23/06/2026
लखनऊ के अग्निकांड ने न जाने कितने घरों की खुशियाँ, कितनी माँओं की गोद, कितने पिता की उम्मीदें और कितने परिवारों के सपने एक ही पल में छीन लिए।
जो मासूम बच्चे कल तक अपने घरों में हँसते-खेलते थे, आज वही हमेशा के लिए खामोश हो गए… यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि इंसानियत के सीने पर लगा ऐसा घाव है, जिसकी टीस बहुत लंबे समय तक महसूस होगी।
किसी माँ के लिए अपने बच्चे की अर्थी देखना इस दुनिया का सबसे बड़ा दुःख होता है।
किसी पिता के लिए अपने जिगर के टुकड़े को यूँ अचानक खो देना, उसकी पूरी दुनिया के उजड़ जाने जैसा होता है।
आज लखनऊ का यह दर्द केवल उन परिवारों का नहीं, बल्कि हम सबकी संवेदनाओं, हमारी व्यवस्था और हमारे समाज की जिम्मेदारी पर खड़ा एक बड़ा सवाल है।
आख़िर कब तक लापरवाही, असुरक्षा और अव्यवस्था की कीमत मासूम जिंदगियाँ चुकाती रहेंगी?
आख़िर कब तक हादसों के बाद सिर्फ संवेदनाएँ व्यक्त की जाएँगी और जिम्मेदार लोग बच निकलेंगे?
हर ऐसी त्रासदी के बाद कुछ दिन शोक, कुछ दिन बयान, और फिर सब कुछ सामान्य… लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ जाते हैं, उनके लिए ज़िंदगी कभी सामान्य नहीं होती।
Legal Sathi Foundation इस हृदयविदारक अग्निकांड में जान गंवाने वाले सभी मासूम बच्चों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
हम शोकसंतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्माओं को शांति तथा परिजनों को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
साथ ही, हम प्रशासन और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों से माँग करते हैं कि—
इस अग्निकांड की निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जाँच हो,
दोषियों की जवाबदेही तय हो,
लापरवाही बरतने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई हो,
और भविष्य में ऐसी किसी भी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मासूम बच्चों की मौत सिर्फ आँकड़ा नहीं होती…
वो किसी माँ की दुनिया, किसी पिता का सहारा, किसी घर की रौनक और किसी परिवार की पूरी उम्मीद होती है।
इसलिए यह सिर्फ शोक का विषय नहीं, न्याय की माँग का विषय भी है।
ॐ शांति। विनम्र श्रद्धांजलि। न्याय आवश्यक है।