DIYA Lucknow

DIYA Lucknow Divine India Youth Association (DIYA) is the youth wing of All World Gayatri Pariwar

03/08/2026

बाल संस्कारशाल के बच्चों द्वारा गीत :
बच्चे प्रयास कर रहे हैं, आप भी हौसला बढ़ाएं

03/08/2026

वीरों शौर्य दिखाना है

दीपयज्ञ: आम्रपाली योजना लखनऊ
03/08/2026

दीपयज्ञ: आम्रपाली योजना लखनऊ

27/07/2026

बाल संस्कारशाला के नौनिहाल 😍 गायत्री मंत्र का प्यारा सा उच्चारण करते हुए

कारगिल विजय दिवस विशेषDIYA टीम ने 1999 के कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिक और अब गुरुदेव के सृजन सैनिक श्री जि...
26/07/2026

कारगिल विजय दिवस विशेष

DIYA टीम ने 1999 के कारगिल युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व सैनिक और अब गुरुदेव के सृजन सैनिक श्री जितेंद्र सिंह जी से विशेष बातचीत की। उन्होंने कारगिल युद्ध के अपने वास्तविक अनुभव, संघर्ष, साहस और देशभक्ति से जुड़े प्रेरणादायक संस्मरण साझा किए।
इस विशेष मुलाकात में उन्होंने DIYA टीम को कारगिल युद्ध से जुड़ी एक अत्यंत दुर्लभ और अमूल्य धरोहर भी भेंट की। यह धरोहर केवल एक वस्तु नहीं, बल्कि हमारे वीर सैनिकों के त्याग, शौर्य और बलिदान की अमिट स्मृति है।
यह वीडियो अवश्य देखें और जानें कि वह कौन सी अमूल्य धरोहर है

कारगिल विजय दिवस के अवसर पर DIYA टीम ने 1999 के कारगिल युद्ध में भा...

24/07/2026

आज के समय में बाल संस्कारशाला क्यों जरूरी?

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*गुरुदेव के विचारों के साक्षात् दर्शन* जरूर पढ़े ... पिछले दिनों जब दीवार सद्वाक्य लेखन के लिए गांव में अखण्ड ज्योति पत्...
14/07/2026

*गुरुदेव के विचारों के साक्षात् दर्शन*

जरूर पढ़े ...

पिछले दिनों जब दीवार सद्वाक्य लेखन के लिए गांव में अखण्ड ज्योति पत्रिका का वितरण किया गया तो इसी क्रम में इन चाचा जी को भी पत्रिका दी गई । पत्रिका पाते ही चाचा बड़े मनोयोग से पत्रिका पढ़ने लगे ।
एकाएक मन में प्रश्न उठा कि यदि यह पत्रिका न दी जाती तो चाचा इस खाली समय में क्या कर रहे होते ? संभवतः गांव के किसी अन्य व्यक्ति के साथ परिवार, गांव, खेतखलिहान, राजनीति इत्यादि की चर्चा कर रहे होते या यूं ही खाली बैठे इधर उधर देख रहे होते । शायद पत्रिका लेने से भी मन कर सकते थे लेकिन जब उन्हें बताया गया कि ये गायत्री परिवार की अखण्ड ज्योति पत्रिका है । उसने खूब अच्छी अच्छी बाते और कहानियां लिखी हैं , इसे पढियेगा । और वो पत्रिका को लेने के बाद पहले आगे और पीछे पलट कर देखा , कुछ पन्ने इधर उधर किए और फिर तन्मयता के साथ किसी एक पन्ने को पढ़ने लगे , शायद उन्हें उनके अनुरूप कोई विषय मिल गया होगा क्योंकि अखण्ड ज्योति पत्रिका में कभी ऐसा नहीं हो सकता कि आपके मतलब की कोई विषय वस्तु न मिले । वो पढ़ने लगे क्योंकि शायद उनके भीतर स्वाध्याय, सत्संग का संस्कार जरूर रहा होगा ।

गुरुदेव ने मार्च 1962 की अखण्ड ज्योति पत्रिका में लिखा था -

_मौलिकता की मात्रा तो बहुत थोड़ी होती है, अधिकतर तो लोग बाहर से ही प्रभाव ग्रहण करते हैं। जैसे वे देखते हैं, सुनते हैं, वैसा ही करने लगते हैं। चूँकि बुराइयों की चर्चाएँ और घटनाएँ बहुत होती रहती हैं, इसलिए लोगों का मन इसी ओर झुक पड़ता है। यदि विचारों का प्रवाह अच्छाई की दिशा में प्रवाहित हो रहा है, तो लोगों के मन उसकी ओर भी झुके बिना नहीं रह सकते। आज इसी प्रवाह-परिवर्तन की सबसे बड़ी आवश्यकता है।_

इससे यह विश्वास और सुदृढ़ हो जाता है कि गुरुदेव जो भी लिख या बोल गए वह हमारे आसपास कभी न कभी, किसी न किसी स्वरूप में जरूर दिख जाता है ।

जय गुरुदेव ।

08/07/2026

प्रज्ञा गीत सुनने वाले परिजन बताए यह धुन किस गीत की है ?

(दीवार लेखन के बाद DIYA टीम का संगीतमय सत्संग 🕉️ ,🎼)

06/07/2026

बोलती दीवारें : दीवार सद्वाक्य लेखन अभियान
ग्राम - आधारखेड़ा

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