प्रबुद्ध भारतIgnited India

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निजामुद्दीन औलिया पर दिल्ली का राजा जो मुसलमान था वह बहुत जलता था और अमीर खुसरो राजा के पास नौकरी करता था राजा लखनऊ में ...
27/01/2026

निजामुद्दीन औलिया पर दिल्ली का राजा जो मुसलमान था वह बहुत जलता था और अमीर खुसरो राजा के पास नौकरी करता था राजा लखनऊ में था निजामुद्दीन सूफी संत थे और राजा कट्टर वादी मुसलमान था अमीर खुसरो को आदेश आया के उनसे कहो दिल्ली छोड़ कर जाए निजामुद्दीन एक जगह मालिक एक जगह सतगुरु अमीर खुसरो निजामुद्दीन के पास गया मुंह सूजा हुआ था का क्या हुआ बेटा बोले बाबा आदेश आया है आपको दिल्ली छोड़नी है बोल बेटा क्या बड़ी बात है इसमें वह लखनऊ से निकला है दिल्ली के लिए राजा वह पहुंचेगी ही नहीं दिल्ली और कहते हैं लखनऊ से थोड़ा आगे आने पर रात हो गई और जैसे ही तंबू लगा रहे थे एक तंबू का खंबा राजा के ऊपर गिर गया और राजा मर गया यह है गुरु जनों की ताकत जो नहीं समझते वह मूर्ख है मैं सूफी कहानी बता रहा हूं मुस्लिम धर्म में 10% सूफी है हम तो 100% सतगुरु को मानते हैं कहां चली गई हमारी धरोवर साधु संत है शंकराचार्य है सिख धर्म के गुरुओं ने शहादत दी है आजादी के लिए राम-राम
C/p

जिन नेताओं ने शंकराचार्यों का अपमान किया, न केवल सत्ता से बाहर हुए, बल्कि बहुत बुरी गति को भी प्राप्त हुए!  #आदिशंकराचार...
20/01/2026

जिन नेताओं ने शंकराचार्यों का अपमान किया, न केवल सत्ता से बाहर हुए, बल्कि बहुत बुरी गति को भी प्राप्त हुए!

#आदिशंकराचार्य और राजा सुधन्वा के बीच वार्ता चल रही थी। राजा सुधन्वा को आदि शंकर ने चक्रवर्ती सम्राट बना दिया था। सभी बौद्ध आदि मत परास्त हो चुके थे। राजा सुधन्वा ने आदि शंकर से यह आशीर्वाद मांगा कि आपके बाद जो भी चारों मठों की गद्दी पर बैठे, वह इंद्र के समान छत्र, चंवर, सिंहासन धारण करे। आदि शंकराचार्य ने तथास्तु कहा। फिर उन्होंने कहा कि मेरे बाद के सभी चारों पीठाधीश्वर में मेरा ही स्वरूप जानों, उन्हें साक्षात् शंकर मानो! शंकराचार्य की यह अबाध परंपरा तभी से चली आ रही है। इसे 2500 वर्ष से ऊपर हो चुके हैं।

कुंभ, माघ मेला आदि में शंकराचार्य एवं अन्य अखाड़ों के महामंडलेश्वर किस तरह स्नान करेंगे, कैसे पालकी पर जाएंगे, यह सब आदि शंकराचार्य के समय से ही चला आ रहा है। इस लंबे इतिहास में पहली बार कल शंकराचार्य को बिना स्नान के लौटना पड़ा है!

स्वतंत्रता के बाद कल की घटना लगाकर सत्ता- प्रतिष्ठान द्वारा शंकराचार्यों के अपमान की चार घटनाएं हो चुकी हैं, और जिन्होंने यह अपमान किया है, उनकी सत्ता तो गई ही है, वह बेहद बुरी गति को भी प्राप्त हुए हैं!

१) पहली घटना May 1990 की है।‌ उस समय केंद्र में भाजपा समर्थित वी.पी.सिंह की सरकार थी और उप्र में मुलायम सिंह यादव की सरकार थी। रामजन्म भूमि मामले में हिंदुओं को मूर्ख बनाने और मुस्लिमों को खुश करने के लिए संघ की इकाई विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कांग्रेस से हाथ मिला लिया और जन्मभूमि स्थान से 192 मीटर दूर शिलान्यास कर झूठ फैला दिया कि जन्मभूमि पर शिलान्यास हो गया है। हिंदू मूर्ख बन गये!

ज्योतिष और द्वारका पीठ के तत्कालीन ब्रह्मलीन शंकराचार्य और वर्तमान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी के गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने इसका विरोध किया कि हिंदू समाज से यह धोखा ठीक नहीं है। उन्होंने वास्तविक रामजन्म भूमि पर 7 May 1990 को शिलान्यास करने की तिथि निकाली। इसके लिए वह 30 April 1990 को द्वारका से अयोध्या के लिए निकले। उधर भाजपा बेचैन थी कि यदि स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज ने सही जगह शिलान्यास कर दिया तो कांग्रेस के साथ विहिप की मिलीभगत की पोल खुल जाएगी और हिंदू नाराज हो जाएगा। दूसरी तरफ वी.पी.सिंह और मुलायम सिंह यादव मुस्लिम वोट को खुश करने के लिए स्वरूपानंद सरस्वती जी को रोकना चाहते थे। सबके अपने-अपने पोलिटिकल कारण थे।

जनकारी के अनुसार, अयोध्या से पहले ही स्वरूपानंद सरस्वती जी को गिरफ्तार करने के लिए भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने वी.पी.सिंह पर दबाव डाला और वी.पी.सिंह ने मुलायम सिंह पर दबाव डाला। मुलायम सिंह यादव की सरकार ने अयोध्या पहुंचने से पूर्व ही रात के समय आजमगढ़ में शंकराचार्य जी को गिरफ्तार कर लिया। मुलायम की पुलिस रात भर शंकराचार्य जी को जंगल में घुमाती रही, उन्हें दैनिक पूजा-संध्या भी नहीं करने दिया और सुबह चुनार गढ़ के किले में उन्हें बंद कर दिया। हालांकि मुलायम सिंह यादव को डर लग गया था, इसलिए उन्होंने चुनार गढ़ किला के उस हिस्से को पहले धुलवाया जहां शंकराचार्य जी को नजरबंद रखना था। पुलिस बल को आदेश दिया गया कि कोई जूता पहन कर उनके कमरे में नहीं जाएगा।

जनता को जब पता चला कि शंकराचार्य जी को गिरफ्तार किया गया है तो देश भर में आंदोलन होने लगे। इससे डर कर नौ दिन बाद 8 May 1990 को उनसे सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए मुलायम सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया। स्वरूपानंद सरस्वती जी अकेले शंकराचार्य हैं जो रामजन्म भूमि आंदोलन में जेल गये। इसका परिणाम देखिए:-

क) कुछ दिन बाद ही वी.पी.सिंह की सरकार चली गई। वी.पी.सिंह दोबारा कभी प्रधानमंत्री नहीं बने। उनकी मृत्यु बहुत हृदयविदारक हुई। उनकी किडनी फेल हो गई थी। वह गल-गल कर मरे। जब वह मरे तो अखबार के किसी पिछले पन्ने की खबर बनकर रह गये।

ख) मुलायम सिंह यादव:- इस घटना के कुछ समय बाद ही मुलायम सिंह यादव की सरकार चली गई। उम्र के आखिरी पड़ाव पर उनके बेटे ने उनसे पार्टी हथिया लिया। कहा जाता है कि उनके बेटे ने उनका वही हाल किया जो कभी शाहजहां का औरंगजेब ने किया था!

