Gangotri Swasthya Sewa Sansthan

Gangotri Swasthya Sewa Sansthan In India nearly about 74% farmers have onlPeople across faiths & religion often misguide others, that cow protection should not be done. I am providing som

13/08/2026
"आयुर्वेद का वरदान है सहजन, सेहतमंद रहने का असली राज़ है सहजन।    ""दवाइयों पर खर्च कम करें, अपनी डाइट में प्रकृति का सु...
12/08/2026

"आयुर्वेद का वरदान है सहजन, सेहतमंद रहने का असली राज़ है सहजन। "

"दवाइयों पर खर्च कम करें, अपनी डाइट में प्रकृति का सुपरफूड 'सहजन' शामिल करें! 🌿💚"

"विटामिन, प्रोटीन और मिनरल्स का एक ही खजाना—सहजन है सेहत के लिए सबसे पुराना और पक्का ठिकाना।"

"प्रकृति ने हमें हर बीमारी का इलाज दिया है, बस देर है सहजन जैसे सुपरफूड्स को पहचानने की। "

शायराना और लाइफस्टाइल (Short & Catchy)

"सुपरफूड्स की रेस में जो सबसे आगे खड़ा है, वही हमारा देसी 'सहजन' है! 🥦✨"

"जो रोज़ सहजन की पत्तियां या फली खाएगा, डॉक्टर से हमेशा दूरी बनाएगा! 🌿💪"

"देसी खाओ, तंदरुस्त रहो... सहजन को अपनी थाली का हिस्सा बनाओ।"

शॉर्ट मोटिवेशनल / पॉजिटिव वाइब्स

"प्रकृति के करीब लौटिए, सहजन को अपनी ज़िंदगी में जोड़िए। अच्छी सेहत ही असली धन है! 💚"

"जब प्रकृति में ही छुपा है हर बीमारी का समाधान, तो सहजन से क्यों न करें अपनी सेहत का कल्याण?

पिप्पली (लॉन्ग पेपर) आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी है। आकार में छोटी लेकिन गुणों में काफी प्रभावशाली मानी जाती है।...
30/04/2026

पिप्पली (लॉन्ग पेपर) आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण जड़ी-बूटी है। आकार में छोटी लेकिन गुणों में काफी प्रभावशाली मानी जाती है। प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में इसका उल्लेख मिलता है। इसकी तासीर गरम होती है, इसलिए इसे खासकर कफ और सर्दी से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है।

✅ पिप्पली कहाँ मिलती है?

पिप्पली एक बेल के रूप में उगने वाला पौधा है जो छायादार और नम वातावरण में अच्छी तरह बढ़ता है। भारत में इसकी खेती मेघालय के चेरापूंजी क्षेत्र में अधिक होती है। इसके अलावा असम, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और नेपाल में भी यह पाई जाती है। इसका स्वाद तीखा होता है और इसका फल छोटा तथा दानेदार होता है।

✅ पिप्पली के प्रमुख फायदे

1️⃣ इम्यूनिटी को सपोर्ट करे
पिप्पली में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं।

2️⃣ सांस की समस्याओं में सहायक
आयुर्वेद के अनुसार यह कफ कम करने में मदद कर सकती है और खांसी, जुकाम व ब्रोंकाइटिस में उपयोगी मानी जाती है।

3️⃣ पाचन को बेहतर बनाए
पिप्पली पाचन क्रिया को सक्रिय करने में मदद करती है और गैस, अपच व पेट फूलने जैसी समस्याओं में लाभकारी हो सकती है।

4️⃣ सूजन कम करने में सहायक
इसमें सूजन कम करने वाले गुण होते हैं, इसलिए इसे जोड़ों के दर्द या गठिया में सहायक माना जाता है।

5️⃣ ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद
कुछ शोधों के अनुसार पिप्पली शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

✅ पिप्पली का उपयोग कैसे करें?

