12/08/2023
जो अभी क्रिमिनल लॉ अपने देश मे चल रहा है, उसके रिप्लेसमेंट को ले कर संसद में तीन नये बिल पेश किये गये है, जिसमें मुख्यतः ये बदलाव प्रस्तावित है-
1- अभी के अधिनियमों के नाम बदले गये है।
2- IPC के परिभाषा जो अलग अलग धाराओं में थे, उसे एक धारा के क्लाउजेज में कर दिया गया है।
3- कुछ नये चीज़े जोड़ी गई है।
4- और कुछ पुरानी चीजें हटाई गई है।
लाभ-
माननीय मंत्री जी ने सदन के भाषण में बता दिया है, और कई विद्वानों ने सोशल मीडिया और न्यूज़पेपर में भी बताया है।
कुछ समस्याएं जिसे फेस करना पड़ेगा, जो मैं समझता-
1- अब धाराओं को नये सिरे से पुनः याद करना पड़ेगा ( ज़रा सोचिए चाहे ज्यूडिशियल एग्जाम हो, APO का एग्जाम हो सबमें लगभग धाराओं पर आधारित प्रश्न काफी मात्रा में पूछे जाते थे, जिसकी तैयारी करने वाले छात्रों ने याद कर लिया, अब धाराएं बदल जाने से उन्हें पुरानी धाराओं को भूलने और नई को याद करने में समस्या तो आएगी ही)।
2- जो कोर्ट प्रक्टिशनर है, उन्हें प्रक्रियाओं की कार्यवाही धाराओं से रट गई थी, अब नये सिरे से, ध्यान दे कर बोलना होगा।
3- जब तक नये अधिनियम के हम आदि नही हो जाते, तब तक पुराने और नये दोनों को साथ पढ़ना होगा।
ख़ैर सुकरात ने कहा था, यदि व्यवस्था से तुम्हे दिक्कत है तो या तो व्यवस्था को बदल दो या फ़िर उसके साथ जीने की आदत डाल लो............मैंने तो दूसरा वाला चुना है। क्योंकि पहले वाले का अभी सामर्थ नही.........
अब मर्डर की धारा 302 और रेप की धारा 376 नही रही........ऐसे कई बदलाव है.......