ग) लालकृष्ण आडवाणी:- इनका प्रधानमंत्री का सपना, सपना ही रह गया। जिन्ना की मजार पर मत्था टेक कर इनकी रही-सही इज्जत भी चली गई। यही नहीं, इनके शिष्य नरेंद्र मोदी ने इन्हें वनवास में भेज कर इनका पूरा पोलिटिकल करियर ही समाप्त कर दिया।

२) दूसरी घटना 11 नवंबर 2004 की है। कांची कामकोटि के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती जी को जयललिता की सरकार ने गिरफ्तार किया था। इसके दो साल बाद हुए चुनाव में जयललिता की सरकार चली गई। जयललिता की मृत्यु दिसंबर 2016 में भी बड़ी कष्टकर हुई थी। उसकी सहेली शशिकला तक से उसे धोखा मिला।

३) तीसरी घटना 23 सितंबर 2015 की है। उप्र में अखिलेश यादव की सरकार थी। उस वक्त अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी शंकराचार्य जी के शिष्य और प्रतिनिधि थे। गणेश विसर्जन मामले में वाराणसी में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। उसके बाद अखिलेश की सरकार चली गई और वह अभी तक सत्ता के लिए तरस रहे हैं। पिछले साल प्रयागराज कुंभ में अखिलेश ने हाथ जोड़ कर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी थी।

४) चौथी घटना 18 Jan 2026 को कल मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के साथ उप्र की योगी सरकार की पुलिस ने प्रयागराज में किया। इतिहास में पहली बार शंकराचार्य को माघी स्नान से रोका गया। उनके दंडी संन्यासी को बाल पकड़ कर जमीन पर घसीटा गया और शंकराचार्यों जी को सारी रात कड़कड़ाती ढंड में भूखे-प्यासे रखा गया।

अब देखना दिलचस्प होगा कि इस डबल इंजन शासन के प्रतानिधियों का कर्म आगे कैसे फलित होता है?
हर हर महादेव 🙏


#ज्योतिर्मठ #शंकराचार्य

हमारे चचा जनाब नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को अपना माँ जाया भाई मानते थे। टेलिफ़ोन पर नेहरु की हमेशा यही कोशिश होती थी ...
18/01/2026

हमारे चचा जनाब नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को अपना माँ जाया भाई मानते थे। टेलिफ़ोन पर नेहरु की हमेशा यही कोशिश होती थी कि वह ख़ुद अपने हाथ से मौलाना अबुल कलाम आज़ाद को फ़ोन मिलाएँ। एक दिन उन्होंने आपने अपने निजी सचिव एम. ओ. मथाई से कहा कि मौलाना साहब से फ़ोन पर बात कराइए। जब मौलाना ने फ़ोन लिया और नेहरु आए तो उनका पहला जुमला था, "जवाहर लाल क्या तुम्हारी उंगलियों में दर्द हो गया है कि तुम दूसरे से फ़ोन मिलवा रहे हो...???"

आप फ़ौरन मौलाना का आशय समझ गए और बोले आइंदा से ये ग़लती कभी नहीं होगी...!

बहुत कम लोगों को पता होगा मौलाना अबुल कलाम आजाद के परदादा बंगाल से 17 वी सदी में ऑटोमन एंपायर में जाकर बस गए थे। तब सऊदी अरब नहीं बना था। तुर्की सऊदी अरब सीरिया यानी मध्य पूर्व के बड़े भू-भाग पर ऑटोमन खलीफाओं का राज था। इनके पिता का नाम मोहम्मद खैरुद्दीन बिन अहमद अल हुसैनी था जो मक्का में एक मस्जिद में पेशे ईमाम थे। इनकी माँ शेखा आलिया बिन्त मोहम्मद सऊदी नस्ल की थी जो मदीना के प्रसिद्ध धर्मगुरु शेख मोहम्मद बिन ज़हीर अल वतरी की बेटी थी।

मौलाना अबुल कलाम पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु थे और इस्लाम पर कई किताब लिख चुके थे। यदि इदारे की बात की जाए तो मौलाना कट्टर देवबंदी अक़ीदे से आते थे और तबलीगी जमात को इस देश का भाग्यविधाता संगठन मानते थे। देश की आजादी के वक़्त वामपंथियों ने नेहरू से एक समझौता किया देश आप चलाओ सिर्फ शिक्षा हमें चलाने दो। उसके बाद वामपंथियों के दबाव में कट्टर इस्लामिक मौलाना अबुल कलाम को शिक्षा मंत्रालय दिया गया ताकि देश से हिंदुत्व का नामोनिशान मिटाया जा सके।

जिस कांग्रेस ने सऊदी नागरिक, मक्का में जन्मे और पेशे से इस्लामिक धर्मगुरु मौलाना अबुल कलाम आजाद उर्फ़ सैयद अबुल कलाम गुलाम मुहियुद्दीन अल अहमद को आजादी के बाद भारत का पहला शिक्षा मंत्री बनाया था उस कांग्रेस ने एक योगी के मुख्यमंत्री बनने पर अपनी छाती कूटी थी

एक झील में एक मछली अपने माता-पिता (पूर्ण व्यस्क मछली-मछला) के साथ रहती थी। उसके माता-पिता की सख्त हिदायत थी, उथले पानी म...
08/11/2025

एक झील में एक मछली अपने माता-पिता (पूर्ण व्यस्क मछली-मछला) के साथ रहती थी। उसके माता-पिता की सख्त हिदायत थी, उथले पानी में किनारे पर न जाने की।

कभी-कभार बहुत जरूरी होता तो माता-पिता की कड़ी सुरक्षा व निगरानी में किनारे तक उथले पानी में जाती और यथाशीघ्र पुनः गहरे पानी में लौट आती।

