्यंजनों से उनका सत्कार किया। यह देखकर राजा दंग रह गए कि ऋषि जिस प्रकार के व्यंजन उन्हें खिला रहे हैं, ऐसे तो महलों में भी नहीं मिलते। तब ऋषि ने उन्हें दिव्य कामधेनु गाय के बारे में बताया।
जिससे राजा के मन में इस दिव्य गाय को पाने की इच्छा प्रकट हुई और उन्होंने ऋषि वशिष्ठ से इसकी मांग की। लेकिन ऋषि वशिष्ठ ने किसी भी कीमत पर इसे राजा को देने से मना कर दिया, जिससे राजा विश्वामित्र ने ऋषि वशिष्ठ पर आक्रमण कर दिया। राजा और ऋषि के बीच इस युद्ध को देखकर कामधेनु गाय बहुत दुखी हुई और वह वापस स्वर्ग लौट गईं। उसके बाद कामधेनु ने स्वर्ग को ही अपना स्थायी निवास स्थान बना लिया।
ऊं श्री सुरैभ्ये नम:🙏🏻💐🚩🚩🚩🚩

भारत के वीर सपूतों को कोटि कोटि नमन व बंदन-काकोरी कांड में शामिल राम प्रसाद बिस्‍मिल अशफाक उल्‍ला खान और रोशन सिंह को आज...
19/12/2024

भारत के वीर सपूतों को कोटि कोटि नमन व बंदन-

काकोरी कांड में शामिल राम प्रसाद बिस्‍मिल अशफाक उल्‍ला खान और रोशन सिंह को आज ही दिन अंग्रेजी हुकूमत ने फांसी की सजा दी थी। क्रांतिकारियों ने काकोरी कांड की घटना को नौ अगस्त 1925 को अंजाम दिया था। ८ अगस्त को राम प्रसाद 'बिस्मिल' के घर पर हुई एक इमर्जेन्सी मीटिंग में निनिर्णय कर योजना बनी और अगले ही दिन ९ अगस्त १९२५ को हरदोई शहर के रेलवे स्टेशन से बिस्मिल के नेतृत्व में कुल १० लोग, जिनमें शाहजहाँपुर से बिस्मिल के अतिरिक्त अशफाक उल्ला खाँ, मुरारी शर्मा तथा बनवारी लाल, बंगाल से राजेन्द्र लाहिडी, शचीन्द्रनाथ बख्शी तथा केशव चक्रवर्ती (छद्मनाम), बनारस से चन्द्रशेखर आजाद तथा मन्मथनाथ गुप्त एवं औरैया से अकेले मुकुन्दी लाल शामिल थे। ८ डाउन सहारनपुर-लखनऊ पैसेंजर रेलगाड़ी में सवार हुए।
लखनऊ जेल में काकोरी षड्यन्त्र के सभी अभियुक्त कैद थे। केस चल रहा था इसी दौरान बसन्त पंचमी का त्यौहार आ गया। सब क्रान्तिकारियों ने मिलकर तय किया कि कल बसन्त पंचमी के दिन हम सभी सर पर पीली टोपी और हाथ में पीला रूमाल लेकर कोर्ट चलेंगे। उन्होंने अपने नेता राम प्रसाद 'बिस्मिल' से कहा- "पण्डित जी! कल के लिये कोई फड़कती हुई कविता लिखिये, उसे हम सब मिलकर गायेंगे।" अगले दिन कविता तैयार थी-
मेरा रँग दे बसन्ती चोला....
हो मेरा रँग दे बसन्ती चोला....
इसी रंग में रँग के शिवा ने माँ का बन्धन खोला,
यही रंग हल्दीघाटी में था प्रताप ने घोला;
नव बसन्त में भारत के हित वीरों का यह टोला,
किस मस्ती से पहन के निकला यह बासन्ती चोला।
मेरा रँग दे बसन्ती चोला....
हो मेरा रँग दे बसन्ती चोला....