● चूर्ण – शहद या गुनगुने पानी के साथ लिया जा सकता है।
● काढ़ा – तुलसी, अदरक और दालचीनी के साथ उबालकर पी सकते हैं।
● आयुर्वेदिक दवाएं – कई औषधियों में इसका उपयोग किया जाता है।

⚠️ सावधानी

पिप्पली की तासीर गर्म होती है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें। गर्भवती महिलाओं या किसी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।

#पिप्पली

SBTC Plus Juice (जिसे अक्सर SBTC Juice कहा जाता है) एक प्रीमियम हर्बल हेल्थ ड्रिंक है। इसका नाम इसके चार मुख्य तत्वों के...
30/04/2026

SBTC Plus Juice (जिसे अक्सर SBTC Juice कहा जाता है) एक प्रीमियम हर्बल हेल्थ ड्रिंक है। इसका नाम इसके चार मुख्य तत्वों के पहले अक्षरों से बना है: S (Sea Buckthorn), B (Berries/Sea Buckthorn), T (Turmeric/Curcumin), और C (Curcumin/Combination of Giloy & Ashwagandha)।
सीबकथॉर्न (Sea Buckthorn): ओमेगा 3, 6, 7, 9 और विटामिन C का भरपूर
ये सभी तत्व—अश्वगंधा, गिलोय, करक्यूमिन, शतावरी, बुरांश और खुबानी—मिले हुए हैं, तो यह केवल एक जूस नहीं बल्कि एक "संपूर्ण टॉनिक" (Complete Health Restorative) बन जाता है।

इन सात महारथियों का मेल आपके शरीर के हर अंग पर अलग और सकारात्मक प्रभाव डालता है। आइए इसे एक आसान तालिका (Table) से समझते हैं:

तत्वों का अद्भुत संगम और उनके कार्य
सामग्री मुख्य काम (Primary Function) शरीर पर प्रभाव
सीबकथॉर्न ओमेगा और विटामिन C का स्रोत इम्युनिटी और त्वचा को चमकदार बनाता है।
अश्वगंधा तनाव निवारक (Stress Buster) नसों को शांति और शारीरिक ताकत देता है।
गिलोय रोग प्रतिरोधक (Immunity) इन्फेक्शन से बचाता है और खून साफ करता है।
करक्यूमिन एंटी-इंफ्लेमेटरी जोड़ों के दर्द और अंदरूनी सूजन को कम करता है।
शतावरी वाइटालिटी बूस्टर कमजोरी दूर करता है और हार्मोन्स बैलेंस करता है।
बुरांश फूल हृदय और रक्त शोधक दिल को स्वस्थ रखता है और हीमोग्लोबिन बढ़ाता है।
खुबानी पाचन और आंखों की रोशनी कब्ज दूर करता है और आंखों को पोषण देता है।
यह कॉम्बिनेशन आपके लिए क्यों खास है?
360-डिग्री सुरक्षा: जहाँ गिलोय और अश्वगंधा आपकी मानसिक और रक्षा प्रणाली पर काम करते हैं, वहीं बुरांश और खुबानी आपके सर्कुलेशन और डाइजेशन को संभालते हैं।

जोड़ों और हड्डियों की मजबूती: करक्यूमिन (हल्दी) और शतावरी का मेल हड्डियों के घिसाव को रोकने और लचीलापन बढ़ाने में बहुत कारगर है।

खून की कमी का इलाज: अगर किसी को एनीमिया (खून की कमी) है, तो इसमें मौजूद बुरांश और खुबानी प्राकृतिक आयरन सप्लीमेंट की तरह काम करते हैं।

लिवर और किडनी डिटॉक्स: गिलोय और सीबकथॉर्न मिलकर शरीर के विषैले पदार्थों को बाहर निकालते हैं।

इस्तेमाल करने का सबसे सही तरीका:
खुराक: 20-30 ml जूस।

मिश्रण: एक गिलास गुनगुने पानी में।

समय: सुबह खाली पेट (Best) या रात को सोने से 1 घंटा पहले।

अवधि: अच्छे परिणाम के लिए इसे लगातार 3 मह

27/04/2026

Sea Buckthorn Farming: कैसे की जाती है सी-बकथॉर्न की खेती, भारत में सिर्फ एक जगह होती है

Sea Buckthorn Farming: हिमालय की ऊंचाइयों में उगने वाला यह खास पौधा अपनी पोषण शक्ति और अनोखी खेती के कारण आज किसानों और बाजार दोनों के लिए एक अहम फसल बनता जा रहा है, आइए जानते हैं.

Sea Buckthorn Farming: कैसे की जाती है सी-बकथॉर्न की खेती, भारत में सिर्फ एक जगह होती है इसकी पैदावार

Sea Buckthorn Farming: हिमालय की ऊंचाइयों में उगने वाला यह खास पौधा अपनी पोषण शक्ति और अनोखी खेती के कारण आज किसानों और बाजार दोनों के लिए एक अहम फसल बनता जा रहा है, आइए जानते हैं.