छोटी मछली को गहरे पानी में सुरक्षा तो थी किन्तु उसे सूर्योदय व सूर्यास्त के समय पानी पर बिखरी हुई लालिमा, झील के किनारे लगे बड़े बड़े पेड़ों पर बैठते और हवा में स्वच्छन्द उड़ते पक्षी बहुत लुभाते थे।

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय क्षितिज पर उगता/डूबता हुआ सूरज बहुत अच्छा लगता था, उसे लगता था कि वहाँ धरती और आसमान मिल कर एक हो जाते हैं और वो वहां तक तैर कर जा सकती है।
उसे भी कभी उड़ने का मौका मिलता तो वह उड़कर चाँद तारों के पार चली जाती, और तमाम सितारे लाकर अपनी झील में सजाती।

मछली ने बचपन छोड़कर यौवन की दहलीज़ पर कदम रखा ही था, अब इसे यौवन की उमंग कहिये चाहे हार्मोनल इफ़ेक्ट, माता-पिता की बन्दिशें उसे पैरों में पड़ी हुई बेड़ियाँ लगतीं थीं,
वो माँ-बाप की नजरों से छुप कर कभी-कभार किनारे पर चली जाती थी।

एक दिन वो किनारे पर सुरक्षित गहराई से झील के बाहर की दुनियाँ का अवलोकन कर रही थी कि उसे एक बगुले ने पुकारा
ये उसके लिए मित्रता का आमन्त्रण था...
युवा मछली ने उसका आमन्त्रण स्वीकार नहीं किया परन्तु एकदम मना भी नहीं किया।

किन्तु कुछ समय बाद सुरक्षित दूरी से बात और मुलाकात की शुरुवात हो गयी
धीरे धीरे ये मुलाकातें आए दिन की बात हो गयी, युवा मछली प्यार से बगुले को #बगदूल बोलने लगी।

फिर दोनो के बीच सच्ची मित्रता की बाते, आसमान की ऊंचाइयों मने सफलता की बुलन्दियों को छूने की बातें, सहयोग, सफलता, शान्तिपूर्ण सह-अस्तित्व, #गंगा_जमुनी_तहजीब बहाने और Symbol of freedom बनने की बातें

युवा मन पर ऐसे विचार जल्दी असर करते हैं, गहरा असर....
मछली पर भी असर पड़ा...
उसे लगता कि जैसे माता-पिता उसे रंग-बिरंगी दुनिया की तमाम ख़ुशियों से वंचित रखना चाहते हैं।

अब माता-पिता से दबी ज़ुबान से शिकायत की, #बगदुल की तरह उनके साथ आसमान में उड़ान भरने की बात की तो पिता ने डाँट कर चुप करा दिया।
फिर माँ ने प्यार से समझाया कि "बेटी ये दुनियाँ जो दूर से इतनी खूबसूरत और रंग-बिरंगी नज़र आती है
वास्तविकता में उतनी ही बुरी, क्रूर और स्वार्थी है।
ये जो सर से टखनों तक सफेद पंखों वाले #बगदूल हैं न इनका दिल उतना ही काला है।
इनकी भूरी या सुरमयी मासूमियत छलकाती आँखों के पीछे तमाम नफ़रतें छिपी हैं।
इनके इन बेरहम काले पंजों ने हमारी कई पीढ़ियों में तुम्हारी परदादी, परनानी के ज़िस्मों को खाल उतारकर नोचा है, दुश्मन हैं ये दुश्मन
ये सफेद लिबास पहने कोई नेकदिल महात्मा नहीं बल्कि केवल पंखों से ही सफेद हैं, काले दिल वाले शैतान हैं ये
बेटी, तुम अभी अपरिपक्व हो, इनकी कुटिलता को नहीं समझतीं, इनसे हमेशा दूर रहना, कभी बात मत करना, कभी भरोसा मत करना, हमेशा दूर रहना"

युवा मछली को ये सभी बाते अतिश्योक्ति लगी
लगा कि माँ उसे डरा रही है
बात आयी गयी हो गई।

मछली ने #बगदूल से मिलना नहीं बंद किया,
बगदूल उसे आये दिन अपने साथ आसमान में उड़ने का ऑफर देता
एक दिन मछली ने मन में कुछ सोचा विचारा और #बगदूल के साथ आसमान में परवाज भरने का निर्णय ले लिया
मन में डर तो था किन्तु उसे लगा कि जब वो लौटकर माँ-बाप समेत सबको आसमान की बुलंदियाँ छूकर आने की खबर सुनाएगी तो सब उसे सराहेंगे, उसकी मिसाल देंगे, उसकी सफलता पीढ़ियों से चली आ रही बगदुलो से बेपनाह नफ़रत को एक ही झटके में समाप्त कर देगी।

वो उस जगह तक जायेगी जहाँ पर धरती और आसमान मिलकर एक हो जाते हैं और वापस आकर वहाँ का आँखों देखा हाल अपनी मछली सहेलियों को बताएगी, वो साबित कर देगी कि माता-पिता की ये बात गलत है कि धरती और आसमान कभी भी एक नहीं हो सकते, #बगदूल भी नेकदिल और सच्चे दोस्त होते हैं। हम मछलियाँ उनसे बेवजह डरते हैं और नफरत करते हैं, मेरा वाला #बग़दुल अलग है, आदि आदि आदि..

माँ-बाप की तमाम नसीहतों को दरकिनार करके मछली एक शाम अपने मित्र #बगदूल के साथ आसमान में उड़ान भरने के लिए तैयार हो गई, अपनी कल्पनाओं में सुनहरे सपने बुनती हुई #बगदूल के पास पहुँच गयी, #बगदूल उसे पंजे में दबाकर उड़ चला

अभी पानी से निकले ज्यादा वक्त न बीता था कि मछली को घुटन महसूस हुई, उसे साँस लेने में परेशानी हो रही थी
उसने #बगदूल से वापस झील में पहुँचाने, पानी में जाने के लिए आग्रह किया और अपना दम घुटने की शिकायत की
किन्तु अब #बगदूल ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया

बगदूल उसे लेकर एक सूखी चट्टान पर पहुँचा,
वहाँ उसके जैसे तमाम #बगदूल थे, उनमें मछलियों को मिल बाँट कर शिकार करने और खाने की रीति रिवाज चली आ रही थी, #बगदूलो ने मिल कर मछली की खाल नोंचकर उतार दी,
वे उसे अपनी चोंचों में दबाकर उछाल रहे थे और उसके जिन्दा ज़िस्म से छोटी छोटी बोटियाँ नोंचकर खा रहे थे