जय माँ भारती ,
जय हिंद

06/12/2024

ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र में गौ (गाय) की महिमा
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1- ज्योतिष में गोधूलिका समय विवाह के लिये सर्वोत्तम माना गया है।

2- यदि यात्रा के प्रारम्भ में गाय सामने पड़ जाय अथवा अपने बछड़े को दूध पिलाती हुई सामने पड़ जाय तो यात्रा सफल होती है।

3- जिस घर में गाय होती है, उसमें वास्तुदोष स्वतः ही समाप्त हो जाता है।

4 - जन्मपत्री में यदि शुक्र अपनी नीचराशि कन्या पर हो, शुक्र की दशा चल रही हो या शुक्र अशुभ भाव (6,8,12)-में स्थित हो तो प्रात:काल के भोजन में से एक रोटी सफेद रंग की गाय को खिलाने से शुक्र का नीचत्व एवं शुक्र सम्बन्धी कुदोष स्वत: ही समाप्त हो जाता है।

5- पितृदोष से मुक्ति👉 सूर्य, चन्द्र, मंगल या शुक्र की युति राहु से हो तो पितृदोष होता है। यह भी मान्यता है कि सूर्य का सम्बन्ध पिता से एवं मंगल का सम्बन्ध रक्त से होने के कारण सूर्य यदि शनि, राहु या केतु के साथ स्थित हो या दृष्टि सम्बन्ध हो तथा मंगल की युति राहु या केतु से हो तो पितृदोष होता है। इस दोष से जीवन संघर्षमय बन जाता है। यदि पितृदोष हो तो गाय को प्रतिदिन या अमावास्या को रोटी, गुड़, चारा आदि खिलाने से पितृदोष समाप्त हो जाता है।
6- किसी की जन्मपत्री में सूर्य नीचराशि तुला पर हो या अशुभ स्थिति में हो अथवा केतु के द्वारा परेशानियाँ आ रही हों तो गाय में सूर्य-केतु नाडी में होने के फलस्वरूप गाय की पूजा करनी चाहिये, दोष समाप्त होंगे।
7- यदि रास्ते में जाते समय गोमाता आती हुई दिखायी दें तो उन्हें अपने दाहिने से जाने देना चाहिये, यात्रा सफल होगी।
8- यदि बुरे स्वप्न दिखायी दें तो मनुष्य गो माता का नाम ले, बुरे स्वप्न दिखने बन्द हो जायेंगे।
9- गाय के घी का एक नाम आयु भी है-'आयई घृतम्'। अत: गाय के दूध-घी से व्यक्ति दीर्घायु होता है।
10- हस्तरेखा में आयु रेखा टूटी हुई हो तो गायका घी काम में लें तथा गाय की पूजा करें।
11- देशी गाय की पीठ पर जो ककुद् (कूबड़) होता है, वह 'बृहस्पति' है। अत: जन्मपत्रिका में यदि बृहस्पति अपनी नीच राशि मकर में हों या अशुभ स्थिति हों तो देशी गाय के इस बृहस्पति भाग एवं शिवलिंग रूपी ककुद् के दर्शन करने चाहिये। गुड़ तथा चने की दाल रखकर गाय को रोटी भी दें।

👉 गोमाता के नेत्रों में प्रकाश स्वरूप भगवान् सुर्य तथा ज्योत्स्ना के अधिष्ठाता चन्द्रदेव का निवास होता है। जन्म पत्री में सूर्य-चन्द्र कमजोर हो तो गोनेत्र के दर्शन करें, लाभ होगा।