सी-बकथॉर्न खेती कैसे करें

Sea Buckthorn Farming: सी-बकथॉर्न, जिसका वैज्ञनिक नाम Hippohae Rhamnoides है, एक कांटेदार झाड़ी जैसा पौधा होता है जो अपने बेहद स्वादिष्ट फलों के लिए जाना जाता है. इसे सुपरफूड की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट और ओमेगा फैटी एसिड होते हैं, जो शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं. हालांकि, इसे कुछ खास जगहों पर ही उगाया जा सकता है, जो इसे और भी दुर्लभ बनाता है.

यह मुख्य रूप से लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के ठंडे हिमालयी क्षेत्रों में उगाई जाती है. इसकी खेती करना काफी मुश्किल होता है, लेकिन इससे मिलने वाले फल और उत्पादों की मांग कई देशों में है. इसी वजह से इसे उगाने वाले किसानों को मेहनत तो करनी पड़ती है, लेकिन मुनाफा भी अच्छा मिलता है.

सिर्फ चुनिंदा जगहों पर ही इसकी खेती क्यों होती है?

सी-बकथॉर्न अत्यधिक ठंडे और शुष्क (Cold Desert) इलाकों का पौधा है. यह -40 डिग्री से लेकर +40 डिग्री तक के तापमान को सहन कर सकता है और खराब मिट्टी में भी उग सकता है. भारत में ऐसे अनुकूल हालात मुख्य रूप से लद्दाख और कुछ अन्य हिमालयी क्षेत्रों में ही मिलते हैं. यह वहां प्राकृतिक रूप से भी बड़े पैमाने पर पाया जाता है. लद्दाख में भारत की लगभग 65 प्रतिशत सी-बकथॉर्न की खेती होती है. इसके लिए 2500 से 3000 मीटर की ऊंचाई अच्छी मानी जाती है. कम वर्षा और ठंडी जलवायु इसके लिए लाभकारी होती है. हालांकि, अब उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के कुछ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन अभी भी लद्दाख इसका प्रमुख केंद्र बना हुआ है.

कैसे करते हैं इसकी खेती?

सबसे जरूरी है ठंडा हिमालयी वातावरण.

इसके लिए कम उपजाऊ या रेतीली मिट्टी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

Kali Haldi (Black Turmeric), jise vaigyanik roop se Curcuma Caesia kaha jata hai, ek bahut hi durlabh aur keemti jadiboo...
26/04/2026

Kali Haldi (Black Turmeric), jise vaigyanik roop se Curcuma Caesia kaha jata hai, ek bahut hi durlabh aur keemti jadibooti hai. Yeh dekhne mein andar se neele ya baigani (purple) rang ki hoti hai aur iska upyog ayurvedic dawaon se lekar ta**ra-shastra tak mein kiya jata hai.

Yahan iski kheti aur faydon ki puri jankari di gayi hai:

Kali Haldi ki Kheti (Cultivation)

Kali Haldi ki kheti sadharan haldi ke muqable thodi alag aur sabra mangne wali hoti hai.

1. Upayukt Jalvayu aur Mitti

Mitti: Iske liye Domat mitti (Loamy soil) sabse acchi mani jati hai. Mitti aisi honi chahiye jahan pani na thahre (well-drained).

Mausam: Yeh garam aur thodi nami wali jagah par acchi hoti hai.

2. Buvai ka Samay (Sowing Time)

Iska sahi samay June se July (monsoon ki shuruat) hota hai.

3. Kheti ki Vidhi

Beej: Iski kheti kandon (rhizomes) ke dwara ki jati hai. Ek acre ke liye lagbhag 2-3 quintal beej ki zaroorat hoti hai.

Doori: Do podhon ke beech lagbhag 25-30 cm aur kataron (rows) ke beech 40 cm ki doori honi chahiye.

Khad: Gobar ki khad (Organic manure) iske liye sabse behtar hai. Chemical fertilizers ka upyog kam se kam karein.

4. Fasal ki Cutai

Yeh fasal pakne mein lagbhag 8 se 9 mahine leti hai. Jab podhe ki pattiyan sookh kar girne lagein, tab iski khudai ki jati hai.