मछली को अपनी मां के उपदेश और पिता की patriarchy बहुत याद आ रहे थे, उसे विश्वास हो गया था कि मां की नसीहतें सच थीं, धरती और आसमान कभी एक नहीं हो सकते... मछलियों की #बगदुलो से कभी मित्रता नहीं हो सकती।
कोई चाँद सितारे नहीं तोड़ सकता, लेकिन अफसोस अब कोई लाभ नहीं था।

मछली की चीखें और बचाव की पुकार सुनने वाला वहाँ कोई भी नहीं था, उसके आँसू और खून परस्पर मिलकर बह रहे थे, माँस विहीन हड्डियों व सूखी चट्टान पर खून के दागों से बन चुका था

मछली को निपटाने के बाद #बगदुलो ने अट्टहास किया, अपने पंख और चोंच व पंजों पर लगा खून साफ किया, पुनः ज़ल्द मिलने का वायदा किया उड़कर फिर झील के किनारे जा पहुँचे।

फिर वही मित्रता आदि की कहानियाँ खुले आसमान में उड़ने के रंगीन सपने देखती किसी और युवा मछली को सुनाने के लिए ...

 #कोख_जिहाद  :अफ्रीका के जंगल में दशकों भटकने के बाद एक बात बहुत अच्छी तरह समझ आई है कि "लकड़बग्घों" का गिरोह "हिरणियों"...
28/10/2025

#कोख_जिहाद :

अफ्रीका के जंगल में दशकों भटकने के बाद एक बात बहुत अच्छी तरह समझ आई है कि "लकड़बग्घों" का गिरोह "हिरणियों" के झुंड में असावधानी के एक मौके की प्रतीक्षा में... केवल एक ही "मौके" की तलाश में रहता है।

"लकड़बग्घे" जानते हैं कि सौ के झुंड में से कोई एक "हिरणी" कभी न कभी तो लापरवाही या गलती करेगी ही!

वहीं दूसरी तरफ नुकीले सींग होने के बावजूद भी हिरणों का झुंड सदैव इसी विचार में रहता है कि वो कैसे "बचे"?? कितनी तेजी से #भागे. वे हिंसक पशुओं की उपस्थिति और इरादों को जानने के बाद भी हमलावर होने के विषय में या (आत्मरक्षार्थ) "Pre emptive Strike" के विषय में सोचता भी नही हैं.

तकनीकी रूप से देखा जाए तो हजारों के झुंड में रहने वाले हिरणों, Wild Beast, जेब्रा, वनभैसों, इत्यादि की "सम्मिलित शक्ति" के आगे "एक - दो" लकड़बग्घा/भेड़िया/शेर की शक्ति कुछ भी नहीं होती है। अक्सर इन वाइल्ड बीस्ट या भैंसों के झुंड की भगदड़ से शेर भी आतंकित रहते हैं और दौड़ लगते झुंड के मार्ग से हट जाते हैं।

परंतु वास्तविकता ये है कि हिरण का झुंड कभी सम्मिलित या व्यक्तिगत रूप से हमलावर होता ही नही है।

वो "भागने" को ही सबसे बड़ी और कारगर रणनीति मानता है। हिरण और हिरणी अपने मेमनों को आजीवन बचने की ही सीख देते रहते है. कभी लड़ने या (आत्मरक्षार्थ) आक्रमण करने की बात भी नही सोचते..

यही कारण है कि एक अकेला लकड़बग्घा भी सैकड़ों के बीच से किसी एक #लापरवाह_हिरणी को खींच कर नृशंश तरीके से नोच खाता है और पूरा "मेमना समूह" अवाक होकर ताकता रह जाता है। और फिर थोड़ी देर में ही सिर घूमा कर #घास चरने में व्यस्त हो जाता है।

वो कहावत है ना - बकरी की अम्मा कब तक खैर मनाएगी? आज नहीं तो कल उसकी बकरी भी शिकार बनेगा ही।

हिरणों!! तुम भी कब तक बचने (भागने) की जुगत में ही रहोगे ??

क्या अब भी नही समझे कि #भेड़िया_गिरोह की पहचान और प्रवृत्ति ही "हिंसा" है। वो पिछले 1400 वर्षों में नही सुधरा और वो अगले 1000 वर्ष आगे भी स्वत: (अपने आप से) नही सुधरने वाला!!

सन 2023 में संसद में चर्चा के दौरान गृह राज्यमंत्री ने NCRB के आंकड़े पेश किए। सन 2019 से 2021 के बीच भारत में 13 लाख लड़कियां और महिलाएं #लापता हो गई। इनमें से अढ़ाई लाख 18 साल से कम आयु की हैं।

मतलब प्रतिवर्ष #चार_लाख हिरणियां गायब कर दी जा रही हैं और गधों का झुंड "घास चरने" में व्यस्त है ! किसी को फिकर ही नहीं है!!

प्रतिदिन 1000 स्त्रियां लापता !!!! कहीं कोई चर्चा होते देखते हैं आप इस विषय पर? किसी पार्टी या #संगठन में "हिरणियों की सुरक्षा" को लेकर कोई विमर्श खड़ा करते या कोई ठोस रणनीति बनाते देखा आपने? सब #मुफ्तखोरी कराने, तुष्टिकरण करने और हिरणों को जातियों में लड़ाने में व्यस्त हैं।

#समाधान :

सबसे पहले अपनी हिरणियों में #शत्रुबोध जगाइए, उन्हें सचेत करिए। साथ ही शिकारियों का प्रतिकार / ब.हिष्कार कीजिए. जिस दिन लकड़बग्घा/भेड़िया समूह में मनुष्यों के द्वारा #प्रतिकार की "दहशत" पैदा हो गई; उस दिन से भेडिये मनुष्यों की बस्ती छोड़कर भाग जायेंगे या #कुत्ता बनकर दुम हिलाने लगेंगे.

सभ्य समाज में अपराधी समूह के भीतर #प्रतिहिंसा का डर पैदा नहीं कर पाना "मेरी और आपकी" व्यक्तिगत "नपुंसकता" है।

और जबतक "सनातनी" लोग #गर्भ_जिहाद में फंस रही अपनी पड़ोसी की कन्याओं के टुकड़े होने की विवेचना में इसके अतिरिक्त कोई भी अन्य (कारण) "बहाना" बकबका रहे हैं, वो "समस्या" का हिस्सा है समाधान का नही !!

आप समाधान पर कार्य नहीं करेंगे तो कभी "कन्हैयालाल" के और कभी आपके "रिंकू शर्मा" के तो कभी निकिता तोमर के तो कभी आपकी #श्रद्धा के टुकड़े होते रहेंगे।

सनद रहे :
अमरीक्का ने "पर्ल हार्बर" पर हमले का प्रतिउत्तर हिरोशिमा और नागासाकी कर के दिया था.