वास्तुदोषों का निवारण भी करती है गाय
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जिस स्थान पर भवन, घर का निर्माण करना हो, यदि वहाँ पर बछड़े वाली गाय को लाकर बाँधा जाय तो वहाँ सम्भावित वास्तु दोषों का स्वत: निवारण हो जाता है, कार्य निर्विघ्न पूरा होता है और समापन तक आर्थिक बाधाएँ नहीं आतीं।
गाय के प्रति भारतीय आस्था को अभिव्यक्त करने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि गाय सहज रूप से भारतीय जनमानस में रची-बसी है। गोसेवा को एक कर्तव्य के रूप में माना गया है। गाय सृष्टि मातृका कही जाती है। गाय के रूप में पृथ्वी की करुण पुकार और विष्णु से अवतार के लिये निवेदन के प्रसंग पुराणों में बहुत प्रसिद्ध हैं। समरांगणसूत्रधार'-जैसा प्रसिद्ध बृहद्वास्तुग्रन्थ गोरूप में पृथ्वी-ब्रह्मादि के समागम-संवाद से ही आरम्भ होता है।
वास्तुग्रन्थ 'मयमतम्' में कहा गया है कि भवन निर्माणका शुभारम्भ करनेसे पूर्व उस भूमि पर ऐसी गाय को लाकर बाँधना चाहिये, जो सवत्सा (बछड़ेवाली) हो। नवजात बछडे को जब गाय दुलारकर चाटती है तो उसका फेन भूमिपर गिरकर उसे पवित्र बनाता है और वो समस्त दोषों का निवारण हो जाता है। यही वास्तुप्रदीप, अपराजितपृच्छा आदि ग्रन्थों में का महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है कि गाय जहां बैठकर निर्भयता पूर्वक सांस लेती है तो उस स्थान के सारे पापों को खींच लेती है।
निविष्टं गोकुलं यत्र श्वासं मुञ्चति निर्भयम।
विराजयति तं देशं पापं चास्यापकर्षति ।।
यह भी कहा गया है कि जिस घर में गाय की सेवा होती है, वहाँ पुत्र-पौत्र, धन, विद्या आदि सुख जो भी चाहिये, मिल जाता है। यही मान्यता अत्रिसंहिता में भी आयी है। महर्षि अत्रि ने तो यह भी कहा है कि जिस घर में सवत्सा धेनु नहीं हो, उसका मंगल-मांगल्य कैसे होगा?
गाय का घर में पालन करना बहुत लाभकारी है। इससे घरों में सर्वबाधाओं और विघ्नों का निवारण हो जाता है। बच्चों में भय नहीं रहता। विष्णुपुराण में कहा गया है कि जब श्रीकृष्ण पूतना के दुग्धपान से डर गये तो नन्द-दम्पती ने गाय की पूँछ घुमाकर उनकी नजर उतारी और भयका निवारण किया। सवत्सा गाय के शकुन लेकर यात्रा में जाने से कार्य सिद्ध होता है।
पद्मपुराण और कूर्मपुराण में कहा गया है कि कभी गाय को लाँघकर नहीं जाना चाहिये। किसी भी साक्षात्कार, उच्च अधिकारी से भेंट आदि के लिये जाते समय गाय के रँभाने की ध्वनि कान में पड़ना शुभ है। संतान-लाभ के लिये गाय की सेवा अच्छा उपाय कहा गया है।
शिवपुराण एवं स्कन्दपुराण में कहा गया है कि गो सेवा और गोदान से यम का भय नहीं रहता। गाय के पाँवकी धूलिका भी अपना महत्त्व है। यह पापविनाशक है, ऐसा गरुडपुराण और पद्मपुराण का मत है। ज्योतिष एवं धर्मशास्त्रों में बताया गया है कि गोधूलि वेला विवाहादि मंगलकार्यों के लिये सर्वोत्तम मुहूर्त है। जब गायें जंगल से चरकर वापस घर को आती हैं, उस समयको गोधूलि वेला कहा जाता है। गायके खुरों से उठने वाली धूलराशि। समस्त पाप-तापों को दूर करनेवाली है। पंचगव्य एवं पंचामृत की महिमा तो सर्वविदित है ही। गोदान की महिमा से कौन अपरिचित है ! ग्रहों के अरिष्ट-निवारण के लिये गोग्रास देने तथा गौ के दान की विधि ज्योतिष-ग्रन्थों में विस्तार से निरूपित है। इस प्रकार गाय सर्वविध कल्याणकारी ही है।

श्री सुरैभ्याय नमः
12/11/2024

श्री सुरैभ्याय नमः

29/10/2024

धनतेरस पर्व की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएँ-

ॐ धन्वन्तरये नमः,
ॐ नमोभगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतराये: अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

आप सभी स्वस्थ व निरोगी हों, इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ,

जय माता दी 🙏🏻💐🚩
जय गौ माता की 🙏🏻

ओम श्री सुरैभ्यै नमो नम:-सनातन धर्म में गोपाष्टमी पर्व का बड़ा धार्मिक महत्व है। यह दिन पूरी तरह से भगवान कृष्ण को समर्प...
20/11/2023

ओम श्री सुरैभ्यै नमो नम:-
सनातन धर्म में गोपाष्टमी पर्व का बड़ा धार्मिक महत्व है। यह दिन पूरी तरह से भगवान कृष्ण को समर्पित है। गोपाष्टमी के दिन पर गायों और बछड़ों को सजाया जाता है। साथ ही उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। ब्रज में इस त्योहार की खूब धूम देखने को मिलती है।
गोपाष्टमी का महत्व-
गोपाष्टमी का दिन ब्रज, गोकुल, मथुरा, वृन्दावन, द्वारकाधीश और पुरी में बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। गोपाष्टमी के शुभ दिन पर भक्त भगवान विष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण की पूजा करते हैं। इस दिन आप भगवान कृष्ण और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं, तो सुख और समृद्धि प्राप्त होती है। लोग इस पवित्र दिन पर गायों और बछड़ों की पूजा करते हैं और उन्हें घंटियों से सजाते हैं

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