Kali Haldi ke Fayde (Benefits)

Kali Haldi apne aushadhiya gunon (medicinal properties) ke liye jani jati hai:

1. Swasthya ke liye (Health)

Dard aur Sujan: Ismein 'Curcumin' ki matra zyada hoti hai, jo arthritis aur jodon ke dard mein rahat deti hai.

Pet ki Samasya: Yeh pachan ta**ra ko thik karne aur gas/acidty mein faydemand hai.

Skin Care: Iska lep lagane se chehre ke daag-dhabbe aur infection dur hote hain.

Cancer: Kuch research ke anusar, ismein anti-cancer tatva paye jate hain.

2. Arthik Fayda (Economic)

Kali haldi ki keemat bazaar mein sadharan haldi se 10 se 20 guna zyada hoti hai.

Iski mang pharmaceutical aur cosmetic companies mei

पीताम्बरी हल्दी की खेती कैसे करें?1. उपयुक्त समय (Sowing Time)हल्दी की बुवाई का सबसे सही समय मई के अंत से जून के अंत तक ...
26/04/2026

पीताम्बरी हल्दी की खेती कैसे करें?

1. उपयुक्त समय (Sowing Time)

हल्दी की बुवाई का सबसे सही समय मई के अंत से जून के अंत तक (मानसून की शुरुआत) होता है।

2. खेत की तैयारी और बीज

मिट्टी: जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है। जलभराव वाली जगह पर हल्दी खराब हो जाती है।

बीज (कंद) की मात्रा: एक एकड़ के लिए लगभग 8 से 10 क्विंटल स्वस्थ कंदों की आवश्यकता होती है।

बीज उपचार: बुवाई से पहले कंदों को मैन्कोजेब या कार्बेंडाजिम (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) के घोल में 30 मिनट तक डुबोकर रखें ताकि सड़न न हो।

3. बुवाई की विधि

मेड़ विधि (Ridge & Furrow): हल्दी को हमेशा मेड़ (मेड़ बनाकर) पर लगाना चाहिए।

दूरी: कतार से कतार की दूरी 30-45 सेमी और कंद से कंद की दूरी 20-25 सेमी रखें।

4. खाद और सिंचाई

खेत तैयार करते समय 10-15 टन गोबर की खाद प्रति एकड़ डालें।

हल्दी को नमी की जरूरत होती है, लेकिन पानी जमा नहीं होना चाहिए। बारिश न होने पर 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करें।

पीताम्बरी किस्म के विशेष फायदे

पीताम्बरी हल्दी अन्य सामान्य किस्मों से बेहतर क्यों है? इसके मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:

विशेषतालाभअधिक करक्यूमिन (Curcumin)इसमें करक्यूमिन की मात्रा 10% से 12% तक होती है (सामान्य हल्दी में 3-5% होती है), जिससे इसकी बाजार में कीमत बहुत अच्छी मिलती है।जल्दी पैदावारयह किस्म लगभग 180-190 दिनों (6 महीने) में तैयार हो जाती है, जबकि अन्य किस्में 8-9 महीने लेती हैं।भारी उत्पादनइसकी औसत पैदावार 300 से 350 क्विंटल (गीली हल्दी) प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है।रोग प्रतिरोधकयह किस्म 'लीफ स्पॉट' और 'राइजोम रॉट' (कंद सड़न) जैसी बीमारियों के प्रति अधिक सहनशील है।शुद्धता और रंगइसका रंग गहरा नारंगी-पीला होता है, जो इसे कॉस्मेटिक और फार्मा उद्योगों की पहली पसंद बनाता है।

कमाई का गणित (मुनाफा)

कम लागत, अधिक दाम: करक्यूमिन की अधिक मात्रा के कारण दवा कंपनियाँ और मसाला निर्यातक इसे ऊंचे दामों पर खरीदते हैं।

इंटरक्रॉपिंग (मिश्रित खेती): हल्दी के साथ आप शुरूआती महीनों में मक्का या मिर्च जैसी फसलें लगाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

प्रोसेसिंग: यदि आप हल्दी को उबालकर और सुखाकर पाउडर बनाकर बेचते हैं, तो मुनाफा दोगुना हो सकता है।

ध्यान देने वाली बात:

करप्रोसेसिंग: यदि आप हल्दी को उबालकर और सुखाकर पाउडर बनाकर बेचते हैं, तो मुनाफा दोगुना हो सकता है।

Address

RAM RAM BANK CHAURAHA
Lucknow
226020

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Gangotri Swasthya Sewa Sansthan posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Shortcuts

Share