"नौ ग्यारह" का #प्रतिउत्तर अफगानिस्तान से ले कर सीरिया के बीच लगभग सभी देशों में पिछले बीस वर्षों में लाखों टन "फूल" बरसा कर अपनी दहशत कायम रखी और न सिर्फ स्वयं को सुरक्षित रखा, अपितु पिछले 80 सालों से सुपर पावर होने का सुख लूट रहा है।

सारांश :
चाहे आप इसे #नैतिक समझो या अनैतिक; कलयुग में "जीत" का एक ही फॉर्मूला है - #जिसकी_लाठी_उसकी_भैंस

प्रतिहिंसा का #डर ही शिकारी भेड़ियों की हिंसा पर लगाम लगा सकता है।

जय श्रीराम 🚩
MYogiAdityanath
Narendra Modi

आगा खां पैलेस... यही वो जेल है जहाँ कथित 'मोहन दास करमचंद गांधी को दो वर्ष तक घोर यातनाएं दी गई थीं।सजा इतनी कठोर थी कि ...
24/10/2025

आगा खां पैलेस... यही वो जेल है जहाँ कथित 'मोहन दास करमचंद गांधी को दो वर्ष तक घोर यातनाएं दी गई थीं।

सजा इतनी कठोर थी कि गांधी को स्नान करने के लिए 10×10 फिट के संगमरमर लगे बाथरूम में नहाना पड़ता था।

सजा इतनी कठोर थी कि बापू को 8×8 फिट के नर्म, मुलायम मखमली बिस्तर पे सोने के लिए मजबूर किया जाता था।

सजा इतनी कठोर थी कि 20 एकड़ में फैले आगा खां पैलेस की हरी-हरी मुलायम घास में घूमने के लिए मजबूर किया जाता था।

सजा इतनी कठोर थी कि 12×12 फिट के स्टडी रूम में आलीशान टेबल और कुर्सी पे बेहतरीन इंग्लैंड के कागज में लेखन के लिए मजबूर किया गया।

और हाँ, सजा इतनी कठोर थी कि बापू की पत्नी भी साथ में रहती थी।

सजा इतनी कठोर थी कि आने-जाने के लिए गांडी को मर्सडीज कार में बैठने को मजबूर किया जाता था।

सजा इतनी कठोर थी कि अंग्रेज अफसरों के साथ ब्लैक कॉफी पीनी पड़ती थी।

और उधर वीर सावरकर को इतनी आसान सजा मिली थी... हाथ-पाँव लोहे की जंजीरों से जकड़े थे और दो जन्म की कालापानी की सजा और उसमें भी रोज कोल्हू से तेल निकालना पड़ता था।

गांधी देश के महात्मा और बापू बन गए और वीर सावरकर जी अंग्रेजों से माफी माँगने वाला माफी वीर !!

जलती 💥✍️💥 से मोहनदास करमचंद गांधी की कथित सेक्स लाइफ़ पर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है. लंदन के प्रतिष्ठित अख़बार “द टाइम...
23/10/2025

जलती 💥✍️💥 से
मोहनदास करमचंद गांधी की कथित सेक्स लाइफ़ पर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है. लंदन के प्रतिष्ठित अख़बार “द टाइम्स” के मुताबिक गांधी को कभी भगवान की तरह पूजने वाली 82 वर्षीया गांधीवादी इतिहासकार कुसुम वदगामा ने कहा है कि गांधी को सेक्स की बुरी लत थी,
वह आश्रम की कई महिलाओं के साथ निर्वस्त्र सोते थे, वह इतने ज़्यादा कामुक थे कि ब्रम्हचर्य के प्रयोग और संयम परखने के बहाने चाचा अमृतलाल तुलसीदास गांधी की पोती और जयसुखलाल की बेटी मनुबेन गांधी के साथ सोने लगे थे।
ये आरोप बेहद सनसनीख़ेज़ हैं क्योंकि किशोरावस्था में कुसुम भी गांधी की अनुयायी रही हैं, कुसुम, दरअसल, लंदन में पार्लियामेंट स्क्वॉयर पर गांधी की प्रतिमा लगाने का विरोध कर रही हैं। बहरहाल, दुनिया भर में कुसुम के इंटरव्यू छप रहे हैं।
वैसे तो महात्मा गांधी की सेक्स लाइफ़ पर अब तक अनेक किताबें लिखी जा चुकी हैं। जो ख़ासी चर्चित भी हुई हैं।
मशहूर ब्रिटिश इतिहासकार जेड ऐडम्स ने पंद्रह साल के गहन अध्ययन और शोध के बाद 2010 में “गांधी नैकेड ऐंबिशन” लिखकर सनसनी फैला दी थी. किताब में गांधी को असामान्य सेक्स,बकरी से सेक्स बिहैवियर वाला अर्द्ध-दमित सेक्स-मैनियॉक कहा गया है।
किताब राष्ट्रपिता के जीवन में आई लड़कियों के साथ उनके आत्मीय और मधुर रिश्तों पर ख़ास प्रकाश डालती है। मसलन, गांधी नग्न होकर लड़कियों और महिलाओं के साथ सोते थे और नग्न स्नान भी करते थे।
देश के सबसे प्रतिष्ठित लाइब्रेरियन गिरिजा कुमार ने गहन अध्ययन और गांधी से जुड़े दस्तावेज़ों के रिसर्च के बाद 2006 में “ब्रम्हचर्य गांधी ऐंड हिज़ वीमेन असोसिएट्स” में डेढ़ दर्जन महिलाओं का ब्यौरा दिया है।
जो ब्रम्हचर्य में सहयोगी थीं और गांधी के साथ निर्वस्त्र सोती-नहाती और उन्हें मसाज़ करती थीं। इनमें मनु, आभा गांधी, आभा की बहन बीना पटेल, सुशीला नायर, प्रभावती (जयप्रकाश नारायण की पत्नी), राजकुमारी अमृतकौर, बीवी अमुतुसलाम, लीलावती आसर, प्रेमाबहन, मिली ग्राहम पोलक, कंचन शाह, रेहाना तैयबजी शामिल हैं। प्रभावती ने तो आश्रम में रहने के लिए पति जेपी को ही छोड़ दिया था। इससे जेपी का गांधी से ख़ासा विवाद हो गया था।
तक़रीबन दो दशक तक महात्मा गांधी के व्यक्तिगत सहयोगी रहे निर्मल कुमार बोस ने अपनी बेहद चर्चित किताब “माई डेज़ विद गांधी” में गांधी का अपना संयम परखने के लिए आश्रम की महिलाओं के साथ निर्वस्त्र होकर सोने और मसाज़ करवाने का ज़िक्र किया है। निर्मल बोस ने नोआखली की एक ख़ास घटना का उल्लेख करते हुए लिखा है।
“एक दिन सुबह-सुबह जब मैं गांधी के शयन कक्ष में पहुंचा तो देख रहा हूं, सुशीला नायर रो रही हैं और महात्मा दीवार में अपना सिर पटक रहे हैं।” उसके बाद बोस गांधी के ब्रम्हचर्य के प्रयोग का खुला विरोध करने लगे. जब गांधी ने उनकी बात नहीं मानी तो बोस ने अपने आप को उनसे अलग कर लिया।
ऐडम्स का दावा है कि लंदन में क़ानून पढ़े गांधी की इमैज ऐसा नेता की थी जो सहजता से महिला अनुयायियों को वशीभूत कर लेता था। आमतौर पर लोगों के लिए ऐसा आचरण असहज हो सकता है पर गांधी के लिए सामान्य था।
आश्रमों में इतना कठोर अनुशासन था कि गांधी की इमैज 20 वीं सदी के धर्मवादी नेता जैम्स वॉरेन जोन्स और डेविड कोरेश जैसी बन गई जो अपनी सम्मोहक सेक्स-अपील से अनुयायियों को वश में कर लेते थे। ब्रिटिश हिस्टोरियन के मुताबिक गांधी सेक्स के बारे लिखना या बातें करना बेहद पसंद करते थे।
इतिहास के तमाम अन्य उच्चाकांक्षी पुरुषों की तरह गांधी कामुक भी थे और अपनी इच्छा दमित करने के लिए ही कठोर परिश्रम का अनोखा तरीक़ा अपनाया। ऐडम्स के मुताबिक जब बंगाल के नोआखली में दंगे हो रहे थे तक गांधी ने मनु को बुलाया और कहा “अगर तुम मेरे साथ नहीं होती तो मुस्लिम चरमपंथी हमारा क़त्ल कर देते।
आओ आज से हम दोनों निर्वस्त्र होकर एक दूसरे के साथ सोएं और अपने शुद्ध होने और ब्रह्मचर्य का परीक्षण करें।”
किताब में महाराष्ट्र के पंचगनी में ब्रह्मचर्य के प्रयोग का भी वर्णन है, जहां गांधी के साथ सुशीला नायर नहाती और सोती थीं।
ऐडम्स के मुताबिक गांधी ने ख़ुद लिखा है, “नहाते समय जब सुशीला मेरे सामने निर्वस्त्र होती है तो मेरी आंखें कसकर बंद हो जाती हैं। मुझे कुछ भी नज़र नहीं आता।
मुझे बस केवल साबुन लगाने की आहट सुनाई देती है। मुझे कतई पता नहीं चलता कि कब वह पूरी तरह से नग्न हो गई है और कब वह सिर्फ़ अंतःवस्त्र पहनी होती है।
दरअसल, जब पंचगनी में गांधी के महिलाओं के साथ नंगे सोने की बात फैलने लगी तो नथुराम गोड्से के नेतृत्व में वहां विरोध प्रदर्शन होने लगा। इससे गांधी को प्रयोग बंद कर वहां से बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ा। बाद में गांधी हत्याकांड की सुनवाई के दौरान गोड्से के विरोध प्रदर्शन को गांधी की हत्या की कई कोशिशों में से एक माना गया।
ऐडम्स का दावा है कि गांधी के साथ सोने वाली सुशीला, मनु, आभा और अन्य महिलाएं गांधी के साथ शारीरिक संबंधों के बारे हमेशा गोल-मटोल और अस्पष्ट बाते करती रहीं।
उनसे जब भी पूछा गया तब केवल यही कहा कि वह सब ब्रम्हचर्य के प्रयोग के सिद्धांतों का अभिन्न अंग था। गांधी की हत्या के बाद लंबे समय तक सेक्स को लेकर उनके प्रयोगों पर भी लीपापोती की जाती रही। उन्हें महिमामंडित करने और राष्ट्रपिता बनाने के लिए उन दस्तावेजों, तथ्यों और सबूतों को नष्ट कर दिया गया, जिनसे साबित किया जा सकता था कि संत गांधी, दरअसल, सेक्स-मैनियॉक थे। कांग्रेस भी स्वार्थों के लिए अब तक गांधी के सेक्स-एक्सपेरिमेंट से जुड़े सच छुपाती रही है।
गांधी की हत्या के बाद मनु को मुंह बंद रखने की सख़्त हिदायत दी गई। उसे गुजरात में एक बेहद रिमोट इलाक़े में भेज दिया गया। सुशीला भी इस मसले पर हमेशा चुप्पी साधे रही। सबसे दुखद बात यह है कि गांधी के ब्रम्हचर्य के प्रयोग में शामिल क़रीब-क़रीब सभी महिलाओं का वैवाहिक जीवन नष्ट हो गया...

प्राचीन भारत में ताँबा के ++++ वनस्पति के रस में सात बार डुबो कर और सात बार गर्म कर रीठा के जल से सफाई कर सोना बनाया जात...
23/10/2025

प्राचीन भारत में ताँबा के ++++ वनस्पति के रस में सात बार डुबो कर और सात बार गर्म कर रीठा के जल से सफाई कर सोना बनाया जाता था। सुनार ताँबा का आभूषण बनाकर उसे सोना में बदल देते थे। अनेक छोटे छोटे मोती को जोड़कर बड़े आकार की मोती बनाने की विद्या उनके पास थी। शंख के चूर्ण से, सीपी के चूर्ण से ऐसे मोती बना लेते थे कि पहचान करने वाले भी धोखा खा जाए। यह विद्या कहाँ गयी?
#लुहार के पास ऐसी कला थी कि उसका बनाया हुआ लोहे का हथियार और दूसरे घरेलू औजार में जंग नहीं लगता था। लुहार ऐसे बाण बनाते थे, जो लक्ष्य पर जाते ही मिसाइल की तरह फट जाते थे, उनमें बारूद का प्रयोग होता था। गंधक, सुहागा, अभ्रक, नोनी मिट्टी इन सबसे वे अपनी #फैक्टरी में बारूद बनाते थे।

#धुनियाँ रूई धुनने के लिए सेमल का बीज इकट्टा करते थे। ऊँचे-ऊँचे पेड़ से एक साथ सेमल के फल को गिराने के लिए पेड़ की जड़ में ++++ का लेप करते थे और चुटकियों में यह काम हो जाता था।

#ठठेरे #अष्टद्रव्य के बर्तन बनाते थे, #त्रिलौह ढालने की विद्या उनके पास थी।

#कुम्हार के पास ऐसी कला थी कि मिट्टी के बर्तन में कभी नोनी नहीं लगती थी और वह लोहे के जैसा मजबूत हो जाता था। उत्तरी भारत का कृष्ण-लेपित मृद्भाण्ड NBPP. की तकनीक कहाँ गयी, किसी ने उसे भूल जाने की जिम्मेदारी ली है?
#शिल्पी एक प्रहर के लिए पत्थर के चट्टान को गीली मिट्टी की तरह कोमल बना देने के लिए वनस्पति से लेपित करने की तकनीक जानते थे। तभी तो इतनी महीन कलाकारी कर चुके हैं।

सबके पास अपनी-अपनी #विद्या थी, अपना-अपना #वेद था, वे उन वेदों को भूल चुके हैं, बरबाद कर चुके हैं। इन बातों पर सोचना सबसे जरूरी है। प्राचीन भारत की समृद्धि को इन जातियों ने बरबाद की है और अब कहते हैं कि उन्हें पढ़ने नहीं दिया गया?

अपनी पढ़ाई भूल कर, अपना वेद भूलकर अब सारा ठीकरा ब्राह्मणों के सर फोड़ रह हैं!!
ब्राह्मणों ने आज तक सबकुछ बचा कर रखा है!!

✍️ पं भवनाथ झा जी

 #वानो:  #प्रथम_लाभार्थीजब भी कोई ब्लाइंड मर्डर होता है तो पुलिस सबसे पहले संदेह उनपर करती है जिन्हें उस मर्डर से प्रत्य...
22/10/2025

#वानो: #प्रथम_लाभार्थी

जब भी कोई ब्लाइंड मर्डर होता है तो पुलिस सबसे पहले संदेह उनपर करती है जिन्हें उस मर्डर से प्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुँचता है और 99% केसों में वह सही ही निकलता है।

भारत में एक राजनैतिक हत्या ऐसी भी हुई जिसके तार कथित रूप से उस हत्या के प्रत्यक्ष लाभार्थी के साथ-साथ अप्रत्यक्ष लाभार्थी से भी स्पष्ट जुड़े हुए थे लेकिन संदेहास्पद लाभार्थी स्वयं ही सत्ता नियंत्रक थे अतः उस हत्या के सीक्रेट सबके सामने खुले होते हुए भी उन आरोपियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जा सका।

यह हत्या (?) थी भारत के महान प्रधानमंत्रियों में से एक लाल बहादुर शास्त्री की जिसके प्रत्यक्ष राजनैतिक लाभार्थी भारत में सत्ता शीर्ष पर थे और अप्रत्यक्ष लाभार्थी भारत से बाहर सत्ता के एक ध्रुव।

कहानी शुरू हुई थी भारत की आजादी के बाद जब दोनों महाशक्तियां अमेरिका व रूस, भारत को अपने पाले में लेने के लिये उत्सुक थीं।

पटेल का रुख पूर्णतः वामपंथ विरोधी और पूँजीवाद समर्थक था लेकिन लेहरू?

लेहरू हमेशा की तरह 'शिखंडित' थे।

दिल धड़कता था ब्रिटेन व अमेरिका के लिये क्योंकि एडविना ब्रिटिश थी और जैक्लीन कैनेडी अमेरिकन जबकि तबियत थी आरामपसंद समाजवादी और इसीलिये स्टालिन ने लेहरू को 'सम्राज्यवाद का एजेंट' कहा और कैनेडी ने 'परस्त्री अनुरक्त'। दोनों में से किसी से संबंध स्थाई तौर पर नहीं सुधरे।

बाद में राधाकृष्णन के प्रयासों से नेहरू व रूस से संबंध सुधरे लेकिन फिर आये शास्त्री जी।

यह वह दौर था जब अफगानिस्तान पर कब्जा करने की बरसों पुरानी रूसी नीति का प्रारम्भ हो चुका था जिसके कारण भारत की अपेक्षा भूराजनैतिक दृष्टि से पाकिस्तान का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया था क्योंकि दोनों शक्तियां जानती थीं कि अफगानिस्तान पर उसी का नियंत्रण होगा जिसका नियंत्रण पाकिस्तान पर होगा।

ऐसे समय शास्त्रीजी सत्ता में आये और पाकिस्तान को खुश करने के लिये अमेरिका ने भारत पर कई प्रतिबंध लगाये।

उधर सोवियत संघ ने पाकिस्तान को खुश करने और भारत पर नियंत्रण रखने के लिये एक घिनौनी चाल चली जो प्रकट हुई ताशकंद में।

न केवल शास्त्रीजी पर दवाब डालकर भारतीय हितों के विपरीत समझौते पर हस्ताक्षर करवाये गये बल्कि लौटने पर समझौते के रद्द होने के भय में शास्त्रीजी की ह्रदयाघात से मृत्यु दिखाई गई।

अब सवाल उठता है कि लाल बहादुर शास्त्री की संदेहास्पद मृत्यु/हत्या का प्रत्यक्ष लाभार्थी कौन था?

भारत में उनके उत्तराधिकारी के रूप में इंदिरा को चुना ही जाना था और वह चुनी गईं
जिसके बाद शास्त्री जी विषयक सारी जांचे ठन्डे बस्ते में डाल दी गई।

तो अब आपको समझ आया कि शास्त्री जी की मृत्यु का प्रत्यक्ष लाभार्थी कौन था?

अगर नहीं तो नीचे चित्र में लालबहादुर शास्त्री के शव का एयरपोर्ट पर इन्तजार करते इंदिरा गाँधी व उनके ख़ासम खास लोगों के चेहरों पर ऐसे राष्ट्रीय शोक के मौके पर भी आ रही मुस्कुराहटें देख लीजिये जो आज भी British Pathe अर्काईव में मौजूद है।

अब प्रश्न उठता है कि प्रमाण क्या है?

वस्तुतः ऐसे गहन षड़यंन्त्रों के पीछे प्रमाण मिलना लगभग असम्भव होता है लेकिन फिर भी एक प्रमाण आया केजीबी से।

2005 में केजीबी के पूर्व एजेंट वैसिली मित्रोखिन ने अपनी पुस्तक "The Mitrokhin Archive II" में बताया कि किस तरह इंदिरा गांधी और उनकी कैबिनेट रूसी इशारों पर नाचती थी।

यह किताब 2005 में छपी थी और इसमें मित्रोखिन ने ब्रिटेन में शरण लेने के बाद केजीबी के दस्तावेजों के आधार पर यह खुलासा किया कि इंदिरा गांधी को केजीबी का एजेंट डिक्लेयर किया गया था, जिसे कोडनाम दिया गया था --'वानो'

किताब में बताया गया कि केजीबी ने इंदिरा गांधी और उनके कैबिनेट के कई सदस्यों को गुप्त रूप से भारी रकम प्रदान की थी, जिससे वे केजीबी के नियंत्रण में थे।

इस किताब को कैंब्रिज के इतिहासकार क्रिस्टोफर एंड्रयू के साथ मिलकर लिखा गया था। वैसिली मित्रोखिन ने केजीबी के कई अन्दरूनी दस्तावेजों को उजागर किया, जिसमें भारत में केजीबी की पैठ और संचालन का भी विस्तार से उल्लेख था।

न कोई जांच हुई और न अदालत में सुनवाई हुई और सोनिया गाँधी की पपेट सरकार ने मामला रिजेक्ट कर दिया।

कांग्रेसियों के चरित्र को एक टिप्पणी में ठीक ही आँका गया था, "हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि हरेक (कांग्रेसी) बिकने को तैयार बैठा था।"

पर मुझे ऐसा लगता है कि-

"बिका हुआ आदमी अंततः कांग्रेसी ही होता है।"
Courtesy

✍️ देवेन्द्र सिकरवार

*इन चरणन पे शीश धरे , जगत को  पालनहार ,,,,*  *उन चरणन से श्रीराधे , कर मेरो भी उद्धार ।*  *जिन चरणन की चाह में , भटके बृ...
22/10/2025

*इन चरणन पे शीश धरे , जगत को पालनहार ,,,,*

*उन चरणन से श्रीराधे , कर मेरो भी उद्धार ।*

*जिन चरणन की चाह में , भटके बृजराज कुमार ,,*

*उन चरणन पे लाडली , मैं तो जाऊँ बलिहार* ।।

*हे लाडली कृपा करो ,,,,,* *राधे राधे 🙌🌸🙌🌸*

🌹🙏🌹
🌼 श्री_राधागोविन्द शरणं ममः 🌼
🌺🙏श्रीकृष्णःशरणम_ममः🙏🌺
🌿🌺🙏!! हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे !!
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे 🙏🌺🌿
🌹🌿🙏 जय श्री राधे कृष्णा🙏🌿🌹
🙏सादर राधे राधे आदरणीय श्री🙏
*सभी को गोवर्धनपूजा की हार्दिक बधाई एवं मंगलमय शुभकामनाएं**इन चरणन पे शीश धरे , जगत को पालनहार ,,,,*

*उन चरणन से श्रीराधे , कर मेरो भी उद्धार ।*

*जिन चरणन की चाह में , भटके बृजराज कुमार ,,*

*उन चरणन पे लाडली , मैं तो जाऊँ बलिहार* ।।

*हे लाडली कृपा करो ,,,,,* *राधे राधे 🙌🌸🙌🌸*गोवर्धन धराधार गोकुल त्राणकारक।
विष्णुबाहू कृतोच्छ्राय गवां कोटिप्रभो भव ।।

गोवर्धन पूजा और अन्नकूट महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं, भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से आपके जीवन में सुख, समृद्धि और आनंद की वर्षा हो।🙏

#जयश्रीकृष्ण

🌹🙏🌹
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धन दौलत माल असबाब उसे कुछ नहीं चाहिए था वो  #नमूना केवल 'औरत की  #शर्मगाह' के लिए जिंदा था उसने 'औरत की  #शर्मगाह' के लि...
18/10/2025

धन दौलत माल असबाब उसे कुछ नहीं चाहिए था वो #नमूना केवल 'औरत की #शर्मगाह' के लिए जिंदा था

उसने 'औरत की #शर्मगाह' के लिए लूट करी उसने 'औरत की #शर्मगाह' ही अपने #गुर्गों में तकसीम किया और 'औरत की #शर्मगाह' के लिए ही नए गुर्गे जोड़ सका मरने के बाद भी जन्नत में अपने गुर्गों को 'औरत की #शर्मगाह' का ही लालच दिया

उस इंसान और किसी भी तरह के कोई और #इमोशंस नहीं थे उसका #दिमाग केवल और केवल 'औरत की #शर्मगाह' ड्रिवेन था

बैठते उठते सोते जागते उसके #तसव्वुर में केवल और केवल chooत ही था आप गौर करिए वो अपनी लूटों में धन दौलत सोना चांदी की लूट तो साइड बिजनेस के तौर पर करता था उसकी लूटों का पहला #एजेंडा ही 'औरत की #शर्मगाह' होता था धन दौलत और सोना तो वो और ज्यादा 'औरत की #शर्मगाह' की लूट करने के लिए #गुर्गे और हथियार खरीदने के लिए करता था

लोग कहते हैं शराब का नशा इंसान को बिगड़ देता है नहीं भाई जान इस #हैवान ने ये प्रूव किया है 'औरत की #शर्मगाह' के नशे के सामने दुनियां के सारे नशे बेकार हैं

एक ही दिन में बूढ़ी बेकार औरतों और बच्चों सहित 900 बेगुनाहों की गरदने तसल्ली से बैठ कर अपने सामने कटवाने के बाद 17 साल की 'औरत की #शर्मगाह' पर चढ़ाई करता है वो भी बिना #शराब पिए, बताओ ज्यादा #नशा किस चीज में हुआ?

उसने यही नशा अपनी उम्मत को भी दिया भारत पर हमले करने वाले भारत से क्या #लूट कर ले गए थे सोना चांदी के अलावा लाखों औरतों को #गुलाम बना कर ले गए थे


खिलजी के डर से अगर हजारों पद्मावतियों ने #जौहर कर लिया था तो इसके पीछे भी नशा केवल और केवल उसकी 'औरत की #शर्मगाह' की चाहत का ही है

इतिहास भरा पड़ा है मैं और दुनियां के तमाम गुर्गे, उम्मत की 'औरत की #शर्मगाह' पॉलिटिक्स का ही नतीजा रहे हैं आज के दौर में ज्यादातर #ह्यूमन #ट्रैफिकिंग (इंसानी तस्करी) भी उसके खास बंदों के दिमाग में 1400 बरस से घुसी हुई एक बात है

'औरत की #शर्मगाह' और चमड़ी सबसे #महंगी बिकती है
मैने खुल कर #औरत की #शर्मगाह' जैसे घटिया लफ्जों का इस्तेमाल किया है मैं अकीदत की पट्टी के बिना जितना उस गलीच इंसान के बारे में पढ़ता जा रहा हूं मेरे लफ्ज़ और उनके असआर और भी तल्ख और तल्ख होते जा रहे हैं

बड़ी मुश्किल में भरे मन से नीचे अपना नाम लिख रहा हूं
☪भारत

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